डॉक्टर के लिए थैंक्यू कविता

थैंक्यू डॉक्टर थैंक्यू डॉक्टर
लव यू डॉक्टर लव यू डॉक्टर

“कितना अच्छा उपचार करते हो
जीवन में हमारे खुशियां भरते हो
रोते हुए हम तुम्हारे पास हैं आते
हंसते हुए तुम हमें भेजते हो”

“तुम कहलाये धरती के भगवान
तुम ने बचाई हमारी जान
सब की सेवा हो तुम करते
यही जहां में तुम्हारी पहचान”

“एक दिन जब एक्सीडेंट हुआ था
जिंदगी पर से भरोसा, मेरा उठा था
पहुंचा जब एम्बुलेंस में पास तुम्हारे
तुमसे ही जीवन का वरदान मिला था”

“अपनी यही पहचान बनाए रखना
लोगों के चेहरे पर मुस्कान दिलाए रखना
जब भी पड़े जरुरत तुम्हारी
अपनी उपस्थिति बनाये रखना”

“तू ना सौदा करना, किसी से किसी की जान का  
दूर फेंकना हथियार अपने अभिमान का
लोगों की दुआओं में जिंदा तू रहेगा
तभी मिलेगा तुझे दर्जा भगवान का”

“मुबारक हो तुम्हें डॉक्टर्स डे
भर लो फिर से साहस ये 
करनी है सेवा दूसरों की तुम्हे
तुम्हारी खुद की भी मर्जी हो ये”

Doctors day……..अच्छा……..तो इसलिए मनाते हैं

Happy Doctors day  : Happy Doctors day : Happy Doctors day

Doctors day पर सबसे पहले तो चिकित्सा को अपना पेशा बनाने वाले लोगों को बहुत- बहुत सम्मान. जिन चिकित्सकों ने वास्तव में अपने मरीज का विश्वास जीता है. दिल से समाज की सेवा की है. उन चिकित्सकों के नाम यह दिन.

Doctors day

तो ऐसी शख्सियत है रामनाथ कोविंद

किनकी याद में मनाते हैं Doctors day:

ऐसे ही भारत के एक ग्रेट चिकित्सक हुए हैं. जिनका नाम बिधानचंद्र राय था. इनका जन्मदिन 1 जुलाई को मनाया जाता है. डॉक्टर बिधान चंद्र रॉय पटना जिले के रहने वाले थे. सन 1882 में उनका जन्म वहीं पर हुआ था.

Doctors day

यह महान हस्ती एक ऐसे डॉक्टर थे. जिन्होंने अपना सारा जीवन समाज सेवा में समर्पित किया. और इनकी मृत्यु भी 80 साल की उम्र में हो गई थी. इनकी मृत्यु भी 1 जुलाई को 1962 में हुई थी.  डॉक्टर बिधान चंद्र भारत देश के महान स्वतंत्रता सेनानी भी रहे हैं. जिनका नाम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के साथ असहयोग आंदोलन में प्रमुख रूप से जुड़ा है. वह शुरू से एक होनहार छात्र रहे हैं. इनकी मेडिकल शिक्षा कोलकाता मेडिकल स्कूल से हुई थी. यह इतने होशियार थे कि अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए इनको स्कॉलरशिप भी मिली थी. अपनी पूरी पढ़ाई पढ़ने के बाद सन 1911 में उन्होंने अपना डॉक्टरी का पेशा आरंभ कर दिया था.

इन्होंने डॉक्टर का पेशा दूसरों की सेवा करने के लिए ही शुरू किया था. बात उन दिनों की है जब भारत देश की आजादी के लिए महात्मा गांधी और दूसरे गांधीजी के समर्थक लोग भूख हड़ताल पर या किसी धरने, आंदोलन पर बैठ जाते थे. तब डॉक्टर बिधान चंद्र ही उनकी देखभाल करते थे.  भारतीय चिकित्सक इतिहास में उनका नाम अमर रहा है. बहुत लोगों की जाने इनके द्वारा बचाई गई थी. और इनकी मुफ्त सेवा भी लोगों को मिलती थी. उनका यही जज्बा मतलब देश की उन्नति में आगे रहने की चाह और लोगों की दिल से सेवा करना उन्हें राजनीति में खींच लाई थी. राष्ट्रपिता गांधी जी के कहने पर ही डॉक्टर राय कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए. बता दें डॉक्टर Roy बंगाल के मुख्यमंत्री भी रहे हैं. इनको देश के सर्वोच्च सम्मान यानी भारत रत्न से भी सम्मानित किया जा चुका है. भारत रत्न उनको 1961 में मिला था. तो इसी तरह ही उनकी याद में हर वर्ष 1 जुलाई को Doctors day सेलिब्रेट करते हैं.

डॉक्टर लाइन को अपना पेशा बनाने का जुनून जिन लोगों के सर पर होता है, वही जानते हैं कि इसमें अपना भविष्य बनाने में कितनी मेहनत लगती है. लेकिन उन्हें पता है कि उनका भविष्य ऊंचाइयों को छूने वाला है. और वह यह भी जानते हैं कि कड़ी मेहनत करने के बाद उन्हें लोगों की कितनी दुआएं मिलने वाली हैं. क्योंकि समाज में एक डॉक्टर का कद बहुत बड़ा होता है. इन चिकित्सकों में ही इतनी क्षमता है कि यह बिस्तर पर पड़े हुए आदमी को चला सकते हैं. एक अंधे को दुनिया को दिखा सकते हैं. मरते मरते आदमी को जीवन दान दे सकते हैं. हमारे चिकित्सकों में स्किल्स की कोई कमी नहीं है. बस कमी है तो सिर्फ नैतिक मूल्यों की जिनकी परवाह होना लगभग बंद सही हो गया है.

इस धरती पर डॉक्टर को वास्तव में भगवान का दूसरा रूप होने का दर्जा मिला हुआ है.  इस समय भी समाज में ऐसे चिकित्सकों की संख्या काफी अधिक है जो दिन रात की परवाह किए बिना अपने मरीजों को पूरी देखरेख देते हैं. चिकित्सक खुद में और अपने मरीजों में विश्वास जगाते हैं, कि वह बहुत जल्दी स्वस्थ हो जाएंगे. बड़ी से बड़ी बीमारी में सफलता पाने के बहुत उदाहरण है.

ईश्वर का द्वितीय रूप कहे जाने वाले चिकित्सक आखिर क्यों  इस दर्जे का अपमान करते हैं. किसी के पैसे और विश्वास के साथ खिलवाड़ करने का उनका क्या मतलब बनता है? कुछ लोग सिर्फ पैसा कमाने के लिए डॉक्टर बनते हैं. उन्हें समझ नहीं आता कौन गरीब है कौन अमीर है सिर्फ उनको अपनी भारी भरकम फीस से मतलब होता है. लेकिन एक डॉक्टर और मरीज के बीच के इस अंतराल को विश्वास और इमानदारी के साथ भरना होगा.

लेकिन दूसरी तरफ अभी भी बहुत लोग ऐसे हैं जो पैसे के साथ-साथ समाज सेवा में विश्वास रखते हैं. वह जानते हैं कि इस समाज को डॉक्टर की कितनी जरूरत है. दिन पर दिन गंभीर बीमारियां अपनी जकड़ बनाती जा रही है. ऐसे में समाज को उन चिकित्सकों की जरूरत है जो अपने बल पर समाज के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं. चिकित्सा एक ऐसा पेशा है जिसमें एक मरीज पूरी तरह से चिकित्सक पर निर्भर हो जाता है. ऐसे में कई जगह देखा गया है कि मरीज का चिकित्सक पर भरोसा बस सोचने मात्र का ही रह जाता है.  क्योंकि आज ऐसी ही छवि बनी हुई है कि डॉक्टर्स मरीजों से फालतू पैसे ऐंठते हैं.  इसी कदम पर आकर दोनों को सोच बदलने की जरूरत है.

न जाने हर दिन कितने मरीज चिकित्सक के अभाव में दम तोड़ देते हैं. और कुछ, समय पर डॉक्टर के ना मिलने पर जिंदगी भर के लिए विकलांगता के साथ जीने के लिए मजबूर हो जाते हैं. इस दुनिया में बहुत कम परिवार ऐसे हैं जिसमें डॉक्टर की जरूरत बहुत कम पड़ती. वही ऐसे लोग हैं जो स्वास्थ्य को लेकर हमेशा सतर्क रहते हैं. उनमें जागरूकता है. वह जानते हैं सेहत के लिए क्या अच्छा है और क्या बुरा है. तो इस देश को भी उसी सतर्कता की लाइन में लाकर खड़ा करना होगा कि सभी स्वास्थ्य के प्रति सचेत हो सकें.

मेरे ख्याल से आजकल ज्यादा बीमारियां इसलिए बढ़ रही हैं क्योंकि समाज में बीमारियों के खिलाफ जागरूकता नहीं है. सोचने वाली बात है कि जागरुकता कौन बनाए? इसलिए चिकित्सकों को पैसों के दायरे से बाहर निकल कर समाज के लिए कुछ अच्छे कार्य करने की जरूरत है. तभी हमारा परिवार, हमारा समाज, हमारा देश, हमारी दुनिया स्वस्थ रह पाएंगे.

एक समय था जब चिकित्सकों को समाज में बहुत ऊंचा स्थान दिया जाता था. उनका बहुत सम्मान किया जाता था क्योंकि उस समय का चिकित्सक ईमानदार, अपने कर्तव्य के प्रति समर्पित और समाज सेवा के भाव से ओतप्रोत था. लेकिन आज के समय में स्थिति इसका बिल्कुल विपरीत है. आज चिकित्सक एक दूसरे से आगे निकलने की अंधी दौड़ में में लगे हुए हैं और भूल रहे हैं कि चिकित्सक का दर्जा समाज में कितना बड़ा है. उन्हें समझना चाहिए कि उनकी थोड़ी सी मेहनत और ईमानदारी से इस समाज का रंग बदल सकता है.

आज के चिकित्सक सरकारी चिकित्सक होने के साथ-साथ प्राइवेट में भी अलग से प्रेक्टिस करते हैं. या अपनी सेवाएं देते रहते हैं. और सेवाओं के बदले पैसे लेते हैं. इस बात से साफ जाहिर होता है कि यह सब पैसे के पीछे ही भाग रहे हैं. और कहीं ना कहीं अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ते जा रहे हैं. सब को गलत कहना तो सही नहीं होगा लेकिन आए दिन ऐसे मामलों का व्याख्यान होता रहता है.

आज का समय इतना खराब है कि आम आदमी को चिकित्सकों पर भरोसा करते हुए डर लगता है. चिकित्सकों के जरिए से समाज के लोग एक तरह से सहम से गए हैं कि वह ज्यादा पैसे लेंगे. अब चिकित्सकों की ही जिम्मेदारी बनती है कि कलंकित हुए चिकित्सा के पेशे को की छवि को बेदाग बनाने की पुरजोर कोशिश करें. इस मामले में पारदर्शिता आनी चाहिए.  गरीब आदमी अस्पताल के महंगे खर्च का बोझ नहीं उठा सकता है. गरीबों को दया दृष्टि से देखने की जरूरत है.

डॉक्टर को चाहिए कि वह कुछ दिनों के अंतराल पर अपनी सेवा गरीबों को दें. फ्री में उनको स्वास्थ्य के लिए सही सलाह दें. उनसे एक रिश्ता कायम करें  जिससे मरीज को भी लगे कि चिकित्सक भी उनके परिवार के सदस्य के समान ही है. दूसरी और मरीजों को भी डॉक्टर के प्रति विश्वास रखना होगा.  उन्हें भी समझना होगा कि कुछ सुविधाएं लेने के लिए पैसे तो देने ही होंगे. लेकिन हां गलत बर्ताव सहन नहीं करना है.

Doctors day पर बात करें तो,अभी सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की बहुत जगह खाली है. इस पर देश की सरकार को ध्यान देना अनिवार्य बनता है. चिकित्सकों की भर्ती समय-समय पर खाली पड़ी जगह के हिसाब से होनी चाहिए. सरकार को ध्यान देना होगा कि, अचानक चिकित्सक हड़ताल पर ना जाएं. और अगर डॉक्टर हड़ताल पर जाते भी हैं तो अस्पताल में उनकी जगह दूसरे डॉक्टर मौजूद होने चाहिए. जिससे अस्पतालों का काम ठप्प ना पड़े. हड़ताल पर जाने से मरीजों और अस्पतालों का बहुत बड़ा नुकसान हो जाता है. सरकार को चिकित्सकों की जरूरतों का पूरा ध्यान रखना चाहिए. सब के सहयोग से ही एक अच्छा भारत देश उभर कर सामने आएगा.

इस बार Doctors day को ऐसे ही नॉर्मल दिन ना बनाएं. सोचे कि आपसे कहां गलती हुई है, और उस गलती को सुधारने की पूरी कोशिश करें. अपने अंदर एक नया जज्बा नया साहस पैदा करें. और खुद को अपने शुरुआती शब्द याद दिलाएं कि आपने अपने पेशे को साफ-सुथरा बनाने के लिए एक कसम उठाई थी.

जब कोई व्यक्ति चिकित्सा की लाइन में जाने की सोचता है. तो उसके मन में समाज सेवा के प्रति कुछ भाव होते हैं. जिन से प्रेरित होकर वह अपना सफर पूरा करता है. और कसम भी खाता है कि वह दिल से काम करेगा, नैतिक मूल्य को हमेशा ध्यान में रखेगा. लेकिन कुछ चिकित्सक अपने सफ़र के दौरान इस बात को भूल जाते हैं. और पथ भ्रष्ट हो जाते हैं.  तो मौका है एक बार फिर से अपने अंतर्मन की वही बातें दोहराने का और अपने आप को एक बेहतर चिकित्सक साबित करने का.
इस आर्टिकल के द्वारा किसी की भावनाओं को आहत करने का उद्देश्य कतई नहीं है.

तो फ्रेंड्स आपको Doctors day पर आर्टिकल कैसा लगा हमें कमेंट करके जरूर बताएं

Happy Doctors day !!!
खुद स्वस्थ रहे, दूसरों को स्वस्थ रखे!