विश्वकर्मा जयंती क्यों मनाई जाती है

विश्वकर्मा पूजा!!!
विश्वकर्मा पूजा

विश्वकर्मा पूजा क्यों मनाते है? और विश्वकर्मा भागवान का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में आता है जिसने विश्व का निर्माण किया हो.

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यहां पर हम आपको विश्वकर्मा पूजा की विधि से लेकर विश्वकर्मा के जीवन से जुड़ी सभी पौराणिक और वैदिक बाते बताएंगे जो इससे पहले शायद आपको ना पता हों.
भागवान विश्वकर्मा ने ही पूरी सृष्टि का निर्माण किया है वो इस जगत के शिल्पकार हैं.
अगर आपको हिंदी के इन भरी-भरकम शब्दों को समझने में दिक्कत हो रही है तो आप इन्हें आज के हिसाब से Engineer भी कह सकते हैं.

विश्वकर्मा जयंती कब मनाई जाती है (Day of celebration):
विश्वकर्मा जयंती हर साल कन्या सक्रांति के दिन मनाई जाती है. इस साल 2017 में इसे 17 सितम्बर Sunday को मनाया जाएगा.
विश्वकर्मा पूजा सभी इंजीनियर, उपकरण और धातु बनाने वाले लोग बड़ी श्रद्धा के साथ करते हैं. इस दिन वो अपने औज़ार और हथियार की भी पूजा करते हैं.
पुराणों और वेदो के अनुसार भागवान विश्वकर्मा ने ही भागवान श्री कृष्ण की नगरी द्वारिका, शंकर भागवान द्वारा रावण को भेट की गयी लंका और युधिष्ठिर की नगरी इंद्रप्रस्थ का निर्माण अपने हांथों से किया था.

विश्वकर्मा का जन्म(Birth of Vishwkarma):
विश्वकर्मा पूजा

पुराणों के अनुसार भागवान विष्णु के अवतार के वक्त उनके नाभि में ब्रम्हा जी विराजमान थे. भागवान ब्रम्हा को जगत का रचयिता कहा जाता है. ब्रम्हा को एक पुत्र की प्राप्ति हुई जोकि स्वयं भागवान विश्वकर्मा थे जो अपने पिता के तरह ही श्रेष्ठ शिल्पकार बने और ब्रम्हांड का निर्माण करने लगे.

विश्वकर्मा पूजा कथा (Katha of Vishwkarma Puja):
पुराने समय में एक व्यापारी था जो दिन-रात कड़ी मेहनत करता था. उसकी पत्नी भी उसके साथ बहुत मेहनत करती थी लेकिन उनके नसीब में सुख दूर-दूर तक नहीं था.
इसलिए उन्हें अमावस्या के दिन विश्वकर्मा भागवान की पूजा करने की बात किसी व्यक्ति ने बताई. उस आदमी के कहे अनुसार दोनों ने भागवान विश्वकर्मा की पूजा की उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई और उनका जीवन आराम से गुजरने लगा.
इस तरह भागवान विश्वकर्म के व्रत का फल उन्हें मिला.

विश्वकर्म पूजा विधि(Vishwkarma Puja vidhi):
भागवान विश्वकर्म की पूजा उनकी मूर्ति को स्थापित करके की जाती है. पुराणों और वेदों में इनकी विभिन्न प्रकार के चित्र देखने को मिलते हैं.
सुबह नित्य कर्म के बाद ही पूजा आरम्भ करें.
हर पूजा में पत्नी का साथ होना आवश्यक है लेकिन यह पूजा में विशेष रूप से अर्धांगिनी के साथ करना चाहिए.
पत्नी के साथ मिलकर ही यज्ञ में सम्मिलित होना चाहिए.
हाथ में चावल लेकर विश्कर्मा जी को स्मरण कर इस मंत्र का उच्चारण करना चाहिए- “ॐ आधार शक्तपे नम: और ओम् कूमयि नम: ओम अनन्तम नम:, पृथिव्यै नमः या ॐ श्री श्रिष्टनतया सर्वसिद्धहया विष्वकर्माया नमो नमः”

विश्वकर्मा जी की आरती(Arti of lord Vishwkarma):

जय विश्वकर्मा प्रभु जय श्री विश्वकर्मा
सकल सृष्टि के करता रक्षक स्तुति धर्मा
आदि सृष्टि में विधि को श्रुति का उपदेश दिया
जीव मात्र का जग में विकास किया
ऋषि अंगिरा तप से शांति नहीं पायी
रोग ग्रस्त राजा ने जब आश्रय लीना
संकट मोचन बनकर दुःख दूर कीना
जय विश्वकर्मा प्रभु जय श्री विश्वकर्मा
जब रथकार दम्पति तुम्हारी तेर करी
सुनकर दीन प्रार्थना विपत हरी सगरी
एकानन, चतुरानन पंचानन राजे
द्विभुज, चतुर्भुज, दशभुज सकल रूप साजे
ध्यान धरे तब पद का सकल सिद्धि आवे
मन दुविधा मिट जावे सकल सिद्धि पावे
मन दुविधा मिट जावे अटल शक्ति पावे
श्री विश्वकर्मा जी की आरती जो कोई नर गावे
भजत गजानंद स्वामी सुख संपत्ति पावे.