स्वच्छ भारत अभियान पर Essay

स्वच्छ भारत अभियान:

दोस्तों स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत हुए काफी समय निकल चुका है. लेकिन यह अभियान कहां तक पहुंचा और इसकी आखिरी डेडलाइन क्या है हम आपको इन सब चीजों की जानकारी देंगे.

दोस्तों स्वच्छ भारत अभियान पर कविता जरूर पढ़ें

स्वच्छ भारत अभियान

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने Clean India Mission की शुरूआत नई दिल्ली, राजपथ से की. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि स्वच्छ भारत के द्वारा ही देश 2019 में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर उन्हें अपनी best श्रद्धांजलि दे सकते हैं. 2 अक्टूबर, 2014 को स्वच्छ भारत मिशन देश भर में व्यापक तौर पर राष्ट्रीय आंदोलन के रूप में शुरू किया गया था. इस Mission के अंतर्गत 2 अक्टूबर 2019 तक “स्वच्छ भारत” की कल्पना को साकार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.

स्वच्छ भारत अभियान

स्वच्छ भारत अभियान भारत सरकार द्वारा चलाया गया सबसे महत्वपूर्ण स्वच्छता अभियान है. नरेन्द्र मोदी ने India Gate पर स्वच्छता के लिए आयोजित समारोह की अगुआई की. समारोह में देश भर से आए हुए लगभग 50 लाख सरकारी कर्मचारियों ने भाग लिया. उन्होंने इस अवसर पर दोस्तों मोदी जी ने पदयात्रा को भी झंडी दिखाई थी. पदयात्रा में भाग लेने वाले लोगों के साथ काफी दूर तक चलकर लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया.

स्वच्छता के जन अभियान की अगुआई करते हुए प्रधानमंत्री ने जनता को महात्मा गांधी के स्वच्छ Environment वाले भारत के निर्माण के सपने को साकार करने के लिए प्रेरित किया. धूल-मिट्टी को साफ़ करने के लिए झाडू उठाकर मोदी ने स्वच्छ भारत अभियान को पूरे राष्ट्र के लिए एक जन-आंदोलन का रूप दिया. मोदी ने लोगों से कहा कि हमेँ ना तो स्वयं गंदगी फैलानी है और न ही किसी और को फैलाने देना चाहिए. उन्होंने गंदगी करेंगे, न करने देंगे” का मंत्र भी दिया. श्री नरेन्द्र मोदी ने नौ लोगों को स्वच्छता अभियान में शामिल होने के लिए भी आमंत्रित किया और उनसे यह अनुरोध किया वो अन्य लोगों को इस Mission में शामिल होने के लिए प्रेरित करें.

दोस्तों आपको बता दें कि मोदी ने लोगों को इस यज्ञ में शामिल कर इसे राष्ट्रीय अभियान का रूप दे दिया है .स्वच्छ भारत अभियान के संदेश ने लोगों के अंदर उत्तरदायित्व की भावना जगा दी है. अब जबकि नागरिक पूरे देश में स्वच्छता के कामों में सक्रिय रूप से सम्मिलित हो रहे हैं, महात्मा गांधी द्वारा देखा गया ‘स्वच्छ भारत’ का सपना अब साकार होने लगा है.

प्रधानमंत्री ने अपनी बातों और अपने कामों से स्वच्छ भारत के संदेश को लोगों का प्रयोग करके पूरे भारत और पूरी दुनिया में फैला दिया है. उन्होंने वाराणसी में भी स्वच्छता अभियान चलाया.उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन के तहत गंगा नदी के निकट अस्सी घाट पर फावड़ा चलाया. बड़ी संख्या में उनके साथ शामिल होकर स्वच्छता अभियान में उनका सहयोग दिया. मोदी ने इसके साथ ही साथ स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को हल करने की बात भी उठाई. ये स्वास्थ्य समस्यायें लगभग आधे भारतीय परिवारों को घर में उचित शौचालय न होने के कारण झेलनी पड़ रही हैं.

स्वच्छ भारत अभियान

समाज के विभिन्न वर्गों ने स्वच्छता के इस जन अभियान में हिस्सा लिया है, और अपना योगदान दिया है. सरकारी कर्मचारियों से लेकर जवानों तक, बालीवुड के Actors से लेकर Player, Spiritual leaders तक सभी ने इस महान काम के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताई है. देश भर के लाखों लोग सरकारी विभागों द्वारा चलाए जा रहे स्वच्छता के इन कामों में सम्मिलित होते रहे हैं, इस काम में N.G.O भी शामिल हैं, नाटकों और संगीत के माध्यम से सफाई और स्वास्थ्य के गहरे संबंध के संदेश को लोगों तक पहुंचाने के लिए बड़े Level पर पूरे देश में स्वच्छता अभियान चलाये जा रहे हैं.

प्रधानमंत्री ने जनता द्वारा स्वच्छ भारत मिशन में हिस्सा लेने और एक स्वच्छ भारत के निर्माण में अपना योगदान देने के प्रयत्नों की सराहना की है. नरेन्द्र मोदी ने सोशल मीडिया में जनता की भागीदारी की हमेशा प्रशंसा की है.  स्वच्छ भारत अभियान के  हिस्से के तौर पर ‘#MyCleanIndia’ Campaign भी शुरू किया गया है. सफाई-सुथराई के लिए चलाए जा रहे इस अभियान में नागरिकों के योगदान को उजागर किया जा सके.

स्वच्छ भारत Mass Movement का रूप ले चुका है क्योंकि इसे जनता का अपार समर्थन मिला है. जनता स्वच्छता के संदेश को फैलाने में मदद कर रही है और इस काम में शामिल हो रही है.

स्वच्छता ही सेवा है अभियान(Swchhta hi sewa hai):

दोस्तों आपको याद ही होगा 2 अक्टूबर 2014 को मोदी जे ने स्वच्छ भारत बनाने का सपना देखा था और एक अभियान चलाया था. गाँधी जी को श्रद्धांजलि देना है तो उनके इस भारत को साफ़ रखिये ये देश आपका घर है इसे साफ़ रखिये. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में लोगो से अपील की थी कि अगर अगर सभी देशवासी एक साथ मिलकर खड़े हो जाएं तो गंदगी को भारत से बाहर निकाल फेंकेंगे.
उसी अभियान में एक और कड़ी है स्वच्छता ही सेवा है अभियान इस अभियान को 15 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक चलाया जाएगा.
मोदी का सपना है कि 2019 तक भारत की तस्वीर बदली नजर आनी चाहिए .

BRICS में मोदी का जलवा आतंकवाद पर जमकर बरसे मोदी

दोस्तों 2011 के बाद चीन BRICS Summit  की आगवानी कर रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी BRICS Summit के लिए चीन में हैं. यह सम्मलेन 3 से 5 सितम्बर तक चलेगा प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स बैठक में बोलते हुए कहा कि सभी देशों में शांति के लिए ब्रिक्स देशों का एकजुट रहना जरूरी है.

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BRICS Summit
सम्मलेन के शुरुआत से पहले चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पीएम मोदी का औपचारिक स्वागत किया. बता दें कि ये ब्रिक्स का 9वां सम्मेलन है. ब्रिक्स देशों में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका देश शामिल हैं.

आतंकवाद पर गरजे मोदी:BRICS Summit

चीन के श्यामन में चल रहे ब्रिक्स समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद का मुद्दा उठाया. पीएम मोदी के इस दबाव का असर भी दिखा. ब्रिक्स श्यामन 2017 के घोषणापत्र में आतंकवाद का जिक्र किया गया है. इस घोषणापत्र में लश्कर-ए-तयैबा, जैश-ए-मोहम्मद समेत कुल 10 आतंकी संगठनों का जिक्र है.

घोषणापत्र में कहीं गयी बातें:
ब्रिक्स समिट में भारत ने आतंकवाद का मुद्दा उठाया. ब्रिक्स श्यामन घोषणापत्र के 48वें पैराग्राफ में आतंकवाद पर कड़ी चिंता व्यक्त की गई है. इसमें लिखा गया है कि हम लोग आस-पास के इलाके में फैल रहे आतंकवाद और सुरक्षा की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हैं.

घोषणापत्र में कहा गया है कि हम लोग दुनिया भर में हुए आतंकी हमलों की कड़ी निंदा की. और कहा गया कि आतंकवाद को किसी भी तरह से स्वीकार नहीं किया जा सकता है. घोषणापत्र में साफ तौर पर कहा गया है कि सभी ब्रिक्स देश आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ेंगे.

कुल 10 संगठनों का हुआ जिक्र

तालिबान
ISIL
अल-कायदा
ईस्टर्न तुर्कीस्तान इस्लामिक मूवमेंट
इस्लामिक मूवमेंट ऑफ उजबेक्सितान
हक्कानी नेटवर्क
जैश-ए-मोहम्मद
टीटीपी
हिज्बुल उत तहरीर
लश्कर-ए-तैयबा

पकिस्तान को फटकार:
दोस्तों साफ है कि इन 10 संगठनों में से कई संगठन ऐसे हैं जिनका सीधा संबंध पाकिस्तान से है. इससे पहले कहा जा रहा था कि ब्रिक्स में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का जिक्र नहीं किया जाएगा. लेकिन सभी ब्रिक्स नेताओं ने एक सुर से आतंकवाद की कड़ी निंदा की है.

गौरतलब है कि चीन लगातार पाकिस्तान समर्थक आतंकी संगठनों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवादी घोषित करने में अड़ंगा लगाता रहा है. लेकिन ब्रिक्स के घोषणापत्र में इनका जिक्र होना भारत के लिए बड़ी सफलता है.

Bhoomi movie trailer

दोस्तों संजय दत्त की कमबैक Film Bhoomi की ट्रेलर रिलीज हो गया है. फिल्म में संजय एक ऐसे पिता की भूमिका निभा रहे हैं जो अपनी बेटी के लिए लड़ता हुआ नजर आ रहा है.

फिल्म का ट्रेलर देख कर आप आसानी से फिल्म की स्टोरी का अंदाज़ा लगा सकतें हैं . Film Bhoomii के ट्रेलर में संजय दत्त पिता के रोल में और अदिति राव हैदरी बेटी के रोल मे नजर आ रहीं हैं .

Newton, movie trailer

दोस्तों Film Bhoomi के ट्रेलर में बाप और बेटी के बीच गहरा रिलेशन साफ़ नज़र आ रहा है. दोस्तों आपको बता दें कि ये फिल्म हॉलिवुड की सुपरहिट फिल्म ‘टेकन’ से प्रेरित है, जिसमें एक पिता अपनी किडनैप हुई बेटी को बचाने के मिशन पर निकलता है. इस फिल्म को काफी पसंद किया गया था. भूषण कुमार और संदीप सिंह द्वारा सह-निर्मित ‘भूमि’ में अदिति राव हैदरी Bhoomi के किरदार में हैं. यह फिल्म 22 सितंबर को रिलीज होगी.

दोस्तों संजू बाबा की माने तो उन्हें अपने कमबैक के लिए ऐसी स्क्रिप्ट की तलाश थी जो मेरे व्यक्तित्व से काफी अलग हो, और स्क्रिप्ट की कहानी डिफरेंट होने के साथ साथ पावरफुल भी हो. फिल्म ‘भूमि’ भी ऐसी ही पिता-बेटी के बीच की एक कहानी है .

फिल्म में संजय दत्त एक पिता की भूमिका निभा रहे हैं. अदिति राव हैदरी संजय दत्त की बेटी बनी हैं. जबकि शरद केलकर विलेन की भूमिक में हैं. फिल्म की पूरी कहानी तो 22 सितंबर को फिल्म रिलीज होने के बाद पता चलेगी. लेकिन फिलहाल ट्रेलर देख कर जो समझ आ रहा है वो यह है कि फिल्म में अदिति राव हैदरी के साथ शरद केलकर कुछ गलत कर देता है. जिसके बाद कैसे एक मजबूर बाप प्रशासन से हार कर कानून अपने हाथ में लेकर अपनी बेटी को इंसाफ दिलाता है. इसी पर फिल्म की कहानी आधारित है. फिल्म की संगीत की बात करें तो सचिन-जिगर की जोड़ी एक बार फिर कमाल कर रही है. फिल्म में सन्नी लियोनी का एक आइटम सॉन्ग भी है ‘ट्रीपी..ट्रीपी..’जो काफी हिट हो रहा है. वहीं फिल्म का एक और गाना ‘लग जा गले..’ भी दर्शकों को खूब पसंद आ रहा है
सुपरहिट फिल्में देने में माहिर ओमंग कुमार एक बार फिर एक गंभीर मुद्दे पर फिल्म लेकर आ रहे हैं. दोस्तों इन्होंने अब तक मैरी कॉम और सरबजीत जैसी सुपरहिट फिल्में दी हैं. फिल्म की कहानी लिखी है संदीप सिंह ने औऱ स्क्रीनप्ले किया है राज शांडिल्य ने.
Star cast: sanjay dutt, aditi rao hydari, sharad kelkar

Newton, movie trailer

दोस्तों अमित वी मसुरकर द्वारा निर्देशित, NEWTON 22 सितंबर को सिल्वर स्क्रीन पर रिलीज़ होगी. फिल्म का नाम NEWTON है तो आप सोच रहे होंगे कि फिल्म सर आइजैक न्यूटन के Law के बारे में होगी लेकिन जब आप राजकुमार राव की फिल्म के ट्रेलर देखते हैं, तो आपको आश्चर्य होगा कि एक व्यक्ति ने एक सरल नियम पर आधारित अपना जीवन कैसे बनाया है, “यदि आप कुछ भी नहीं बदलते हैं, तो कुछ भी नहीं बदलेगा.
Star cast: Rajkumar Rao, Pankaj Tripathi, Anjali Patil, Raghubir Yadav

फिल्म में newton अपने लिए पार्टनर की तलाश करता है लेकिन लड़की सिर्फ 16 साल कि निकलती है. NEWTON के जीवन में बदलाव तब शुरू होता है जब उसे नक्सल क्षेत्र में चुनाव की जिम्मेदारी सौंपी जाती है.

Bhoomi movie trailer
राजकुमार राव और फिल्म निर्माताओं ने मतदाताओं को मतदान के लिए जागरूक करने का प्रयास किया है और मतदान को एक महत्वपूर्ण अधिकार बताया है. फिल्म के ट्रेलर से पता चलता है कि लोग, जीवन खोने के डर के कारण, योग्य उम्मीदवार के लिए मतदान नहीं करते हैं.Newton

फिल्म हमें याद दिलाती है कि वोट हमारे हाथ में है. हमारे हाथ में सब कुछ बदलने की शक्ति है. और अगर हम बदलाव नहीं करते हैं, तो हमें परिवर्तन की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए. जब ट्रेलर समाप्त होता है, हम राजकुमार को कहते हुए सुनते हैं- “अगर आप कुछ नहीं बदलते हैं, तो कुछ भी नहीं बदलेगा”
इसे पहले आयी फिल्म टॉयलेट एक प्रेम कथा ने भी सिल्वर स्क्रीन पर अच्छा प्रदर्शन किया. फिल्म सामाजिक मुद्दे पर बनी थी . NEWTON भी सामाजिक मुद्दे को लेकर दर्शकों के बीच आ रही है अब देखना ये होगा दर्शक इस फिल्म को अपना कितना प्यार देते हैं.

दोस्तों आपको बता दें कि राकुमार राव ने अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत फिल्म लव सेक्स और धोखा से की थी. फिल्म इंडस्ट्री में बहुत कम समय में राजकुमार राव ने एक बड़ा मुकाम हासिल किया है. राकुमार राव ने सिटी लाइट्स, अलीगढ़ और शाहिद जैसी फिल्मों में काम किया है.

बच के कहना रे बाबा, बच के कहना रे !!!

रेप पर नेताओ के बयान!! जुबान भी कितनी कमाल की चीज होती है, जब फिसलती है तो हड्डियां तुड़वाने तक का हुनर रखती है. भारत में लोगों की जुबान बात-बात पर फिसलती है,जुबान के फिसलने का लोगों की डिग्री से कोई लेना देना नहीं जब ये फिसलती है तो किसी भी चीज का ध्यान नहीं रखती. इस लिस्ट में हमारे नेता भी पीछे नहीं हैं. नेताओं की जुबान काफी फिसलती है और भावनाओं के प्रवाह में ये लोग भी बह जाते हैं. कुछ नेता जानबूझकर, तो कुछ अनजाने में ऐसी बात बोल जाते हैं जिससे बवाल मच जाता है. फिर शुरू होता है आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला.

Parenting! बड़े लोचे हैं इस राह में

अनेक बड़ी पार्टी के बड़े नेताओं की भी जुबान फिसलती रहती है. रेप पर नेताओ के बयान अक्सर सुनने को मिलते हैं. जिसके बाद उन्हें सफाई देनी पड़ती है. सफाई का क्या है जबतक दी जाती है, पार्टी की फ़ज़ीहत अच्छी तरह से हो चुकी होती है.

दोस्तों कुछ ऐसे ही रेप पर नेताओ के बयान है. जिसके बाद उन्हें और उनकी पार्टी को काफी शर्मिंदगी उठानी पड़ी और इन नेताओं की और इनकी Parties की मीडिया में इनकी काफी किरकिरी हुई:

ओमप्रकाश चौटाला:
रेप पर नेताओ के बयान
चौटाला साहब के अचूक उपाय …….

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने देश में बढ़ रही रेप घटनाओं को कम करने के लिए अचूक उपाय बताया. चौटाला साहब की माने तो लड़कियों की शादी जल्दी करने से रेप जैसे अपराधों में भारी कमी आएगी. ये तो चौटाला साहब ही जाने की उन्होंने इसके पीछे कौन सा विज्ञान लगाया लेकिन उन्होंने खुद की और सरकार की भरपूर खिंचाई कराई.

मुलायम सिंह यादव:
नेताओं की जुबान in hindi
दिल तो बच्चा है जी……

चार हाथ आगे बढ़ते हुए मुलायम सिंह ने गलत काम करने वाले लड़को का साथ दिया. सपा मुखिया के अनुसार लड़के है और लड़कों से रेप जैसी गलतियां!!! हो जाती हैं. खैर बाद में पार्टी के तरफ से बयान जारी किया गया कि नेता जी का वो मतलब नहीं था.

ममता बनर्जी:
नेताओं की जुबान in hindi
Western culture ने बिगाड़ रखा है ……

बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी बयानबाजी में पीछे नहीं है. दीदी की जुबान भी बयान देते वक्त लड़खड़ा गयी. और दीदी ने रेप के पीछे लड़के लड़कियों की दोस्ती और खुलापन को कारण बताया. समझा जा सकता है उनके ज़माने और इस जमाने में काफी फर्क है. लेकिन इस बयान को कहीं से तर्कसंगत नहीं ठहराया जा सकता है.

मोहन भागवत:
नेताओं की जुबान in hindi
गांवों में कोई क्राइम नहीं है….

संघ के भागवत जी भी एक नयी थ्योरी लेकर आएं. उनके मुताबिक रेप जैसी घटनाएं गावों में नहीं होती. अब कौन मोहन भागवत जी के पास आंकड़े लेकर जाए खैर सबकी अपनी अपनी सोच है.

राजपाल सिंह:
इन्होने की है असली बात इन महाशय के मुताबिक फ़ोन बच्चों और महिलाओं को देना ही नहीं चाहिए. इससे वो Distract होते हैं और उन्हें फ़ोन की जरूरत भी क्या है.

असुद्दीन ओवैसी:
नेताओं की जुबान in hindi
Exclusive जानकारी ……

ओवैसी साहब के पास एकदम एक्सक्लूसिव खबरें रहती हैं. इनके मुताबिक जब भी कोई बच्चा पैदा होता है वो मुस्लिम ही होता है. बाद में उसको समाज अपने अनुसार धर्म में बदल देता है.

संजय निरुपम :
नेताओं की जुबान in hindi
नाचने गाने वाले क्या राजनीती करेंगे …….

राजनीति में विभिन्न बैकग्राउंड से लोग आते हैं. ऐसी ही एक नेता है स्मृति ईरानी सीरियल में काम करने वाली स्मृति जब राजनीति में आयी तो उनपर काफी तंज़ कैसे गए. संजय निरुपम ने उन्हें ठुमके लगाने वाली तक बोल दिया.

ये बयान राह चलते किसी ऐसे वैसे लोगों के नहीं है.ये नेताओं की जुबान और बयान है उन लोगों के जिनपर विश्वास करके जनता ने इन्हें पावर दिया है, लेकिन इनकी ऐसी बयानबाजी ही जनता को दूसरे विकल्प देखने के लिए मदद करती है.

राम रहीम को नहीं मिली रहम की भीख कोर्ट ने सुनाई 20 साल की सजा

राम रहीम सजा का आज एलान हो चुका है. उसके गुनाहो की सजा उसको मिल चुकी है. धारा 376 के तहत बाबा को 20 साल के कैद की सजा सुनाई गयी. दोनों सजाएँ अलग-अलग चलेंगी. वर्ष 2002 में बाबा राम रहीम पर साध्वियों के यौन शोषण के आरोप लगे थे. दो साध्‍वियों ने रेप और यौन शोषण का आरोप लगाया था. दोनों डेरा सच्चा सौदा के सिरसा स्‍थित हेडक्वार्टर में ही रहती थीं.

राम रहीम सजा
एक युवती ने बाबा पर यौन शौषण का आरोप लगाते हुए एक पत्र पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और प्रधानमंत्री को भेजा था.

राष्ट्रीय खेल दिवस पर इन खिलड़ियों को किया जाएगा सम्मानित

रेप के मामले में राम रहीम सजा सुनाए जाते समय गुरमीत राम रहीम सिंह फूट-फूट कर रो रहा था. रोहतक जेल के कोर्ट रूम में ठीक ढाई बजे सुनवाई शुरू हुई. सुनवाई के दौरान गुरमीत राम रहीम सिंह रहम की भीख मांगता नजर आ रहा था. बाबा हाथ जोड़कर गलती माफ करने की अपील कर रहा था.
अब राम रहीम कैदी नंबर 1997 से जाना जायेगा और इसको आम कैदियों की तरह काम करना होगा और जेल की पोशाक भी पहननी होगी. हालाँकि बाबा के वकील हाई कोर्ट में अपील करने की भी बात कर रहे हैं. बाबा के ऊपर दो हत्या के मामले भी दर्ज हैं. ये लड़ाई 2 बहादुर लड़कियों के द्वारा लड़ी गयी और आखिरकार 15 साल के बाद उन्हें इन्साफ मिला.

इन ढोंगी बाबाओं ने किया लोगों की श्रद्धा से विश्वासघात

ढोंग और ढोंगियों से सावधान! दोस्तों श्रद्धा, भक्ति और विश्वास में ऐसी ताकत होती है कि कभी-कभी असंभव दिखने वाला काम भी हो जाता है. भारत में शुरू से ही साधु-संतों का आदर सम्मान रहा है. हम कहीं भी गेरुआ वस्त्र धारण किये हुए व्यक्ति को देखतें हैं तो हमारे मन में उस व्यक्ति के लिए एक सम्मान का भाव बन जाता है. लेकिन बात फिलहाल में हुए कुछ बड़े खुलासों की करें तो लोगों का विश्वास इन बाबाओं के ऊपर से उठता जा रहा है. हालाँकि आज भी ऐसे बहुत से लोग हैं जो अंधभक्ति, और अंधविश्वास का शिकार हैं.

हैप्पी टीचर्स डे!!! आइए उनकों स्पेशल फील कराए, जिन्होनें बनाया है आपको स्पेशल

आइए दोस्तों आपको मिलातें हैं कुछ ऐसे ही अय्यास बाबाओं से जिन्होंने संत समाज की छवि धूमिल करने से पहले एक बार भी नहीं सोचा:

राम रहीम:

ढोंग
रेप के केस में आरोपी सिद्ध हो चुका राम रहीम फिल्मों में भी काम कर चुका है. ढोंग करने वाले राम रहीम की एक दिन की कमाई तकरीबन 16 लाख रुपए है. और उसे सरकार को कोई टैक्स भी नहीं देना पड़ता.
राम रहीम डेरा सच्चा सौदा का मुखिया है. उसे 1948 में शाह मस्ताना ने स्थापित किया था. डेरा के नाम पर हरियाणा के सिरसा में करीब 700 एकड़ जमीन है, राम रहीम के नाम पर एक गैस स्टेशन भी है. दुनियाभर में डेरा सच्चा सौदा के करीब 250 आश्रम हैं. इतना ही नहीं राम रहीम के नाम पर दुनिया में कई मार्केट कॉम्पलेक्स भी हैं. जब राम रहीम को दोषी ठहराया गया तो उसके समर्थकों ने तोड़-फोड़ और आगजनी की जिससे एक बात तो साफ़ है लोग तथ्यों, सबूतों और सच्चाई को अनदेखा कर रहे हैं.

आशाराम बापू:

ढोंग
इस आदमी ने बापू शब्द को मिट्टी में मिला कर रख दिया, लाखों लोगों की अंधभक्ति और जबरदस्त FAN FOLLOWING  के चलते पीड़ित व्यक्ति कभी इसके खिलाफ़ आवाज़ उठाने की हिम्मत भी नहीं करते थे. आशाराम का ढोंग तब सबके सामने आया, जब इसके आश्रम में हो रही बच्चों की मौत के कारण पुलिस और कानून का ध्यान इसकी तरफ गया, धीरे-धीरे इसके कुकर्मों का भांडा फूटने लगा. महिलाओं के साथ संबंध बनाने के अलावा और भी गैर कानूनी कामों में इसका हाथ है. इस काम में इसका बेटा भी इसकी मदद करता था. फिलहाल दोनों सलाखों के पीछे हैं.

चंद्रास्वामी:
संतों का खासकर उच्च कोटि के संत जो मोहमाया से दूर रहने की बात तो करते है लेकिन मोहमाया में ही संलिप्त रहते हैं. उसमे चंद्रास्वामी या यूं कहें डॉन चंद्रास्वामी का नाम राजनीतिक गलियारों के लिए बहुत जाना पहचाना है. इस संत के शिष्यों की लिस्ट में पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हाराव से लेकर चद्रशेखर तक शामिल थे. एक रिपोर्ट अनुसार राजीव गाँधी के हत्या का षड़यंत्र रचने वालों में इसका नाम शामिल था.अवैध रूप से हथियारों की तस्करी में भी इसका नाम जुड़ा है.

नित्यानंद स्वामी:

ढोंग
ये काम वासना में डूबा हुआ बाबा खुद के नाम के साथ स्वामी लगता है, इसके ढोंग और करतूतों का पर्दा फांस 2010 में हुआ. वायरल हुई CD में बाबा दक्षिण की अभिनेत्री के साथ आपत्तिजनक हालत में था. सवालों के पूछे जाने पर उसका कहना था कि उस वक्त ये समाधी में था, और इसे नहीं पता था की उसके शिष्य उसके साथ क्या कर रहे थे.

संत भीमानंद महाराज:
ये ढोंगी बाबा, संत भीमानंद महराज यूपी के चित्रकूट के रहने वाला है.ये कामभोगी बाबा प्रवचन की आड़ में सेक्स रैकेट चलाता था. इस बाबा ने अपने अश्लील धंधों से खूब पैसा कमाया, स्वामी इच्छाधारी भीमानंद ने अपने कारनामे छुपाने के लिए अपना नाम शिव मूरत  से बदलकर संत स्वामी इच्छाधारी भीमानंद रख लिया.वेश्यावृत्ति से होने वाली कमाई से ही वह लक्जरी कारों, मोबाइल और ज्वैलरी का खर्च उठाता था. इसके पास कोलकाता, कानपुर, अमृतसर,चेन्नई आदि में वेश्याओं के दलाल और ग्राहकों का बड़ा समूह था. इसके मोबाइल का एक साल का बिल 5.21 लाख था.

संत रामपाल:

ढोंग
हरियाणा के संत रामपाल के बारे में तो आपने जरूर सुना होगा. ये पाखंडी ढोंगी और वासना का बहुत बड़ा पुजारी था. पुलिस ने जब इसके आश्रम पर छापेमारी की तो वहां से अश्लील CD के साथ अन्य अश्लील चीजें भी बरामद हुई.

बिन गुरु भवनिधि तरई न कोई,जो विरंची शंकर सम होई
यानी बिना गुरु के भवसागर कोई भी पार नहीं कर सकता चाहे वह परमपिता परमेश्वर ही क्यों ना हों, लेकिन दोस्तों आपको यह तय करना है की आप जिस गुरु पर विश्वास कर रहें हैं .क्या वो सच में विश्वास करने लायक है, जो आपको मोह माया से दूर रहने का उपदेश दे रहा है क्या वो खुद मोहमाया से दूर है.लोगों को परखने की एक कसौटी बनाइए जिधर भीड़ जा रही है, जो भीड़ कर रही है वो मत करिए. हर पैमाने पर चीजों को परखिये फिर विश्वास कीजिये. ऐसे गुरु हमारे उत्कर्ष का नहीं लेकिन पतन का कारण जरूर बन सकतें हैं तो ऐसे ढोंगियों से सावधान रहे सतर्क रहें.

आपकी एक गलती और एक गलत कदम आपके लिए और आपके परिवार के लिए मुसीबत का सबब बन सकता है, इसलिए सावधान रहना जरुरी है.

ज्यों तिल माहि तेल है, जो चकमक में आग तेरा साई तुझमें है जाग सके तो जाग
दोस्तों खुद पर यकीन सबसे जरुरी है. और ईश्वर तक पहुँचने के लिए सबसे पहले एक सच्चा और अच्छा इंसान होना जरुरी है. ऐसे ढोंगी बाबओं की परछाई भी हमें खुद से दूर रखनी चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला,”मौलिक अधिकार है निजता का अधिकार”

राइट टू प्राइवेसी एक ऐसा अधिकार है, जिसके बारे में काफी लम्बे समय से बहस चल रही थी. और अब जाकर सुप्रीम कोर्ट ने लोगो की निजता का ध्यान रखते हुए इसका फैसला जनता के पक्ष में ही दिया है. तो चलिए हम आपको इस सरे matter से अवगत कराते हैं.

सोचिये मत…… जानिए कि इस बार बिगबॉस 11 में क्या है खास

राइट टू प्राइवेसी

हमारे संविधान ने देश के हर व्यक्ति को कई मौलिक अधिकार दिए हैं. बहस यह थी की क्या राइट टू प्राइवेसी, मौलिक अधिकारों में आता है या नहीं? और अब कैनवास बिलकुल साफ़ है, मुख्य न्यायाधीश जस्टिस खेहर की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच ने सर्वसम्मति से अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार माना है.

दोस्तों आपको बता दें कि इस फैसले से आधार का कोई सम्बन्ध नहीं है. जजों के इस बेंच ने सिर्फ राइट टू प्राइवेसी (निजता के अधिकार) पर अपना फैसला सुनाया है. फैसले के वक्त आधार पर कोई बात नहीं हुई. आधार निजता का हनन है या नहीं, इस पर तीन जजों की अन्य बेंच सुनवाई करेगी.

मौलिक अधिकार:
भारतीय संविधान ने देश के प्रत्येक नागरिक को मौलिक अधिकार दिए हैं. व्यक्ति के विकास में मौलिक अधिकारों को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.

  • समानता का अधिकार
  • स्वतंत्रता का अधिकार
  • शोषण के खिलाफ अधिकार
  • धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार
  • सांस्कृति और शिक्षा का अधिकार
  • संवैधानिक उपचार का अधिकार
  • निजता का अधिकार

इन नौ जजों की बेंच ने निजता को मौलिक अधिकार का दर्जा प्रदान किया है….

  1. मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जेएस खेहर
  2. जस्टिस एसए बोबड़े
  3. जस्टिस एएम सापरे
  4. जस्टिस चमलेश्वर
  5. जस्टिस आरके अग्रवाल
  6. जस्टिस आरएफ नरिमन
  7. जस्टिस जीवाई चंद्रचूड़
  8. जस्टिस संजय किशन कौल
  9. जस्टिस एस एब्दुल नजीर

आधार कार्ड क्या है और क्यों जरुरी है?:
Aadhar Card भारत सरकार द्वारा भारत के नागरिकों को जारी किया जाने वाला पहचान पत्र है. इसमें 12 अंकों की एक विशिष्ट संख्या छपी होती है. जिसे भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (भा.वि.प.प्रा.) जारी करता है. यह संख्या, भारत में कहीं भी, व्यक्ति की पहचान और पते का प्रमाण होगा. भारतीय डाक द्वारा प्राप्त और यू.आई.डी.ए.आई. की वेबसाइट से डाउनलोड किया गया ई-आधार दोनों ही समान रूप से मान्य हैं. कोई भी व्यक्ति आधार के लिए नामांकन करवा सकता है बशर्ते वह भारत का निवासी हो और यू.आई.डी.ए.आई. द्वारा निर्धारित सत्यापन प्रक्रिया को पूरा करता हो, चाहे उसकी उम्र और लिंग (Gender) कुछ भी हो. प्रत्येक व्यक्ति केवल एक बार नामांकन करवा सकता है. नामांकन निशुल्क है. आधार कार्ड एक पहचान पत्र मात्र है तथा यह नागरिकता का प्रमाणपत्र नहीं है.

क्या है आधार कार्ड का पंगा?:
अब अधिकतर सरकारी सेवाओं का लाभ लेने के लिए आधार लगभग अनिवार्य हो गया है. ऐसे में ना हमारा नाम और पता बल्कि बायोमैट्रिक(Biometric) जानकारी जैसे फिंगर प्रिंट आदि जैसी गोपनीय जानकारी सरकार के पास चली जाती है. ऐसे में उस जानकारी का गलत प्रयोग भी हो सकता है.

कुछ लोगों ने पिटीशन डालकर बायोमैट्रिक जानकारी को निजता के अधिकार के अंदर लाने का आग्रह किया है. सरकार इसे पहले ही नकार चुकी है और सरकार का मानना है कि आधार कार्ड में दी गयी जानकारी निजता के अधिकार के अंदर नहीं आती. अब मामला अदालत में है, और कोर्ट के तीन जजों की बेंच इसपर अपना फैसला सुनाएगी.

बिग बॉस 11 सीजन है दमदार,हो जाइए तैयार,इस बार पड़ोसी करेंगे वार (Host Salman khan)

बिगबॉस सीजन 11!! जी हाँ दोस्तों बिग बॉस सीजन 11 का प्रोमो ऑन एयर हो चुका है. आपको बता दें की टीज़र में सलमान की शादी को लेकर भी तंज कसा गया है, खैर बात अगर दबंग खान से जुड़ी हो तो हर छोटी बात भी सुर्खियों में आ जाती है.

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और यहां तो बात मोस्ट वांटेड बैचलर सलमान और हमेशा ख़बरों में रहने वाले शो बिग बॉस की है. पिछले कुछ सीजन में शो के लोकप्रियता में भरी कमी आयी थी,इसलिए इस बार इसे ध्यान में रखते हुए शो को एक नए अंदाज़ में पेश किया जाएगा, अगर प्रोमो की बात की जाये तो इसे देख कर लगता है कि इस बार कांसेप्ट पड़ोसियों का होगा. इस बार फॉर्मेट बिलकुल अलग होगा, इस बार शो दो घरों में बटा होगा और प्रतिभागियों को एक दूसरे के साथ पड़ोसियों की तरह रहना होगा. सभी कंटेस्टेंट चार महीनों तक घर में कैद रहेंगे.

https://www.youtube.com/watch?v=taL3tRBQ1sc

शो की टेलीविजन पर शुरुवात और Timing:

साल भर बिगबॉस सीजन 11 शो का इंतजार करने के बाद एक और बिगबॉस सीजन ब्राडकास्टिंग के लिए तैयार है. लोग इस रियलिटी शो को देखना चाहते हैं इसका अंदाजा इस बात से ही लग जाता है कि, कैसे सब इसके नए सीजन के आने का इंतजार करतें हैं.

हम आपको बता दें, बिगबॉस सीजन 11 की ब्रॉडकास्टिंग अक्टूबर से colors चैनल पर रात के समय होगी. भारतीय समयानुसार सोमवार से शुक्रवार रात 10 से 11 बजे तक प्रसारित होगा तो शनिवार और रविवार को 9 से 10 बजे तक प्रसारित किया जायेगा.

अगर कांसेप्ट अलग है अंदाज़ अलग है तो इस बार आपको क्या लगता है? पार्टीसिपेंट भी हटके ही होंगे.बिलकुल सही सोच रहे हैं आप.

बिगबॉस सीजन 11 के लिए प्रतिभागियों की लिस्ट के कुछ नाम तो लगभग तय है ही. चलिए बिना इंतजार के हम आपको बताते हैं कि इस बार के सीजन में कौन-कौन दर्शको का मनोरंजन करेगा. और इस लिस्ट में कुछ नाम तो ऐसे हैं जिन्हें सुनकर आप भी चौक जाएंगे….

ढिंचक पूजा:
“ढिंचक पूजा” इंटरनेट पर अपनी पकाऊ हरकतों के बावजूद भी हिट ढिंचक पूजा के शो में आने की खबर अगर पक्की है तो शो की टीआरपी में इज़ाफ़ा होना तो तय ही है. और बात अगर चली है तो दूर तक जाएगी.

सना सईद:
लाखो दिलों की चहेती फिल्म कुछ-कुछ होता में छोटी अंजलि का रोल निभाने वाली एक्ट्रेस सना सईद भी इस शो का हिस्सा बन सकती हैं.

देवलीना भट्टाचार्या:
इस लिस्ट में बहुएं भी पीछे नहीं हैं,चर्चा है की स्टार प्लस की बहू यानी गोपी बहू,देवलीना भट्टाचार्या के नाम पर भी मुहर लग सकती है.

रिया सेन:
कई फिल्मों में काम कर चुकी रिया सेन भी बिग बॉस के जरिये छोटे परदे पर एंट्री ले सकती हैं, फ़िलहाल रिया एकता कपूर के साथ एक प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं.लिस्ट लम्बी है और अटकलें भी लेकिन इस बार लिस्ट भी हटके ही होनी थी अभी तक किसी भी नाम पर मुहर नहीं लगी है, लेकिन फिल्म जगत के गलियारों में चर्चा जोरों पर है. लिस्ट में एक और नाम

मिष्ठी चक्रवर्ती :
बेगम जान, कोलंबस, कांची, द ग्रेट ग्रांड मस्ती जैसी फिल्मों में दिख चुकी एक्ट्रेस मिष्ठी चक्रवर्ती का भी आ रहा है.फेहरिस्त में नाम निया शर्मा का भी आ रहा है जो खतरों के ख़िलाड़ी में भी दिख चुकी हैं.

फ्रेंड्स इसके आगे भी बिगबॉस सीजन 11 के कई नाम है. लेकिन फाइनल कौन-कौन प्रतिभागी होंगे ये तो शो को देखने के बाद ही पता चल पायेगा. तो बस थोड़ा सा इंतज़ार और इसके बाद बिगबॉस के इस सनसनी मचा देने वाले सीजन के हर रहस्य से पर्दा उठ जायेगा.

दोस्तों ये तो रही बात आने वाले सीजन की लेकिन क्या आप ये जानना नहीं चाहेंगे की दर्शकों यानी की आपने और मैंने और हम जैसे सभी ने सबसे ज्यादा किन प्रतिभागियों से नफरत की है.

जानना चाहते हैं !!! तो चलिए फिर हम आपको इन शख्सियतों से भी रु-ब-रु करातें हैं.

स्वामी ओम:
सीजन 10 के स्वामी ओम हमेशा महिलाओं पर गलत कमेंट और घर में अन्य प्रतिभागियों के साथ गलत बर्ताव के चलते नम्बर एक पर हैं. शो की बैड गर्ल प्रियंका जग्गा के साथ उनके एक्स्ट्रा स्वीट बर्ताव ने भी उन्हें इस लिस्ट में नम्बर एक के ख़िताब से नवाज़े जाने का काम किया है.

इमाम सिद्द्की:
इन जनाब को कौन भूल सकता है सीजन 6 के इस प्रतिभागी की होस्ट सलमान से हमेशा हुई बहस और चिल्लाने की कला ने इसे यहां तक पहुँचाया है.

राखी सावंत:
जहां राखी हो वहां कुछ अलग ना हो ऐसा हो ही नहीं सकता सीजन 1 में राखी के कश्मीरा शाह से टसल कौन भूल सकता है, और कान के पर्दों को, राखी ने शो के जरिये काफी कष्ट दिया.

कमाल आर खान:
इन जानब ने भी कारनामे भूलने लायक नहीं किये हैं, इन्होंने सीजन 3 में भाग लिया था और साथी प्रतिभागी रोहित वर्मा के सिर पर बोतल से वार किया था,इनको शो के दौरान विन्दु दारा सिंह ने तमाचा भी जड़ा था.

डॉली बिंद्रा:
या यूँ कहें डॉन डॉली बिंद्रा सीजन 4 में डॉली ने शो की टीआरपी में खूब तड़का लगाया. हर रोज कोई नया ड्रामा और खासकर श्वेता तिवारी और मनोज तिवारी के साथ मैडम का पंगा कुछ ज्यादा ही होता था.

ये लिस्ट आप तब तक सच नहीं मानते जब तक इस बाला का नाम इस लिस्ट ना होता तो लीजिये आ गया इनका भी नाम

प्रियंका जग्गा:
बिग बॉस 10 सीजन की इस लड़की को लोगों की भरपूर नफरत मिली जग्गा को मुसीबतें खड़ी करने का शौक था झूठ बोलने और नफरत गेन करने में जग्गा का कोई सानी नहीं है. और बानी के साथ उसका काण्ड कौन भूल सकता है!!!

एज़ाज़ खान:
इस लिस्ट में आखिरी नाम एज़ाज़ खान का है किसी के भी लफड़े में पड़कर फालतू फुटेज और लाइमलाइट लेने में एज़ाज़ सबसे आगे थे, दर्शकों को उनका ये अंदाज़ कभी नहीं भाया.

तो देखते हैं इस बार के स्पेशल शो में बिगबॉस के घर का कौन सा सदस्य जनता के दिलो पर राज करता हैं या कौन सबके दिलों से उतरता है. ये तो आने वाला समय ही बताएगा.
फिलहाल के लिए All the Best to All Participants…..

सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को बताया असंवैधानिक,केंद्र को दिया कानून बनाने का आदेश

सियासी गहमा गहमी के बीच तीन तलाक सुप्रीम कोर्ट पर आखिरकार फैसला आ ही गया जिससे मुस्लिम महिलाओ के बीच ख़ुशी का माहौल है तो कई मुस्लिम लोग इसके लगातार विरोध में लगे हुए हैं.

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तीन तलाक सुप्रीम कोर्ट

तीन तलाक सुप्रीम कोर्ट!! देश में लम्बे समय से तीन तलाक पर चली आ रही बहस अब थमती नज़र आ रही है. तीन तलाक एक ऐसा मुद्दा बना रहा जिसको राजनितिक दल सिर्फ वोट बैंक में कमी के डर से इस मुद्दे पर चर्चा से में गुरेज करते रहें. मोदी सरकार ने जब इस मसले को उठाया तो उन्हें मुस्लिम समुदाय की महिलाओं का अभूतपूर्व समर्थन मिला.
सरकार और कानून इस मसले को मानवाधिकार और स्त्री के सम्मान से जोड़कर देखता है. लेकिन कुछ मुस्लिम इसे जायज़ और शरीयत के हिसाब से बिल्कुल सही मानते हैं. आइये आपको अवगत करातें हैं तीन तलाक के सभी सुने – अनसुने पहलुओं से…..

तीन तलाक सुप्रीम कोर्ट का निर्णय:
इस मुद्दे को सुलझाने के लिए न्यायपालिका को बीच में आना पड़ा क्योंकि राजनितिक दलों ने इस मुद्दे पर सवेदनशीलता कम और वोट बैंक को ज्यादा तव्वजो दिया .

उच्चतम न्यायालय ने इस मसले पर संज्ञान 16 अक्टूबर 2015 में लिया और बहुविवाह जैसी प्रथाओं पर विचार करने की जरूरत को समझा. तीन तलाक के मुद्दे पर फैसला सुनाते वक्त तीन तलाक सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संविधान पीठ के तीन जजों ने इसे असंवैधानिक बताया है. जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस फली नरीमन,जस्टिस जोसेफ कुरियन ने तीन तलाक को असंवैधानिक बताते हुए कहा-इससे मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का हनन होता है. इसी बीच जस्टिस जेएस खेहर ने तीन तलाक धार्मिक प्रक्रिया और भावनाओं से जुड़ा मामला बताया और कहा कि इसलिए इसे एकदम से खारिज नहीं किया जा सकता.

जस्टिस खेहर ने इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण पक्ष संसद और केंद्र सरकार को बताया, और कहा की उन्हें ही इसपर क़ानून बनाना चाहिए, कानून बनाकर स्पष्ट दिशा निर्देश तय करने चाहिए. चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने इसके लिए केंद्र सरकार को छह महीने का समय दिया. और छह महीने तक के लिए कोर्ट अनुच्छेद 142के अंतर्गत विशेष शक्तियों का प्रयोग से तीन तलाक पर तत्काल रोक लगाती है. इस अवधि में देश में कहीं भी तीन तलाक मान्य नहीं होगा.

तीन तलाक के खिलाफ से आवाजें हमेशा उठती और दबती रहीं हैं. लेकिन धर्म से जुड़ा मुद्दा होने के कारण किसी राजनीतिक दल या सरकार ने इस मसले पर खुला स्टैंड नहीं लिया. केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद 7 अक्टूबर, 2016 को राष्ट्रीय विधि आयोग ने जब इसपर लोगों की राय मांगी तो इस मसले पर देश में एक नई बहस की शुरुआत हुई. तमाम बहसों और मीडिया कवरेज के बाद भी मुद्दा जस का तस बना रहा.

सुप्रीम कोर्ट ने 30 मार्च 2017 को यह फैसला किया कि इस मसले से जुड़ी सभी याचिकाओं पर सुनवाई पांच जजों की संविधान पीठ करेगी. सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद अदालत ने जोर देकर कहा कि यह मामला संजीदा है. और यह सविंधान द्वारा प्रदत्त अनुच्छेद 14 (समानता के अधिकार का उलंघ्घन करता है) इसे टाला नहीं जा सकता.

11 मई 2017 को इस मसले पर संविधान बेंच ने सुनवाई शुरू की सुनवाई लगातार 6 दिन चली. इस बीच कोर्ट में जोरदार बहस देखने को मिली ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा कि तीन तलाक इस्लाम का मूल हिस्सा नहीं है. कुरान में तलाक की प्रक्रिया बताई गई है। मोहम्मद साहब की मौत के बाद हनीफी में जो लिखा गया, उसमें तीन तलाक का जिक्र है. कुरान इस्लामिक शास्त्र है उसमें तीन तलाक जैसा कुछ नहीं लिखा गया है.

ये लड़ाई अगर यहां तक पहुंची है तो इसके पीछे कई चेहरे,संघर्ष और योद्धा होंगे आइए आपको बताते हैं कुछ ऐसी ही बहादुर महिलाओं के बारे में…

सायरा बानो:
उत्तराखंड के काशीपुर की सायरा बानो ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर कर ट्रिपल तलाक और निकाह हलाला के प्रचलन के संवैधानिकता को चुनौती दी थी.उन्होनें याचिका में मुस्लिम समाज में प्रचलित बहुविवाह प्रथा को भी गलत बता उसे खत्म करने की मांग की थी. सायरा ने तीन तलाक को संविधान के अनुच्छेद 14 के अंतर्गत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया था. 2001 में सायरा की शादी हुई. 10 अक्टूबर 2015को उन्हें पति ने तलाक दे दिया.

आफरीन रहमान:
25 वर्षीय आफरीन रहमान ने भी तलाक के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. इंदौर में रहने वाले उनके पति ने उन्हें स्पीड पोस्ट के जरिए तलाक दिया,आफरीन ने कोर्ट से न्याय की गुहार लगायी थी.