सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला,”मौलिक अधिकार है निजता का अधिकार”

राइट टू प्राइवेसी एक ऐसा अधिकार है, जिसके बारे में काफी लम्बे समय से बहस चल रही थी. और अब जाकर सुप्रीम कोर्ट ने लोगो की निजता का ध्यान रखते हुए इसका फैसला जनता के पक्ष में ही दिया है. तो चलिए हम आपको इस सरे matter से अवगत कराते हैं.

सोचिये मत…… जानिए कि इस बार बिगबॉस 11 में क्या है खास

राइट टू प्राइवेसी

हमारे संविधान ने देश के हर व्यक्ति को कई मौलिक अधिकार दिए हैं. बहस यह थी की क्या राइट टू प्राइवेसी, मौलिक अधिकारों में आता है या नहीं? और अब कैनवास बिलकुल साफ़ है, मुख्य न्यायाधीश जस्टिस खेहर की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच ने सर्वसम्मति से अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार माना है.

दोस्तों आपको बता दें कि इस फैसले से आधार का कोई सम्बन्ध नहीं है. जजों के इस बेंच ने सिर्फ राइट टू प्राइवेसी (निजता के अधिकार) पर अपना फैसला सुनाया है. फैसले के वक्त आधार पर कोई बात नहीं हुई. आधार निजता का हनन है या नहीं, इस पर तीन जजों की अन्य बेंच सुनवाई करेगी.

मौलिक अधिकार:
भारतीय संविधान ने देश के प्रत्येक नागरिक को मौलिक अधिकार दिए हैं. व्यक्ति के विकास में मौलिक अधिकारों को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.

  • समानता का अधिकार
  • स्वतंत्रता का अधिकार
  • शोषण के खिलाफ अधिकार
  • धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार
  • सांस्कृति और शिक्षा का अधिकार
  • संवैधानिक उपचार का अधिकार
  • निजता का अधिकार

इन नौ जजों की बेंच ने निजता को मौलिक अधिकार का दर्जा प्रदान किया है….

  1. मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जेएस खेहर
  2. जस्टिस एसए बोबड़े
  3. जस्टिस एएम सापरे
  4. जस्टिस चमलेश्वर
  5. जस्टिस आरके अग्रवाल
  6. जस्टिस आरएफ नरिमन
  7. जस्टिस जीवाई चंद्रचूड़
  8. जस्टिस संजय किशन कौल
  9. जस्टिस एस एब्दुल नजीर

आधार कार्ड क्या है और क्यों जरुरी है?:
Aadhar Card भारत सरकार द्वारा भारत के नागरिकों को जारी किया जाने वाला पहचान पत्र है. इसमें 12 अंकों की एक विशिष्ट संख्या छपी होती है. जिसे भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (भा.वि.प.प्रा.) जारी करता है. यह संख्या, भारत में कहीं भी, व्यक्ति की पहचान और पते का प्रमाण होगा. भारतीय डाक द्वारा प्राप्त और यू.आई.डी.ए.आई. की वेबसाइट से डाउनलोड किया गया ई-आधार दोनों ही समान रूप से मान्य हैं. कोई भी व्यक्ति आधार के लिए नामांकन करवा सकता है बशर्ते वह भारत का निवासी हो और यू.आई.डी.ए.आई. द्वारा निर्धारित सत्यापन प्रक्रिया को पूरा करता हो, चाहे उसकी उम्र और लिंग (Gender) कुछ भी हो. प्रत्येक व्यक्ति केवल एक बार नामांकन करवा सकता है. नामांकन निशुल्क है. आधार कार्ड एक पहचान पत्र मात्र है तथा यह नागरिकता का प्रमाणपत्र नहीं है.

क्या है आधार कार्ड का पंगा?:
अब अधिकतर सरकारी सेवाओं का लाभ लेने के लिए आधार लगभग अनिवार्य हो गया है. ऐसे में ना हमारा नाम और पता बल्कि बायोमैट्रिक(Biometric) जानकारी जैसे फिंगर प्रिंट आदि जैसी गोपनीय जानकारी सरकार के पास चली जाती है. ऐसे में उस जानकारी का गलत प्रयोग भी हो सकता है.

कुछ लोगों ने पिटीशन डालकर बायोमैट्रिक जानकारी को निजता के अधिकार के अंदर लाने का आग्रह किया है. सरकार इसे पहले ही नकार चुकी है और सरकार का मानना है कि आधार कार्ड में दी गयी जानकारी निजता के अधिकार के अंदर नहीं आती. अब मामला अदालत में है, और कोर्ट के तीन जजों की बेंच इसपर अपना फैसला सुनाएगी.

बिग बॉस 11 सीजन है दमदार,हो जाइए तैयार,इस बार पड़ोसी करेंगे वार (Host Salman khan)

बिगबॉस सीजन 11!! जी हाँ दोस्तों बिग बॉस सीजन 11 का प्रोमो ऑन एयर हो चुका है. आपको बता दें की टीज़र में सलमान की शादी को लेकर भी तंज कसा गया है, खैर बात अगर दबंग खान से जुड़ी हो तो हर छोटी बात भी सुर्खियों में आ जाती है.

इस गणेश चतुर्थी करें, विघ्नहर्ता को प्रसन्न

और यहां तो बात मोस्ट वांटेड बैचलर सलमान और हमेशा ख़बरों में रहने वाले शो बिग बॉस की है. पिछले कुछ सीजन में शो के लोकप्रियता में भरी कमी आयी थी,इसलिए इस बार इसे ध्यान में रखते हुए शो को एक नए अंदाज़ में पेश किया जाएगा, अगर प्रोमो की बात की जाये तो इसे देख कर लगता है कि इस बार कांसेप्ट पड़ोसियों का होगा. इस बार फॉर्मेट बिलकुल अलग होगा, इस बार शो दो घरों में बटा होगा और प्रतिभागियों को एक दूसरे के साथ पड़ोसियों की तरह रहना होगा. सभी कंटेस्टेंट चार महीनों तक घर में कैद रहेंगे.

https://www.youtube.com/watch?v=taL3tRBQ1sc

शो की टेलीविजन पर शुरुवात और Timing:

साल भर बिगबॉस सीजन 11 शो का इंतजार करने के बाद एक और बिगबॉस सीजन ब्राडकास्टिंग के लिए तैयार है. लोग इस रियलिटी शो को देखना चाहते हैं इसका अंदाजा इस बात से ही लग जाता है कि, कैसे सब इसके नए सीजन के आने का इंतजार करतें हैं.

हम आपको बता दें, बिगबॉस सीजन 11 की ब्रॉडकास्टिंग अक्टूबर से colors चैनल पर रात के समय होगी. भारतीय समयानुसार सोमवार से शुक्रवार रात 10 से 11 बजे तक प्रसारित होगा तो शनिवार और रविवार को 9 से 10 बजे तक प्रसारित किया जायेगा.

अगर कांसेप्ट अलग है अंदाज़ अलग है तो इस बार आपको क्या लगता है? पार्टीसिपेंट भी हटके ही होंगे.बिलकुल सही सोच रहे हैं आप.

बिगबॉस सीजन 11 के लिए प्रतिभागियों की लिस्ट के कुछ नाम तो लगभग तय है ही. चलिए बिना इंतजार के हम आपको बताते हैं कि इस बार के सीजन में कौन-कौन दर्शको का मनोरंजन करेगा. और इस लिस्ट में कुछ नाम तो ऐसे हैं जिन्हें सुनकर आप भी चौक जाएंगे….

ढिंचक पूजा:
“ढिंचक पूजा” इंटरनेट पर अपनी पकाऊ हरकतों के बावजूद भी हिट ढिंचक पूजा के शो में आने की खबर अगर पक्की है तो शो की टीआरपी में इज़ाफ़ा होना तो तय ही है. और बात अगर चली है तो दूर तक जाएगी.

सना सईद:
लाखो दिलों की चहेती फिल्म कुछ-कुछ होता में छोटी अंजलि का रोल निभाने वाली एक्ट्रेस सना सईद भी इस शो का हिस्सा बन सकती हैं.

देवलीना भट्टाचार्या:
इस लिस्ट में बहुएं भी पीछे नहीं हैं,चर्चा है की स्टार प्लस की बहू यानी गोपी बहू,देवलीना भट्टाचार्या के नाम पर भी मुहर लग सकती है.

रिया सेन:
कई फिल्मों में काम कर चुकी रिया सेन भी बिग बॉस के जरिये छोटे परदे पर एंट्री ले सकती हैं, फ़िलहाल रिया एकता कपूर के साथ एक प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं.लिस्ट लम्बी है और अटकलें भी लेकिन इस बार लिस्ट भी हटके ही होनी थी अभी तक किसी भी नाम पर मुहर नहीं लगी है, लेकिन फिल्म जगत के गलियारों में चर्चा जोरों पर है. लिस्ट में एक और नाम

मिष्ठी चक्रवर्ती :
बेगम जान, कोलंबस, कांची, द ग्रेट ग्रांड मस्ती जैसी फिल्मों में दिख चुकी एक्ट्रेस मिष्ठी चक्रवर्ती का भी आ रहा है.फेहरिस्त में नाम निया शर्मा का भी आ रहा है जो खतरों के ख़िलाड़ी में भी दिख चुकी हैं.

फ्रेंड्स इसके आगे भी बिगबॉस सीजन 11 के कई नाम है. लेकिन फाइनल कौन-कौन प्रतिभागी होंगे ये तो शो को देखने के बाद ही पता चल पायेगा. तो बस थोड़ा सा इंतज़ार और इसके बाद बिगबॉस के इस सनसनी मचा देने वाले सीजन के हर रहस्य से पर्दा उठ जायेगा.

दोस्तों ये तो रही बात आने वाले सीजन की लेकिन क्या आप ये जानना नहीं चाहेंगे की दर्शकों यानी की आपने और मैंने और हम जैसे सभी ने सबसे ज्यादा किन प्रतिभागियों से नफरत की है.

जानना चाहते हैं !!! तो चलिए फिर हम आपको इन शख्सियतों से भी रु-ब-रु करातें हैं.

स्वामी ओम:
सीजन 10 के स्वामी ओम हमेशा महिलाओं पर गलत कमेंट और घर में अन्य प्रतिभागियों के साथ गलत बर्ताव के चलते नम्बर एक पर हैं. शो की बैड गर्ल प्रियंका जग्गा के साथ उनके एक्स्ट्रा स्वीट बर्ताव ने भी उन्हें इस लिस्ट में नम्बर एक के ख़िताब से नवाज़े जाने का काम किया है.

इमाम सिद्द्की:
इन जनाब को कौन भूल सकता है सीजन 6 के इस प्रतिभागी की होस्ट सलमान से हमेशा हुई बहस और चिल्लाने की कला ने इसे यहां तक पहुँचाया है.

राखी सावंत:
जहां राखी हो वहां कुछ अलग ना हो ऐसा हो ही नहीं सकता सीजन 1 में राखी के कश्मीरा शाह से टसल कौन भूल सकता है, और कान के पर्दों को, राखी ने शो के जरिये काफी कष्ट दिया.

कमाल आर खान:
इन जानब ने भी कारनामे भूलने लायक नहीं किये हैं, इन्होंने सीजन 3 में भाग लिया था और साथी प्रतिभागी रोहित वर्मा के सिर पर बोतल से वार किया था,इनको शो के दौरान विन्दु दारा सिंह ने तमाचा भी जड़ा था.

डॉली बिंद्रा:
या यूँ कहें डॉन डॉली बिंद्रा सीजन 4 में डॉली ने शो की टीआरपी में खूब तड़का लगाया. हर रोज कोई नया ड्रामा और खासकर श्वेता तिवारी और मनोज तिवारी के साथ मैडम का पंगा कुछ ज्यादा ही होता था.

ये लिस्ट आप तब तक सच नहीं मानते जब तक इस बाला का नाम इस लिस्ट ना होता तो लीजिये आ गया इनका भी नाम

प्रियंका जग्गा:
बिग बॉस 10 सीजन की इस लड़की को लोगों की भरपूर नफरत मिली जग्गा को मुसीबतें खड़ी करने का शौक था झूठ बोलने और नफरत गेन करने में जग्गा का कोई सानी नहीं है. और बानी के साथ उसका काण्ड कौन भूल सकता है!!!

एज़ाज़ खान:
इस लिस्ट में आखिरी नाम एज़ाज़ खान का है किसी के भी लफड़े में पड़कर फालतू फुटेज और लाइमलाइट लेने में एज़ाज़ सबसे आगे थे, दर्शकों को उनका ये अंदाज़ कभी नहीं भाया.

तो देखते हैं इस बार के स्पेशल शो में बिगबॉस के घर का कौन सा सदस्य जनता के दिलो पर राज करता हैं या कौन सबके दिलों से उतरता है. ये तो आने वाला समय ही बताएगा.
फिलहाल के लिए All the Best to All Participants…..

सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को बताया असंवैधानिक,केंद्र को दिया कानून बनाने का आदेश

सियासी गहमा गहमी के बीच तीन तलाक सुप्रीम कोर्ट पर आखिरकार फैसला आ ही गया जिससे मुस्लिम महिलाओ के बीच ख़ुशी का माहौल है तो कई मुस्लिम लोग इसके लगातार विरोध में लगे हुए हैं.

इस गणेश चतुर्थी को कैसे मनाये ख़ास जानने के लिए क्लिक करें

तीन तलाक सुप्रीम कोर्ट

तीन तलाक सुप्रीम कोर्ट!! देश में लम्बे समय से तीन तलाक पर चली आ रही बहस अब थमती नज़र आ रही है. तीन तलाक एक ऐसा मुद्दा बना रहा जिसको राजनितिक दल सिर्फ वोट बैंक में कमी के डर से इस मुद्दे पर चर्चा से में गुरेज करते रहें. मोदी सरकार ने जब इस मसले को उठाया तो उन्हें मुस्लिम समुदाय की महिलाओं का अभूतपूर्व समर्थन मिला.
सरकार और कानून इस मसले को मानवाधिकार और स्त्री के सम्मान से जोड़कर देखता है. लेकिन कुछ मुस्लिम इसे जायज़ और शरीयत के हिसाब से बिल्कुल सही मानते हैं. आइये आपको अवगत करातें हैं तीन तलाक के सभी सुने – अनसुने पहलुओं से…..

तीन तलाक सुप्रीम कोर्ट का निर्णय:
इस मुद्दे को सुलझाने के लिए न्यायपालिका को बीच में आना पड़ा क्योंकि राजनितिक दलों ने इस मुद्दे पर सवेदनशीलता कम और वोट बैंक को ज्यादा तव्वजो दिया .

उच्चतम न्यायालय ने इस मसले पर संज्ञान 16 अक्टूबर 2015 में लिया और बहुविवाह जैसी प्रथाओं पर विचार करने की जरूरत को समझा. तीन तलाक के मुद्दे पर फैसला सुनाते वक्त तीन तलाक सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संविधान पीठ के तीन जजों ने इसे असंवैधानिक बताया है. जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस फली नरीमन,जस्टिस जोसेफ कुरियन ने तीन तलाक को असंवैधानिक बताते हुए कहा-इससे मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का हनन होता है. इसी बीच जस्टिस जेएस खेहर ने तीन तलाक धार्मिक प्रक्रिया और भावनाओं से जुड़ा मामला बताया और कहा कि इसलिए इसे एकदम से खारिज नहीं किया जा सकता.

जस्टिस खेहर ने इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण पक्ष संसद और केंद्र सरकार को बताया, और कहा की उन्हें ही इसपर क़ानून बनाना चाहिए, कानून बनाकर स्पष्ट दिशा निर्देश तय करने चाहिए. चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने इसके लिए केंद्र सरकार को छह महीने का समय दिया. और छह महीने तक के लिए कोर्ट अनुच्छेद 142के अंतर्गत विशेष शक्तियों का प्रयोग से तीन तलाक पर तत्काल रोक लगाती है. इस अवधि में देश में कहीं भी तीन तलाक मान्य नहीं होगा.

तीन तलाक के खिलाफ से आवाजें हमेशा उठती और दबती रहीं हैं. लेकिन धर्म से जुड़ा मुद्दा होने के कारण किसी राजनीतिक दल या सरकार ने इस मसले पर खुला स्टैंड नहीं लिया. केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद 7 अक्टूबर, 2016 को राष्ट्रीय विधि आयोग ने जब इसपर लोगों की राय मांगी तो इस मसले पर देश में एक नई बहस की शुरुआत हुई. तमाम बहसों और मीडिया कवरेज के बाद भी मुद्दा जस का तस बना रहा.

सुप्रीम कोर्ट ने 30 मार्च 2017 को यह फैसला किया कि इस मसले से जुड़ी सभी याचिकाओं पर सुनवाई पांच जजों की संविधान पीठ करेगी. सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद अदालत ने जोर देकर कहा कि यह मामला संजीदा है. और यह सविंधान द्वारा प्रदत्त अनुच्छेद 14 (समानता के अधिकार का उलंघ्घन करता है) इसे टाला नहीं जा सकता.

11 मई 2017 को इस मसले पर संविधान बेंच ने सुनवाई शुरू की सुनवाई लगातार 6 दिन चली. इस बीच कोर्ट में जोरदार बहस देखने को मिली ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा कि तीन तलाक इस्लाम का मूल हिस्सा नहीं है. कुरान में तलाक की प्रक्रिया बताई गई है। मोहम्मद साहब की मौत के बाद हनीफी में जो लिखा गया, उसमें तीन तलाक का जिक्र है. कुरान इस्लामिक शास्त्र है उसमें तीन तलाक जैसा कुछ नहीं लिखा गया है.

ये लड़ाई अगर यहां तक पहुंची है तो इसके पीछे कई चेहरे,संघर्ष और योद्धा होंगे आइए आपको बताते हैं कुछ ऐसी ही बहादुर महिलाओं के बारे में…

सायरा बानो:
उत्तराखंड के काशीपुर की सायरा बानो ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर कर ट्रिपल तलाक और निकाह हलाला के प्रचलन के संवैधानिकता को चुनौती दी थी.उन्होनें याचिका में मुस्लिम समाज में प्रचलित बहुविवाह प्रथा को भी गलत बता उसे खत्म करने की मांग की थी. सायरा ने तीन तलाक को संविधान के अनुच्छेद 14 के अंतर्गत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया था. 2001 में सायरा की शादी हुई. 10 अक्टूबर 2015को उन्हें पति ने तलाक दे दिया.

आफरीन रहमान:
25 वर्षीय आफरीन रहमान ने भी तलाक के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. इंदौर में रहने वाले उनके पति ने उन्हें स्पीड पोस्ट के जरिए तलाक दिया,आफरीन ने कोर्ट से न्याय की गुहार लगायी थी.

सूर्य ग्रहण 21 अगस्त,सूर्य ग्रहण अगस्त 2017 टाइम और डेट

सूर्य ग्रहण 21 अगस्त!! अभी कुछ दिन पहले एक ग्रहण राखी के त्यौहार पर हुआ था. जोकि चंद्र ग्रहण था. चंद्र ग्रहण के 15 दिन बाद सूर्य ग्रहण होता है. इसके बाद अब 21 अगस्त 2017 यानि आज दूसरा सूर्य ग्रहण होने जा रहा है. और माना जा रहा है कि ये बहुत बड़ा और पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा. हालाँकि ये ग्रहण अमेरिका में पूरी तरह से दिखाई देगा.  भारत में उस समय रात होगी तो भारत के लोग पूर्ण सूर्य ग्रहण नहीं देख पाएंगे.

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सूर्य ग्रहण 21 अगस्त का समय और सूतक :

सूर्य ग्रहण 21 अगस्त 2017 सोमवार को भारतीय समयानुसार सूर्य ग्रहण रात्रि 9:15 से मध्य रात्रि 2:34 बजे तक होगा और इसके पहले सूतक दिन में 12 बजे के करीब लग जायेगा.  रात्रि  11:51 बजे पर ग्रहण का मध्यकाल होगा.  सूर्य ग्रहण की अवधि लगभग 5 घंटे 19 मिनट की होगी.

कैसे होता है सूर्य ग्रहण:

जब  चन्द्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है तब सूर्य ग्रहण माना जाता है. इसी प्रकार जब चाँद पृथ्वी को पूरी तरह से ढक लेता है तो पूर्ण सूर्य ग्रहण माना जाता हैं.  इस परिस्थिति में सूरज की रौशनी सीधे पृथ्वी तक नहीं पहुंच पाती और धरती पर इसी वजह से अँधेरा हो जाता हैं.

इस सूर्य ग्रहण पर कुछ जानकारों का कहना है कि भारत में ग्रहण के समय रात्रि होने पर और ग्रहण न दिखाई देने की वजह से भारत के लोगो पर इसका कोई ज्यादा असर नहीं पड़ेगा. तो दूसरी तरफ कुछ लोगो का कि ग्रहण पूरी दुनिया है, तो इसका असर हर जगह होना लाजमी है. लेकिन लोगो को समझना चाहिए कि ग्रहण का कोई असर हो या न हो परन्तु कुछ आसान से उपाय करने में क्या जाता है.

ग्रहण का असर जहां कुछ राशियों पर पड़ता है वहीँ सबसे ज्यादा असर गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ता हैं. गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के समय जयादा सावधानियां रखनी होती हैं.

  • जैसे कि ग्रहण की पूरी अवधि तक सोना नहीं होता है.
  • बैठकर मन्त्र जाप करना लाभकारी माना जाता है.
  • थोड़ा घूमना फिरना भी सही होता है.
  • बहार निकलने के लिए मना किया जाता है.
  • इस दौरान कुछ खाना-पीना भी सही नहीं माना जाता है.
  • ग्रहण के पश्चात् स्नान करना भी सही कहलाता है.
  • कुछ काटना, या काम करना भी वर्जित माना जाता है.

सो आप सब भी सूर्य ग्रहण पर अपना ख्याल रखे….

मोदी की इजराइल यात्रा : खास बातें विशेष मायने

मोदी की इजराइल यात्रा!!  अपनी इस यात्रा के लिए खासे उत्साहित मोदी इजराइल पहुंचकर भारत के इजराइल के साथ कई समझौते करते ही भारत के निखार में एक और नया कदम जुड़ जायेगा.

मोदी की इजराइल यात्रा

किसी भी मंगल कार्य को कहे “ना”

मोदी के इजराइल पहुंचने का समय:

मोदी अपनी इजराइल की यात्रा के लिए रवाना हो चुके हैं. मोदी भारतीय समयानुसार शाम साढ़े 6 बजे इजराइल की जमीं पर अपने कदम रखेंगे. जहाँ उनके स्वागत के लिए पहले से ही खास तैयारियां कर ली गयी हैं.

मोदी की इजराइल यात्रा:

4 जुलाई से 6 जुलाई तक तीन दिनों के इजराइल दौरे पर जा रहे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस यात्रा के काफी मायने निकाले जा रहे हैं. एक बार फिर से दो देशो के बीच गर्म जोशी का माहौल बनने को तैयार है. इस गर्म जोशी के माहौल में सम्भावना है प्रोटोकॉल के टूटने की. मोदी की यह यात्रा दोनों देशो के कूटनीतिक 25 वर्ष पूरे के उपलक्ष में अहम् मानी जा रही है. इस यात्रा से दोनों देशो के रिश्तो में और भी ज्यादा मजबूती आएगी.

इतिहास में पहली बार होने वाली, किसी भारतीय प्रधानमंत्री की इजराइल यात्रा के मतलब तो कई है. साथ-साथ ही कई अहम् मुद्दों पर बातचीत होने का रास्ता भी साफ़ है.
बता दे, भारत और इजराइल के बीच राजनितिक रिश्तो की नींव रखने का श्रेय 1992 में प्रधानमंत्री रहे पीवी नरसिह राव को जाता है. उन्होंने 1992 में ही इजराइल के साथ भारत के सम्बन्ध स्थापित करने में खास भूमिका निभायी थी. वर्ष 2015 पहली बार में वर्तमान राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का इजराइल दौरा हुआ था.

भारत की बड़ी राजनितिक पार्टी भारतीय जनता पार्टी की और से इजराइल को हमेशा एक ाची दोस्त की नजर से देखा गया है. भूतपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कार्यकाल अवधि में इजराइल के साथ सम्बन्धो को नए आयाम तक पहुंचने की पुरजोर कोशिश की गयी थी.
अटल बिहारी के प्रधानमंत्री रहते हुए ही इजराइल के तत्कालीन राष्ट्रपति एरियल शेरोन ने भारत की यात्रा की थी वो यात्रा भी किसी इजराइल राष्ट्रपति की पहली यात्रा थी.

अच्छा इजराइल में मोदी का स्वागत ऐसा?

एक बार फिर से कोई दूसरा देश प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत को तैयार है. इजराइल में मोदी का स्वागत बहुत शानदार होगा. मोदी को एयरपोर्ट पर वेलकम करने खुद इजराइल के वर्तमान प्रधानमंत्री पहुंचेंगे.  मोदी की तीन दिन यात्रा में इजराइल प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू मोदी के साथ ही रहेंगे. जानकर हैरानी होगी या ख़ुशी कि वहां पर ऐसा स्वागत केवल अमेरिकी राष्ट्रपति या पॉप का ही होता है. लेकिन सोचिये कि मोदी का वेलकम भी उसी शाही अंदाज में किया जायेगा.

इजराइल दौरा मोदी के शब्दों में “विशेष”:

दौरे पर जाने की पूर्व संध्या पर पीएम मोदी ने कहा कि “मेरा इजराइली दौरा एक खास मौके पर आया है जब दोनों देशो के बीच सम्बन्ध स्थापित होने के 25 साल पूरे हुए हैं”.

मोदी ने इजराइल यात्रा पर बातचीत करते हुए इस यात्रा को खास बताया है. और कहा कि इस यात्रा से दोनों पक्षों के आपसी सम्बन्ध और मधुर होंगे और और कई प्रमुख क्षेत्रो में सहयोग के साथ आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एक-दूसरे से मदद मिलेगी.

मोदी की इजराइल यात्रा पर बातचीत का आकर्षण:

  • मुंबई 26/11 के आतंकी हमले में जिन्दा बचे कहते बच्चे से भी मिलेंगे पीएम मोदी.
  • पीएम मोदी इजराइल से आधुनिक तरीको से खेती करने के तरीको पर भी चर्चा करेंगे.
  • जहाँ भारत और इजराइल दोनों ही आतंकवाद के सताए हुए हैं. वही दोनों देशो के बीच बातचीत का मुख्य केंद्र सुरक्षा और आतंकवाद ही होगा.
  • जल प्रबंधन के मामले में इजराइल अव्वल है. खारे पानी को पीने के पानी में तब्दील करने की शानदार तकनीक विकसित करने वाले इजराइल से भारत ले सकता है विशेष सहायता.

जीएसटी क्या है?

जीएसटी क्या है? आखिर देश में बहुत लम्बे इंतज़ार के बाद वो समय आने वाला है. जिसका देश के लोगो को इंतज़ार था. जी हाँ हम बात कर रहे हैं. GST Bill की.

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GST – GOODS  and SERVICES TAX  (वस्तु एवं सेवा कर)

जीएसटी क्या है? अभी कुछ लोगों को समझ नहीं आ रहा है लेकिन धीरे-धीरे लोगों को समझ आएगा कि जीएसटी से क्या फायदे हुए हैं आम आदमी के उपयोग करने वाली हर चीज पहले से सस्ती हो जाएगी और टेक्स्ट भी ज्यादा नहीं चुकाना पड़ेगा. लेकिन फिर भी हर पक्ष की सहमति से जीएसटी लागू होने जा रहा है

आखिर विपक्ष के समर्थन के साथ सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर को देश में  1 July-2017 से लागू करने का फैसला ले ही लिया.

GST लागू होने पर देश के हर हिस्से में एक समान टैक्स लगेगा.

भारत के प्रत्येक राज्य में उपभोक्ताओं की जरुरत के समान पर एक समान कर होगा देय.

(जीएसटी क्या है?) GST टैक्स एक indirect टैक्स के रूप में होगा. और इसके अलावा ख़रीदे गए सामान पर कोई कर नहीं चुकाना होगा.

आर्थिक सुधारो की दृष्टि से देश के हित में सबसे बड़ा कदम माना जाने वाला GST बिल राज्यसभा और लोकसभा में पहले ही पास हो चुका है. और ये 1July -2017 से देश भर में लागू होने के लिए तैयार है.

देश में आने के बाद एक व्यक्ति या संस्था को बारबार टैक्स शुल्क देने से रियायत मिलेगी. और कर वसूली करने वालो के लिए भी कर वसूली करने का रास्ता कठिन हो जायेगा.

हालाँकि देश की जनता का कुछ हिस्सा GST के पक्ष में नही है. क्यूंकि उनको लगता है कि आम आदमी के उपयोग की चीजे तो सस्ती होंगी. परन्तु बड़े कारोबारियों को अब से और भी ज्यादा टैक्स चुकाना पड़ेगा.
अभी तक ख़रीदे गए सामनो पर हर राज्य का अलगअलग टैक्स लगता था. इन टैक्सों में सर्विस टैक्स, सेस टैक्स, VAT etc शामिल हैं.

अलग-अलग राज्य पर एक समान कर:

GST लागू होने पर यदि कोई उपभोक्ता देश के किसी भी राज्य से समान खरीदेगा तो उसको कोई भी कर अलग से देने की जरुरत नहीं होगी. और आसान तरीके से समझने के लिए चलो हम एक example लेकर समझते हैं.

यदि आप कोई मोटर साईकिल दिल्ली से खरीद रहे हैं तो उसके दाम कुछ और होते हैं और यदि आप वही मोटर साईकिल किसी दूसरे राज्य से खरीद रहे हैं तो आपको उसके दाम कुछ और देने पड़ते हैं. GST लागू होने से आम आदमी को यही सबसे बड़ा फायदा होने जा रहा है. जी हाँ दो जगह से मोटर साईकिल खरीदने पर कीमत एक ही होगी. जो कीमत दिल्ली में वो ही कीमत दूसरे राज्य में. GST के नियम के तहत सिर्फ मोटर साइकिल की कीमतों पर ही नहीं वरन किसी भी सामान की कीमतों पर लागू होगा. तो है आम आदमी के बड़े फायदे की बात.

क्या आप रामनाथ कोविंद के बारे में ये सब जानते हैं?

रामनाथ कोविंद

रामनाथ कोविंद

देश के अगले संभावित राष्ट्रपति हो सकते हैं रामनाथ कोविंद. देश के राष्ट्रपति के चुनाव का समय आ गया है. जी हाँ वर्तमान राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के बाद अब देश को एक और नया राष्ट्रपति मिलने वाला है. राष्ट्रपति के चुनाव की प्रकिर्या शुरू हो चुकी है. और राष्ट्रपति बनने में सबसे ऊपर बिहार के वर्तमान राज्यपाल रामनाथ कोविंद का नाम है.
सबसे पहले हम आपको इस बात से परिचित करा दे कि, देश का नया राष्ट्रपति बनने में सबसे ऊपर बिहार के वर्तमान राज्यपाल का नाम ही क्यों? देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्र अध्यक्ष अमित शाह की पहली पसंद है कोविंद. इन दोनों का मानना है कि रामनाथ कोविंद के रूप में देश को एक अच्छा, सुशासित, और जनता के पक्ष में काम करने वाला राष्ट्रपति मिलेगा.

अमित शाह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को सम्बोधित करते हुए NDA पार्टी की तरफ से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के लिए रामनाथ कोविंद के नाम की घोषणा की. बता दें, कोविंद उत्तरप्रदेश से बनने वाले पहले राष्ट्रपति होंगे. और राष्ट्रपति बनने वाले दुसरे दलित होंगे. जी हाँ, रामनाथ कोविंद भी एक दलित समाज से ही ताल्लुक रखते हैं.

इस बार का राष्ट्रपति का चुनाव बहुत ही रोमांचक होने जा रहा है. जहाँ इससे पहले लाल कृष्ण आडवाणी के राष्ट्रपति बनने की अटकले लगाई जा रही थी. तो वही राष्ट्रपति बनने की होड़ में मीरा कुमार और दूसरे नेताओ का नाम भी सामने आ रहा है.

रामनाथ कोविंद के बारे में जानकारी:

1 अक्टूबर 1945 को जन्मे कोविंद उत्तरप्रदेश राज्य के कानपुर के देहात में पैदा हुए थे. उन्होंने कानपुर विश्वविद्यालय से बीकॉम और एलएलबी की शिक्षा प्राप्त की. इनके पिता स्वर्गीय माइकू लाल और माता स्वर्गीय कलावती हैं. धर्म पत्नी सविता कोविंद हैं. इनके दो बच्चे जिनके नाम प्रशांत(बेटा) और स्वाति(बेटी) हैं.

बिहार के राज्यपाल बनने के साथ-साथ उन्होंने अपने गावं में कई सराहनीय कार्य किये.  गावं वालो से कहे अपने सब वादे पूरे किये. जिससे वहां के लोग कोविंद के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बनने से बहुत खुश हैं.

कोविंद को समाज के दलित, छोटे और पिछड़े वर्गों के लिए काम करना बेहद पसंद रहा है. कोविंद ने अपनी UPSC की नौकरी को छोड़कर समाज सेवा करना जारी रखा.

सही मार्ग पर और सही लोगो तक सेवाएं पहुंचाने के लिए कोविंद ने UPSC को चुना. पहले दो प्रयासों में सफलता न मिलने के बाद भी कोविंद ने हार नहीं मानी और तीसरी बार के प्रयास में सफल भी हो गए. हालाँकि कोविंद को आईएएस ग्रेड नहीं मिला.  जिसकी वजह से कोविंद ने UPSC को छोड़कर वकालत में भविष्य बनाना ही उचित समझा.  अपनी वकालत के दौरान उन्होंने बहुत गरीबो को क़ानूनी सहायता फ्री में दी.

रामनाथ कोविंद शुरू से ही एक साफ़ सुथरी छवि वाले नेता रहे हैं. यही कारण हैं कि, मोदी सरकार ने राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के लिए कोविंद के नाम की घोषणा की.  कोविंद के नाम को राष्ट्रपति पद के लिए स्वीकार न करने की सरकार की विपक्षी पार्टी के पास भी कुछ ज्यादा वजहें नहीं है. बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार और उत्तरप्रदेश की दलित नेता मायावती भी कोविंद के नाम पर सहमति देते नजर आ रहे हैं. उधर अखिलेश कुमार भी सहमति जता सकते हैं. क्योंकि कोविंद उत्तरप्रदेश से ही नाता रखते हैं.

कौन-कौन से पद पर रह चुके हैं रामनाथ कोविंद:

  • वर्तमान में बिहार के राज्यपाल
  • राजयसभा के सदस्य दो बार रह चुके हैं
  • उत्तरप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के दलित नेता
  • सन 1971 में बार काउन्सिल के लिए भी नामांकित हुए
  • सरकारी वकील भी रह चुके है कोविंद
  • दिल्ली के सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में 16 वर्षो तक प्रैक्टिस की
  • अगर राष्ट्रपति का चुनाव जितने में सफल हुए तो UP से दूसरे राष्ट्रपति होंगे.

राष्ट्रपति पद के समीकरण ज्यादा गड़बड़ाते तो नजर नहीं आ रहे. लेकिन विपक्षी पार्टिया कुछ तो कांटा लगाने की पूरी कोशिश करेंगी ही. लेकिन शायद राष्ट्रपति तो वो ही बनेगा जिसको मोदी सरकार चाहेगी. तो कुछ और इंतज़ार जिसके बाद भारत देश के राष्ट्रपति का चेहरा साफ़ हो जायेगा.
देखना बड़ा दिलचस्प होगा कि सभी पार्टियों की सहमति किसको देश का पहला नागरिक बनने का सम्मान देगी.