राष्ट्रीय एकता दिवस कविता

राष्ट्रीय एकता दिवस कविता!!राष्ट्रीय एकता दिवस कविता

राष्ट्रीय एकता दिवस कविता!! 31 अक्टूबर को देश में राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाता है. यह देश के लोह पुरुष के रूप में जाने वाले सरदार वल्लभ भाई पटेल की जन्म जयंती के दिन मनाया जाता है. देश की केंद्रीय सरकार ने 2014 में इसकी शुरुआत की थी.
इस दिन को मनाने का मकसद देश के लोगों में एक दूसरे के प्रति एकता की भावना को उजागर करना है. चलिए पढ़ते हैं एक राष्ट्रीय एकता दिवस कविता…..

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राष्ट्रीय एकता दिवस कविता:
इस राष्ट्र की एकता को हमेशा बनाए रखें
दिल में इस जज्बे को हमेशा जगाए रखें
एकता के परिवेश में, जब वह रूप हमने पाया
अपना भारत देश ही, सोने की चिड़िया कहलाया
भारत माता के सपूतों क्यों
एक दूसरे पर वार करते हो
क्यों देश की अखंडता को, तार तार करते हो
राष्ट्र के महापुरुषों ने, एकता का प्रचार किया था
सांप्रदायिक विचार का, बहिष्कार किया था
सब में प्रेम बांटना ही, अपनी पहचान होनी चाहिए
इसी धारणा की सभी के मन में
ऊंची आवाज होनी चाहिए
ईश्वर के बच्चों में भेद मत होने दीजिए
हर मजहब एक दिखें, सीख सब को दीजिए!!

आइए इस बार राष्ट्रीय एकता दिवस पर हम सब भी मिलकर भारत देश की एकता के लिए योगदान करते हैं.

  • आसपास के लोगों को राष्ट्रीय एकता दिवस के मौके पर जागरूक करें
  • आपसी मतभेदों को भुलाएं
  • परिवार को एकता की परिभाषा समझाए
  • जन-जन में प्रेम बांटने की कोशिश करें
  • सांप्रदायिक विचारों से अपना बचाव करें

दोस्तों स्वच्छ भारत अभियान पर कविता जरूर पढ़ें

स्वच्छ भारत अभियान कविता! दोस्तों स्वच्छ भारत अभियान हमारे प्रधानमंत्री द्वारा लिया गया एक संकल्प है. वो चाहते हैं कि 2019 तक भारत स्वच्छ बन जाये. हर साल गंदगी कि वजह से हमारे देश में लाखों लोगों की मौत हो जाती है.

स्वच्छता अभियान पर कविता

कूड़े के ढेर, बदबू वाली नालिया, कचरे का कुप्रबंधन ये सब मिलके देश की हवा और वातावरण को जहरीला बना रहें हैं. दोस्तों सरकार के संकल्प के अलावा हमारा खुद का संकल्प होना चाहिए कि हम अपने आस-पास स्वच्छता रखें और स्वच्छता के इस यज्ञ में आहुति दें.

स्वच्छ भारत अभियान पर कविता in hindi
स्वच्छ भारत अभियान

स्वच्छ भारत अभियान कविता:

स्वच्छता संकल्प हो
स्वच्छ हो ज़मीन ये स्वच्छ आसमान हो
गौरव बढ़े इस देश का
ऊँचा भारत का स्वाभिमान हो
स्वच्छता संकल्प हो
दूजा नहीं विकल्प हो
हर नगर साफ़ हो गाँव हर साफ़ हो
हर नदी निर्मल बहे
स्वच्छता हो हर जगह
कूड़े का ढेर ना हो कहीं
दम किसी का ना घुटे
स्वच्छ साफ़ हो ये हवा
जहर नसों में ना घुलें
स्वच्छता जिम्मेदारी हो हर कंधे की
हर रोज हो गंदगी पे वार
देश के स्वाभिमान की रक्षा
करें मिलके सभी
बातें नहीं अब काम
अब विश्व में भारत का स्वच्छता से नाम हो
है मिशन 2019 क्यों
संकल्प लो हर रोज का
सब मिल बढ़े सब मिल चले
हम सब अगर साथ हों
तो देश का विकास हो
सत्य, अहिंसा हो हर जगह पे
सड़के ही नहीं मन भी सभी साफ़ हों
धर्म का हो आचरण
पर नाम पे धर्म के ना हो अन्याय फिर
आतंक का भी अंत हो
स्वतंत्रता भी अनंत हो
सब मिल चले स्वच्छ भारत अभियान से
हो सफल देश को गंदगी मुक्त बनाने का स्वप्न
गंदगी को दूर कर स्वच्छ भारत हम चुनें
साथ मिलकर हम सभी सुनहरे कल के सपनें बुनें

स्वच्छ भारत अभियान पर कविता लिखने का उद्देश्य यह है, दोस्तों ये देश हमारा है इसे संवारना हमारी जिम्मेदारी है. हम सब को साथ मिलकर इसे साफ़ और निर्मल बनाना है. ताकि हम गर्व से कह सकें Incredible India.

स्वच्छता अभियान पर कविता

स्वच्छ भारत कविता के माध्यम से स्वच्छता की ओर थोड़ा ध्यान दिया जाए. भारत एक तेजी से बढ़ने वाली आर्थिक व्यवस्था की स्थिति में है लेकिन फिर भी भारत देश में बहुत कमियां हैं स्वच्छ भारत कविता में हमने कुछ ऐसा ही वर्णन किया है. भारत के हर एक नागरिक को साथ मिलकर भारत की छवि बदलने में सहयोग करना चाहिए.
चलिए पढ़ते हैं स्वच्छ भारत कविता!!!

सावन शिवरात्रि 2017 के बारे में जानकारी

स्वच्छ भारत अभियान है
बढ़ानी जग में शान है

भारत माँ को प्यार करो
इसका तुम सम्मान करो
नहीं है जग में हिंदुस्तान कोई
यहां भी ये अनमोल है

स्वच्छ भारत अभियान है
बढ़ानी जग में शान है

गंगा यमुना नदियां कई
भारत में विराजमान है
इनको पवित्र करने का संकल्प
अब कागजों में विद्यमान है

स्वच्छ भारत अभियान है
बढ़ानी जग में शान है

एक तरफ है आतंकवाद
एक तरफ है भ्रष्टाचार
मिलकर  इनको उखाड़ना है
यही आज का सुविचार है

स्वच्छ भारत अभियान है
बढ़ानी जग में शान है

क्यों न सपनों का भारत बन जाए
कोई कभी ना परेशानी में आए
माता बहने मेरे देश की
जहां भी चाहे राह बनाएं
इस पर ही सबको अभिमान है

स्वच्छ भारत अभियान है
बढ़ानी जग में शान है

रोजगार से संपन्न हो देश
गंदगी का ना हो नामोनिशान
इसी सादगी इसी संपनता
पर हो देश की पहचान
हम सब ने भी यह माना है

स्वच्छ भारत अभियान है
बढ़ानी जग में शान है

गुरु पूर्णिमा पर हिंदी कविता

poem on teachers dayगुरु पूर्णिमा कविता!!!

गुरु पूर्णिमा कविता

  1. “जन्म माँ-बाप से मिला
    ज्ञान गुरु से दिला दिया
    ड्रेस, किताबे, बस्ता,
    माँ-बाप से मिला
    पढ़ना गुरु ने सीखा दिया
    माँ ने जीवन का पहला पाठ पढ़ाया
    दूसरा तीसरा चौथा गुरु ने पढ़ा दिया”

यह भी पढ़ें, गुरु पूर्णिमा : गुरु और शिष्य का दिन

“जब हम छोटे होते हैं “टीचर बच्चे” खेलते हैं
जब थोड़े बड़े हुए, सीधे-उलटे काम भी करते हैं
एक दिन हम जवान होकर,आएंगे काम देश के
ऐसा गुरु जी हमसे हरदम कहते रहते हैं”

“गुरु ने हमको अपने ज्ञान से सींचा हैं
हमने उनसे ही जीवन का सार सीखा हैं
समझा देंगे हमें वो दुनिया दारी
उनकी इसी बात पर किया सदा भरोसा हैं”

“आज हम इतने बड़े हुए
बच्चों को उनकी शरण हैं दिए हुए
गुरु से ही वो नैतिकता मिलेगी
जिसके लिए न जाने कब से हैं तरसे हुए”

2.  

“गुरुओ का तुम सम्मान करो
उनकी शिक्षा जीवन में भरो
सिखा देंगे वो तुम्हे इंसानियत
इतना तो तुम ध्यान धरो”

“तुमको गुरु ज्ञान पढ़ाते हैं
अच्छी बातें भी सिखलाते हैं
उनके जैसा बन कर के तुम
उनकी शिक्षाओं का गुणगान करो”

“गुरु के ज्ञान का नहीं अंत कही
तुम भी लेकर आगे बढ़ो वही
छा जाओगे इस संसार में
जो उनकी तरह शिष्टाचार की बात करो”

“आज जो गुरु पर्व आया है
यादें ये अनोखी लाया है
पालन गुरु आज्ञा का करके तुम
जीवन की खुशिया धारण करो”

“गुरु जितना न महान है कोई
कमिया हमारी गिनाता है वो ही
गिरकर उठना सिखाया जिसने
साहस उसकी बातो से तुम भी भरो”

“हीरे की तरह तराशा गुरु ने
जीवन को आसान बनाया गुरु ने
अंदर विश्वास जगाकर तुम भी
अपने आप को धनवान करो”

गुरु पूर्णिमा पर्व को धूमधाम से मनाये और sarijankari की और से आप सबको गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाये.
प्यारे पाठको! आपको गुरु पूर्णिमा कविता कैसी लगी हमें कमेंट करके जरूर बताये. और अपने दोस्तों के संग भी गुरु पूर्णिमा कविता शेयर करे.

“आज का डॉक्टर कल मरीज भी बन सकता है” डॉक्टर्स डे पर कविता

Doctors Day poem…. उन डॉक्टर्स के लिए जिन्होंने जाने अनजाने मरीज पर पैसे का बोझ गिराया है.

Doctors Day poem

एक कविता(Doctors Day poem) के माध्यम से हम पूछना चाह रहे हैं कि अगर भविष्य में आज का डॉक्टर कल को मरीज बनता है तो वह डॉक्टर अपने आपको किस रूप में देखेगा एक “डॉक्टर के रूप” में या एक “मरीज के रूप” में.

यह कविता लिखने का मात्र इतना उद्देश्य है कि आज के समय में एक डॉक्टर की मानसिकता बदल चुकी है. आज के डॉक्टर की मानसिकता में पैसे की मांग ज्यादा और दूसरों की सेवा का जज्बा कम नजर आता है. दूसरी तरफ डॉक्टर को यह लगता है कि अगर वह मरीजों से पैसे नहीं लेंगे तो उनका इलाज अच्छी तरह नहीं कर पाएंगे,तो उनको अच्छी सुविधाएं नहीं दे पाएंगे.
दोनों को अपनी सोच बदलने की जरूरत है. इसी बात को लेकर मरीज और डॉक्टर का रिश्ता भी बदलकर कुछ और हो गया है.

जरूर पढ़ें…. डॉक्टर्स डे पर विशेष

“आज का डॉक्टर कल मरीज भी बन सकता है”

क्यों तूने अपने विश्वास को खोया है
क्यों तूने अपने मरीज का पैसा डुबोया है
एक बात तो तू खुद से भी पूछ ले जालिम
कल को जब तू बीमार होएगा
किस डॉक्टर के बेड पर तू सोएगा
कितना अपना पैसा, तू लुटाएगा
लेकिन ध्यान रखना, ऐ आज के डॉक्टर
जिसका भी तू मरीज बनेगा
हो सकता है, वह तेरे किसी मरीज का बेटा बेटी ही हो   
फिर तू सोचना अंजाम  
कहां तू मुंह छिपायेगा?
जो मरीज तुझसे अपने रोग से जुड़ा था
कुछ दिन बाद उसका भगवान तू हुआ था
क्या था इस “भगवान”, शब्द का मतलब
इसके लिए तू
अपनी अंतर आत्मा को टटोल ले…..