गुरु पूर्णिमा : गुरु और शिष्य का दिन

“गुरु पूर्णिमा”!! आषाढ़ मास में पड़ने वाली शुक्ल पक्ष की  पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है. गुरु पूर्णिमा देश भर में मनाई जाती है. गुरु पूर्णिमा के बारे में जानने के लिए  इस आर्टिकल को पूरा पढ़िए.

गुरु पूर्णिमा

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कब है गुरु पूर्णिमा:

वर्ष 2017 में यह गुरु पूर्णिमा 9 जुलाई को है. यह पर्व गुरु और शिष्यों का है. लोगो की मान्यता है कि यह दिन बहुत महत्वपूर्ण होता है. इस दिन गुरुओ का आशीर्वाद लेना बहुत जरुरी है. अपने दिन को शुभ बनाने के लिए दिन की शुरुआत अपने गुरुओ के आशीर्वाद से ही करनी चाहिए. इसी दिन से पता चलता है कि गुरु और शिष्य का सम्बन्ध कैसा है, गुरुओ की हमारे जीवन में कितनी महत्ता है.

मंदिरो  में कार्यक्रम:

इस खास दिन के लिए मंदिरो में खासे इंतज़ाम किये जाते है. क्यूंकि लोग अपने गुरुओ की पूजा-अर्चना करने और आशीर्वाद लेने के लिए मंदिरो की और ही प्रस्थान करते हैं. गुरु पूर्णिमा के लिए मंदिरो को सजाया भी जाता है. चारो और गुरु पूर्णिमा पर्व से कई दिन पहले ही तैयारियां शुरू कर दी जाती है.

इस उपलक्ष में मदिरों में कई दिवसीय कार्यक्रम भी आयोजित किये जाते है. जैसे कि कथा, पाठ, कीर्तन, जागरण सत्संग, प्रवचन  इत्यादि.  देश-विदेश से लोग कई-कई दिन पहले ही अपने गुरुओ के आश्रम में डेरा डाल लेते है. और सेवा में लगे रहते हैं.

कितना बड़ा गुरु:

पुराने समय के महान ऋषि थे “व्यास”. जो चारो वेदो के पहले व्याख्याता भी हुए हैं. जिनकी पूजा गुरु पूर्णिमा के दिन की जाती है. गुरु पूर्णिमा के दिन व्यास जी की पूजा के महत्व् के अनुसार इस दिन को “व्यास पूर्णिमा” भी कहा जाता है.

हमारे समाज में गुरुओ का दर्जा बहुत बड़ा है. इसकी कई मिसालें शास्त्रों में भी व्याख्यान है. प्राचीन समय से ही माना गया है कि जीवन का सही सार जानने के लिए एक सच्चे गुरु का होना आवश्यक है. जीवन में गुरु का साथ होना अच्छा मानव होने की निशानी है.  गुरु की शरण में रहने से मनुष्य को नैतिक मूल्यों का सही ज्ञान होता है. साथ ही शांति, भक्ति करने की शक्ति, अध्ययन और योग का भी ज्ञान मिलता है.

देशभर में यह पर्व बड़ी ही श्रद्धा से मनाया जाता है. जब प्राचीन समय में शिष्य अपने गुरुओ से उनके आश्रम में रहकर शिक्षा लेते थे तो इस दिन के महत्व्  के अनुसार अपने गुरुओ की पूजा करके  दान-दक्षिणा भी देते थे.
इसीलिए गुरु पूर्णिमा जैसे बड़े पर्व पर अपने गुरु का आशीर्वाद लेना मायने रखता है.

नोट: अपने गुरु का चयन करते समय बड़ी सावधानी बरतनी चाहिए. क्यूंकि आज के समय में सच्चा गुरु मिलना बहुत मुश्किल सा हो गया है. किसी पर बिना सोचे-समझे विश्वास करना आपको परेशानी में डाल सकता है.

क्या करे गुरु पूर्णिमा पर:

  • गुरु पूर्णिमा के दिन सुबह सवेरे उठकर घर की साफ़-सफाई करे.
  • स्नान करके मन ही मन अपने गुरु का मनन करते रहे.
  • साफ़-सुथरे कपडे पहने और तैयार हो जाये.
  • घर के पूजा वाले स्थान पर या किसी भी पावन जगह पर लकड़ी की एक साफ़ पाटी रख ले.
  • पाटी पर सफ़ेद रंग का साफ़ कपडा बिछा ले.
  • अब बारह-बारह रेखाएं बनाकर व्यास पीठ बना ले.
  • “गुरुपरम्परासिद्धयर्थ व्यासपूजां करिष्ये” मन्त्र से पूजा करे और संकल्प ले.
  • उसके बाद चारो दिशाओ में चावल छोड़े.
  • अब महान ऋषि और गुरुओं का नाम या मन्त्र से जाप करें.
  • इसके बाद अपने गुरु का स्मरण और पूजा करके दक्षिणा भी दे.

इसके अलावा व्यास ऋषि के लिखे हुए शास्त्रों और ग्रंथो का अध्यन भी कर सकतें हैं. और उनकी शिक्षाओं को अपने आचरण में लाने की कोशिश करें.

यह महत्वपूर्ण गुरु पर्व बड़ी ही श्रद्धा का पर्व है. इसको श्रद्धा से मनाये, लेकिन इसमें अन्धविश्वास शामिल नहीं होना चाहिए.

इस मौके पर गुरु को फूलो की माला पहनाकर, फल, फूल, वस्त्र आदि देकर आशीर्वाद प्राप्त करें.

इस दिन केवल गुरु का ही नहीं अपने माता-पिता और घर-परिवार के सभी बड़ो का आशीर्वाद ले. यह बहुत कल्याणकारी माना गया है.

तो आप इस सब तरीके से अपना गुरु पर्व मनाइये और हमें कमेंट बॉक्स में बताइये कैसा रहा आपका पवित्र दिन?

प्यारे पाठको को  गुरु पूर्णिमा की बहुत बहुत बधाइयाँ…….

विश्व पर्यावरण दिवस 5 June पर पढ़े कुछ विशेष

विश्व पर्यावरण दिवस पर पढ़े कुछ विशेष 

विश्व पर्यावरण दिवस

विश्व पर्यावरण दिवस 2017 की थीम  – The theme for 2017 is ‘Connecting People to Nature – in the city and on the land, from the poles to the equator’.

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विश्व पर्यावरण दिवस 2017 में कब मनाया जायेगा:

world environment day 2017  – 5 June – Monday – 2017 को पूरे विश्व में सेलिब्रेट किया जायेगा.
हर साल की तरह ही इस बार भी 5th June को World Environment Day सेलिब्रेट किया जायेगा.

पहली बार कब मनाया गया विश्व पर्यावरण दिवस:

विश्व पर्यावरण दिवस की शुरुवात 1972 में संयुक्त राष्ट्र महासभा  द्वारा 5 जून से 16 जून तक विश्व पर्यावरण सम्मलेन मनाने से हुई थी.

1973, 5 जून को पहला विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया.

क्या होता है पर्यावरण दिवस पर:

5 जून के आने से पहले ही दिवस को मनाने की तैयारियां शुरू हो जाती हैं. और देशो में कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किये जाते है.

  •  खूब पेड़ लगाए जाते है.
  •  एक बहुत बड़े उत्सव के रूप में मनाया जाता है.
  •  मीटिंग्स का भी आयोजन किया जाता है.
  •  पेड़ो को लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया जाता है.
  •  पर्यावरण पर चर्चा की जाती है कि और क्या अच्छा हो सकता है.
  •  पर्यावरण के मद्देनजर साल भर के लिए दिशा-निर्देश सुनिश्चित किये जाते हैं.
  •  पर्यावरण के सम्बन्ध में अधूरे पड़े कार्यो को तेज गति से निपटने के निर्देश दिए जाते हैं.
  •  पर्यावरण को सुरक्षित रखने के तौर-तरीको के विषयो पर नाटकों की भी प्रस्तुति दी जाती है.
  •  देश-विदेशो में आपसी सहयोग से पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए समझौते किये जाते हैं.
  •  समाज का हर एक व्यक्ति पर्यावरण के प्रति अपने कर्तव्य को बखूबी निभाएं. और देश को साफ़  और सुन्दर बनाने में सहयोग करने का होता है लक्ष्य.
    पर्यावरण दिवस क्यों  ?:

    लोगो में पर्यावरण को लेकर जागरूकता फ़ैलाने के मकसद से पर्यावरण दिवस मनाया जाता है.
    आम आदमी सिर्फ विकास किये हुए सुख-संसाधनों को इस्तेमाल करता है. कई बार उसको खबर भी नहीं होती कि कभी भरपाई न होने वाले बड़े नुक्सान के बाद ये संसाधन विकसित हुए है.

    इंसान जब अपने सुख के लिए विकास की राह पर चलता चला जा रहा होगा. तब उसे जरा भी अंदाजा नहीं रहा होगा कि, एक दिन इस तरह से विकास करना कितना भयानक रूप भी ले सकता है. अंधाधुंध विकास की राह पर चलते हुए मनाव ने धरती माँ का संतुलन बिगड़ा दिया.

और जब संसार में पर्यावरण जैसे बड़े मुद्दे की और ध्यान दिया गया, तो थोड़ी देर तो हो चुकी है. अब हर देश की सरकार समाधान तो निकालने की कोशिश में लगी तो है, लेकिन सोचने वाली बात है क्या पर्यावरण पूरी तरह से शुद्ध हो सकता है? जहाँ पहले साफ-शुद्ध हवा थी, कितनी हरियाली थी, गाड़ियों से निकलने वाले धुए का झंझट ही नहीं था. लोग प्रकृति के कितने करीब थे, उस वक्त में कभी लगा ही नहीं होगा की हमें मास्क पहनने की जरुरत है या बच्चो को बंद घर में रखने की जरुरत है. कितना मधुर हुआ करता था उस समय पर्यावरण. उस आबोहवा में पले-बढे लोगो के शरीर भी कितने शक्तिशाली होते थे. जब शारीरिक तौर पर भी बीमारिया ज्यादा नहीं थी.  लेकिन आज के समय में उसकी बिलकुल विपरीत परिस्थिति हो गयी है.

धरती का संतुलन बिगाड़ने की शुरुआत तो की विकसित देशो ने But अब तो सभी खामियाजा भुगत रहे है. प्रतिस्पर्धा वाले समय में परेशानी यह है कि जब बाकि के गरीब देश भी अपने देश में विकास चाहते है. तो उनको शर्तो के दायरे में लाकर खड़ा कर दिया जाता है.

हालाँकि भारत हमेशा से ही अपने प्रकृति से लगाव के नाम से जाना जाता है. But तेज गति से विकास करना तो भारत की भी जरुरत बन चली है.  But  ऐसी स्थिति में भारत को भी पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए ही अपने विकास को बढ़ावा देना होगा.  वैसे भारत ने इस और कदम भी कभी के बढ़ा दिए हैं. बस थोड़ी तेज गति की और जरुरत है.

उपाय जो पर्यावरण को बचाने में किये जा सकते हैं:
  •   ग्रीन तकनीकों को अपनाया जाये.
  •   इकोफ्रेंडली चीजों की तरफ बढ़ना होगा.
  •   प्रदुषण रोधी तकनीक विकसित की जाये.
  •   धरती पर बढ़ रहे दबाव को जल्द ही घटाना होगा.
  •   क्यूँ ना कम खपत वाली मशीने विकसित की जाये.
  •   ज्यादा से ज्यादा पौधरोपण करना होगा, और उनकी देखभाल भी करनी होगी.
         पर्यावरण से होने वाले नुकसान:

ग्लेशियर पिघल रहें हैं.
बीमारिया ज्यादा फ़ैल रही हैं.
नदियों में पानी सूखने लगा है.
संसार में ना जाने कितनी जगहों पर सूखे से लोग मर रहें हैं.
ग्लोबल वार्मिंग की समस्या दिन-प्रतिदिन बड़ा रूप लेती जा रही है.

क्या होने चाहिए विश्व पर्यावरण दिवस के मायने (मेरे विचार से):

देखो दोस्तों, यूँ तो सरकारें अपनी अपनी तरफ से पुरजोर कोशिश करती है, कि दुनिया भर में पर्यावरण सम्बंधित समस्याएं आये ही ना. चारो और का environment खुशनुमा बना रहे. पर्यावरण की वजह से कोई परेशानी ना झेलनी पड़े.

लेकिन अपनी और से भी हम सबको पर्यावरण के लिए जागना होगा. प्रकृति ने जितना प्यार हमें दिया जितना शुद्धता के रूप में  धन  दिया.  वो सब तो हम सब मिलकर भी लौटा नहीं सकते But कुछ अच्छे की और कुछ  अच्छी कोशिश तो कर ही सकते हैं. क्यूंकि अगर ऐसे ही विकास की दौड़ में लगे रहे, तो इस विकास से लोगो का तो भला हो ना हो, परन्तु धरती का विनाश तो जल्दी ही संभव है.

  •    इसलिए, पानी बचाने में योगदान दें.
  •    कार पूल की सर्विस प्रयोग करें.
  •    अपने आस-पास सफाई का ध्यान रखे.
  •    हफ्ते में कम से कम एक दिन तो वाहन ना चलाये.
  •    लोगो को पर्यावरण से होने वाले फायदें के बारे में जागरूक करें.
  •    एयरकंडीशनर, कूलर, पंखों का इस्तेमाल जरुरत के समय पर ही करे.
  •    पेड़-पौधे लगाए और उनकी देख-रेख की जिम्मेदारी लगाने से भी पहले लें.
  •    समाज में हर किसी को पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी.
  •    पर्यावरण रोधी तकनीक को विकसित करने के सुझाव सरकार को दे. या खुद ही तकनीक विकसित करें.हम भारत वासियों को अपने भारत देश की पहले जैसी प्रकृति लौटाने में मदद करनी होगी.

तो…… कम से कम पर्यावरण को महफूज रखने की दिशा में एक छोटा सा संकल्प तो लें. और उसे पूरा करें.

साफ़ भारत, शुद्ध भारत 
ग्रीन भारत, सुन्दर भारत

Doctors day……..अच्छा……..तो इसलिए मनाते हैं

Happy Doctors day  : Happy Doctors day : Happy Doctors day

Doctors day पर सबसे पहले तो चिकित्सा को अपना पेशा बनाने वाले लोगों को बहुत- बहुत सम्मान. जिन चिकित्सकों ने वास्तव में अपने मरीज का विश्वास जीता है. दिल से समाज की सेवा की है. उन चिकित्सकों के नाम यह दिन.

Doctors day

तो ऐसी शख्सियत है रामनाथ कोविंद

किनकी याद में मनाते हैं Doctors day:

ऐसे ही भारत के एक ग्रेट चिकित्सक हुए हैं. जिनका नाम बिधानचंद्र राय था. इनका जन्मदिन 1 जुलाई को मनाया जाता है. डॉक्टर बिधान चंद्र रॉय पटना जिले के रहने वाले थे. सन 1882 में उनका जन्म वहीं पर हुआ था.

Doctors day

यह महान हस्ती एक ऐसे डॉक्टर थे. जिन्होंने अपना सारा जीवन समाज सेवा में समर्पित किया. और इनकी मृत्यु भी 80 साल की उम्र में हो गई थी. इनकी मृत्यु भी 1 जुलाई को 1962 में हुई थी.  डॉक्टर बिधान चंद्र भारत देश के महान स्वतंत्रता सेनानी भी रहे हैं. जिनका नाम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के साथ असहयोग आंदोलन में प्रमुख रूप से जुड़ा है. वह शुरू से एक होनहार छात्र रहे हैं. इनकी मेडिकल शिक्षा कोलकाता मेडिकल स्कूल से हुई थी. यह इतने होशियार थे कि अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए इनको स्कॉलरशिप भी मिली थी. अपनी पूरी पढ़ाई पढ़ने के बाद सन 1911 में उन्होंने अपना डॉक्टरी का पेशा आरंभ कर दिया था.

इन्होंने डॉक्टर का पेशा दूसरों की सेवा करने के लिए ही शुरू किया था. बात उन दिनों की है जब भारत देश की आजादी के लिए महात्मा गांधी और दूसरे गांधीजी के समर्थक लोग भूख हड़ताल पर या किसी धरने, आंदोलन पर बैठ जाते थे. तब डॉक्टर बिधान चंद्र ही उनकी देखभाल करते थे.  भारतीय चिकित्सक इतिहास में उनका नाम अमर रहा है. बहुत लोगों की जाने इनके द्वारा बचाई गई थी. और इनकी मुफ्त सेवा भी लोगों को मिलती थी. उनका यही जज्बा मतलब देश की उन्नति में आगे रहने की चाह और लोगों की दिल से सेवा करना उन्हें राजनीति में खींच लाई थी. राष्ट्रपिता गांधी जी के कहने पर ही डॉक्टर राय कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए. बता दें डॉक्टर Roy बंगाल के मुख्यमंत्री भी रहे हैं. इनको देश के सर्वोच्च सम्मान यानी भारत रत्न से भी सम्मानित किया जा चुका है. भारत रत्न उनको 1961 में मिला था. तो इसी तरह ही उनकी याद में हर वर्ष 1 जुलाई को Doctors day सेलिब्रेट करते हैं.

डॉक्टर लाइन को अपना पेशा बनाने का जुनून जिन लोगों के सर पर होता है, वही जानते हैं कि इसमें अपना भविष्य बनाने में कितनी मेहनत लगती है. लेकिन उन्हें पता है कि उनका भविष्य ऊंचाइयों को छूने वाला है. और वह यह भी जानते हैं कि कड़ी मेहनत करने के बाद उन्हें लोगों की कितनी दुआएं मिलने वाली हैं. क्योंकि समाज में एक डॉक्टर का कद बहुत बड़ा होता है. इन चिकित्सकों में ही इतनी क्षमता है कि यह बिस्तर पर पड़े हुए आदमी को चला सकते हैं. एक अंधे को दुनिया को दिखा सकते हैं. मरते मरते आदमी को जीवन दान दे सकते हैं. हमारे चिकित्सकों में स्किल्स की कोई कमी नहीं है. बस कमी है तो सिर्फ नैतिक मूल्यों की जिनकी परवाह होना लगभग बंद सही हो गया है.

इस धरती पर डॉक्टर को वास्तव में भगवान का दूसरा रूप होने का दर्जा मिला हुआ है.  इस समय भी समाज में ऐसे चिकित्सकों की संख्या काफी अधिक है जो दिन रात की परवाह किए बिना अपने मरीजों को पूरी देखरेख देते हैं. चिकित्सक खुद में और अपने मरीजों में विश्वास जगाते हैं, कि वह बहुत जल्दी स्वस्थ हो जाएंगे. बड़ी से बड़ी बीमारी में सफलता पाने के बहुत उदाहरण है.

ईश्वर का द्वितीय रूप कहे जाने वाले चिकित्सक आखिर क्यों  इस दर्जे का अपमान करते हैं. किसी के पैसे और विश्वास के साथ खिलवाड़ करने का उनका क्या मतलब बनता है? कुछ लोग सिर्फ पैसा कमाने के लिए डॉक्टर बनते हैं. उन्हें समझ नहीं आता कौन गरीब है कौन अमीर है सिर्फ उनको अपनी भारी भरकम फीस से मतलब होता है. लेकिन एक डॉक्टर और मरीज के बीच के इस अंतराल को विश्वास और इमानदारी के साथ भरना होगा.

लेकिन दूसरी तरफ अभी भी बहुत लोग ऐसे हैं जो पैसे के साथ-साथ समाज सेवा में विश्वास रखते हैं. वह जानते हैं कि इस समाज को डॉक्टर की कितनी जरूरत है. दिन पर दिन गंभीर बीमारियां अपनी जकड़ बनाती जा रही है. ऐसे में समाज को उन चिकित्सकों की जरूरत है जो अपने बल पर समाज के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं. चिकित्सा एक ऐसा पेशा है जिसमें एक मरीज पूरी तरह से चिकित्सक पर निर्भर हो जाता है. ऐसे में कई जगह देखा गया है कि मरीज का चिकित्सक पर भरोसा बस सोचने मात्र का ही रह जाता है.  क्योंकि आज ऐसी ही छवि बनी हुई है कि डॉक्टर्स मरीजों से फालतू पैसे ऐंठते हैं.  इसी कदम पर आकर दोनों को सोच बदलने की जरूरत है.

न जाने हर दिन कितने मरीज चिकित्सक के अभाव में दम तोड़ देते हैं. और कुछ, समय पर डॉक्टर के ना मिलने पर जिंदगी भर के लिए विकलांगता के साथ जीने के लिए मजबूर हो जाते हैं. इस दुनिया में बहुत कम परिवार ऐसे हैं जिसमें डॉक्टर की जरूरत बहुत कम पड़ती. वही ऐसे लोग हैं जो स्वास्थ्य को लेकर हमेशा सतर्क रहते हैं. उनमें जागरूकता है. वह जानते हैं सेहत के लिए क्या अच्छा है और क्या बुरा है. तो इस देश को भी उसी सतर्कता की लाइन में लाकर खड़ा करना होगा कि सभी स्वास्थ्य के प्रति सचेत हो सकें.

मेरे ख्याल से आजकल ज्यादा बीमारियां इसलिए बढ़ रही हैं क्योंकि समाज में बीमारियों के खिलाफ जागरूकता नहीं है. सोचने वाली बात है कि जागरुकता कौन बनाए? इसलिए चिकित्सकों को पैसों के दायरे से बाहर निकल कर समाज के लिए कुछ अच्छे कार्य करने की जरूरत है. तभी हमारा परिवार, हमारा समाज, हमारा देश, हमारी दुनिया स्वस्थ रह पाएंगे.

एक समय था जब चिकित्सकों को समाज में बहुत ऊंचा स्थान दिया जाता था. उनका बहुत सम्मान किया जाता था क्योंकि उस समय का चिकित्सक ईमानदार, अपने कर्तव्य के प्रति समर्पित और समाज सेवा के भाव से ओतप्रोत था. लेकिन आज के समय में स्थिति इसका बिल्कुल विपरीत है. आज चिकित्सक एक दूसरे से आगे निकलने की अंधी दौड़ में में लगे हुए हैं और भूल रहे हैं कि चिकित्सक का दर्जा समाज में कितना बड़ा है. उन्हें समझना चाहिए कि उनकी थोड़ी सी मेहनत और ईमानदारी से इस समाज का रंग बदल सकता है.

आज के चिकित्सक सरकारी चिकित्सक होने के साथ-साथ प्राइवेट में भी अलग से प्रेक्टिस करते हैं. या अपनी सेवाएं देते रहते हैं. और सेवाओं के बदले पैसे लेते हैं. इस बात से साफ जाहिर होता है कि यह सब पैसे के पीछे ही भाग रहे हैं. और कहीं ना कहीं अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ते जा रहे हैं. सब को गलत कहना तो सही नहीं होगा लेकिन आए दिन ऐसे मामलों का व्याख्यान होता रहता है.

आज का समय इतना खराब है कि आम आदमी को चिकित्सकों पर भरोसा करते हुए डर लगता है. चिकित्सकों के जरिए से समाज के लोग एक तरह से सहम से गए हैं कि वह ज्यादा पैसे लेंगे. अब चिकित्सकों की ही जिम्मेदारी बनती है कि कलंकित हुए चिकित्सा के पेशे को की छवि को बेदाग बनाने की पुरजोर कोशिश करें. इस मामले में पारदर्शिता आनी चाहिए.  गरीब आदमी अस्पताल के महंगे खर्च का बोझ नहीं उठा सकता है. गरीबों को दया दृष्टि से देखने की जरूरत है.

डॉक्टर को चाहिए कि वह कुछ दिनों के अंतराल पर अपनी सेवा गरीबों को दें. फ्री में उनको स्वास्थ्य के लिए सही सलाह दें. उनसे एक रिश्ता कायम करें  जिससे मरीज को भी लगे कि चिकित्सक भी उनके परिवार के सदस्य के समान ही है. दूसरी और मरीजों को भी डॉक्टर के प्रति विश्वास रखना होगा.  उन्हें भी समझना होगा कि कुछ सुविधाएं लेने के लिए पैसे तो देने ही होंगे. लेकिन हां गलत बर्ताव सहन नहीं करना है.

Doctors day पर बात करें तो,अभी सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की बहुत जगह खाली है. इस पर देश की सरकार को ध्यान देना अनिवार्य बनता है. चिकित्सकों की भर्ती समय-समय पर खाली पड़ी जगह के हिसाब से होनी चाहिए. सरकार को ध्यान देना होगा कि, अचानक चिकित्सक हड़ताल पर ना जाएं. और अगर डॉक्टर हड़ताल पर जाते भी हैं तो अस्पताल में उनकी जगह दूसरे डॉक्टर मौजूद होने चाहिए. जिससे अस्पतालों का काम ठप्प ना पड़े. हड़ताल पर जाने से मरीजों और अस्पतालों का बहुत बड़ा नुकसान हो जाता है. सरकार को चिकित्सकों की जरूरतों का पूरा ध्यान रखना चाहिए. सब के सहयोग से ही एक अच्छा भारत देश उभर कर सामने आएगा.

इस बार Doctors day को ऐसे ही नॉर्मल दिन ना बनाएं. सोचे कि आपसे कहां गलती हुई है, और उस गलती को सुधारने की पूरी कोशिश करें. अपने अंदर एक नया जज्बा नया साहस पैदा करें. और खुद को अपने शुरुआती शब्द याद दिलाएं कि आपने अपने पेशे को साफ-सुथरा बनाने के लिए एक कसम उठाई थी.

जब कोई व्यक्ति चिकित्सा की लाइन में जाने की सोचता है. तो उसके मन में समाज सेवा के प्रति कुछ भाव होते हैं. जिन से प्रेरित होकर वह अपना सफर पूरा करता है. और कसम भी खाता है कि वह दिल से काम करेगा, नैतिक मूल्य को हमेशा ध्यान में रखेगा. लेकिन कुछ चिकित्सक अपने सफ़र के दौरान इस बात को भूल जाते हैं. और पथ भ्रष्ट हो जाते हैं.  तो मौका है एक बार फिर से अपने अंतर्मन की वही बातें दोहराने का और अपने आप को एक बेहतर चिकित्सक साबित करने का.
इस आर्टिकल के द्वारा किसी की भावनाओं को आहत करने का उद्देश्य कतई नहीं है.

तो फ्रेंड्स आपको Doctors day पर आर्टिकल कैसा लगा हमें कमेंट करके जरूर बताएं

Happy Doctors day !!!
खुद स्वस्थ रहे, दूसरों को स्वस्थ रखे!

 

योग दिवस पर कविता

एक योगा का दिन भी आता है
अपने संग खुशियां लाता है
और कहता है कि,

international yoga day in Hindi

“गर रोज करोगे योगा तुम
तो अच्छे बन ही जाओगे
बीमारियों से रहोगे दूर
सुन्दर शरीर तुम पाओगे”

“अगर रोज थोड़ी देर करोगे योगा
फायदा तो तुम्हे अवश्य होगा
तन-मन की स्फूर्ति से
काम तुम्हारा सफल होगा”

“रामदेव बाबा से सीखकर
दूसरो को भी सावधान करो
जीवन है छोटा सा तुम्हारा
इसमें शुद्ध प्राण तुम भरो”

“समा न जाये  दुनिया सारी
प्रदुषण के आगोश में
आज बचा लो अपनों को तुम
लेकर योग, नित प्रयोग में”

“किसने ऐसा सोचा है कि
जरा इधर हुए, जरा उधर हुए
जरा सीधे बैठे, जरा उलटे लेटे
लेकिन हकीकत……………
यही जग में योगा कहलाया है”

“जापान, अमेरिका रूस चाइना
योग दिवस सब मनाते हैं
भारत में योग का जन्म हुआ
यूँ ही भारतवासी इतराते हैं”

“जब मोदी जी के प्रयासों से
संयुक्त राष्ट्र भी संग आया है
तब  177 देशो में भारत ने
अपना  नाम कराया है”

“वही 21 जून का दिन,  फिर से है आ गया
चारो तरफ का शोर है, चारो तरफ की तैयारी
जनता सारी फू-फू  करके कहती रहती
अनुलोम विलोम व् प्राणायाम से, दूर जाएगी बीमारी”

Happy Yoga Day!!!

 

 

 

 

 

 

पर्यावण दिवस पर कविता

कुछ सवाल पूछती एक छोटी सी कविता 
है किसी के पास जवाब??

क्यूँ पर्यावरण ही पर्यावरण चारों तरफ हो रहा
क्यूँ ना, इस को संजो कर तुम रख सके
“क्यूँ वनो को तुमने काट दिया
क्यूँ धरती मां को सूना बना दिया
क्यूँ पेड़ों की पुकार तुम सुनते नहीं
क्यूँ इनसे प्यार तुम करते नहीं”
क्यूँ इनको संजोकर तुम रखते नहीं……………
“कब देश की मिट्टी सोना उगलेगी
कब हरियाली वो छायेगी
कब प्रदूषण को मिलकर, जनता मार भगाएगी
कब सरकार प्रदूषण मुक्त, भारत अपना लाएगी”
कब पर्यावरण की मार से सब को सुरक्षित कर पाएगी …………..
“कैसे छाया वाले आंगन में तुम रह पाओगे
कैसे इतने मीठे फल-फूल तुम खाओगे
कैसे वृक्षों से सबको प्यार हो
कैसे इस दुनिया का उद्धार हो”
तो कहो दूषित पर्यावरण के लिए सब जिम्मेदार हो…………
“क्या ऐसे ही सब चलता जाएगा
क्या हर इंसान इसकी कीमत चुकाएगा
क्या पेड़ों को संरक्षण कोई देगा
क्या कोई ऐसा दिन भी आएगा”
क्या कोई पर्यावरण की रक्षा कर पाएगा…………
“डर है कहीं ये सवाल, सवाल ना रह जाए
इनके उत्तर मिलना मुश्किल ना हो जाए
अरे, मुश्किल तो तब होगा, जब दुनिया में कुछ हो ही नहीं
अभी तो मेरे भारत में होशियार लोगों की कमी नहीं “
कमी नहीं, कमी नहीं………….

“तो सब मिलकर पर्यावरण को बचाने के कदम उठाओ
रहना सब को यही है सब अपनी जिम्मेदारी निभाओ”

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस हिंदी में

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस:

योग दिवस पर कविता

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय स्तर का सबसे सुंदर और सबसे बड़ा पर्व है. योग दिवस पूरे विश्व में बड़े जोरों शोरों की तैयारियों के साथ आयोजित किया जाता है. प्राचीन समय में योग सबसे पहले भारत की भूमि से शुरू होकर, आज पूरे विश्व की पहचान बन चुका है. पिछले कुछ समय से देश विदेशों में  योग का प्रचलन बहुत प्रसिद्ध हुआ है. दुनिया भर में सरकारों की तरफ से मनाए जाने वाले योग दिवस को हर साल के जून महीने की 21 तारीख को मनाया जाता है.  इस दिन के लिए तैयारियां काफी पहले से शुरू हो जाती है.  जगह-जगह योग के आयोजन किए जाते हैं, योग शिविर लगाए जाते हैं. और 21 तारीख के बाद तक भी यह कार्यक्रम चलते रहते हैं. भारत देश में सरकार के प्रतिनिधि कई राज्यों में जाकर योग दिवस के कार्यक्रम में हिस्सा लेते हैं.

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस

हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी भी योग शिविर में हिस्सा लेते हैं. यू तो प्रधानमंत्री मोदी हमेशा अपने दिन की शुरुआत योग से ही करते हैं. और वह अक्सर अपने संदेश में लोगों को योग करने के लिए प्रेरित करते हैं. हर साल मोदी योग दिवस की शुरुआत कुछ अलग करते हैं. इस बार भी उन्होंने 1 जून से हर दिन अपने ट्विटर अकाउंट से  एक योग के बारे में लोगों को रूबरू कराया है.  योगासन के नाम के साथ-साथ, योग के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी भी साझा है. और उससे होने वाले लाभ के बारे में भी लोगों को बताया है.
देश-विदेशों के लिए योग दिवस अब एक महत्वपूर्ण दिन बन चुका है. देश-विदेश की सरकारें अब इस दिन को एक सेलिब्रेशन के रूप में मनाती हैं.

क्या होता है योग का मतलब?:

योग मतलब जोड़ना होता है. योग शब्द संस्कृत से लिया हुआ है. संस्कृत धातु  युज से निकाला गया है, योग शब्द. संस्कृत में योग शब्द युज से संबंधित माना गया है.

कैसे मनाया गया अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस?:

योग गुरु बाबा रामदेव को कौन नहीं जानता वह शख्स बाबा रामदेव ही है. जिन्होंने योग को पहाड़ों और गुफाओं से निकालकर आम आदमी तक पहुंचाया है. भारत देश के नागरिक हैं. और वह पूरे विश्व में योग गुरु के नाम से प्रसिद्ध है. उनके इस काम को और अधिक सफल बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने उनका साथ दिया. उन्होंने आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग दिवस को मनाने का प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र संघ में जारी किया. जिस पर एक साथ 177 देशों ने बहुत कम समय में अपनी सहमति दी. और 21 जून अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के नाम से प्रचलित हो गया है.

स्वामी रामदेव जी ने योग के हर प्रारूप को बखूबी बताया है. जहां योग से मानसिक शांति मिलती है, वही किसी भी प्रकार की बीमारी में योग करना बहुत लाभकारी होता है.

Father’s Day 2017 in HIndi

Father’s Day 2017 (फादर्स डे 2017)

Father's Day 2017

Father’s Day 2017….हर साल जून के तीसरे रविवार को मनाया जाने वाला त्यौहार यानी “फादर्स डे”! जी हाँ हम बात कर रहे हैं एक अनोखे दिवस की जिसको सारे जहाँ में फादर्स डे के नाम से जाना जाता हैं. यूँ तो हर दिन अपने आप में कोई न कोई छोटा-बड़ा सेलिब्रेशन लेकर आता है. लेकिन जून का तीसरा संडे (रविवार) अपने आप में बहुत खास है. इस दिन सब अपने पिता को याद करते हैं, उपहार देते हैं, उनके संग अच्छा समय व्यतीत करते हैं, उन्हें कहीं दूर घूमाने ले जाते हैं या जो मन करता है वो करते हैं.
ये तो हम सभी जानते हैं, कि हम सबकी लाइफ में हमारे पिता का कितना बड़ा स्थान होता हैं. एक ऐसा स्थान जिसको पिता के अलावा कोई भर नहीं सकता.

जब एक बच्चा माँ के गर्भ में होता है, तो उसके होने की सबसे ज्यादा परवाह उसके माँ-बाप को ही होती है. माँ तो फिर भी गर्भ में बच्चे की हलचल महसूस कर लेती है. परन्तु एक बाप सिर्फ इंतज़ार ही करता है कि, कब उनका बच्चा उनकी गोद में आये. हर पिता की अपने बच्चे के लिए ये ही चाह होती है.  जब एक बच्चे का जन्म होता है, तो उसे सबसे पहले अपने माता-पिता का ही स्पर्श मिलता है. बच्चे के दुनिया में आने की सबसे ज्यादा ख़ुशी उसके माँ-बाप को ही होती है. आपके पिता आपके दुनिया में आने का इतना बड़ा जश्न मनाते हैं. तो अब आपकी बारी है उनको खुशियां देने की.

दोस्तों सबके पिता एक सपना तो देखते ही है कि, उनका बच्चा बड़ा होकर उनका नाम रोशन करे. बुढ़ापे में उनकी पूरी देखभाल करे, उनकी इच्छाओं का ख्याल रखें. एक सफल आदमी बने जो समाज में इज्जत पाए.

तो चलिए इस बार 18 जून 2017 यानि फादर्स डे पर देखते हैं कि फादर्स डे को हम कैसे सेलिब्रेट कर सकते हैं मैं आपको कुछ आइडियास दे रही हूं. जिनको अप्लाई करके आप अपने दिन को एक यादगार दिन के रूप में संजो सकते हैं.

सबसे पहले, तो फादर्स डे से कुछ दिन पहले अपने पिता की कुछ इच्छाओं को जानना शुरू कर दें कि इन दिनों उनकी कौनसी इच्छाएं मुख्य हैं या वह क्या चाहते हैं. आप उनको एक डायरी में नोट कर लीजिए. फिर उनमें से जो आपको अपने टाइम और पैसे के हिसाब से सही लगे अपने पिता की इच्छाओं को पूरा कीजिए.
वैसे तो मां-बाप की कोई खास बड़ी इच्छा नहीं होती वह सिर्फ इतना चाहते हैं, कि उनके बच्चे हमेशा उनके साथ रहे. और उनका ख्याल रखें. परंतु फिर भी इस खास मौके पर उनके मन को टटोलने की कोशिश करें. और हो सके तो जो उनकी इच्छा है अवश्य पूरी करें.  और अगर उनकी कोई इच्छा नहीं है, तो आप उनके लिए कुछ भी अच्छा सा खुद ही प्लान करे. लेकिन ध्यान रहे कि आप उनकी पसंद और ना पसंद का थोड़ा ख्याल रखें.

तो चलिए दोस्तों मैं आपको कुछ ideas दे रही हूँ. जिनसे की आप भी अपने पिता का दिन अच्छा कर सकते हैं. कुछ अच्छे आइडियाज जानने के लिए इस आर्टिकल को पूरा पढ़िए. और अपने friends & relatives के साथ शेयर भी अवश्य कीजिए.

फादर्स डे पर आउटिंग:

अगर आपके फादर घर से बहार जाने में खुश हैं, तो उनको कहीं घूमाने का प्रोग्राम बनाइये. जहां वह जाना पसंद करते हो, उनको वहां लेकर जाइए. और आप यहां ध्यान रखें कि आप भी उनके साथ जाएं. उनको बहुत अच्छा लगेगा. घूमने जाने की जगह निश्चित करने से पहले ध्यान रखें कि वहां का मौसम कैसा है, आसपास का माहौल सही बना हुआ है या नहीं, जाने से पहले कुछ खास तैयारी अवश्य कर लें.

घर पर फादर्स डे सेलिब्रेशन:

अगर आप किन्हीं कारणों से अपने माता-पिता को बाहर घुमाने नहीं ले जा सकते हैं, तो इसमें परेशान होने वाली कोई बात नहीं है. आप घर पर भी फादर्स डे, अपने फादर के साथ सेलिब्रेट कर सकते हैं. घर पर फादर्स डे सेलिब्रेट करने का एक सबसे बड़ा फायदा है, कि यह थोड़ी सी मेहनत और पैसे भी थोड़े से ही मांगता है. आप बहुत थोड़े खर्च में अपनी फैमिली को खुश कर सकते हैं.
इसके लिए आपको सिर्फ कुछ रेसिपीज का चुनाव करना होगा. और घर को सजाना होगा. चाहे तो के कटिंग का प्रोग्राम भी रख सकते हैं. साथ में अपने फादर को कोई अच्छा गिफ्ट भी दे सकते हैं.

फैमिली फिल्म फॉर फैमिली:

आपके घर के आसपास के सिनेमाघरों में अगर कोई फैमिली फिल्म लगी है. तो देर किस बात की झट से अपनी मूवी टिकट बुक कीजिए. और अपनी फैमिली को लेकर पहुंच जाइए. और फिल्म का आनंद लीजिए . साथ में उनकी पसंद की शॉपिंग भी करा सकते हैं. क्यों…?  तो हो गया ना एक अच्छा पिकनिक डे.

गिफ्ट देकर खिला दें उनका चेहरा:

तोहफा देना किसी के भी चेहरे पर स्माइल ला सकता है. तोहफा देने से रिश्ते भी मजबूत होते हैं. तोहफा लेने वाले और देने वाले दोनों के दिलों में एक दूसरे के प्रति सम्मान और समर्पण की भावना बढ़ जाती है.
फादर्स डे पर बाजार में अनेको गिफ्ट होते हैं. कोई भी एक अच्छा सा उपहार का चुनाव करके अपने माता-पिता को दिया जा सकता है. आप चाहे तो एक फैमिली फोटो फ्रेम करके उनको उपहार स्वरुप दे सकते हैं.

कुछ पुरानी यादों के साथ:

अगर आप वास्तव में चाहते हैं कि इस दिन आपके पिता और माता खुश रहे या आप अपने माता पिता को खुशी दे सके. तो उनके साथ आप समय बिताएं. उनसे बातें करें उनके और अपने जीवन के अनुभवों को उनसे साझा करें. और आप भी उनका अनुभव अपने जीवन में उतारने की कोशिश करें. ध्यान रखें, उन्होंने दुनिया को आपसे ज्यादा जाना है. इस दिन आप अपने कुछ पुराने फोटो एल्बम निकाल कर देख सकते हैं. इन फोटो को खींचने के वक्त के पलों को फिर से दोहराएं, कुछ पुरानी यादें ताजा हो जाएंगी.

दोस्तों यह तो छोटे-छोटे बहाने हैं. जिनसे परिवार में खुशियों के पल लाए जा सकते हैं. लेकिन सबको ध्यान रखना होगा कि, अपने माता-पिता को कभी अकेला ना छोड़ें. उन्होंने जीवन में आप ही को अपना सब कुछ दिया है, तो अब आपकी बारी है. माता-पिता वह सब कुछ तो नहीं मांगते जो उन्होंने आपको दिया है. लेकिन बस वह आपका साथ जरूर मांगते हैं. उन्होंने तुम्हारे लिए इतने सारे सपने देखे हैं एक सपना तुम भी उनके लिए देख लो.

यूं तो अवसर पार्टी करने के बहाने हम लोग ढूंढते रहते हैं लेकिन वास्तव में दिल को खुश करने वाली पार्टी का मतलब अपने परिवार के साथ ही बनता है. यह छोटे-छोटे तरीके ही अपनों को खुशियां देने के लिए काफी होते हैं.
यूं तो अक्सर पार्टी करने के बहाने हम लोग ढूंढते रहते हैं. लेकिन वास्तव में दिल को खुश करने वाली पार्टी का मतलब अपने परिवार के साथ ही बनता है. इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में थोड़ा सा टाइम अपनों के लिए जरूर निकालें. अपने बच्चों को भी इस बात से अवगत कराएं कि, आप अपने पिता से कितना प्यार करते हैं. आप अपने माता-पिता की जरूरतों का पूरा ख्याल रखते हैं. क्योंकि कल को आपके बच्चे भी बड़े होकर आप ही की तरह सम्मान देंगे.
जैसा व्यवहार आप अपने बच्चों से अपने लिए चाहते हैं, वैसा ही अपने मां-बाप के लिए आप भी करें. ध्यान रखना होगा कि आपके बच्चे आपको देखकर ही बड़े हो रहे हैं. अपने बच्चों में अच्छे संस्कार भरे ताकि पीढ़ी-दर-पीढ़ी आपके संस्कार की विरासत एक दूसरे हाथों में सौंपी जा सके.

देखना कितना मासूम सा होता है पिता:

अपने बच्चों की तकलीफ पर खुद रोता है, परंतु अपने बच्चों के अंदर फिर भी साहस भरता है वो.
हर पल,अपने से दूर रह रहे बच्चों के फोन का इंतजार करता है वो.
कितनी भी धूप हो, बारिश हो, सर्दी हो पर तुम्हारे लिए कमा के लाता है वो.
खुद मज़बूरी में रहकर तुमको बड़ा आदमी बनाता है वो.

“उनके सपने कभी चूर-चूर ना करना
उनको कभी अपने से दूर भी ना रखना”

फादर्स डे गिफ्ट आइडियाज

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