नाहरगढ़ किला : दिलदहलाने वाला रहस्य और खूबसूरती का मिश्रण

नाहरगढ़ किला, राजस्थान का नाहरगढ़ किला वैसे तो राजस्थान का एक मशहूर पर्यटक स्थल है। ये किला गुलाबी नगरी जयपुर की खूबसूरती में चार चाँद लगाता है। अपनी सुंदरता और ऐतिहासिकता के लिए प्रसिद्ध ये किला सुर्खियों में आया है। संजय लीला भंसाली की फिल्म “पद्मावती” के विरोध के चलते शुक्रवार (24 नवंबर 2015 ) को नाहरगढ़ के किले पर एक शव लटका पाया गया जिससे ये किला सुर्खियों में आ गया।

राजस्थान का नाहरगढ़ किला कई मायनो में अलग और दिलचस्प है।लेकिन कैसे? ये हम आपको बतायगे। चलिए फिर जानते है

नाहरगढ़ किला:

  •  पीले रंग का नारहगढ़ किला गुलाबी नगरी जयपुर के उत्तर—पश्चिम में अरावली के पहाड़ो पर बसा है।
  • आप को शायद ही पता होगा की इस किले को आप शहर के हर कोने से देख सकते है।
  • बारिश के समय में यहां से जयपुर का नजारा किसी हिल स्टेशन से कम नहीं होता है।

किले का इतिहास:

नाहरगढ किले तक पहुंचने के लिए एक या दो नहीं, तीन रास्ते है।
नाहरगढ किले तक पहुंचने के लिए एक या दो नहीं, तीन रास्ते है।

इस किले का इतिहास दिलचस्प है इसके नामकरण की कहानी भी कुछ कम रोचक नहीं है।

नामकरण के पीछे की कहानी:

  1. नाहरगढ़ किले का नाम पहले सुदर्शन किला रखा गया था।
  2. इसी जगह द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने देवराज इंद्र के बेटे सुदर्शन को श्राप से मुक्त किया था।
  3. उसके बाद से इस जगह का नाम अम्बिका वन से सुदर्शन खोल हो गया।
  4. 1734 में महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने सुदर्शन खोल में पहाड़ी पर किले का निर्माण शुरू किया और इसका नाम सुदर्शन किला रखने का फैसला किया।
  5. जहां किला बन रह था वहां नाहरसिंह नामक भोमियां जी का वास था।
  6. वो किले को बनने नहीं दे रहा थे। दिन में किले का निर्माण होता और रात में वो धाराशाही हो जाता था।
  7. तंत्र द्वारा नाहरसिंह भौमियां जी को यहां किले के निर्माण के लिए मनाया और उनका स्थान दूसरी जगह बनवाया गया।
  8. तब कही जाकर किले का निर्माण हो सका। बाद में इस किले का नाम नाहरसिंह जी के नाम पर नाहरगढ़ रखा गया।

नाहरगढ़ किले में रानियों के लिए 9 महल:

नाहरगढ़ किला
Bavdi Of Nahargarh Fort

इस किले में की मुख्य इमारत को माघवेन्द्र महल के नाम से जाना जाता है।रानियों के लिए नौ महल बनाए गए है। इन महलो के नाम कुछ इस तरह है।

  1. रज प्रकाश महल,
  2. चंद्र प्रकाश महल,
  3. आनन्द प्रकाश महल,
  4. जवाहर प्रकाश महल,
  5. लक्ष्मी प्रकाश महल,
  6. रत्न प्रकाश महल,
  7. ललित प्रकाश महल,
  8. बसंत प्रकाश महल और
  9. खुशाल प्रकाश महल
  • माघवेन्द्र महल के सामने एक बावड़ी भी है।
  • ये बावड़ी देखने में अलग है क्योंकी बावड़ी के तीन तरफ की सीढ़ियां लहरदार आकृति में बनी हुई है।

किले तक पहुंचने के तीन रास्ते:

  • नाहरगढ किले तक पहुंचने के लिए एक या दो नहीं, तीन रास्ते है।
  • पहला रास्ता पुरानी बस्ती से होकर जाता है। पुराने समय में जयपुर से इस किले तक आने—जाने के लिए इसी रास्ते का उपयोग होता था। अब यह रास्ता नाहरगढ़ रोड के नाम से फेमस है
  • दूसरा रास्ता आमेर रोड पर कनक घाटी से है। इस रास्ते का उपयोग आने-जाने के लिए होता है। छोटे—बड़े वाहनों यहां से गुज़रते है। आमेर रोड से नाहरगढ किले करीब नौ किलोमीटर दूर है।।
  • तीसरा रास्ता आमेर से है।इस रास्ते से आप पैदल आ—जा सकते है। लेकिन यहाँ यहां वाइल्ड लाइफ के चलते ये रास्ता काफी खतरनाक है।