कौन है भारत का No.1 दुश्मन हाफिज सईद, जाने

हाफिज सईद, ये आंतक की दुनिया का ऐसा नाम है जिसने अपने आंतक से लोगो में खौफ पैदा किया है। अगर इससे हम आंतक की दुनिया का मास्टरमाइंड भी कहे तो गलत नहीं होगा। इस आतंकवादी ने जब भी अपना मुँह खोला है तो भारत के लिए ज़हर ही उगला है। भारत को अपना No.1 दुश्मन मानने वाला ये आंतकवादी पाकिस्तान का मसीहा है।

आज हम आपको आंतकी हाफिज सईद के बारे में बताएंगे की किस तरह ये जुर्म की दुनिया का बादशाह बना।

चलिए जानते है हाफिज सईद के बारे में

कौन है हाफिज सईद:

हाफिज सईद का पूरा नाम हाफिज मोहम्मद सईद है
हाफिज सईद
  • हाफिज सईद का पूरा नाम हाफिज मोहम्मद सईद है।
  • सईद का जन्म 10 मार्च 1950 को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के सरगोधा में हुआ था।
  • हाफिज सईद के अनुसार भारत-पाक विभाजन के बाद उसका परिवार पाकिस्तान के सरगोधा में बस गया था वह उनके पिता को रहने के लिए एक मिट्टी की बनी झोपड़ी दी थी।
  • उसके बाद में उनके परिवार को सरगोधा के पास ही स्थित एक गांव में 15 एकड़ जमीन दी। जहां से उनके परिवार के जीवन की दूसरी शुरुआत हुई।
  • आपको पता है की हाफिज सईद अरबी और इंजीनियरिंग का पूर्व प्राध्यापक भी रह चुका है।
  • हाफिज मोहम्मद सईद धर्मार्थ काम करने वाली संस्था जमात-उद-दावा का प्रमुख है।
  • कहने को तो ये एक चरमपंथी इस्लामी संगठन है जिसका उद्देश्य भारत के कुछ हिस्सों में और पाकिस्तान में इस्लामी हुकूमत को स्थापित करना है।
  • हाफिज ने इस संगठन को तब बनाया था जब पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा को बैन कर दिया गया था।

आंतक में हाफिज सईद की भूमिका:

  • भारत में 2003, 2005 और 2008 में हुए आतंकी हमलों के लिए भारत सरकार आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा को जिम्मेदारी मानती है।
  • भारतीय संसद पर हुए हमले की कड़ी भी इसीआंतकी गुट से जुड़ती है।
  • 2008 में मुंबई आंतकी हमले का मास्टरमाइंड भी हाफिज सईद था।

अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था द्वारा लिया गया कदम:

  • मुंबई आतंकी हमलों के तुरंत बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने दिसंबर 2008 में जमात-उत-दावा को आतंकी संगठन घोषित किया था।
  • हाफिज सईद पर अमेरिका ने एक करोड़ डॉलर का इनाम घोषित कर रखा है।

आज हमने आपको बताया खतरनाक आंतकी हाफिज सईद के बारे में जो अभी तक बैखौफ और आज़ाद पाकिस्तान में घूम रहा है।

बर्थडे स्पेशल: आनंदीबेन के जन्मदिन पर जाने उनसे जुडी दिलचस्प बातें

आनंदीबेन जेठाभाई पटेल का जन्म (21 नवंबर 1 9 41) मेहसाणा जिले के विजापुर तालुका के खरोद गांव में हुआ था। एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं जो सबसे लंबे समय तक कार्यरत महिला विधायक हैं।आनंदीबेन गुजरात की एकमात्र महिला विधायक हैं जो लगातार 4 बार चुने गई हैं। उनके कठिन परिश्रम, साहस, ईमानदारी और धीरज उन्हें शीर्ष पर ले गया। आनंदीबेन के जन्मदिन के सम्मान में, हम आपके लिए इस बहादुर और साहसी महिला के बारे में 5 तथ्यों लेकर आए हैं जो गुजरात की पहली महिला मुख्यमंत्री बनी।

आईये,एक नज़र डालते है।

आनंदीबेन पटेल से जुडी Amazing बातें:

आनंदीबेन एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं
आनंदीबेन एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं

1. आनंदीबेन ने 700 लड़कों के बीच एक लड़की के रूप में अपनी शिक्षा की।

उनको लड़कों के स्कूल में भर्ती कराया गया था क्योंकि इस क्षेत्र में कोई दूसरा स्कूल नहीं था। यह बहुत ही चौंकाने वाला है कि आनंदीबेन ने 700 लड़कों के बीच सिर्फ एक लड़की होने के बाद भी अपनी पढाई की।

इसके बाद उन्हें 8 वीं कक्षा में विसनगर में स्कूल न्यूटन सर्व विद्यालय में एक गर्ल्स में शिफ्ट कर दिया गया था और आनंदीबेन को एथलेटिक्स में उनकी उपलब्धियों के लिए मेहसाणा में “वीरबाला” पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

2. वह पढ़ाई के बारे में बेहद भावुक थी और अपने कॉलेज में बैचलर ऑफ साइंस पढ़ने वाली एकमात्र लड़की थी।

1960 में आनंदीबेन ने कॉलेज में शामिल हुए और अपने कॉलेज में वो फर्स्ट ईयर की विज्ञान की एकमात्र लड़की थी।

3. शादी के बाद आनंदीबेन ने अपनी पढ़ाई को जारी रखी

1 9 65 में वह अपने पति के साथ अहमदाबाद रहने लगी। जहां उन्होंने मास्टर ऑफ साइंस में प्रवेश किया। बाद में उन्होंने 1970 में मोहनिबा स्कूल विद्यालय में एक स्कूल शिक्षिका के रूप में 30 साल तक बच्चो को पढ़ाया।

4. राजनीति की दुनिया में उनका आना काफी नाटकीय था।

आनंदीबेन ने अपने स्कूल के ट्रिप के दौरान 2 लड़कियों को डूबने से बचा लिया। वह भाजपा के ध्यान में तब आई जब वो दो छात्रों को बचाने के लिए, जो नदी के पानी में कूद गई थी।

पर वह तब शामिल नहीं हुईं क्योंकि आनंदिबेन पहली बार राजनीतिक में आने के बारे में संकोच करती थी। लेकिन बाद में यह देखकर कि राजनीति लोगों के लिए एक माध्यम बन सकती हैआनंदिबेन इसमें शामिल हो गई।

5. आनंदीबेन पटेल गुजरात की पहली महिला मुख्यमंत्री बने।

आनंदीबेन के काम के प्रति से प्रभावित हक्लार उन्हें इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी गई थी।

हमारी उन्हें उनके जन्मदिन पर ढेर सारी शुभकामनांए !

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस (ICJ) में भारत का परचम

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस, न्याय की जरुरत पूरी दुनिया को होती है। इसलिए हर इंसान को न्याय दिलाने और उस तक न्याय को पहुंचने के लिए हर देश की अपनी न्याय व्यवस्था होती है। हर देश का अपना न्यायालय होता है जो लोगो की समस्या का समाधान करता है और जरूरत पड़ने पर जनहित याचिका पर भी सुनवाई करता है।

न्याय की आस सिर्फ लोगो को ही नहीं होती कई बार दो देशो के बीच कुछ मुद्दे इतने संवेदनशील होते है जिनके समाधान वो खुद नहीं कर पाते है। ऐसे में इन समस्या के समाधान के लिए इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस (ICJ) की स्थापना की गई है आज हम आपको बताते है ICJ के बारे में।

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस (ICJ):

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस
International Court Of Justice

आपको पता है की संयुक्त राष्ट्र का मुख्य न्यायिकअंग अंतरराष्‍ट्रीय न्यायालय है और यह संयुक्त राष्ट्र के छह मुख्य भागो में से एक है। ICJ की स्थापना 26 जून 1945 को सैन फ्रांसिस्को में हुई थी। इसका मुख्यालय दि हेग (नीदरलैंड) में है।

ICJ(International Court Of Justice) की क्या है जरुरत:

ICJ
Court Of Justice

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस का उद्देश्य है सदस्य राष्ट्रों द्वारा सामने रखे गये विवादों की सुनवाई और निपटारा करना है। महासभा, सुरक्षा परिषद या महासभा द्वारा अधिकृत अन्य सहयोगी संगठन के अनुरोध करने पर किसी वैधानिक प्रश्न से जुडी सलाह देना है।

जज का कार्यकाल:

  • इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस में 15 जज होते हैं। इनका चुनाव 9 वर्ष के कार्यकाल के लिए महासभा और सुरक्षा परिषद स्वतंत्र रूप से करता है। एक-तिहाई सीटों के लिए प्रति तीन वर्षों के बाद चुनाव होते हैं।
  • किसी भी देश के दो जज का चुनाव नहीं किया जाता।
  • इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस के न्यायाधीश को राजनीतिक या प्रशासनिक गतिविधियों में भाग लेने की स्वीकृति नहीं दी जाती।

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस में भारत के जज:

Indian Judge of Intertional Court of Justice
Indian Judge

ICJ में भारत ने भी अपना डंका बजाया है और हमारे देश के 4 जज इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस में जज रह चुके है। मुझे पूरा यकीं है ये सुनकर आपको भी इंडियन होने पर गर्व हुआ होगा, तो देखते है कौन से वो 4 जज।

  1. दलवीर भंडारी

भारतीय जज दलवीर भंडारी ने नीदरलैंड के हेग की अंतर्राष्ट्रीय अदालत में दूसरी बार जज चुने गए। दलवीर को जनरल एसेंबली में 183 वोट मिले। सिक्योरिटी काउंसिल में जस्टिस भंडारी को 15 वोट ही मिले। भंडारी का जज के चुनाव के लिए मुकाबला ब्रिटेन के उम्मीदवार क्रिस्टोफर ग्रीनवुड से था। भंडारी दूसरी बार इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस के जज बने हैं। राजस्थान के जोधपुर से ताल्लुक रखते हैं भंडारी।

2. जस्टिस नगेंद्र सिं‍ह

जस्टिस नगेंद्र सिंह भी राजस्थान के ही डूंगरपुर के राजघराने से ताल्लुक रखते है। नगेंद्र सिं‍ह इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस में 1973 से 1988 के बीच जज रहे। इस दौरान ही सिंह 1976-79 में वाइस प्रेसिडेंट और उसके बाद 1985-88 में प्रेसिडेंट बने।

जस्टिस बेनेगल नरसिंग राव:

बेनेगल नरसिंह राव या बी. एन. राव एक भारतीय प्रशासनिक अधिकारी, राजनयिक और राजनीतिज्ञ के रूप में जाने जाते थे। इनकी भारत के संविधान का ढांचा तैयार करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका रही थी।
बेनेगल नरसिंग राव का हेग में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश होने का गौरव प्राप्त है जो संयुक्त राष्ट्र (यूएन) का प्रमुख न्यायिक अंग है।

जस्टिस रघुनंदन स्‍वरूप पाठक: 

रघुनंदन स्वरूप पाठक का भारत के 18वें मुख्य न्यायाधीशके रूप में चुना गया। साथ ही वो अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश के रूप में कार्य कर चुके है। इन्होंने इस पद पर 1989 से 1991 तक कार्य किया। इनका जन्म 25 नवम्बर 1924 को बरेली सन्युक्त प्रांत में हुआ था।

ये वो जज थे जिन्होंने दुनिया के सामने भारत का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया।

इंदिरा गाँधी: क्या है इस आयरन लेडी की कहानी

इंदिरा गाँधी ये भारत के इतिहास का ऐसा नाम है जिससे शायद ही कोई भूल पाए। भारतीय राजनीति में इस महिला ने एक अहम छाप छोड़ी। इंदिर गाँधी को हमारे देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनाने का गौरव प्राप्त हुआ। भारतीय राजनीति में इन्हे तेज़-तरार नेता के रूप में जाना जाता था। अपने जीवनकाल में इंदिरा गाँधी एक या दो बार नहीं बल्कि चार बार भारत की प्रधानमंत्री रही।

आज हम आपको इंदिरा गाँधी के जीवन के बारे में ऐसे कुछ राज़ बताएंगे जो आपको हैरान कर देंगे और जिन्हे आप ने शायद ही कभी सुना हो।

शनि अमावस्या पर कैसे करे भगवान शनि को खुश

इंदिरा गाँधी:

Iron Lady Of India
इंदिरा गाँधी के बचपन की फोटो

इंदिरा गाँधी का जन्म राजनीतिक रूप से प्रभावशाली और आर्थिक रूप से संपन्न नेहरू परिवार में 19 नवम्बर 1917 को हुआ था। इनके पिता जवाहरलाल नेहरू और माता कमला नेहरू की इकलौती बेटी थीं।

इंदिरा का नाम दादा पंडित मोतीलाल नेहरू ने रखा था। इनके दादा को लगता था कि पोती के रूप में उन्हें माँ लक्ष्मी और दुर्गा की प्राप्ति हुई है।

इन्होने अपनी शिक्षा इकोले नौवेल्ले, बेक्स (स्विट्जरलैंड), इकोले इंटरनेशनेल, जिनेवा, पूना और बंबई में स्थित प्यूपिल्स ओन स्कूल, बैडमिंटन स्कूल, ब्रिस्टल, विश्व भारती, शांति निकेतन और समरविले कॉलेज, ऑक्सफोर्ड जैसे मशहूर शिक्षा संस्थानों से प्राप्त की।

इंदिरा गाँधी ने 26 मार्च 1942 को फ़िरोज़ गाँधी के साथ विवाह किया। उनके दो बेटे राजीव और संजय गाँधी हुए।

इंदिरा के बारे में रोचक पहलू:

First Lady Prime Minister Of India
इंदिरा गाँधी के पिता जवाहर लाल नेहरू थे
  • क्या आपको पता है की इंदिरा गांधी का पूरा नाम इंदिरा प्रियदर्शिनी गाँधी था।
  • शान्तिनिकेतन में साक्षात्कार के समय ही रबिन्द्रनाथ टैगोर ने उनको प्रियदर्शिनी नाम दिया और तभी से वह इंदिरा प्रियदर्शिनी नेहरु के नाम से पहचानी गई।
  • देश प्रेम उनके खून में बचपन से ही था तभी उन्होंने 1930 के ‘सविनय अवज्ञा’ आंदोलन के समय कॉग्रेस के स्वयंसेवको को मदद करने के लिए छोटे बच्चों की ‘वानरसेना’ बनाई थी।
  • इंदिरा गांधी ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ के तहत 1942 में जेल गई।
  • देश में इंदिरा गांधी को ‘लौह महिला’ (Iron Lady) के नाम से भी बुलाये जाने लगा।

राजनितिक जीवन:

इंदिरा गाँधी का राजनितिक जीवन
इंदिरा गाँधी का सफल राजनितिक जीवन
  • इंदिरा गाँधी ने 1959 और 1960 में चुनाव लड़ा और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष चुनी गई।
  • नए प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की प्रेरणा से वो चुनाव लड़ीं और 1966-1964 तक सूचना और प्रसारण मंत्री रहीं।
  • जनवरी 1966 में इंदिरा देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी।
  • 14 जनवरी 1980 में इंदिरा गाँधी चौथी बार प्रधानमंत्री चुनी गई।

विवादित फैसले:

Indira Gandhi Declared Emergency
आपातकाल की घोषणा की
  • “ऑपरेशन ब्लू स्टार” इनका एक ऐसा ही विवादित फैसला था। इस फैसले की कीमत इंदिरा गाँधी को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। स्वर्ण मंदिर में हजारों नागरिकों की उपस्थिति होने के बाद भी गांधी ने आतंकवादियों का खात्मा करने के लिए सेना को इस ऎतिहासिक धर्मस्थल में प्रवेश करने का आदेश दिया। अलगाववादी एक अलग राज्य खालिस्तान की मांग के लिए हिंसा कर रहे थे जिसकी वजह से इंदिरा गाँधी को ये फैसला लेना पड़ा।
  • “26 जून आपातकाल 1975 “ इससे भारतीय सविधान का काला दिन कहा जाता है। जब 26 जून की रात भारतीय संविधान की धारा 352 के तहत आपातकाल की घोषणा कर दी। इस दौरान सविधान का चौथा स्तम्भ कहे जाने वाले “मीडिया” की आज़ादी पर रोक लगा दी गयी थी।

इंदिरा ने जहा अपने मजबूत फैसले से देश को बदला वही अपने कुछ विवादित फैसलो की वजह सेआलोचना का शिकार होना पड़ा। इंदिरा गाँधी की मौत 31 अक्टूबर 1984 को दो अज्ञात हमलावरों द्वारा हत्या कर दी गई, देश के लिए किया उनका कार्य आदर्शनीय है।

शनि अमावस्या पर कैसे करे भगवान शनि को खुश

शनि अमावस्या 2017!! न्याय के देवता है शनि। लोगो को उनके कर्मो के अनुसार फल प्रदान करते है भगवान शनि। इनको प्रसन्न करके आप अपने जीवन में खुशियां ला सकते है। ये आप कर सकते है शनि अमावस्या 2017 के अवसर पर। शनि अमावस्या का शुभ संयोग बहुत कम अवसर पर बनता है।

शनि देव को शनि अमावस्या बहुत प्रिय है। इस साल शनि अमावस्या 2017, 18 नवंबर 2017 यानी शनिवार को मनाई जाएगी। ऐसा माना जाता है कि साढ़ेसाती एवं ढैय्या के दौरान शनि ग्रह व्यक्ति पर शुभ-अशुभ फल प्रदान करता है।शनि अमावस्या पर शनिदेव की पूजा कर उन्हें प्रसन्न कर व्यक्ति शनि के कोप से खुद का बचा सकता है।

कौन है शनि:

God of Justice Shani
Shani Amavsya

शनि भगवान सूर्य तथा छाया के पुत्र हैं। मृत्यु के देवता यमराज शनिदेव के बड़े भाई हैं। आकाश मंडल में सौर परिवार के जो 9 ग्रह हैं, उनमें यह दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है। शनिदेव यदि रुष्ट हो जाएं तो राजा को रंक बना देते हैं और यदि प्रसन्न हो जाएं तो आम आदमी को खास आदमी बना देते हैं।

शनि अमावस्या का योग:
18 नवंबर 2017 को शनि अमावस्या पर 30 साल बाल शोभन योग बन रहा है। यह योग दान-पुण्य से लेकर बाजार से खरीदी नए कार्यों की शुरुआत के लिए शुभ रहेगा। इस दिन शनि के साथ बुध-चंद्रमा की युति से फसलों और व्यापार में वृद्धि के संकेत मिल रहे हैं। साथ ही पूजा-पाठ से शनि की कृपा भी बरसेगी।

शनि अमावस्या 2017 का महत्व:
मार्गशीर्ष अमावस्या का एक अन्य नाम अगहन अमावस्या भी है। इस अमावस्या का महत्व कार्तिक अमावस्या से कम नहीं है। जिस प्रकार कार्तिक मास की अमावस्या को लक्ष्मी पूजन कर दिपावली बनाई जाती है। इस दिन भी श्री लक्ष्मी का पूजन करना शुभ होता है. इसके अतिरिक्त अमावस्या होने के कारण इस दिन स्नान- दान आदि कार्य भी किये जाते है। अमावस्या के दिन पितरों के कार्य विशेष रुप से किये जाते है. तथा यह दिन पूर्वजों के पूजन का दिन होता है।

क्यों खास है शोभन योग:
इस शनिश्चरी अमावस्या पर दोपहर 12.48 बजे तक गजकेसरी योग रहेगा। इसके उपरांत बुधादित्य योग के साथ काल सर्पदोष की भी निष्पत्ति हो रही है। इस योग के कारण शिक्षा एवं न्याय क्षेत्र में काम करने वाले और विद्यार्थियों के लिए शुभ रहेगा। जलीय वस्तुओं, इलेक्ट्रॉनिक्स सामान, ऑटो मोबाइल सेक्टर में महंगाई बढ़ेगी।

अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में क्या इस बार खास जानने के लिए यहां क्लिक करें

शनि अमावस्या 2017

शनि अमावस्या 2017
शनि अमावस्या पर करना चाहते है भगवान शनि को खुश

का शनि भक्तो पर असर:

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न्याय के देवता है शनि

शनि अमावस्या को शनि भक्तों के लिए फलदायी मानी जाती है। शनि अमावस्या को न्याय के देवता शनिदेव का दिन माना गया है। जिन जातकों की जन्म कुंडली या राशियों पर शनि की साढ़ेसाती और ढैया का असर होता है, उनके लिये यह खास दिन है, क्योंकि शनि अमावस्या पर शनि देव की पूजा-अर्चना करने पर शांति व अच्छे भाग्य की प्राप्ति होती है। ज्येष्ठ मास में दान-पुण्य के लिए ये सबसे अच्छा दिन माना जाता है। शनि मंदिरों में इस दिन दर्शन-पूजन से शनि पीड़ा से मुक्ति मिलेगी।

शनि अमावस्या पर करे ये उपाय

  • शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए आप दिन व्रत रख सकते है इससे शनि दोषों से छुटकारा दिलाता है।
  • शनिदेव के कवच, बीज मंत्र और स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।
  • शनिवार व्रत कथा पढ़ना भी उत्तम माना जाता है।
  • शनि अमावस्या के दिन व्रत के दौरान फल, दूध और लस्सी आदि ग्रहण कर सकते हैं।
  • शाम के समय हनुमान जी और बटुक भैरव का दर्शान करें।
  • काले उड़द की खिचड़ी में काला नमक मिलाकर ग्रहण करना चाहिए। इसके अलावे काले उड़द दाल का मीठा हलवा भी ग्रहण कर सकते हैं।

शनि अमावस्या पर इन् आसान उपायों को कर के भगवान शनि को प्रसन्न कर सकते है, उनकी कृपा पा सकते है,

अंतर्राष्ट्रीय भारतीय फिल्म फेस्टिवल 2017 का होगा शानदार आगाज़

बॉलीवुड वैसे तो अपनी चमक से हमेशा जगमगया रहता है, लेकिन जब बात किसी फिल्म फेस्टिवल की आती है तो इसकी रौनक देखती ही बनती है, फिल्म जगत में वैसे तो कोई न कोई फिल्म फेस्टिवल चलता रहता है, लेकिन जो फिल्म फेस्टिवल इस समय देश में चल रहा है वो है International Film Festival India 2017 (इफ्फी)

IFFI Goa 2017 :

IFFI 2017 in Goa
International Film Festival Of India 2917

48वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का आयोजन 20 नवंबर से गोवा में किया जा रहा है। इस IFFI की खास बात ये है की इसमें इस बार बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन को सम्मानित किया जाएगा।

http://sarijankari.com/2017/11/16/smog-delhi-reasons-save/

इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल इंडिया 2017 (IFFI )-

  • International Film Festival India 2017 की शुरुआत 20 नवंबर से लेकर 28 नवंबर तक आयोजित किया जाएगा।
  • पूरे 8 दिनों तक दर्शकों को विभिन्न भाषओं की बेहतरीन फिल्में देखने को मिलेंगी।
  • इस महोत्सव में बहुत से सेलिब्रिटीज को सम्मानित किया जाएगा तो देश के बेहतरीन सिनेमा को लोगों के सामने लाने का काम किया जाएगा।
  • इसके अलावा आपको बहुत से फिल्मी सितारें इन 8 दिनों में महोत्सव में शिरकत करते हुए दिखेंगे।

IFFi में विवाद-

  • इस International Film Festival India 2017 में दो फिल्में मलयालम भाषा की सेक्सी दुर्गा और मराठी की न्यूड को दिखाया जाना था।
  • महोत्सव के लिए बनी 13 सदस्यों की ज्यूरी में मशहूर फिल्म निर्माता सुजॉय घोष को अध्यक्ष बनाया गया था।
  • सेक्सी दुर्गा और न्यूड ज्यूरी को इतनी पसंद आई थीं कि उन्होंने इन्हीं के साथ महोत्सव की शुरुआत करने की सोची थी। लेकिन इन्हें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सूची से हटा दिया है। जिसकी वजह से नाराज घोष ने 13 सदस्यीय टीम से इस्तीफा दे दिया है।

भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 2017 हर बार की तरह बहुत सारे Twist & Turns के साथ वापस आया है।यहाँ आपको बॉलीवुड से लेकर दूसरी फिल्म जगत की भी बेहरीन फिल्मो की झलक देखने को मिलती है। यही खास बात है इफ्फी की। आज हमने आपको रूबरू कराया इसी के कुछ रंगीन पहलुओं से।

जानें दाउद इब्राहम के अंडरवर्ल्ड डॉन बनने की कहानी

आज हम फिर आपके लिए एक ऐसे पर्सनालिटी के बारे में बताएँगे जिसका नाम तो आपने सुना होगा पर आप उसके बारे में पूरी कहानी नहीं जानते होंगे। जिसके बारे में हम आपको बताएंगे वो है डॉन दाउद इब्राहम। इनका नाम अपराध की दुनिया का जाना – माना नाम है।

1970 से 90 में भारत में गैंगस्टर कल्चर अपनी चरम सीमा पर था मुंबई की झोपड़ियों और चौलों में अपराधी पनप रहे थे इसी अपराध की दुनिया के सबसे बड़े नाम भी इसी चौलों से निकला इन सबकी शुरुआत छोटी-मोटी चोरियों से हुई थी। जैसे ब्लैक में फ़िल्म के टिकट बेचना लेकिन धीरे-धीरे इनके बड़े-बड़े सपने आकाश को छूने लगे और जुर्म की दुनिया से ये बन गए मुंबई अंडरवर्ल्ड के बादशाह दाऊद इब्राहिम। लेकिन ऐसी कई बातें है जो आपको इस डॉन के बारे में हीं पता होंगी। चलिए जानते है फिर उन बातो को।

http://sarijankari.com/2017/11/16/winters-skin-care-beautiful-tips/

कौन है Daud Ibrahm-

ऐसा कोई भारतीय नहीं होगा जिसने दाऊद इब्राहिम का नाम नहीं सुना होगा। डी कंपनी शुरू करने के बाद, दाऊद जुर्म की दुनिया का इतना बड़ा नाम बन गया कि अब उसकी गिनती दुनिया के सबसे खतरनाक अपराधियों की लिस्ट में उनका नाम तीसरे नंबर पर है।

  • दाऊद इब्राहिम का जन्म महाराष्ट्र के रत्नागिरी में हुआ था।
  • पार्टियों का शौकीन दाऊद को बचपन से ही जल्द से जल्द पैसा कमाने की ललक थी। इसके लिए उसने गलत रास्ता को अपनाया ।
  • दाऊद के पिता इब्राहिम कासकर मुंबई पुलिस में कांस्टेबल थे और उनके 7 बेटे और 3 बेटियां थीं
  • सबसे बड़ा बेटा साबिर था और दाऊद दूसरे नंबर पर था ।
  • दाऊद इब्राहिम ने 9वीं के बाद ही स्कूल से नाता तोड़ दिया था। पैसे की ललक उस पर इस कदर सवार हुए की वो आपराधिक गतिविधियों में लगने लगा।
  • दाऊद के आपराधिक जीवन की शुरुआत एक बिजनेसमैन के साथ लूटपाट से हुई जिसकी वजह से उसे जेल जाना पड़ा।
  • इसके बाद से दाऊद मुंबई के अंडरवर्ल्ड डॉन करीम लाला के गैंग के लिए काम करने लगा, लेकिन धीरे-धीरे उसकी राह अलग होती गई।
  • वह अपने भाई के साथ एक अलग गैंग चलाने लगा।
  • 1980 के दशक में दाऊद का नाम मुंबई के अपराध जगत में बहुत तेज़ी से उभरा । उसकी पहुंच फिल्म जगत से लेकर सट्टे और शेयर बाज़ार तक हो गई थी।
  • करीम लाला और हाजी मस्तान जैसे डॉन अब पुराने हो चले थे और उनका दौर खत्म हो रहा था। ऐसे वक्त पर दाऊद इन दोनों की जगह धीरे-धीरे ले रहा था ।
  • उसका काम था धमकी देकर फिरौती वसूल करना। वह मुंबई पुलिस की नजरों में चढ़ चुका था और उसका जेल आने-जाने काअब आम बात हो गई थी।
  • मुंबई में उसका खौफ काम कर रहा था और वह करोड़ों में खेल रहा था।

भारत के सबसे बड़े दुश्मन और 1993 मुंबई बम धमाके के मास्टरमाइंड अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम इस वक़्त भारत सरकार के कब्ज़े से दूर है। सरकार के तमाम कोशिशों के बाद भी दाऊद भारत सरकार के हाथ अभी तक नहीं लगा।

 

स्मॉग वाली दिल्ली में कैसे रखे अपने परिवार को तंदुरस्त जाने

स्मॉग एक ऐसा शब्द बन गया है जिसने हम सब परेशान है। राजधानी दिल्ली वैसे तो पूरे साल ही प्रदुषण के लिए ख़बरों में बनी रहती है। पर बीते कुछ दिनों से दिल्ली की हवा इतनी जहरीली हो गयी है की लोगो को साँस लेने में भी परेशानी हो रही है। स्मॉग जिससे देख अक्सर हम कोहरा समझ लेते है वो प्रदूषण का ही एक रूप है। इस स्मॉग की वजह से बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक परेशान नज़र आ रहे है।

अगर आप भी इससे परेशान है तो आज हम आपको स्मॉग से बचने और अपने परिवार को सुरक्षित रखने के तरीके बताएंगे।

स्मॉग क्या है-

People are affected by Delhi Smog
Delhi Smog

स्मॉग एक तरह का वायु प्रदूषण ही होता है। स्मॉग, स्मोक और फॉग से मिलकर बना है जिसका मतलब है स्मोकी फॉग, यानी कि धुआं युक्त कोहरा। इस वायु प्रदूषण में हवा में नाइट्रोजन ऑक्साइड्स, सल्फर ऑक्साइड्स, ओजोन, स्मोक और पार्टिकुलेट्स मिले होते हैं। इस तरह के वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण हमारे द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों से निकलने वाला धुआं, फैक्ट्रियों और कोयले, पराली आदि के जलने से निकलने वाला धुआं होता है।

स्मॉग का कारण –

  • दिल्ली-एनसीआर के पडोसी राज्ये पंजाब, उत्तर प्रदेश और हरियाणा हैं। जहां बहुत ज्यादा मात्रा में खेती की जाती है। यहां के लोग फसल कटने के बाद उसके अवशेष जिससे पराली कहते है उसको जला देते हैं जिससे स्मॉग की समस्या पैदा होती है।
  • इस बार सुप्रीम कोर्ट से पटाखों पर बैन के बावजूद राजधानी के बहुत से इलाकों में काफी पटाखे फोड़े गए है।
  • राजधानी की सड़कों पर दौड़ने वाली कारें, ट्रक्स, बस भी साफ़ पर्यावरण का एक बड़ा दुश्मन है।
  • औद्योगिक प्रदूषण भी स्मॉग का मुख्य जिम्मेदार कारक है।
  • सर्दी के मौसम में हवाएं थोड़ी सुस्त होती हैं। ऐसे में डस्ट पार्टिकल्स और प्रदूषण वातावरण में स्थिर हो जाता है जिससे स्मॉग जैसी समस्याएं सामने आती हैं।

स्मॉग के बुरे प्रभाव –

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  1. खांसी, गले और सीने में जलन – जब आप स्मॉग भरी हवा में साँस लेते हैं तो हवाओं में हाई लेवल का ओजोन मौजूद होने की वजह से आपके श्वसन तंत्र पर बुरा असर पड़ता है। इससे सीने में जलन होने लगती है तथा खांसी की भी समस्या उत्पन्न हो जाती है। ओजोन आपके फेफड़ों को तब भी नुकसान पहुंचाती है।
  2. अस्थमा– अस्थमा के मरीज़ो के लिए स्मॉग ज्यादा घातक हो सकता है। स्मॉग में मौजूद ओजोन की वजह से अस्थमा का अटैक आ सकता है।
  3. सांस लेने में तकलीफ और फेफड़े खराब होना – स्मॉग की वजह से सांस लेने में तकलीफ होती ही है साथ ही साथ इसकी वजह से अस्थमा, एम्फीसिमा, क्रोनिक ब्रोंकाइटिस और अन्य साँस संबंधी समस्याएं अपनी गिरफ्त में ले लेती हैं। इसकी वजह से फेफड़ों में संक्रमण भी हो सकता है।

क्या है बचने का तरीका –

  1. सबसे पहले आपको अपने इलाके का ओजोन स्तर पता होना चाहिए।
  2. ऐसे समय में घर से ज्यादा देर तक के लिए बाहर रहने से बचें।
  3. बाहर जाने का प्रोग्राम हो तो मुँह पर मास्क का इस्तेमाल करे।
  4.  स्मॉग के दिनों में कम से कम एक्टिव रहने की कोशिश करें। ऐसे मौसम में आप जितना एक्टिव रहेंगे       आपको श्वसन संबंधी रोग होने का 5. खतरा उतना बढ़ जाएगा।
  5.  वायु प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई में सहयोग करें। ऊर्जा संरक्षण, कार पूलिंग और पब्लिक ट्रांसपोर्ट जैसे अभियानों में सहयोग दें।
  6. घर की भीतरी हवा की गुणवत्ता को नियन्त्रित रखें- दरवाजे और खिड़कियां बंद रखें। एयर            प्यूरीफायर भी लगा सकते हैं।
  7. पूरी बाजू के कपड़े पहनें और अपने चेहरे को अच्छी गुणवत्ता के मास्क से ढकें। (नियमित समय अंतराल पर मास्क बदलें)
  8. घर के बाहर किए जाने वाले व्यायाम से बचें, इसके बजाए घर के अंदर योगा जैसे व्यायाम करें। अपने घर के आस-पास प्रदूषण कम करने के लिए पेड़ लगाएं।
  9. इम्‍यूनिटी को मजबूत बनाने के लिए अदरक और तुलसी की चाय पीएं।
  10. अपने आहार में विटामिन सी, ओमेगा 3 और मैग्निशियम, हल्दी, गुड़, अखरोट आदि का सेवन करें।

फिर टेंशन किस बात की, इन आसान तरीको को अपना कर आप अपनी ज़िन्दगी को स्मॉग से सुरक्षित रख सकते है

कौन है रानी पद्मावती और क्या है फिल्म से जुड़ा विवाद

Film Padmavati!! भारत देश का इतिहास सुनहरा रहा है। इस देश की भूमि पर प्राचीनकाल से ही ना जाने कितनी वीरांगनाओ ने जन्म लिया। हमारी भूमि को धन्य किया। जब बात आती है शूरवीर वीरांगनाओ की तो उसमे झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, रानी चेनम्मा और रानी पद्मावती का ज़िक्र भी आते है। बहुत कम लोग होंगे जो रानी पद्मावती के बारे में जानते है। पर आज देश में इनका नाम जोरोशोरों से लिया जा रहा है।

अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल गोवा में इस बार क्या है खास? जानने के लिए अवश्य पढ़ें

ऐसा हो रहा है संजय लीला भंसाली की फिल्म “पद्मावती” की वजह से। रानी पद्मावती पर बनी फिल्म अपने विवाद की वजह से लगातार सुर्खियों में है। अगर इस Film Padmavati को लेकर आप भी असमंजस में है तो हम आपको आज इस पूरे विवाद के बारे में बताएंगे।

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Film Padmavati based on Queen Padmavati’s life

कौन है “पद्मावती:
रानी पद्मावती को पद्मिनी के नाम से भी जाना जाता था। राजा गंधर्व सेन और रानी चंपावती की बेटी रानी पद्मावती का विवाह चित्तौड़ के राजा रतन सिंह से हुआ था। ऐसा कहा जाता है कि खिलजी वंश का शासक अलाउद्दीन खिलजी पद्मावती को पाना चाहता था। रानी को जब ये पता चला तो उन्होंने कई अन्य राजपूत महिलाओं के साथ जौहर कर लिया। इस बात की पुष्टि सुप्रसिद्ध इतिहासकार आर.वी. सिंह द्वारा लिखित राजपूताना का इतिहास नमक पुस्तक में भी होती है।

 क्या है Film Padmavati विवाद:

संजय लाली भंसाली की फिल्‍म ‘पद्मावती’ पहले ही दिन से विवादों में घिर गई और जैसे-जैसे इस फिल्‍म की रिलीज डेट पास आती जा रही है। फिल्‍म का विरोध भी बढ़ता जा रहा है। संजय लीला भंसाली की फिल्म की कहानी खिलजी और पद्मावती को केंद्र में रखकर बुनी गई है। रानी पद्मावती को अलाउद्‌दीन खिलजी की प्रेमिका बताया जा रहा है। उसके सपने में पद्मावती के साथ प्रेम-प्रसंग के दृश्यों को फिल्माने की बात सामने आ रही है।

करणी सेना व राजपूत सभा को आपत्ति:
राजपूत करणी सेना के अध्यक्ष महिपाल मकराना और राजपूत सभा के अध्यक्ष गिर्राज सिंह लोटवाड़ा ने कहा है कि अगर इतिहास और परंपराओं के साथ छेड़छाड़ होगी तो इसका अंजाम अच्छा नहीं होगा। पदाधिकारियों ने कहा कि रानी पद्मिनी हमारा गौरव हैं। उन्होंने अलाउद्दीन के पास जाने के बजाय जौहर (आग में कूदना) करने को बेहतर समझा। फिल्म में उन्हें अलाउद्‌दीन की प्रेमिका बताया जा रहा है, जो सरासर गलत है।

 हम राजपूतों की धरती पर अपने पूर्वजों को लेकर दिखाई जा रही अश्लीलता को बर्दाश्त नहीं करेंगे। करणी सेना के प्रमुख लोकेंद्र सिंह कालवी ने कहा कि दीपिका-रणवीर के रिलेशन कुछ भी हों लेकिन इस फिल्म में उन्हें प्रेमी-प्रेमिका के रूप में नहीं दिखाया जाना चाहिए। अलाउद्दीन-पद्मिनी के लव सीन को नहीं फिल्माया जाना चाहिए।


संजय लीला भंसाली ने दी विवाद पर सफाई:

Film Padmavati By Sanjay Leela Bhansali
Sanjay Leela Bhansali upcoming film Padmavati

भंसाली  की तरफ से एक वीडियो पोस्ट किया गया है, जिस वीडियो में भंसाली ने कहा, ‘मैंने यह फिल्‍म बहुत इमानदारी और मेहनत से बनाई है. रानी पद्मावती की कहानी से मैं हमेशा प्रभावित रहा हूं और यह फिल्‍म उनकी वीरता और उनके आत्‍मबलिदान को नमन करती है. लेकिन कुछ अफवाहों के चलते यह विवादों का मुद्दा बन कई है. अफवाह है कि इसमें रानी पद्मावती और अलाउद्दीन खिलजी के बीच ड्रीम सीक्‍वेंस दिखाया गया है. मैंने इस बात को पहले ही नकारा है, लिखित प्रमाण दिए हैं और एक बार फिर नकार रहा हूं कि इस फिल्‍म में रानी पद्मावती और खिलजी के बची कोई ऐसा सीन नहीं है जो किसी की भावना को ठेस पहुंचाए. हमने इस फिल्‍म को बहुत जिम्‍मेदारी से बनाया है और राजपूती मान का पूरा ध्‍यान रखा है।’

Film Padmavati और उसकी स्टार कास्ट-

Film Padmavati
Sanjay Leela Bhansali and StarCast of Film Padmavati

संजय लीला भंसाली द्वारा निर्देशित “पद्मावती” है, इस फिल्म में दीपिका पादुकोन रानी पद्मावती, एक्टर शाहिद कपूर राजा रतन सिंह और रणवीर सिंह खलनायक अल्लाउदीन खिलजी के रूप में नज़र आएंगे, ये फिल्म 1  दिसंबर 2017 को रिलीज़ होगी

रानी पद्मावती पर बनी इस फिल्म को एक बार मौका देना चाहिए जो आज की पीढ़ी उनको और उनके बलिदान की भूल गयी है उन्हें एक बार फिर याद दिलाने की जरुरत है।

इंटरनेशनल ट्रेड फेयर 2017 का हुआ आगाज

trade fair 2017- जी हाँ, राजधानी दिल्ली के प्रगति मैदान में हर साल की तरह 14 नवंबर यानी आज से अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले शुरू हो गया है। अगर आप भी trade fair 2017 का लुत्फ़ उठाना चाहते है पर इस दुविधा में है कि कहाँ से टिकट ले और कैसे वहाँ पंहुचा जाए तो हम आज आपके लिए सारी जानकारी लेकर आए है।

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ट्रेड फेयर का इतिहास:
प्रगति मैदान दिल्ली में लगने वाला एक क्षेत्र है। हर वर्ष नवम्बर महीने में यहाँ अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले का आयोजन किया जाता है। प्रगति मैदान दिल्ली स्थित बडे प्रदर्शिनियों और व्यापारियों का परिसर है। पूरा परिसर कई छोटे छोटे प्रदर्शनी हॉल में बंटा होता है। यह फेयर खासतौर पर हर साल लगने वाले विश्व पुस्तक मेला एवं इंटरनेशनल ट्रेड फेयर के लिये बहुत मशहूर है।

कब तक है ट्रेड फेयर:
इस बार अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 14 नवंबर से 27 नवंबर 2017 तक दिल्ली के प्रगति मैदान में चलेगा।

ट्रेड फेयर 2017:
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 अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले का आगाज आज( 14 नवंबर) राष्ट्रपत‌ि रामनाथ कोव‌िंद ने क‌िया। आपको बता दे कि व्यापार मेले में जाने के लिए टिकटों की बिक्री दिल्ली मेट्रो के सभी स्टेशनों (प्रगति मैदान मेट्रो स्टेशन को छोड़कर) पर होगी। आप किसी भी स्टेशन से टिकट ले सकते है। जबकि पहले चार बिजनेस डेज की टिकटें 42 मेट्रो स्टेशनों पर उपलब्ध होंगी।
कोई भी व्यक्ति मेट्रो के ग्राहक सुविधा केंद्र से सुबह साढ़े 8 से शाम 5 बजे तक मेले की टिकटें खरीद सकते है। दिल्ली मेट्रो के स्टेशनों के अलावा मेले की टिकटें एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन के स्टेशनों पर भी उपलब्ध होंगी।
दिल्ली मेट्रो के सभी स्टेशनों पर व्यापार मेले की टिकटें 14 नवंबर(आज ) से बिकनी शुरू हो गई है। इस बार मेले में एंट्री 14 नवंबर से 17 नवंबर तक बिजनेस डेज की टिकट प्रति व्यक्ति 500 रुपये होगी। 18 से 27 नवंबर के बीच वीकएंड और सरकारी छुट्टी के दिन वयस्कों के लिए 120 रुपये, जबकि बच्चों के लिए 60 रुपये की टिकट होगी।
  1. अन्य दिनों में मेले की टिकट वयस्कों के लिए 60 रुपये रखी गई है।
  2. बच्चो के लिए 40 रुपये की टिकट रखी गई है
  3. प्रगति मैदान के एंट्री गेट्स पर टिकटों की बिक्री नहीं होगी।
  4. लोग मेले देखने आने से चार दिन पहले एडवांस टिकट खरीद सकते हैं।
  5. इस बार की थीम स्टार्टअप इंडिया रखी गई है

कैसे जाएँ पब्लिक या प्राइवेट ट्रांसपोर्ट से:

आपने भी इंटरनैशनल ट्रेड फेयर में आने का मन बना लिया है और आप प्राइवेट वहां से जाने का सोच रहे है तो आपको बता दे की पब्लिक ट्रांसपॉर्ट का इस्तेमाल ही बेहतर विकल्प होगा। दरअसल, ट्रेड फेयर में इस साल पार्किंग शुल्क पिछले साल के बराबर ही रखा गया है। दूसरी ओर, GRAP की वजह से अन्य जगहों पर पार्किंग 4 गुना तक महंगी हो गई है।
ट्रेड फेयर में पार्किंग इसलिए महंगी की जाती है ताकि लोग पब्लिक ट्रांसपॉर्ट का इस्तेमाल अधिक करें। लेकिन इस बार ट्रेड फेयर ने पार्किंग रेट को पिछले साल के बराबर ही रखा है। इसके चलते लोग गाड़ियों से आना अधिक पसंद करेंगे। इसकी वजह से पार्किंग फुल मिलने की संभावना बढ़ ही गई है साथ ही ट्रेड फेयर के आसपास जाम लगने की भी आशंका है।
आप भी trade fair 2017 जाने का प्लान बना रहे है तो डरिये मत…..किसी भी मेट्रो स्टेशन से टिकट ले और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करे और खूब एन्जॉय करे।