नाहरगढ़ किला : दिलदहलाने वाला रहस्य और खूबसूरती का मिश्रण

नाहरगढ़ किला, राजस्थान का नाहरगढ़ किला वैसे तो राजस्थान का एक मशहूर पर्यटक स्थल है। ये किला गुलाबी नगरी जयपुर की खूबसूरती में चार चाँद लगाता है। अपनी सुंदरता और ऐतिहासिकता के लिए प्रसिद्ध ये किला सुर्खियों में आया है। संजय लीला भंसाली की फिल्म “पद्मावती” के विरोध के चलते शुक्रवार (24 नवंबर 2015 ) को नाहरगढ़ के किले पर एक शव लटका पाया गया जिससे ये किला सुर्खियों में आ गया।

राजस्थान का नाहरगढ़ किला कई मायनो में अलग और दिलचस्प है।लेकिन कैसे? ये हम आपको बतायगे। चलिए फिर जानते है

नाहरगढ़ किला:

  •  पीले रंग का नारहगढ़ किला गुलाबी नगरी जयपुर के उत्तर—पश्चिम में अरावली के पहाड़ो पर बसा है।
  • आप को शायद ही पता होगा की इस किले को आप शहर के हर कोने से देख सकते है।
  • बारिश के समय में यहां से जयपुर का नजारा किसी हिल स्टेशन से कम नहीं होता है।

किले का इतिहास:

नाहरगढ किले तक पहुंचने के लिए एक या दो नहीं, तीन रास्ते है।
नाहरगढ किले तक पहुंचने के लिए एक या दो नहीं, तीन रास्ते है।

इस किले का इतिहास दिलचस्प है इसके नामकरण की कहानी भी कुछ कम रोचक नहीं है।

नामकरण के पीछे की कहानी:

  1. नाहरगढ़ किले का नाम पहले सुदर्शन किला रखा गया था।
  2. इसी जगह द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने देवराज इंद्र के बेटे सुदर्शन को श्राप से मुक्त किया था।
  3. उसके बाद से इस जगह का नाम अम्बिका वन से सुदर्शन खोल हो गया।
  4. 1734 में महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने सुदर्शन खोल में पहाड़ी पर किले का निर्माण शुरू किया और इसका नाम सुदर्शन किला रखने का फैसला किया।
  5. जहां किला बन रह था वहां नाहरसिंह नामक भोमियां जी का वास था।
  6. वो किले को बनने नहीं दे रहा थे। दिन में किले का निर्माण होता और रात में वो धाराशाही हो जाता था।
  7. तंत्र द्वारा नाहरसिंह भौमियां जी को यहां किले के निर्माण के लिए मनाया और उनका स्थान दूसरी जगह बनवाया गया।
  8. तब कही जाकर किले का निर्माण हो सका। बाद में इस किले का नाम नाहरसिंह जी के नाम पर नाहरगढ़ रखा गया।

नाहरगढ़ किले में रानियों के लिए 9 महल:

नाहरगढ़ किला
Bavdi Of Nahargarh Fort

इस किले में की मुख्य इमारत को माघवेन्द्र महल के नाम से जाना जाता है।रानियों के लिए नौ महल बनाए गए है। इन महलो के नाम कुछ इस तरह है।

  1. रज प्रकाश महल,
  2. चंद्र प्रकाश महल,
  3. आनन्द प्रकाश महल,
  4. जवाहर प्रकाश महल,
  5. लक्ष्मी प्रकाश महल,
  6. रत्न प्रकाश महल,
  7. ललित प्रकाश महल,
  8. बसंत प्रकाश महल और
  9. खुशाल प्रकाश महल
  • माघवेन्द्र महल के सामने एक बावड़ी भी है।
  • ये बावड़ी देखने में अलग है क्योंकी बावड़ी के तीन तरफ की सीढ़ियां लहरदार आकृति में बनी हुई है।

किले तक पहुंचने के तीन रास्ते:

  • नाहरगढ किले तक पहुंचने के लिए एक या दो नहीं, तीन रास्ते है।
  • पहला रास्ता पुरानी बस्ती से होकर जाता है। पुराने समय में जयपुर से इस किले तक आने—जाने के लिए इसी रास्ते का उपयोग होता था। अब यह रास्ता नाहरगढ़ रोड के नाम से फेमस है
  • दूसरा रास्ता आमेर रोड पर कनक घाटी से है। इस रास्ते का उपयोग आने-जाने के लिए होता है। छोटे—बड़े वाहनों यहां से गुज़रते है। आमेर रोड से नाहरगढ किले करीब नौ किलोमीटर दूर है।।
  • तीसरा रास्ता आमेर से है।इस रास्ते से आप पैदल आ—जा सकते है। लेकिन यहाँ यहां वाइल्ड लाइफ के चलते ये रास्ता काफी खतरनाक है।

क्रिकेटर ज़हीरऔर एक्ट्रेस सागरिका चोरी- चुपके बंधे शादी के बंधन में

ज़हीर और सागरिका, भारतीय क्रिकेट टीम के हॉट बैचलर्स में से एक ज़ाहिर खान कल (23 नोवेम्बर 2017 )एक्ट्रेस सागरिका  के साथ शादी के बंधन में बंध गए। हो गए न आप भी ये खबर सुनकर, लेकिन ये सच है अपनी फीमेल फैंस का दिल तोड़ते हुए टीम इंडिया का ये बॉलर ने चोरी-चुपकेअपनी प्रेमिका एक्ट्रेस सागरिका घाटके से कोर्ट मैरिज कर ली।

ज़हीर और सागरिका:

Beautiful Couple
Cricketer Zaheer Khan and Sagarika

ज़हीर खान इंडियन क्रिकेट टीम के एक फ़ास्ट बॉलर है। ज़हीर को दोनों तरीके से गेंद को स्विंग करने की वजह से जाना जाता है। टीम इंडिया के Hot and Handsome  ज़हीर खान की इसी अदा पर सब फ़िदा है। वही सागरिका बॉलीवुड की एक खूबसूरत एक्ट्रेस है। आपको शाहरुख़ खान की हिट फिल्म “चक दे इंडिया” तो याद ही होगी तो उसमे सागरिका अहम किरदार में नज़र आयी थी।

ज़हीर और सागरिका की कॉकटेल पार्टी:

ज़हीर और सागरिका की कॉकटेल पार्टी
ज़हीर और सागरिका की कॉकटेल पार्टी

दोनों ने शादी तो दुनिया की नज़रो से बचा कर, कर ली ,लेकिन उसके बाद दोनों ने अपने दोस्तों और खास लोगो के लिए गुरुवार की शाम कॉकटेल पार्टी का आयोजन किया। मुंबई के एक पांच सितारा होटल में कॉकटेल पार्टी रखी गई। ज़हीर खान ब्लैक ब्लेजर में हैंडसम लग रहे थे। वहीं सागरिका घाटगे हल्के पिंक शेड की साड़ी में काफी खूबसूरत पहन लग रही थी।

शादी में पहुंचे ये सितारे:

सागरिका के साथ “चक दे इंडिया” में काम कर चुकी विद्या मालवडे शादी के कामो में काफी सक्रिय रहीं। पार्टी में यह दोनों खासतौर से मौजूद रहीं। टीम इंडिया के पूर्व बॉलरऔर ज़हीर के अच्छे दोस्त आशीष नेहरा भी अपनी पत्नी के साथ दोनों की शादी में पहुंचे थे।

रिसेप्शन पार्टी:

नए वैवाहिक जोड़े का मेंहदी फंक्शन रविवार को पूरा किया जाएगा। इसके बाद सोमवार 27 नवंबर को मुंबई के ताज महल पैलेस होटल में एक गाला रिसेप्‍शन का आयोजन किया जा रहा है। रिसेप्शन पार्टी में क्रिकेट से लेकर बॉलीवुड जगत तक के मशहूर हस्तियों के आने की उम्मीद है।

मिस वर्ल्ड का ख़िताब जीतने वाले पर होती है पैसो की बरसात

मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता हर साल लड़कियों के लिए आयोजित की जाती है। यह एक International World Competition है। मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में दुनिया भर की खूबसूरत हसीनायें भाग लेती है और उन्ही में से मिस वर्ल्ड को चुना जाता है। इस साल ये खिताब पर भारत की मानुषी छिल्लर ने अपने नाम दर्ज़ किया है।

इससे पहले भारत को यह खिताब 17 साल पहले साल यानी 2000 में बॉलीवुड ब्यूटी प्रियंका चोपड़ा ने दिलाया था। हर साल दुनियाभर के देशों की लड़कियां इस ख़िताब को पाने के लिए कड़ी मेहनत करती हैं। यह एक ऐसा खिताब है जो हर देश के लिए जीतना बहुत मायने रखता है।

मिस वर्ल्ड 2017
Miss World 2017

मिस वर्ल्ड का ताज पहनने का मतलब है कि उस साल की सबसे खूबसूरत महिला होने का सम्मान प्राप्त होना। साथ ही इस ताज को अपने नाम करने के वाली महिला की किस्मत कुछ ही मिनटों में बदल जाती है। या फिर आप कह सकते है कि मिस वर्ल्ड बनते ही उनकी जिंदगी का एक नया अध्याय शुरू हो जाता है, पर अब आप सोच रहे होंगे की कैसे?

तो आइए, आज हम आपको बताते हैं कि मिस वर्ल्ड बनने वाली महिला पर कैसे होती है इनामो की बरसात।

  1. मिस वर्ल्ड ताज:

मिस वर्ल्ड मानुषी छिल्लर
Miss World 2017 Manushi Chillar
  • मिस वर्ल्ड की सबसे खास चीज होती है उसका ताज। जी हां, यह ताज बहुत बेशकीमती होता है। ताज में जड़े हीरे और रत्न काफी बहुमूल्य होते हैं। मीडिया खबरों के अनुसार तो इस ताज की कीमत 2 करोड़ से 5 करोड़ के बीच होती है।

2.कैश प्राइज

  • इस ताज के अलावा मिस वर्ल्ड को कैश प्राइज भी दिया जाता है। यह कैश प्राइज करीब 10 करोड़ के आसपास होता है।
  • ताज और कैश प्राइज के साथ ही ख़िताब जीतने वाली महिला को ट्रेवल अलाउंस भी मिलता है। जिसमें वह सालभर के लिए दुनिया में कहीं भी घूम सकती हैं।
  • इसके लिए उन्हें किसी भी वाहन पर सफर करने के लिए खर्च नहीं करना पड़ता।
  • प्रतियोगिता का ख़िताब जीतने के बाद बड़े-बड़े ब्रांड उसे स्पोंसर करते हैं।
  • इन प्रॉडक्ट को इस्तेमाल करने के लिए भी उन्हें कोई खर्च नहीं करना पड़ता।
  • इसके साथ ही बाद में उन्हें एड फिल्म के ऑफर आने भी शुरू हो जाते हैं।

3. भारत से किस-किस ने ख़िताब जीतने:

Indian Miss World
Indian Miss World
  • इस साल भारत से मिस वर्ल्ड बनीं मानुषी छिल्लर है लेकिन इसे पहले भारत की रीता फारिया (1966), ऐश्वर्य राय (1994), डायना हेडन (1997), युक्ता मुखी (1999) और प्रियंका चोपड़ा (2000) ने इस खिताब को अपने नाम कर चुकी है।
  • इन सभी में ऐश्वर्या और प्रियंका दो ऐसे नाम हैं। जो बॉलीवुड में सबके के लिए आज भी मिसाल बनी हुई हैं। वैसे तो रीता फारिया को छोड़ डायना हेडन और युक्ता मुखी भी बॉलीवुड की फिल्मो में नजर आ चुकी हैं।
  • अब बारी मानुषी छिल्लर की है। मानुषी की मानें तो अगर उन्हें अच्छा अवसर मिला तो वह बॉलीवुड में आने के लिए तैयार हैं।

तो अब इंतज़ार है कि मानुषी बॉलीवुड में कब एंट्री करती हैं.और साथ ही किस तरह इन पर पैसो की बरसात होती है

कौन है भारत का No.1 दुश्मन हाफिज सईद, जाने

हाफिज सईद, ये आंतक की दुनिया का ऐसा नाम है जिसने अपने आंतक से लोगो में खौफ पैदा किया है। अगर इससे हम आंतक की दुनिया का मास्टरमाइंड भी कहे तो गलत नहीं होगा। इस आतंकवादी ने जब भी अपना मुँह खोला है तो भारत के लिए ज़हर ही उगला है। भारत को अपना No.1 दुश्मन मानने वाला ये आंतकवादी पाकिस्तान का मसीहा है।

आज हम आपको आंतकी हाफिज सईद के बारे में बताएंगे की किस तरह ये जुर्म की दुनिया का बादशाह बना।

चलिए जानते है हाफिज सईद के बारे में

कौन है हाफिज सईद:

हाफिज सईद का पूरा नाम हाफिज मोहम्मद सईद है
हाफिज सईद
  • हाफिज सईद का पूरा नाम हाफिज मोहम्मद सईद है।
  • सईद का जन्म 10 मार्च 1950 को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के सरगोधा में हुआ था।
  • हाफिज सईद के अनुसार भारत-पाक विभाजन के बाद उसका परिवार पाकिस्तान के सरगोधा में बस गया था वह उनके पिता को रहने के लिए एक मिट्टी की बनी झोपड़ी दी थी।
  • उसके बाद में उनके परिवार को सरगोधा के पास ही स्थित एक गांव में 15 एकड़ जमीन दी। जहां से उनके परिवार के जीवन की दूसरी शुरुआत हुई।
  • आपको पता है की हाफिज सईद अरबी और इंजीनियरिंग का पूर्व प्राध्यापक भी रह चुका है।
  • हाफिज मोहम्मद सईद धर्मार्थ काम करने वाली संस्था जमात-उद-दावा का प्रमुख है।
  • कहने को तो ये एक चरमपंथी इस्लामी संगठन है जिसका उद्देश्य भारत के कुछ हिस्सों में और पाकिस्तान में इस्लामी हुकूमत को स्थापित करना है।
  • हाफिज ने इस संगठन को तब बनाया था जब पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा को बैन कर दिया गया था।

आंतक में हाफिज सईद की भूमिका:

  • भारत में 2003, 2005 और 2008 में हुए आतंकी हमलों के लिए भारत सरकार आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा को जिम्मेदारी मानती है।
  • 13 दिसंबर 2001 को भारतीय संसद पर हुए हमले की कड़ी भी इसीआंतकी गुट से जुड़ती है।
  • 2008 में मुंबई आंतकी हमले का मास्टरमाइंड भी हाफिज सईद था।
  • मुंबई की ट्रेनों में 11 जुलाई 2006 को हुए धमाकों में भी इसका हाथ था।

अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था द्वारा लिया गया कदम:

  • मुंबई आतंकी हमलों के तुरंत बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने दिसंबर 2008 में जमात-उत-दावा को आतंकी संगठन घोषित किया था।
  • हाफिज सईद पर अमेरिका ने एक करोड़ डॉलर का इनाम घोषित कर रखा है।
  • अमेरिका ने अप्रैल 2012 में आतंकवाद फ़ैलाने के लिए जिम्मेदार लोगों की लिस्ट जारी की थी। इस लिस्ट में हाफिज सईद नंबर दो पर था।
  • सईद के खिलाफ भारत ने इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया हुआ है।

आज हमने आपको बताया खतरनाक आंतकी हाफिज सईद के बारे में जो अभी तक बैखौफ और आज़ाद पाकिस्तान में घूम रहा है।

बर्थडे स्पेशल: आनंदीबेन के जन्मदिन पर जाने उनसे जुडी दिलचस्प बातें

आनंदीबेन जेठाभाई पटेल का जन्म (21 नवंबर 1 9 41) मेहसाणा जिले के विजापुर तालुका के खरोद गांव में हुआ था। एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं जो सबसे लंबे समय तक कार्यरत महिला विधायक हैं।आनंदीबेन गुजरात की एकमात्र महिला विधायक हैं जो लगातार 4 बार चुने गई हैं। उनके कठिन परिश्रम, साहस, ईमानदारी और धीरज उन्हें शीर्ष पर ले गया। आनंदीबेन के जन्मदिन के सम्मान में, हम आपके लिए इस बहादुर और साहसी महिला के बारे में 5 तथ्यों लेकर आए हैं जो गुजरात की पहली महिला मुख्यमंत्री बनी।

आईये,एक नज़र डालते है।

आनंदीबेन पटेल से जुडी Amazing बातें:

आनंदीबेन एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं
आनंदीबेन एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं

1. आनंदीबेन ने 700 लड़कों के बीच एक लड़की के रूप में अपनी शिक्षा की।

उनको लड़कों के स्कूल में भर्ती कराया गया था क्योंकि इस क्षेत्र में कोई दूसरा स्कूल नहीं था। यह बहुत ही चौंकाने वाला है कि आनंदीबेन ने 700 लड़कों के बीच सिर्फ एक लड़की होने के बाद भी अपनी पढाई की।

इसके बाद उन्हें 8 वीं कक्षा में विसनगर में स्कूल न्यूटन सर्व विद्यालय में एक गर्ल्स में शिफ्ट कर दिया गया था और आनंदीबेन को एथलेटिक्स में उनकी उपलब्धियों के लिए मेहसाणा में “वीरबाला” पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

2. वह पढ़ाई के बारे में बेहद भावुक थी और अपने कॉलेज में बैचलर ऑफ साइंस पढ़ने वाली एकमात्र लड़की थी।

1960 में आनंदीबेन ने कॉलेज में शामिल हुए और अपने कॉलेज में वो फर्स्ट ईयर की विज्ञान की एकमात्र लड़की थी।

3. शादी के बाद आनंदीबेन ने अपनी पढ़ाई को जारी रखी

1 9 65 में वह अपने पति के साथ अहमदाबाद रहने लगी। जहां उन्होंने मास्टर ऑफ साइंस में प्रवेश किया। बाद में उन्होंने 1970 में मोहनिबा स्कूल विद्यालय में एक स्कूल शिक्षिका के रूप में 30 साल तक बच्चो को पढ़ाया।

4. राजनीति की दुनिया में उनका आना काफी नाटकीय था।

आनंदीबेन ने अपने स्कूल के ट्रिप के दौरान 2 लड़कियों को डूबने से बचा लिया। वह भाजपा के ध्यान में तब आई जब वो दो छात्रों को बचाने के लिए, जो नदी के पानी में कूद गई थी।

पर वह तब शामिल नहीं हुईं क्योंकि आनंदिबेन पहली बार राजनीतिक में आने के बारे में संकोच करती थी। लेकिन बाद में यह देखकर कि राजनीति लोगों के लिए एक माध्यम बन सकती हैआनंदिबेन इसमें शामिल हो गई।

5. आनंदीबेन पटेल गुजरात की पहली महिला मुख्यमंत्री बने।

आनंदीबेन के काम के प्रति से प्रभावित हक्लार उन्हें इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी गई थी।

हमारी उन्हें उनके जन्मदिन पर ढेर सारी शुभकामनांए !

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस (ICJ) में भारत का परचम

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस, न्याय की जरुरत पूरी दुनिया को होती है। इसलिए हर इंसान को न्याय दिलाने और उस तक न्याय को पहुंचने के लिए हर देश की अपनी न्याय व्यवस्था होती है। हर देश का अपना न्यायालय होता है जो लोगो की समस्या का समाधान करता है और जरूरत पड़ने पर जनहित याचिका पर भी सुनवाई करता है।

न्याय की आस सिर्फ लोगो को ही नहीं होती कई बार दो देशो के बीच कुछ मुद्दे इतने संवेदनशील होते है जिनके समाधान वो खुद नहीं कर पाते है। ऐसे में इन समस्या के समाधान के लिए इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस (ICJ) की स्थापना की गई है आज हम आपको बताते है ICJ के बारे में।

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस (ICJ):

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस
International Court Of Justice

आपको पता है की संयुक्त राष्ट्र का मुख्य न्यायिकअंग अंतरराष्‍ट्रीय न्यायालय है और यह संयुक्त राष्ट्र के छह मुख्य भागो में से एक है। ICJ की स्थापना 26 जून 1945 को सैन फ्रांसिस्को में हुई थी। इसका मुख्यालय दि हेग (नीदरलैंड) में है।

ICJ(International Court Of Justice) की क्या है जरुरत:

ICJ
Court Of Justice

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस का उद्देश्य है सदस्य राष्ट्रों द्वारा सामने रखे गये विवादों की सुनवाई और निपटारा करना है। महासभा, सुरक्षा परिषद या महासभा द्वारा अधिकृत अन्य सहयोगी संगठन के अनुरोध करने पर किसी वैधानिक प्रश्न से जुडी सलाह देना है।

जज का कार्यकाल:

  • इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस में 15 जज होते हैं। इनका चुनाव 9 वर्ष के कार्यकाल के लिए महासभा और सुरक्षा परिषद स्वतंत्र रूप से करता है। एक-तिहाई सीटों के लिए प्रति तीन वर्षों के बाद चुनाव होते हैं।
  • किसी भी देश के दो जज का चुनाव नहीं किया जाता।
  • इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस के न्यायाधीश को राजनीतिक या प्रशासनिक गतिविधियों में भाग लेने की स्वीकृति नहीं दी जाती।

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस में भारत के जज:

Indian Judge of Intertional Court of Justice
Indian Judge

ICJ में भारत ने भी अपना डंका बजाया है और हमारे देश के 4 जज इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस में जज रह चुके है। मुझे पूरा यकीं है ये सुनकर आपको भी इंडियन होने पर गर्व हुआ होगा, तो देखते है कौन से वो 4 जज।

  1. दलवीर भंडारी

भारतीय जज दलवीर भंडारी ने नीदरलैंड के हेग की अंतर्राष्ट्रीय अदालत में दूसरी बार जज चुने गए। दलवीर को जनरल एसेंबली में 183 वोट मिले। सिक्योरिटी काउंसिल में जस्टिस भंडारी को 15 वोट ही मिले। भंडारी का जज के चुनाव के लिए मुकाबला ब्रिटेन के उम्मीदवार क्रिस्टोफर ग्रीनवुड से था। भंडारी दूसरी बार इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस के जज बने हैं। राजस्थान के जोधपुर से ताल्लुक रखते हैं भंडारी।

2. जस्टिस नगेंद्र सिं‍ह

जस्टिस नगेंद्र सिंह भी राजस्थान के ही डूंगरपुर के राजघराने से ताल्लुक रखते है। नगेंद्र सिं‍ह इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस में 1973 से 1988 के बीच जज रहे। इस दौरान ही सिंह 1976-79 में वाइस प्रेसिडेंट और उसके बाद 1985-88 में प्रेसिडेंट बने।

जस्टिस बेनेगल नरसिंग राव:

बेनेगल नरसिंह राव या बी. एन. राव एक भारतीय प्रशासनिक अधिकारी, राजनयिक और राजनीतिज्ञ के रूप में जाने जाते थे। इनकी भारत के संविधान का ढांचा तैयार करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका रही थी।
बेनेगल नरसिंग राव का हेग में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश होने का गौरव प्राप्त है जो संयुक्त राष्ट्र (यूएन) का प्रमुख न्यायिक अंग है।

जस्टिस रघुनंदन स्‍वरूप पाठक: 

रघुनंदन स्वरूप पाठक का भारत के 18वें मुख्य न्यायाधीशके रूप में चुना गया। साथ ही वो अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश के रूप में कार्य कर चुके है। इन्होंने इस पद पर 1989 से 1991 तक कार्य किया। इनका जन्म 25 नवम्बर 1924 को बरेली सन्युक्त प्रांत में हुआ था।

ये वो जज थे जिन्होंने दुनिया के सामने भारत का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया।

इंदिरा गाँधी: क्या है इस आयरन लेडी की कहानी

इंदिरा गाँधी ये भारत के इतिहास का ऐसा नाम है जिससे शायद ही कोई भूल पाए। भारतीय राजनीति में इस महिला ने एक अहम छाप छोड़ी। इंदिर गाँधी को हमारे देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनाने का गौरव प्राप्त हुआ। भारतीय राजनीति में इन्हे तेज़-तरार नेता के रूप में जाना जाता था। अपने जीवनकाल में इंदिरा गाँधी एक या दो बार नहीं बल्कि चार बार भारत की प्रधानमंत्री रही।

आज हम आपको इंदिरा गाँधी के जीवन के बारे में ऐसे कुछ राज़ बताएंगे जो आपको हैरान कर देंगे और जिन्हे आप ने शायद ही कभी सुना हो।

शनि अमावस्या पर कैसे करे भगवान शनि को खुश

इंदिरा गाँधी:

Iron Lady Of India
इंदिरा गाँधी के बचपन की फोटो

इंदिरा गाँधी का जन्म राजनीतिक रूप से प्रभावशाली और आर्थिक रूप से संपन्न नेहरू परिवार में 19 नवम्बर 1917 को हुआ था। इनके पिता जवाहरलाल नेहरू और माता कमला नेहरू की इकलौती बेटी थीं।

इंदिरा का नाम दादा पंडित मोतीलाल नेहरू ने रखा था। इनके दादा को लगता था कि पोती के रूप में उन्हें माँ लक्ष्मी और दुर्गा की प्राप्ति हुई है।

इन्होने अपनी शिक्षा इकोले नौवेल्ले, बेक्स (स्विट्जरलैंड), इकोले इंटरनेशनेल, जिनेवा, पूना और बंबई में स्थित प्यूपिल्स ओन स्कूल, बैडमिंटन स्कूल, ब्रिस्टल, विश्व भारती, शांति निकेतन और समरविले कॉलेज, ऑक्सफोर्ड जैसे मशहूर शिक्षा संस्थानों से प्राप्त की।

इंदिरा गाँधी ने 26 मार्च 1942 को फ़िरोज़ गाँधी के साथ विवाह किया। उनके दो बेटे राजीव और संजय गाँधी हुए।

इंदिरा के बारे में रोचक पहलू:

First Lady Prime Minister Of India
इंदिरा गाँधी के पिता जवाहर लाल नेहरू थे
  • क्या आपको पता है की इंदिरा गांधी का पूरा नाम इंदिरा प्रियदर्शिनी गाँधी था।
  • शान्तिनिकेतन में साक्षात्कार के समय ही रबिन्द्रनाथ टैगोर ने उनको प्रियदर्शिनी नाम दिया और तभी से वह इंदिरा प्रियदर्शिनी नेहरु के नाम से पहचानी गई।
  • देश प्रेम उनके खून में बचपन से ही था तभी उन्होंने 1930 के ‘सविनय अवज्ञा’ आंदोलन के समय कॉग्रेस के स्वयंसेवको को मदद करने के लिए छोटे बच्चों की ‘वानरसेना’ बनाई थी।
  • इंदिरा गांधी ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ के तहत 1942 में जेल गई।
  • देश में इंदिरा गांधी को ‘लौह महिला’ (Iron Lady) के नाम से भी बुलाये जाने लगा।

राजनितिक जीवन:

इंदिरा गाँधी का राजनितिक जीवन
इंदिरा गाँधी का सफल राजनितिक जीवन
  • इंदिरा गाँधी ने 1959 और 1960 में चुनाव लड़ा और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष चुनी गई।
  • नए प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की प्रेरणा से वो चुनाव लड़ीं और 1966-1964 तक सूचना और प्रसारण मंत्री रहीं।
  • जनवरी 1966 में इंदिरा देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी।
  • 14 जनवरी 1980 में इंदिरा गाँधी चौथी बार प्रधानमंत्री चुनी गई।

विवादित फैसले:

Indira Gandhi Declared Emergency
आपातकाल की घोषणा की
  • “ऑपरेशन ब्लू स्टार” इनका एक ऐसा ही विवादित फैसला था। इस फैसले की कीमत इंदिरा गाँधी को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। स्वर्ण मंदिर में हजारों नागरिकों की उपस्थिति होने के बाद भी गांधी ने आतंकवादियों का खात्मा करने के लिए सेना को इस ऎतिहासिक धर्मस्थल में प्रवेश करने का आदेश दिया। अलगाववादी एक अलग राज्य खालिस्तान की मांग के लिए हिंसा कर रहे थे जिसकी वजह से इंदिरा गाँधी को ये फैसला लेना पड़ा।
  • “26 जून आपातकाल 1975 “ इससे भारतीय सविधान का काला दिन कहा जाता है। जब 26 जून की रात भारतीय संविधान की धारा 352 के तहत आपातकाल की घोषणा कर दी। इस दौरान सविधान का चौथा स्तम्भ कहे जाने वाले “मीडिया” की आज़ादी पर रोक लगा दी गयी थी।

इंदिरा ने जहा अपने मजबूत फैसले से देश को बदला वही अपने कुछ विवादित फैसलो की वजह सेआलोचना का शिकार होना पड़ा। इंदिरा गाँधी की मौत 31 अक्टूबर 1984 को दो अज्ञात हमलावरों द्वारा हत्या कर दी गई, देश के लिए किया उनका कार्य आदर्शनीय है।

शनि अमावस्या पर कैसे करे भगवान शनि को खुश

शनि अमावस्या 2017!! न्याय के देवता है शनि। लोगो को उनके कर्मो के अनुसार फल प्रदान करते है भगवान शनि। इनको प्रसन्न करके आप अपने जीवन में खुशियां ला सकते है। ये आप कर सकते है शनि अमावस्या 2017 के अवसर पर। शनि अमावस्या का शुभ संयोग बहुत कम अवसर पर बनता है।

शनि देव को शनि अमावस्या बहुत प्रिय है। इस साल शनि अमावस्या 2017, 18 नवंबर 2017 यानी शनिवार को मनाई जाएगी। ऐसा माना जाता है कि साढ़ेसाती एवं ढैय्या के दौरान शनि ग्रह व्यक्ति पर शुभ-अशुभ फल प्रदान करता है।शनि अमावस्या पर शनिदेव की पूजा कर उन्हें प्रसन्न कर व्यक्ति शनि के कोप से खुद का बचा सकता है।

कौन है शनि:

God of Justice Shani
Shani Amavsya

शनि भगवान सूर्य तथा छाया के पुत्र हैं। मृत्यु के देवता यमराज शनिदेव के बड़े भाई हैं। आकाश मंडल में सौर परिवार के जो 9 ग्रह हैं, उनमें यह दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है। शनिदेव यदि रुष्ट हो जाएं तो राजा को रंक बना देते हैं और यदि प्रसन्न हो जाएं तो आम आदमी को खास आदमी बना देते हैं।

शनि अमावस्या का योग:
18 नवंबर 2017 को शनि अमावस्या पर 30 साल बाल शोभन योग बन रहा है। यह योग दान-पुण्य से लेकर बाजार से खरीदी नए कार्यों की शुरुआत के लिए शुभ रहेगा। इस दिन शनि के साथ बुध-चंद्रमा की युति से फसलों और व्यापार में वृद्धि के संकेत मिल रहे हैं। साथ ही पूजा-पाठ से शनि की कृपा भी बरसेगी।

शनि अमावस्या 2017 का महत्व:
मार्गशीर्ष अमावस्या का एक अन्य नाम अगहन अमावस्या भी है। इस अमावस्या का महत्व कार्तिक अमावस्या से कम नहीं है। जिस प्रकार कार्तिक मास की अमावस्या को लक्ष्मी पूजन कर दिपावली बनाई जाती है। इस दिन भी श्री लक्ष्मी का पूजन करना शुभ होता है. इसके अतिरिक्त अमावस्या होने के कारण इस दिन स्नान- दान आदि कार्य भी किये जाते है। अमावस्या के दिन पितरों के कार्य विशेष रुप से किये जाते है. तथा यह दिन पूर्वजों के पूजन का दिन होता है।

क्यों खास है शोभन योग:
इस शनिश्चरी अमावस्या पर दोपहर 12.48 बजे तक गजकेसरी योग रहेगा। इसके उपरांत बुधादित्य योग के साथ काल सर्पदोष की भी निष्पत्ति हो रही है। इस योग के कारण शिक्षा एवं न्याय क्षेत्र में काम करने वाले और विद्यार्थियों के लिए शुभ रहेगा। जलीय वस्तुओं, इलेक्ट्रॉनिक्स सामान, ऑटो मोबाइल सेक्टर में महंगाई बढ़ेगी।

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शनि अमावस्या 2017

शनि अमावस्या 2017
शनि अमावस्या पर करना चाहते है भगवान शनि को खुश

का शनि भक्तो पर असर:

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न्याय के देवता है शनि

शनि अमावस्या को शनि भक्तों के लिए फलदायी मानी जाती है। शनि अमावस्या को न्याय के देवता शनिदेव का दिन माना गया है। जिन जातकों की जन्म कुंडली या राशियों पर शनि की साढ़ेसाती और ढैया का असर होता है, उनके लिये यह खास दिन है, क्योंकि शनि अमावस्या पर शनि देव की पूजा-अर्चना करने पर शांति व अच्छे भाग्य की प्राप्ति होती है। ज्येष्ठ मास में दान-पुण्य के लिए ये सबसे अच्छा दिन माना जाता है। शनि मंदिरों में इस दिन दर्शन-पूजन से शनि पीड़ा से मुक्ति मिलेगी।

शनि अमावस्या पर करे ये उपाय

  • शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए आप दिन व्रत रख सकते है इससे शनि दोषों से छुटकारा दिलाता है।
  • शनिदेव के कवच, बीज मंत्र और स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।
  • शनिवार व्रत कथा पढ़ना भी उत्तम माना जाता है।
  • शनि अमावस्या के दिन व्रत के दौरान फल, दूध और लस्सी आदि ग्रहण कर सकते हैं।
  • शाम के समय हनुमान जी और बटुक भैरव का दर्शान करें।
  • काले उड़द की खिचड़ी में काला नमक मिलाकर ग्रहण करना चाहिए। इसके अलावे काले उड़द दाल का मीठा हलवा भी ग्रहण कर सकते हैं।

शनि अमावस्या पर इन् आसान उपायों को कर के भगवान शनि को प्रसन्न कर सकते है, उनकी कृपा पा सकते है,

अंतर्राष्ट्रीय भारतीय फिल्म फेस्टिवल 2017 का होगा शानदार आगाज़

बॉलीवुड वैसे तो अपनी चमक से हमेशा जगमगया रहता है, लेकिन जब बात किसी फिल्म फेस्टिवल की आती है तो इसकी रौनक देखती ही बनती है, फिल्म जगत में वैसे तो कोई न कोई फिल्म फेस्टिवल चलता रहता है, लेकिन जो फिल्म फेस्टिवल इस समय देश में चल रहा है वो है International Film Festival India 2017 (इफ्फी)

IFFI Goa 2017 :

IFFI 2017 in Goa
International Film Festival Of India 2917

48वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का आयोजन 20 नवंबर से गोवा में किया जा रहा है। इस IFFI की खास बात ये है की इसमें इस बार बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन को सम्मानित किया जाएगा।

http://sarijankari.com/2017/11/16/smog-delhi-reasons-save/

इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल इंडिया 2017 (IFFI )-

  • International Film Festival India 2017 की शुरुआत 20 नवंबर से लेकर 28 नवंबर तक आयोजित किया जाएगा।
  • पूरे 8 दिनों तक दर्शकों को विभिन्न भाषओं की बेहतरीन फिल्में देखने को मिलेंगी।
  • इस महोत्सव में बहुत से सेलिब्रिटीज को सम्मानित किया जाएगा तो देश के बेहतरीन सिनेमा को लोगों के सामने लाने का काम किया जाएगा।
  • इसके अलावा आपको बहुत से फिल्मी सितारें इन 8 दिनों में महोत्सव में शिरकत करते हुए दिखेंगे।

IFFi में विवाद-

  • इस International Film Festival India 2017 में दो फिल्में मलयालम भाषा की सेक्सी दुर्गा और मराठी की न्यूड को दिखाया जाना था।
  • महोत्सव के लिए बनी 13 सदस्यों की ज्यूरी में मशहूर फिल्म निर्माता सुजॉय घोष को अध्यक्ष बनाया गया था।
  • सेक्सी दुर्गा और न्यूड ज्यूरी को इतनी पसंद आई थीं कि उन्होंने इन्हीं के साथ महोत्सव की शुरुआत करने की सोची थी। लेकिन इन्हें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सूची से हटा दिया है। जिसकी वजह से नाराज घोष ने 13 सदस्यीय टीम से इस्तीफा दे दिया है।

भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 2017 हर बार की तरह बहुत सारे Twist & Turns के साथ वापस आया है।यहाँ आपको बॉलीवुड से लेकर दूसरी फिल्म जगत की भी बेहरीन फिल्मो की झलक देखने को मिलती है। यही खास बात है इफ्फी की। आज हमने आपको रूबरू कराया इसी के कुछ रंगीन पहलुओं से।

जानें दाउद इब्राहम के अंडरवर्ल्ड डॉन बनने की कहानी

आज हम फिर आपके लिए एक ऐसे पर्सनालिटी के बारे में बताएँगे जिसका नाम तो आपने सुना होगा पर आप उसके बारे में पूरी कहानी नहीं जानते होंगे। जिसके बारे में हम आपको बताएंगे वो है डॉन दाउद इब्राहम। इनका नाम अपराध की दुनिया का जाना – माना नाम है।

1970 से 90 में भारत में गैंगस्टर कल्चर अपनी चरम सीमा पर था मुंबई की झोपड़ियों और चौलों में अपराधी पनप रहे थे इसी अपराध की दुनिया के सबसे बड़े नाम भी इसी चौलों से निकला इन सबकी शुरुआत छोटी-मोटी चोरियों से हुई थी। जैसे ब्लैक में फ़िल्म के टिकट बेचना लेकिन धीरे-धीरे इनके बड़े-बड़े सपने आकाश को छूने लगे और जुर्म की दुनिया से ये बन गए मुंबई अंडरवर्ल्ड के बादशाह दाऊद इब्राहिम। लेकिन ऐसी कई बातें है जो आपको इस डॉन के बारे में हीं पता होंगी। चलिए जानते है फिर उन बातो को।

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कौन है Daud Ibrahm-

ऐसा कोई भारतीय नहीं होगा जिसने दाऊद इब्राहिम का नाम नहीं सुना होगा। डी कंपनी शुरू करने के बाद, दाऊद जुर्म की दुनिया का इतना बड़ा नाम बन गया कि अब उसकी गिनती दुनिया के सबसे खतरनाक अपराधियों की लिस्ट में उनका नाम तीसरे नंबर पर है।

  • दाऊद इब्राहिम का जन्म महाराष्ट्र के रत्नागिरी में हुआ था।
  • पार्टियों का शौकीन दाऊद को बचपन से ही जल्द से जल्द पैसा कमाने की ललक थी। इसके लिए उसने गलत रास्ता को अपनाया ।
  • दाऊद के पिता इब्राहिम कासकर मुंबई पुलिस में कांस्टेबल थे और उनके 7 बेटे और 3 बेटियां थीं
  • सबसे बड़ा बेटा साबिर था और दाऊद दूसरे नंबर पर था ।
  • दाऊद इब्राहिम ने 9वीं के बाद ही स्कूल से नाता तोड़ दिया था। पैसे की ललक उस पर इस कदर सवार हुए की वो आपराधिक गतिविधियों में लगने लगा।
  • दाऊद के आपराधिक जीवन की शुरुआत एक बिजनेसमैन के साथ लूटपाट से हुई जिसकी वजह से उसे जेल जाना पड़ा।
  • इसके बाद से दाऊद मुंबई के अंडरवर्ल्ड डॉन करीम लाला के गैंग के लिए काम करने लगा, लेकिन धीरे-धीरे उसकी राह अलग होती गई।
  • वह अपने भाई के साथ एक अलग गैंग चलाने लगा।
  • 1980 के दशक में दाऊद का नाम मुंबई के अपराध जगत में बहुत तेज़ी से उभरा । उसकी पहुंच फिल्म जगत से लेकर सट्टे और शेयर बाज़ार तक हो गई थी।
  • करीम लाला और हाजी मस्तान जैसे डॉन अब पुराने हो चले थे और उनका दौर खत्म हो रहा था। ऐसे वक्त पर दाऊद इन दोनों की जगह धीरे-धीरे ले रहा था ।
  • उसका काम था धमकी देकर फिरौती वसूल करना। वह मुंबई पुलिस की नजरों में चढ़ चुका था और उसका जेल आने-जाने काअब आम बात हो गई थी।
  • मुंबई में उसका खौफ काम कर रहा था और वह करोड़ों में खेल रहा था।

भारत के सबसे बड़े दुश्मन और 1993 मुंबई बम धमाके के मास्टरमाइंड अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम इस वक़्त भारत सरकार के कब्ज़े से दूर है। सरकार के तमाम कोशिशों के बाद भी दाऊद भारत सरकार के हाथ अभी तक नहीं लगा।