स्मॉग वाली दिल्ली में कैसे रखे अपने परिवार को तंदुरस्त जाने

स्मॉग एक ऐसा शब्द बन गया है जिसने हम सब परेशान है। राजधानी दिल्ली वैसे तो पूरे साल ही प्रदुषण के लिए ख़बरों में बनी रहती है। पर बीते कुछ दिनों से दिल्ली की हवा इतनी जहरीली हो गयी है की लोगो को साँस लेने में भी परेशानी हो रही है। स्मॉग जिससे देख अक्सर हम कोहरा समझ लेते है वो प्रदूषण का ही एक रूप है। इस स्मॉग की वजह से बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक परेशान नज़र आ रहे है।

अगर आप भी इससे परेशान है तो आज हम आपको स्मॉग से बचने और अपने परिवार को सुरक्षित रखने के तरीके बताएंगे।

स्मॉग क्या है-

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Delhi Smog

स्मॉग एक तरह का वायु प्रदूषण ही होता है। स्मॉग, स्मोक और फॉग से मिलकर बना है जिसका मतलब है स्मोकी फॉग, यानी कि धुआं युक्त कोहरा। इस वायु प्रदूषण में हवा में नाइट्रोजन ऑक्साइड्स, सल्फर ऑक्साइड्स, ओजोन, स्मोक और पार्टिकुलेट्स मिले होते हैं। इस तरह के वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण हमारे द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों से निकलने वाला धुआं, फैक्ट्रियों और कोयले, पराली आदि के जलने से निकलने वाला धुआं होता है।

स्मॉग का कारण –

  • दिल्ली-एनसीआर के पडोसी राज्ये पंजाब, उत्तर प्रदेश और हरियाणा हैं। जहां बहुत ज्यादा मात्रा में खेती की जाती है। यहां के लोग फसल कटने के बाद उसके अवशेष जिससे पराली कहते है उसको जला देते हैं जिससे स्मॉग की समस्या पैदा होती है।
  • इस बार सुप्रीम कोर्ट से पटाखों पर बैन के बावजूद राजधानी के बहुत से इलाकों में काफी पटाखे फोड़े गए है।
  • राजधानी की सड़कों पर दौड़ने वाली कारें, ट्रक्स, बस भी साफ़ पर्यावरण का एक बड़ा दुश्मन है।
  • औद्योगिक प्रदूषण भी स्मॉग का मुख्य जिम्मेदार कारक है।
  • सर्दी के मौसम में हवाएं थोड़ी सुस्त होती हैं। ऐसे में डस्ट पार्टिकल्स और प्रदूषण वातावरण में स्थिर हो जाता है जिससे स्मॉग जैसी समस्याएं सामने आती हैं।

स्मॉग के बुरे प्रभाव –

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  1. खांसी, गले और सीने में जलन – जब आप स्मॉग भरी हवा में साँस लेते हैं तो हवाओं में हाई लेवल का ओजोन मौजूद होने की वजह से आपके श्वसन तंत्र पर बुरा असर पड़ता है। इससे सीने में जलन होने लगती है तथा खांसी की भी समस्या उत्पन्न हो जाती है। ओजोन आपके फेफड़ों को तब भी नुकसान पहुंचाती है।
  2. अस्थमा– अस्थमा के मरीज़ो के लिए स्मॉग ज्यादा घातक हो सकता है। स्मॉग में मौजूद ओजोन की वजह से अस्थमा का अटैक आ सकता है।
  3. सांस लेने में तकलीफ और फेफड़े खराब होना – स्मॉग की वजह से सांस लेने में तकलीफ होती ही है साथ ही साथ इसकी वजह से अस्थमा, एम्फीसिमा, क्रोनिक ब्रोंकाइटिस और अन्य साँस संबंधी समस्याएं अपनी गिरफ्त में ले लेती हैं। इसकी वजह से फेफड़ों में संक्रमण भी हो सकता है।

क्या है बचने का तरीका –

  1. सबसे पहले आपको अपने इलाके का ओजोन स्तर पता होना चाहिए।
  2. ऐसे समय में घर से ज्यादा देर तक के लिए बाहर रहने से बचें।
  3. बाहर जाने का प्रोग्राम हो तो मुँह पर मास्क का इस्तेमाल करे।
  4.  स्मॉग के दिनों में कम से कम एक्टिव रहने की कोशिश करें। ऐसे मौसम में आप जितना एक्टिव रहेंगे       आपको श्वसन संबंधी रोग होने का 5. खतरा उतना बढ़ जाएगा।
  5.  वायु प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई में सहयोग करें। ऊर्जा संरक्षण, कार पूलिंग और पब्लिक ट्रांसपोर्ट जैसे अभियानों में सहयोग दें।
  6. घर की भीतरी हवा की गुणवत्ता को नियन्त्रित रखें- दरवाजे और खिड़कियां बंद रखें। एयर            प्यूरीफायर भी लगा सकते हैं।
  7. पूरी बाजू के कपड़े पहनें और अपने चेहरे को अच्छी गुणवत्ता के मास्क से ढकें। (नियमित समय अंतराल पर मास्क बदलें)
  8. घर के बाहर किए जाने वाले व्यायाम से बचें, इसके बजाए घर के अंदर योगा जैसे व्यायाम करें। अपने घर के आस-पास प्रदूषण कम करने के लिए पेड़ लगाएं।
  9. इम्‍यूनिटी को मजबूत बनाने के लिए अदरक और तुलसी की चाय पीएं।
  10. अपने आहार में विटामिन सी, ओमेगा 3 और मैग्निशियम, हल्दी, गुड़, अखरोट आदि का सेवन करें।

फिर टेंशन किस बात की, इन आसान तरीको को अपना कर आप अपनी ज़िन्दगी को स्मॉग से सुरक्षित रख सकते है

कौन है रानी पद्मावती और क्या है फिल्म से जुड़ा विवाद

Film Padmavati!! भारत देश का इतिहास सुनहरा रहा है। इस देश की भूमि पर प्राचीनकाल से ही ना जाने कितनी वीरांगनाओ ने जन्म लिया। हमारी भूमि को धन्य किया। जब बात आती है शूरवीर वीरांगनाओ की तो उसमे झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, रानी चेनम्मा और रानी पद्मावती का ज़िक्र भी आते है। बहुत कम लोग होंगे जो रानी पद्मावती के बारे में जानते है। पर आज देश में इनका नाम जोरोशोरों से लिया जा रहा है।

अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल गोवा में इस बार क्या है खास? जानने के लिए अवश्य पढ़ें

ऐसा हो रहा है संजय लीला भंसाली की फिल्म “पद्मावती” की वजह से। रानी पद्मावती पर बनी फिल्म अपने विवाद की वजह से लगातार सुर्खियों में है। अगर इस Film Padmavati को लेकर आप भी असमंजस में है तो हम आपको आज इस पूरे विवाद के बारे में बताएंगे।

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Film Padmavati based on Queen Padmavati’s life

कौन है “पद्मावती:
रानी पद्मावती को पद्मिनी के नाम से भी जाना जाता था। राजा गंधर्व सेन और रानी चंपावती की बेटी रानी पद्मावती का विवाह चित्तौड़ के राजा रतन सिंह से हुआ था। ऐसा कहा जाता है कि खिलजी वंश का शासक अलाउद्दीन खिलजी पद्मावती को पाना चाहता था। रानी को जब ये पता चला तो उन्होंने कई अन्य राजपूत महिलाओं के साथ जौहर कर लिया। इस बात की पुष्टि सुप्रसिद्ध इतिहासकार आर.वी. सिंह द्वारा लिखित राजपूताना का इतिहास नमक पुस्तक में भी होती है।

 क्या है Film Padmavati विवाद:

संजय लाली भंसाली की फिल्‍म ‘पद्मावती’ पहले ही दिन से विवादों में घिर गई और जैसे-जैसे इस फिल्‍म की रिलीज डेट पास आती जा रही है। फिल्‍म का विरोध भी बढ़ता जा रहा है। संजय लीला भंसाली की फिल्म की कहानी खिलजी और पद्मावती को केंद्र में रखकर बुनी गई है। रानी पद्मावती को अलाउद्‌दीन खिलजी की प्रेमिका बताया जा रहा है। उसके सपने में पद्मावती के साथ प्रेम-प्रसंग के दृश्यों को फिल्माने की बात सामने आ रही है।

करणी सेना व राजपूत सभा को आपत्ति:
राजपूत करणी सेना के अध्यक्ष महिपाल मकराना और राजपूत सभा के अध्यक्ष गिर्राज सिंह लोटवाड़ा ने कहा है कि अगर इतिहास और परंपराओं के साथ छेड़छाड़ होगी तो इसका अंजाम अच्छा नहीं होगा। पदाधिकारियों ने कहा कि रानी पद्मिनी हमारा गौरव हैं। उन्होंने अलाउद्दीन के पास जाने के बजाय जौहर (आग में कूदना) करने को बेहतर समझा। फिल्म में उन्हें अलाउद्‌दीन की प्रेमिका बताया जा रहा है, जो सरासर गलत है।

 हम राजपूतों की धरती पर अपने पूर्वजों को लेकर दिखाई जा रही अश्लीलता को बर्दाश्त नहीं करेंगे। करणी सेना के प्रमुख लोकेंद्र सिंह कालवी ने कहा कि दीपिका-रणवीर के रिलेशन कुछ भी हों लेकिन इस फिल्म में उन्हें प्रेमी-प्रेमिका के रूप में नहीं दिखाया जाना चाहिए। अलाउद्दीन-पद्मिनी के लव सीन को नहीं फिल्माया जाना चाहिए।


संजय लीला भंसाली ने दी विवाद पर सफाई:

Film Padmavati By Sanjay Leela Bhansali
Sanjay Leela Bhansali upcoming film Padmavati

भंसाली  की तरफ से एक वीडियो पोस्ट किया गया है, जिस वीडियो में भंसाली ने कहा, ‘मैंने यह फिल्‍म बहुत इमानदारी और मेहनत से बनाई है. रानी पद्मावती की कहानी से मैं हमेशा प्रभावित रहा हूं और यह फिल्‍म उनकी वीरता और उनके आत्‍मबलिदान को नमन करती है. लेकिन कुछ अफवाहों के चलते यह विवादों का मुद्दा बन कई है. अफवाह है कि इसमें रानी पद्मावती और अलाउद्दीन खिलजी के बीच ड्रीम सीक्‍वेंस दिखाया गया है. मैंने इस बात को पहले ही नकारा है, लिखित प्रमाण दिए हैं और एक बार फिर नकार रहा हूं कि इस फिल्‍म में रानी पद्मावती और खिलजी के बची कोई ऐसा सीन नहीं है जो किसी की भावना को ठेस पहुंचाए. हमने इस फिल्‍म को बहुत जिम्‍मेदारी से बनाया है और राजपूती मान का पूरा ध्‍यान रखा है।’

Film Padmavati और उसकी स्टार कास्ट-

Film Padmavati
Sanjay Leela Bhansali and StarCast of Film Padmavati

संजय लीला भंसाली द्वारा निर्देशित “पद्मावती” है, इस फिल्म में दीपिका पादुकोन रानी पद्मावती, एक्टर शाहिद कपूर राजा रतन सिंह और रणवीर सिंह खलनायक अल्लाउदीन खिलजी के रूप में नज़र आएंगे, ये फिल्म 1  दिसंबर 2017 को रिलीज़ होगी

रानी पद्मावती पर बनी इस फिल्म को एक बार मौका देना चाहिए जो आज की पीढ़ी उनको और उनके बलिदान की भूल गयी है उन्हें एक बार फिर याद दिलाने की जरुरत है।

इंटरनेशनल ट्रेड फेयर 2017 का हुआ आगाज

trade fair 2017- जी हाँ, राजधानी दिल्ली के प्रगति मैदान में हर साल की तरह 14 नवंबर यानी आज से अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले शुरू हो गया है। अगर आप भी trade fair 2017 का लुत्फ़ उठाना चाहते है पर इस दुविधा में है कि कहाँ से टिकट ले और कैसे वहाँ पंहुचा जाए तो हम आज आपके लिए सारी जानकारी लेकर आए है।

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ट्रेड फेयर का इतिहास:
प्रगति मैदान दिल्ली में लगने वाला एक क्षेत्र है। हर वर्ष नवम्बर महीने में यहाँ अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले का आयोजन किया जाता है। प्रगति मैदान दिल्ली स्थित बडे प्रदर्शिनियों और व्यापारियों का परिसर है। पूरा परिसर कई छोटे छोटे प्रदर्शनी हॉल में बंटा होता है। यह फेयर खासतौर पर हर साल लगने वाले विश्व पुस्तक मेला एवं इंटरनेशनल ट्रेड फेयर के लिये बहुत मशहूर है।

कब तक है ट्रेड फेयर:
इस बार अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 14 नवंबर से 27 नवंबर 2017 तक दिल्ली के प्रगति मैदान में चलेगा।

ट्रेड फेयर 2017:
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 अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले का आगाज आज( 14 नवंबर) राष्ट्रपत‌ि रामनाथ कोव‌िंद ने क‌िया। आपको बता दे कि व्यापार मेले में जाने के लिए टिकटों की बिक्री दिल्ली मेट्रो के सभी स्टेशनों (प्रगति मैदान मेट्रो स्टेशन को छोड़कर) पर होगी। आप किसी भी स्टेशन से टिकट ले सकते है। जबकि पहले चार बिजनेस डेज की टिकटें 42 मेट्रो स्टेशनों पर उपलब्ध होंगी।
कोई भी व्यक्ति मेट्रो के ग्राहक सुविधा केंद्र से सुबह साढ़े 8 से शाम 5 बजे तक मेले की टिकटें खरीद सकते है। दिल्ली मेट्रो के स्टेशनों के अलावा मेले की टिकटें एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन के स्टेशनों पर भी उपलब्ध होंगी।
दिल्ली मेट्रो के सभी स्टेशनों पर व्यापार मेले की टिकटें 14 नवंबर(आज ) से बिकनी शुरू हो गई है। इस बार मेले में एंट्री 14 नवंबर से 17 नवंबर तक बिजनेस डेज की टिकट प्रति व्यक्ति 500 रुपये होगी। 18 से 27 नवंबर के बीच वीकएंड और सरकारी छुट्टी के दिन वयस्कों के लिए 120 रुपये, जबकि बच्चों के लिए 60 रुपये की टिकट होगी।
  1. अन्य दिनों में मेले की टिकट वयस्कों के लिए 60 रुपये रखी गई है।
  2. बच्चो के लिए 40 रुपये की टिकट रखी गई है
  3. प्रगति मैदान के एंट्री गेट्स पर टिकटों की बिक्री नहीं होगी।
  4. लोग मेले देखने आने से चार दिन पहले एडवांस टिकट खरीद सकते हैं।
  5. इस बार की थीम स्टार्टअप इंडिया रखी गई है

कैसे जाएँ पब्लिक या प्राइवेट ट्रांसपोर्ट से:

आपने भी इंटरनैशनल ट्रेड फेयर में आने का मन बना लिया है और आप प्राइवेट वहां से जाने का सोच रहे है तो आपको बता दे की पब्लिक ट्रांसपॉर्ट का इस्तेमाल ही बेहतर विकल्प होगा। दरअसल, ट्रेड फेयर में इस साल पार्किंग शुल्क पिछले साल के बराबर ही रखा गया है। दूसरी ओर, GRAP की वजह से अन्य जगहों पर पार्किंग 4 गुना तक महंगी हो गई है।
ट्रेड फेयर में पार्किंग इसलिए महंगी की जाती है ताकि लोग पब्लिक ट्रांसपॉर्ट का इस्तेमाल अधिक करें। लेकिन इस बार ट्रेड फेयर ने पार्किंग रेट को पिछले साल के बराबर ही रखा है। इसके चलते लोग गाड़ियों से आना अधिक पसंद करेंगे। इसकी वजह से पार्किंग फुल मिलने की संभावना बढ़ ही गई है साथ ही ट्रेड फेयर के आसपास जाम लगने की भी आशंका है।
आप भी trade fair 2017 जाने का प्लान बना रहे है तो डरिये मत…..किसी भी मेट्रो स्टेशन से टिकट ले और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करे और खूब एन्जॉय करे।

दीवाली कहानी, लक्ष्मी पूजन मंत्र और मुहूर्त

दीवाली हिंदुओं के मुख्य त्यौहारों में से एक है. दीपावली को लक्ष्मी पूजा के नाम से भी जाना जाता है. दिवाली लोगो के लिए खुशियों भरा त्यौहार है. इस त्यौहार को पूरे भारत में बड़े हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है. इस फेस्टिव सीजन के लिए कार्यालयों में भी छुट्टी दी जाती है. लोग अपने-अपने घरों को जाते हैं और अपने परिवार वालो के साथ इस त्यौहार का भरपूर आनंद लेते हैं.

दिवाली गिफ्ट के लिए आईडिया यहाँ से ले

दीवाली

दीवाली भगवान श्री राम के अयोध्या वापसी की खुशी में मनाई जाती है. दीवाली के दिन लक्ष्मी जी की पूजा का भी विधान है.
इस साल दीवाली 19 अक्टूबर=2017 यानी बृहस्पतिवार को मनाई जाएगी. शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान राम 14 वर्ष के बाद रावण यानी अंधकार पर विजय प्राप्त कर अयोध्या वापस लौटे थे. प्रभु राम के आने की ख़ुशी में अयोध्यावासियों ने दीपक जलाकर भगवान के वापसी का उत्सव मनाया था. स्कंद पुराण के अनुसार कार्तिक अमावस्या के दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर सभी देवताओं की पूजा इस विधि विधान के साथ करनी चाहिए.

कुछ ऐसे करे दिवाली पर घर की सजावट

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त:
दिवाली के दिन लक्ष्मी माँ के पूजन का मुहूर्त शाम 07:11 से लेकर रात को 08:16 तक है.

महानिशा काल पूजा का मुहूर्त:
रात 11:40 से लेकर रात को 12:31 तक है

दिवाली पूजा विधि :
दिवाली के दिन पूजन मुहूर्त के समय पूजा घर में लक्ष्मी और गणेश जी की नई मूर्तियों को स्थापित करें.
पूजा की चौकी पर स्वस्तिक बनाकर और चावल रखकर उसके ऊपर कलश की स्थापना करनी चाहिए.
इसके बाद प्रतिमा के सामने बैठकर हाथ में जल लेकर शुद्धि मंत्र का उच्चारण करते हुए उसे मूर्ति पर, परिवार के सदस्यों पर और घर में सर्वत्र छिड़कना चाहिए.

दिवाली का त्यौहार पाँच दिन (धनतेरस, नरक चतुर्दशी, अमावश्या, कार्तिक सुधा पधमी, यम द्वितीया या भाई दूज) का हिन्दू त्यौहार है. जिसकी शुरुआत धनतेरस (अश्वनी माह के पहले दिन का त्यौहार है) से होती है और भाई दूज (कार्तिक माह के अन्तिम दिन का त्यौहार है) पर खत्म होती है.
इस त्यौहार को लोग खुशी से घरों को सजाकर बहुत सारी Light, दिये, candles  जलाकर, आरती पढकर, Gifts बाटकर, मिठाईयॉ, cards बॉटकर, एस .एम. एस भेजकर, रंगोली बनाकर, खेल खेलकर, मिठाइयां खाकर मानते हैं.

त्यौहार की शुरुआत:
गुरुवार, 19 अक्टूबर, 2017
धनतेरस: मंगलवार, 17 अक्टूबर, 2017
नरक चतुर्दशी (छोटी दीवाली): बुद्धवार, 18 अक्टूबर, 2017
लक्ष्मी पूजा (मुख्य दिवाली): गुरुवार, 19 अक्टूबर, 2017
बाली प्रतिप्रदा या गोवर्धन पूजा: शुक्रवार, 20 अक्टूबर, 2017
भाईदूज: शनिवार, 21 अक्टूबर, 2017

दिवाली पर सुख समृद्धि के विशेष 8 mantra:
दिवाली पर हर कोई महालक्ष्मी को प्रसन्न करने की कोशिश करता है. हम आपको शास्त्रों और पुराणों से एकत्र 8 ऐसे मंत्र के विषय में बताएंगे जो माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए जरुरी होता है.

महालक्ष्मी मंत्र 1
ॐ ह्रीं श्री क्रीं क्लीं श्री लक्ष्मी मम गृहे धन पूरये,
धन पूरये, चिंताएं दूरये-दूरये स्वाहा:

महालक्ष्मी मंत्र 2
ॐ ह्रीं ह्रीं श्री लक्ष्मी वासुदेवाय नम:

महालक्ष्मी मंत्र 3
पद्मानने पद्म पद्माक्ष्मी पद्म संभवे
तन्मे भजसि पद्माक्षि येन सौख्यं लभाम्यहम्

 महालक्ष्मी मंत्र 4
ॐ आं ह्रीं क्रौं श्री श्रिये नम: ममा लक्ष्मी
नाश्य-नाश्य मामृणोत्तीर्ण कुरु-कुरु
सम्पदं वर्धय-वर्धय स्वाहा:

महालक्ष्मी मंत्र 5
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नम:

 महालक्ष्मी मंत्र 6
ॐ ह्रीं श्री क्लीं नम:

महालक्ष्मी मंत्र 7
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नम:

महालक्ष्मी मंत्र 8
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं अर्ह नम: महालक्ष्म्यै
धरणेंद्र पद्मावती सहिते हूं श्री नम:

sarijankari के सभी प्रिय पाठकों को दिवाली की ढेरों शुभकामनाएं!!!
अपने साथ-साथ अपने आस-पास के वातावरण का भी ख्याल रखें !!
Polution free दिवाली मनाये और स्वस्थ रहे…..

करवा चौथ की पूजन विधि और मुहूर्त

करवा चौथ व्रत सुहागन महिलाएं अपने पति के लिए करती हैं इस दिन वो पति की लंबी उम्र की प्रार्थना करती हैं. साथ ही भगवान से अपने सुखी गृहस्थ जीवन के भी लिए प्रार्थना करती हैं.

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करवा चौथ

इस बार साल 2017 में करवाचौथ का व्रत आठ अक्टूबर(8 October), रविवार को पड़ रहा है.

करवा चौथ के दिन का मुहूर्त(Karwa chauth Ka Muhurt):

करवा चौथ के दिन पूजा का समय शाम 5:55 पर शुरू होगा और शाम 7: 09 पर पूजा करने का महूर्त समाप्त होगा.

चांद देखना जरूरी क्‍यों है (Kab niklega chaand):
इस व्रत के दिन चंद्रमा का उदय शाम आठ बजकर चौदह मिनट पर होगा. इस दिन महिलाएं चंद्रमा को देखे पानी ग्रहण करती हैं. चाँद निकलने के बाद होने के बाद औरतें चाँद को छलनी से  देखती हैं फिर अपने पति का दीदार भी छलनी से ही करती हैं. इसके बाद पति अपनी पत्नियों को पानी पिलाकर उनका व्रत पूरा करते हैं. चाँद को देखे बिना यह व्रत अधूरा माना जाता है.

करवा चौथ करने की विधि :
Karwa chauth का व्रत केवल शादी-शुदा महिलाओं के लिये ही होता है. महिलाएं अपने सास या फिर माँ से करवा चौथ करने की विधि सीखती हैं. लेकिन अगर आप अपने घर से दूर रहती हैं और यह व्रत करना चाहती हैं, इसकी विधि जाननी चाहती हैं तो हम आपको इस व्रत की विधि विस्तार से बताएंगे तो चलिए जानते हैं क्या है करवा चौथ व्रत की सही विधि.

  • सरगी करने के बाद करवा चौथ का निर्जला व्रत शुरु होता है. व्रत के दिन माता पार्वती, महादेव और गणेश जी का ध्‍यान मन में करती रहें.
  • गेरू और पिसे चावलों के घोल से दिवार पर करवा का चित्र बनाएं. चित्र बनाने की इस कला को करवा धरना कहा जाता है जो कि पुरानी परंपरा है.
  • लकड़ी के सिंहासन पर माता पार्वती को स्थापित करें. और उन्हें लाल रंग की चुनरी पहना कर  सुहाग, श्रृंगार की  सामग्री अर्पित करें और माँ कि स्थापित मूर्ति के आगे जल से भरा कलश रखें.
  • व्रत के दिन माँ गौरी और गणेश के स्‍वरूपों की पूजा करें.

करवा चौथ के दिन इस मंत्र का जाप करें:
नमः शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभाम्‌
प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे.

अधिकतर महिलाएं अपने परिवार में प्रचलित प्रथा के अनुसार पूजा करती हैं. हर क्षेत्र  में अपने रिवाज के हिसाब से पूजा करने का विधान है. इसलिये कथा में भी अंतर पाया जाता है.
व्रत के दिन करवा चौथ की कथा कहनी सुननी चाहिए कथा के बाद आपको अपने घर के सभी वरिष्‍ठ लोगों का चरण स्‍पर्श करना चाहिये.
रात के समय छननी के प्रयोग से चाँद का दर्शन करें फिर पति के पैरों को छूकर उनका आर्शिवाद लें बाद में पति को प्रसाद दे कर बाद में खुद भी प्रसाद ग्रहण करें.

सभी दम्पत्तियों को करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनायें!!

मां सिद्धिदात्री के पूजन से समाप्त होता है नवरात्र

नवरात्र महापर्व के नौवें दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा और उपासना की जाती है. मां सिद्धिदात्री अपने भक्तों को सभी प्रकार की सिद्धियां प्रदान करती हैं.

दशहरा पर भगवान राम और मां दुर्गा से लें सीख

मां सिद्धिदात्री

ऐसा माना जाता है कि मां सिद्धिदात्री की पूजा पूरे विधि-विधान के साथ करने वाले मनुष्यों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
मां के चार हाथ हैं और मां सिद्धिदात्री कमल के पुष्प पर विराजमान हैं.
मां के दाहिंनी हाथ में चक्र है ऊपर वाले हाथ में गदा है. दूसरे हाथ में कमल का फूल और शंख है. प्राचीन पुराणों में शास्त्रों में अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, और वशित्व नामक आठ सिद्धियां बताई गई हैं.
भक्तों को ये आठों सिद्धियां मां सिद्धिदात्री की पूजा और उपासना करने से मिल सकती है.
हनुमान चालीसा में भी इन्हीं आठ सिद्धियों का उल्लेख है कि ‘अष्टसिद्धि नव निधि के दाता, अस वर दीन्ह जानकी माता’ यहां ऊपर दिए गए आठों सिद्धियों की बात की गयी है.
शास्त्रों के अनुसार स्वयं भगवान शंकर ने भी मां सिद्धिदात्री देवी की कठोर तपस्या कर मां से ये आठ सिद्धियां प्राप्त की थीं.
मां की कृपा से ही खुद सिद्धिदात्री महादेव की आधी देह हो गयीं और भोलेनाथ अर्द्धनारीश्वर कहलाए.
नौवें दिन इनकी पूजा के बाद ही नवरात्र का समापन माना जाता है.
इस दिन ही हिंदू परिवारों में कन्याओं का पूजन किया जाता है.

मां सिद्धदाद्धत्री स्तुति मंत्र:
सिद्धगन्‍धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि,
सेव्यमाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी

देवी का बीज मंत्र:
ऊॅं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे नमो नमः
ऊपर दिए गए श्लोक के अलावा भी मां सिद्धिदात्री की पूजा में दुर्गा सप्तशती के सभी श्लोकों का प्रयोग किया जा सकता है.

कन्या पूजन :
नवरात्र के नवें दिन नौ कन्याओं को घर में भोजन कराना चाहिए. नव-देवियों में मां सिद्धिदात्री आखिरी हैं. मां की पूजा से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है.
जिन कन्याओं को आप कन्या भोज करा रहे हैं उन कन्याओं की आयु दो वर्ष से ऊपर और 10 वर्ष तक होनी चाहिए.
यदि 9 से ज्यादा कन्या आपके घर भोजन करने आ रही हैं तो इसमें कोई परेशानी नहीं है.

सातवें दिन करें माँ कालरात्रि की उपासना

नवरात्र महापर्व में सातवां दिन मां कालरात्रि का होता है. मां कालरात्रि को विनाश और संहार की देवी माना जाता है. लेकिन मां अपने भक्तो को हमेशा शुभ फल देती है.

नवरात्र के छठे दिन करें माँ कात्यायनी की उपासना

मां कालरात्रि की कथा :
मां कालरात्रि

मां कालरात्रि ने हाहाकारी दुष्ट असुर रक्तबीज के संहार के लिए अपने तेज से मां काली को उत्पन्न किया था.
माँ का रंग काला होने के कारण इनका नाम मां कालरात्रि पड़ा. दुष्ट दानवों शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज ने तीनो लोको में हाहाकार मचा दिया था.
असुरो की अति से तंग आकर देवगण भगवान शंकर के पास गए उन्होनें मां पार्वती से असुरों का संहार करने को कहा.
मां पार्वती ने भगवती दुर्गा रूप धारण कर शुम्भ और निशुम्भ से युद्ध कर उन्हें पराजित किया और मौत के घाट उतार दिया लेकिन जैसे ही माँ ने रक्त बीज का वध करने की कोशिश की तभी उसके रक्त से लाखो असुर पैदा हो गये.
इस तरह माँ जब परेशान हुई तो उन्होंने मां काली को उत्पन्न किया.
जब मां दुर्गा ने रक्तबीज का संहार किया तो माँ काली ने रक्तबीज का सारा रक्त पी लिया और इस तरह दुष्ट दानवों का दलन हुआ.
शास्त्रों के अनुसार सप्तमी की रात सिद्धियों की रात होती है. मां भगवती का यह रूप ऋद्धि-सिद्धि प्रदान करने वाला है.
मां की कृपा से हर बाधा दूर हो जाती है.
माता की कृपा पाने के लिए उन्हें गुड़ का भोग लगाया जाता है ऐसा माना जाता है कि गुड़ मां कालरात्रि को प्रिय हैं.

सप्तमी को करे इस मंत्र का जाप:
श्लोकः या देवी सर्वभूतेषु कालरात्रि रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

शास्त्रों में माँ कालरात्रि को त्रिनेत्री भी कहा गया है इनके तीन नेत्र ब्रह्माण्ड की तरह विशाल हैं.
जिनसे बिजली की तरह किरणें निकलती हैं. माँ के खुले बाल बिखरे हुए रहते हैं
इनकी नासिका से श्वास और भयंकर ज्वालाएं निकलती हैं.
माँ कालरात्रि को शास्त्रों में चतुर्भुजी कहा गया है.
इनकी चार भुजाएं हैं दायीं ओर की ऊपरी भुजा से महामाया भक्तों को वरदान दे रही हैं और नीचे की भुजा से अभय का आशीर्वाद देती हैं.
देवी कालरात्रि की सवारी गर्दभ (गधे) है, माँ उसपर विराजमान रहती हैं.

शुभ मुहूर्त में करें कलश स्थापना

कलश स्थापना!!! इस बार शारदीय नवरात्र 21 सितंबर से शुरू हो रहे हैं. इस महापर्व को शारदीय नवरात्र इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह अश्विन माह में पड़ता है.

प्रथम दिन करें माँ शैलपुत्री की आराधना

नवरात्र के दूसरे दिन करें ब्रम्हचारिणी माँ की आराधना

नवरात्रों में सबसे मुख्य काम जो माना जाता है वो है माता की चौकी लगाना और कलश स्थापना. इस शारदीय नवरात्र कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 3 मिनट से 8 बजकर 22 मिनट तक रहेगा.

कलश स्थापना

नवरात्रि के इस महापर्व के दौरान दुर्गा माँ के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है. व्रत  के पहले दिन घटस्थापना की जाती है.

इसके बाद भक्त नौ दिनों तक दुर्गा माँ की पूजा अर्चना करते हैं इसके बाद व्रत के अष्टमी और नवमी में कन्या पूजन होता है.

कलश स्थापना कैसे करें:
21 सितंबर को सुबह माँ शैलपुत्री की पूजा की जाती है. पहला दिन माँ शैलपुत्री को अर्पित किया जाता है.
सुबह कलश की स्थापना की जाती है.
कलश के ऊपर स्वास्तिक का चिन्ह बनाया जाता है किसी भी शुभ कार्य में स्वस्तिक का चिन्ह शुभ माना जाता है.
कलश में जल डालकर आम के पत्तों से उसे सजाते हैं. मौली से उसे बांधते है.
जल में बिना टूटे चावल (अक्षत) डालकर उसके ऊपर नारियल रखते है.

माता की चौकी स्थापना के लिए एक चौकी रखकर उसपर लाल रंग का कपड़ा बिछा दें. लाल रंग शुभ माना जाता है, फिर उस पर माता की मूर्ति स्थापित करें मूर्ति पर फूल और फूलों की माला इत्यादि चढ़ाएं.
कलश की स्थापना करते वक्त ध्यान रखें कि कलश माँ के मूर्ति कि दायी तरफ रखें.

माँ के नौ रूपों के नाम:
माँ के नौ रूपों के नाम
पहली शैलपुत्री कहलावें (Shailputri Mata)
दूसरी ब्रह्मचारिणी मन भावे (Brahmacharini Mata)
तीसरी चंद्रघण्टा शुभनाम (Chandrghanta Mata)
चौथी कुष्मांडा सुखधाम (Kushmanda Mata)
पांचवी देवी स्कन्दा माता (Skanda Mata)
छठी कात्यायनी विख्याता (katyayani Mata)
सातवीं कालरात्रि महामाया (Kaalratri Mata)
आठवीं महागौरी जगजाया (Mahagauri Mata)
नौवीं सिद्धिदात्री जग जाने (Siddhidatri Mata)
नव दुर्गा के नाम बखाने 

अखंड ज्योत का महत्व:
कलश स्थापना

दोस्तों अखंड ज्योत यानी लगातार जलने वाला दीपक, बिना लौ बाधित हुए जलने वाला दीपक. नवरात्रों में अखंड ज्योत का विशेष महत्व होता है.
इसे जलाने से घर में माँ जगत जननी जगदम्बिका की कृपा बनी रहती है. अखंड ज्योत का संकल्प लेने से पहले उसके विषय में कुछ नियम होते हैं और आपको इन नियमों का पालन करना ही होता हैं.
हिन्दू परंम्परा के अनुसार जिस घर में अखंड ज्योत जलती हैं उस घर के लोगों को जमीन पर सोना पड़ता हैं.
यूँ तो भगवान को याद करने के लिए हर समय उचित हैं, लेकिन मुहूर्त पर पूजन-हवन का अपना एक विशेष महत्व होता हैं कोशिश करें कि इस बार माँ की मूर्ति स्थापना और कलश स्थापना एक साथ ही करें.

Happy Navratri to All Readers!!

नवरात्र के दूसरे दिन करें ब्रह्मचारिणी माँ की आराधना

ब्रह्मचारिणी !!! माँ दुर्गा के दूसरे स्वरुप यानी की ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा करने से मनुष्य को ज्ञान के साथ वैराग्य की भी प्राप्ति होती है. शास्‍त्रों में मां एक हर रूप की पूजा विधि और कथा का महत्‍व बताया गया है. मां आपके कठिन समय में आपको सम्बल प्रदान करती है. तो आइए जाने माँ के इस रूप के बारे में.

तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा को ऐसे करे प्रसन्न, पूजा विधि, मंत्र

ब्रह्मचारिणी  मां का मंत्र:
ब्रह्मचारिणी

माँ ब्रह्मचारिणी पूजा मंत्र:
“दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा.”

माँ के नाम का अर्थ बहुत ही सीधा है ब्रह्मचारिणी का अर्थ तप की चारिणी यानी तप का आचरण करने वाली. माँ का यह रूप साहस और दृढ़ संकल्प के लिए माना जाता है. मां इस रूप में दाएं हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमण्डल धारण कर भक्तों को वरदान देती हैं .

मां ब्रह्मचारिणी की कथा:
माँ शैलपुत्री ने जब राजा हिमवान के घर जन्म लीं तो एक दिन महर्षि ने पार्वती को उनके पूर्व जन्म की कथा कह सुनाई.ऋषि नारद जी की बातों ने पार्वती जी के मन में शंकर जी के प्रति प्रेम भाव भर दिया. माँ पार्वती ने प्रभु शंकर को पति रूप में पाने के लिए घोर तपस्या की. इस कठिन और अडिग तपस्या के चलते ही इन्हें ब्रह्मचारिणी नाम से जाना गया. माँ ने हज़ारों वर्ष फल-फूल खाकर अपना जीवन बिताया.

कई दिन तक कठिन उपवास रखे. माँ ने खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप जैसे तमाम मुश्किल कष्ट सहे. माँ पत्तों को खाकर अपना जीवन बिताती. एक दिन माँ ने पत्तों को भी खाना छोड़ दिया इस कारण माँ का नाम अपर्णा पड़ा.
इस अडिग तपस्या के कारण माँ ब्रह्मचारिणी का शरीर क्षीण हो गया. देवता, ऋषि-मुनि अन्य सभी लोगो ने ब्रह्मचारिणी माँ की तपस्या को अभूतपूर्व कृत्य माना और माँ के इस कृत्य की सराहना की और कहा- देवी किसी ने ऐसी कठोर तपस्या नहीं की है. ये आपके द्वारा ही संभव था. आपकी मनोकामना पूरी होगी और भगवान शिव आपको पति रूप में मिलेंगे.
उन्होंने माँ पार्वती से तपस्या छोड़ घर लौट जाने को कहा और कहा आपके पिता आपको लेने आ रहे हैं. मां ब्रह्मचारिणी ने तमाम दुखों को सहा लेकिन वह अडिग रही एक पल के लिए भी विचलित नहीं हुई. और आखिरकार उन्हें स्वयं महादेव पति के रूप में मिले. जीवन में कठिन संघर्षों में विचलित नहीं होना चाहिए. मां की कृपा से सभी सिद्धि प्राप्त होती है.

प्रथम दिन करें माँ शैलपुत्री की आराधना

माँ दुर्गा के नौ रूप होते हैं. माता दुर्गा का पहला स्वरूप शैलपुत्री के नाम से जाना जाता है. ये माँ के नौ स्वरूपों में उनका पहला स्वरुप है.पर्वत के राजा हिमालय के घर माँ ने पुत्री के रूप में जन्म लिया इसी कारण माँ का नाम शैलपुत्री पड़ा.
नवरात्र के पहले दिन माँ शैलपुत्री की पूजा और उपासना की जाती है.

नवरात्र के दूसरे दिन करें ब्रह्मचारिणी माँ की आराधना

मां शैलपुत्री – व्रत कथा( shailputri vrat katha):
शैलपुत्री

महाराज प्रजापति दक्ष ने बहुत बड़ा यज्ञ करवाया इस यज्ञ में दक्ष ने सारे देवताओं को निमंत्रित किया, लेकिन शंकर जी से विशेष ईष्या होने के कारण दक्षराज ने उन्हें इस यज्ञ में आने के लिए निमंत्रित नहीं किया. जब माता सती को यह बात पता चली कि उनके पिता विशाल यज्ञ का अनुष्ठान कर रहे हैं, तब माँ सती वहाँ जाने के लिए विचार करने लगी. माँ ने अपनी मंशा भोलेबाबा को बताई कुछ सोचने के बाद शंकर जी ने कहा किसी कारणवश प्रजापति दक्ष ने हमे यज्ञ में नहीं बुलाया है.

यज्ञ में उन्होंने सारे देवताओं को निमंत्रित किया है. देवों के यज्ञ-भाग भी उन्हें समर्पित किए हैं, लेकिन हमे जान-बूझकर न्योता नहीं दिया. यज्ञ से सम्बंधित कोई सूचना भी नहीं भेजी है. ऐसे में तुम्हारा यज्ञ में बिन बुलाये जाना किसी तरीके से सही नहीं होगा. लाख समझने के बाद भी माता पारवती नहीं मणि शंकर जी ने उनका मन रखने के लिए उन्हें जाने की आज्ञा दे दी.

सती ने पिता के घर महसूस किया कि कोई भी उनसे आदर और प्रेम से बातचीत नहीं कर रहा है. सिर्फ माँ ने ही उन्हें स्नेह से उन्हें गले लगाया. बहने सीधे मुँह सती से बात भी नहीं कर रही थी.
सती ने महसूस किया कि वहाँ भगवान शंकरजी के प्रति तिरस्कार का भाव भरा हुआ है.महाराज दक्ष ने भगवान् शंकर के प्रति अपमानजनक वचन भी कहे. पति का अपमान देखकर उनका मन क्षोभ, ग्लानि और क्रोध से भर उठा वह अपने पति के अपमान को ना सह सकीं.

उन्होंनेअपने शरीर को यज्ञ वेदी में जलाकर भस्म कर दिया. शंकरजी ने क्रोधित होकर अपने गणों को भेज दक्ष का यज्ञ विधांश कर दिया.
माँ का जन्म हिमालय राज के घर हुआ इसलिए माँ ‘शैलपुत्री’ नाम से विख्यात हुर्ईं. पार्वती, हैमवती भी माँ के ही नाम हैं.

शैलपुत्री की पूजा विधि(Puja vidhi):
मां की तस्वीर को स्थापित करें और उसके नीचें चौकी पर लाल वस्त्र बिछायें. अक्षत का ढेर बनाकर उस पर कलश रख दें. फिर हाथ में लाल पुष्प लेकर माता शैलपुत्री का ध्यान करें.

ध्यान मंत्र इस प्रकार है:
ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे ओम् शैलपुत्री देव्यै नम:
इस मंत्र का जाप 108 बात करें.
मंत्र की संख्या पूरी हो जाने पर मां से अपनी मनोकामना व्यक्त करें.

माँ का स्रोत पाठ:
प्रथम दुर्गा त्वंहि भवसागर: तारणीम्
धन ऐश्वर्य दायिनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यम्
त्रिलोजननी त्वंहि परमानंद प्रदीयमान्
सौभाग्यरोग्य दायनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यहम्
चराचरेश्वरी त्वंहि महामोह: विनाशिन
मुक्ति भुक्ति दायनीं शैलपुत्री प्रमनाम्यहम्.