विराट कोहली से जुडी रोचक बातें आपको कर देगी हैरान

विराट कोहली, भारतीय क्रिकेट टीम के युवा और सबसे तेज़ी से उभरे खिलाड़ियों में इनका नाम आता है। कोहली भारतीय टीम में सचिन और धोनी के बाद देश के सबसे चाहते खिलाडी है। उनके फँस का प्यार उन पर खूब बरसता है। ऐसा नहीं है उनके चाहने वाले सिर्फ इंडिया में है बल्कि विदेशो में विराट के चाहने वाले बहुत है।

विराट कोहली के बारे में तो वैसे आप सभी जानते हो पर जो बातें उनके बारे में हम बताएंगे शायद ही आप जानते होंगे।

विराट कोहली के Unknown Fact:

1. विराट को प्यार से ‘चीकू’ कहकर बुलाया जाता है। ये उनका निकनेम है जो बचपन में उनके कोच अजीत चौधरी ने दिया था।

Virat Kohli looking handsome
विराट कोहली का स्टाइलिश लुक

2. दूसरे भारतीय खिलाड़ियों को पीछे छोड़ते हुए विराट ने सबसे तेज शतक लगाने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एकदिवसीय मैच में 52 गेंदों पर 100 रन बनाए थे।

3. विराट कोहली टैटू के बनवाने के बड़े शौकीन हैं। उन्होंने अपने शरीर पर चार टैटू बनवाएं हैं। समुराई यौद्धा वाला टैटू उन्हें सबसे ज्यादा पसंद है।

विराट कोहली
कोहली की बॉडी पर चार टैटू बने है

 4. 2006 में रंजी ट्रॉफी के एक मैच में कर्नाटका के खिलाफ खेलते हुए उनके पिता प्रेम कोहली का निधन हो गया था। फिर भी खेल भावना दिखाते हुए उन्होंने टीम को नहीं छोड़ा और दिल्ली की तरफ से अपनी टीम को Follow on से बचाया।

  5. विराट कोहली को उनकी बेहतरीन फैशन सेंस के लिए भी जाना जाता हैं। उनका नाम दुनिया के      10 बेहतरीन कपड़े पहनने वाले शख्सों में शामिल हैं। इस लिस्ट में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का नाम भी शामिल है।

  6. विराट कोहली की लड़कियों में लोकप्रियता का अलाम है। उन्हें खून से लिखे प्रेम पत्र मिलना एक सामान्य बात हो गई है।

Virat kohli
विराट कोहली, भारतीय क्रिकेट टीम के युवा और सबसे तेज़ी से उभरे है

  7.  विराट जब छोटे थे तो उन्हें करिश्मा कपूर को काफ़ी पसंद करते थे।

  8. वैसे तो विराट को स्वादिष्ट खाना पसंद है। लेकिन जब वो घर पर होते है तो उन्हें अपनी मम्मी के हाथों की बनी मटन बिरयानी और खीर पसंद है।

 9. 23 साल की छोटी ही उम्र में 2012 में विराट कोहली ने ICC का क्रिकेटर ऑफ द ईयर का खिताब जीता था।

विराट कोहली के बारे में तो वैसे आप सभी जानते हो पर जो बातें उनके बारे में हम बताएंगे शायद ही आप जानते होंगे

क्रिकेटर ज़हीरऔर एक्ट्रेस सागरिका चोरी- चुपके बंधे शादी के बंधन में

ज़हीर और सागरिका, भारतीय क्रिकेट टीम के हॉट बैचलर्स में से एक ज़ाहिर खान कल (23 नोवेम्बर 2017 )एक्ट्रेस सागरिका  के साथ शादी के बंधन में बंध गए। हो गए न आप भी ये खबर सुनकर, लेकिन ये सच है अपनी फीमेल फैंस का दिल तोड़ते हुए टीम इंडिया का ये बॉलर ने चोरी-चुपकेअपनी प्रेमिका एक्ट्रेस सागरिका घाटके से कोर्ट मैरिज कर ली।

ज़हीर और सागरिका:

Beautiful Couple
Cricketer Zaheer Khan and Sagarika

ज़हीर खान इंडियन क्रिकेट टीम के एक फ़ास्ट बॉलर है। ज़हीर को दोनों तरीके से गेंद को स्विंग करने की वजह से जाना जाता है। टीम इंडिया के Hot and Handsome  ज़हीर खान की इसी अदा पर सब फ़िदा है। वही सागरिका बॉलीवुड की एक खूबसूरत एक्ट्रेस है। आपको शाहरुख़ खान की हिट फिल्म “चक दे इंडिया” तो याद ही होगी तो उसमे सागरिका अहम किरदार में नज़र आयी थी।

ज़हीर और सागरिका की कॉकटेल पार्टी:

ज़हीर और सागरिका की कॉकटेल पार्टी
ज़हीर और सागरिका की कॉकटेल पार्टी

दोनों ने शादी तो दुनिया की नज़रो से बचा कर, कर ली ,लेकिन उसके बाद दोनों ने अपने दोस्तों और खास लोगो के लिए गुरुवार की शाम कॉकटेल पार्टी का आयोजन किया। मुंबई के एक पांच सितारा होटल में कॉकटेल पार्टी रखी गई। ज़हीर खान ब्लैक ब्लेजर में हैंडसम लग रहे थे। वहीं सागरिका घाटगे हल्के पिंक शेड की साड़ी में काफी खूबसूरत पहन लग रही थी।

शादी में पहुंचे ये सितारे:

सागरिका के साथ “चक दे इंडिया” में काम कर चुकी विद्या मालवडे शादी के कामो में काफी सक्रिय रहीं। पार्टी में यह दोनों खासतौर से मौजूद रहीं। टीम इंडिया के पूर्व बॉलरऔर ज़हीर के अच्छे दोस्त आशीष नेहरा भी अपनी पत्नी के साथ दोनों की शादी में पहुंचे थे।

रिसेप्शन पार्टी:

नए वैवाहिक जोड़े का मेंहदी फंक्शन रविवार को पूरा किया जाएगा। इसके बाद सोमवार 27 नवंबर को मुंबई के ताज महल पैलेस होटल में एक गाला रिसेप्‍शन का आयोजन किया जा रहा है। रिसेप्शन पार्टी में क्रिकेट से लेकर बॉलीवुड जगत तक के मशहूर हस्तियों के आने की उम्मीद है।

मिस वर्ल्ड का ख़िताब जीतने वाले पर होती है पैसो की बरसात

मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता हर साल लड़कियों के लिए आयोजित की जाती है। यह एक International World Competition है। मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में दुनिया भर की खूबसूरत हसीनायें भाग लेती है और उन्ही में से मिस वर्ल्ड को चुना जाता है। इस साल ये खिताब पर भारत की मानुषी छिल्लर ने अपने नाम दर्ज़ किया है।

इससे पहले भारत को यह खिताब 17 साल पहले साल यानी 2000 में बॉलीवुड ब्यूटी प्रियंका चोपड़ा ने दिलाया था। हर साल दुनियाभर के देशों की लड़कियां इस ख़िताब को पाने के लिए कड़ी मेहनत करती हैं। यह एक ऐसा खिताब है जो हर देश के लिए जीतना बहुत मायने रखता है।

मिस वर्ल्ड 2017
Miss World 2017

मिस वर्ल्ड का ताज पहनने का मतलब है कि उस साल की सबसे खूबसूरत महिला होने का सम्मान प्राप्त होना। साथ ही इस ताज को अपने नाम करने के वाली महिला की किस्मत कुछ ही मिनटों में बदल जाती है। या फिर आप कह सकते है कि मिस वर्ल्ड बनते ही उनकी जिंदगी का एक नया अध्याय शुरू हो जाता है, पर अब आप सोच रहे होंगे की कैसे?

तो आइए, आज हम आपको बताते हैं कि मिस वर्ल्ड बनने वाली महिला पर कैसे होती है इनामो की बरसात।

  1. मिस वर्ल्ड ताज:

मिस वर्ल्ड मानुषी छिल्लर
Miss World 2017 Manushi Chillar
  • मिस वर्ल्ड की सबसे खास चीज होती है उसका ताज। जी हां, यह ताज बहुत बेशकीमती होता है। ताज में जड़े हीरे और रत्न काफी बहुमूल्य होते हैं। मीडिया खबरों के अनुसार तो इस ताज की कीमत 2 करोड़ से 5 करोड़ के बीच होती है।

2.कैश प्राइज

  • इस ताज के अलावा मिस वर्ल्ड को कैश प्राइज भी दिया जाता है। यह कैश प्राइज करीब 10 करोड़ के आसपास होता है।
  • ताज और कैश प्राइज के साथ ही ख़िताब जीतने वाली महिला को ट्रेवल अलाउंस भी मिलता है। जिसमें वह सालभर के लिए दुनिया में कहीं भी घूम सकती हैं।
  • इसके लिए उन्हें किसी भी वाहन पर सफर करने के लिए खर्च नहीं करना पड़ता।
  • प्रतियोगिता का ख़िताब जीतने के बाद बड़े-बड़े ब्रांड उसे स्पोंसर करते हैं।
  • इन प्रॉडक्ट को इस्तेमाल करने के लिए भी उन्हें कोई खर्च नहीं करना पड़ता।
  • इसके साथ ही बाद में उन्हें एड फिल्म के ऑफर आने भी शुरू हो जाते हैं।

3. भारत से किस-किस ने ख़िताब जीतने:

Indian Miss World
Indian Miss World
  • इस साल भारत से मिस वर्ल्ड बनीं मानुषी छिल्लर है लेकिन इसे पहले भारत की रीता फारिया (1966), ऐश्वर्य राय (1994), डायना हेडन (1997), युक्ता मुखी (1999) और प्रियंका चोपड़ा (2000) ने इस खिताब को अपने नाम कर चुकी है।
  • इन सभी में ऐश्वर्या और प्रियंका दो ऐसे नाम हैं। जो बॉलीवुड में सबके के लिए आज भी मिसाल बनी हुई हैं। वैसे तो रीता फारिया को छोड़ डायना हेडन और युक्ता मुखी भी बॉलीवुड की फिल्मो में नजर आ चुकी हैं।
  • अब बारी मानुषी छिल्लर की है। मानुषी की मानें तो अगर उन्हें अच्छा अवसर मिला तो वह बॉलीवुड में आने के लिए तैयार हैं।

तो अब इंतज़ार है कि मानुषी बॉलीवुड में कब एंट्री करती हैं.और साथ ही किस तरह इन पर पैसो की बरसात होती है

गुरु तेगबहादुर के शहीदी दिवस पर जानें उनकी कहानी

गुरु तेग बहादुर के नाम हर कोई जानता है। उनका जीवन आज हर किसी के लिए आदर्श है। गुरु तेग बहादुर ने धर्म ,मानवीय मूल्यों, आदर्शों और सिद्धांत की रक्षा के लिए अपने प्राणो की आहुति दे दी। इनका नाम इतिहास में सुनहरे अक्षरों में अंकित है। 24 नवम्बर, 1675 को उन्होंने अपने प्राणो का बलिदान दिया। उनके शहीदी दिवस पर हम महान गुरु तेग बहादुर के जीवन और बलिदान के बारे में बताएंगे।

गुरु तेग बहादुर:

गुरु तेग़बहादुर सिंह जी को सिखो का नौवा गुरु बनाया गया।
गुरु तेग़बहादुर सिंह जी को सिखो का नौवा गुरु बनाया गया।
  • गुरू तेग़ बहादुर का जन्म 18 अप्रैल, 1621 को पंजाब के अमृतसर में हुआ था।।
  • ये सिखो के सातवें गुरु हरगोविन्द जी के पांचवें पुत्र थे।
  • आठवें गुरु हरिकृष्ण राय की अचानक मृत्यु हो जाने के कारण जनमत सहमति से गुरु तेग़ बहादुर सिंह जी को सिखो का नौवा गुरु बनाया गया।
  • सिखों के नवें गुरु थे जिन्होने हमेशा ही प्रथम सिख गुरु नानक जी द्वारा बताए गये मार्ग का अनुसरण करते रहे।

गुरु तेगबहादुर के जीवन की रोचक बातें:

  1. क्या आपको पता है की गुरु तेग बहादुर सिंह जी का बचपन में नाम त्यागमल था।
  2. 13 साल की छोटी उम्र में उन्होंने अपने पिता गुरु हरगोविन्द जी से साथ मुगलों की सेना के खिलाफ युद्ध किया। इस युद्ध में गुरु तेग बहादुर ने अपनी तलवार को बिजली की गति से घुमाते हुए मुग़लों के हमले के ख़िलाफ़ युद्ध में अपना पराक्रम दिखाया।
  3. उनकी बहादुरी से प्रभावित होकर उनके पिता ने उनका नाम त्यागमल से तेगबहादुर (तलवार के धनी) रख दिया।
  4. वैराग्य और त्याग मूर्ति गुरु तेगबहादुर ने लगातार 20 साल तक ‘बाबा बकाला’ नामक स्थान पर साधना की।
  5. गुरू तेग बहादुर सिखों ने जिन पद्यों की रचना की उनमे से 115 पद्य गुरु ग्रन्थ साहिब में शामिल हैं।

औरंगजेब के अत्याचारों का किया डटकर सामना

  • क्रूरऔरंगजेब के दरबार में एक कश्मीरी पंडित रोज़ गीता के श्लोक का पाठ करता था ।
  • इन पंडितो को श्लोकों की व्याख्या इस तरह करनी होती थी जिससे औरंगजेब के घमंड को चोट न पहुंचे।
  • एक दिन पंडित के बीमार होने पर उसका बेटा औरंगजेब को गीता सुनाने के लिए आया।
  • उसने वास्तविक श्लोकों का अर्थ औरंगजेब को सुना दिया। हिन्दू धर्म ग्रन्थ श्रेष्ठ हैं ये औरंगजेब सहन न कर सका और उसकी कट्टरता बढ़ गई।
  • औरंगजेब को अपने धर्म के अलावा किसी दूसरे धर्म की प्रशंसा सहन नहीं थी।
  • सभी को इस्लाम धर्म अपनाने का आदेश औरंगजेब ने दिया।
  • लोगो पर इस्लाम कबूल करने के अतयाचार बढ़ने पर सबने गुरु तेगबहादुर को बताया की किस तरह उन पर दूसरे धर्म अपनाने का दवाब डाला जा रहा है।
गुरु तेगबहादुर जी की याद में आज उनके ‘शहीदी स्थल’ पर गुरुद्वारा बना है
तेगबहादुरजी की याद में आज उनके ‘शहीदी स्थल’ पर गुरुद्वारा बना है
  • दयालु गुरु तेगबहादुर ने उन लोगों को कहा कि आप जाकर औरंगजेब से कह दें कि अगर गुरु तेगबहादुर ने इस्लाम धर्म अपना लिया तो उनके बाद हम भी इस्लाम धर्म को ग्रहण कर लेंगे।
  • औरंगजेब ने लोगो की ये चुनौती स्वीकार कर ली।
  • गुरु तेगबहादुर स्वयं दिल्ली में औरंगजेब के दरबार गए। औरंगजेब ने उनको धर्म बदलवाने के लिए बहुत से लालच दिए पर गुरु तेगबहादुर अपने पथ पर टिके रहे।
  • इसके बाद औरंगजेब ने गुरु तेगबहादुर पर तरह-तरह के जुल्म करना शुरू कर दिया। उनके दो शिष्यों की उनके सामने ही हत्या कर दी गई
गुरु जी ने हँसते-हँसते बलिदान दे दिया।
गुरु जी ने हँसते-हँसते बलिदान दे दिया।
  • इतने जुल्म सहने के बाद गुरुजी ने औरंगजेब से कहा कि यदि तुम जबरदस्ती लोगों से इस्लाम धर्म कबूल करवाओगे तो तुम सच्चे मुसलमान नहीं हो क्योंकि इस्लाम यह शिक्षा नहीं देता कि किसी पर जुल्म करके मुस्लिम बनाया जाए।
  • यह सुनकर औरंगजेब आगबबूला हो गया। उसने दिल्ली के चाँदनी चौक पर गुरु तेगबहादुर जी का शीश काटने का हुक्म ज़ारी कर दिया।
  • गुरु जी ने हँसते-हँसते बलिदान दे दिया। 24 नवम्बर 1675 को गुरु जी का सिर काट दिया गया। गुरु तेगबहादुरजी की याद में आज उनके ‘शहीदी स्थल’ पर गुरुद्वारा बना है, जिसका नाम गुरुद्वारा ‘शीश गंज साहिब’ है।

बर्थडे स्पेशल: आनंदीबेन के जन्मदिन पर जाने उनसे जुडी दिलचस्प बातें

आनंदीबेन जेठाभाई पटेल का जन्म (21 नवंबर 1 9 41) मेहसाणा जिले के विजापुर तालुका के खरोद गांव में हुआ था। एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं जो सबसे लंबे समय तक कार्यरत महिला विधायक हैं।आनंदीबेन गुजरात की एकमात्र महिला विधायक हैं जो लगातार 4 बार चुने गई हैं। उनके कठिन परिश्रम, साहस, ईमानदारी और धीरज उन्हें शीर्ष पर ले गया। आनंदीबेन के जन्मदिन के सम्मान में, हम आपके लिए इस बहादुर और साहसी महिला के बारे में 5 तथ्यों लेकर आए हैं जो गुजरात की पहली महिला मुख्यमंत्री बनी।

आईये,एक नज़र डालते है।

आनंदीबेन पटेल से जुडी Amazing बातें:

आनंदीबेन एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं
आनंदीबेन एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं

1. आनंदीबेन ने 700 लड़कों के बीच एक लड़की के रूप में अपनी शिक्षा की।

उनको लड़कों के स्कूल में भर्ती कराया गया था क्योंकि इस क्षेत्र में कोई दूसरा स्कूल नहीं था। यह बहुत ही चौंकाने वाला है कि आनंदीबेन ने 700 लड़कों के बीच सिर्फ एक लड़की होने के बाद भी अपनी पढाई की।

इसके बाद उन्हें 8 वीं कक्षा में विसनगर में स्कूल न्यूटन सर्व विद्यालय में एक गर्ल्स में शिफ्ट कर दिया गया था और आनंदीबेन को एथलेटिक्स में उनकी उपलब्धियों के लिए मेहसाणा में “वीरबाला” पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

2. वह पढ़ाई के बारे में बेहद भावुक थी और अपने कॉलेज में बैचलर ऑफ साइंस पढ़ने वाली एकमात्र लड़की थी।

1960 में आनंदीबेन ने कॉलेज में शामिल हुए और अपने कॉलेज में वो फर्स्ट ईयर की विज्ञान की एकमात्र लड़की थी।

3. शादी के बाद आनंदीबेन ने अपनी पढ़ाई को जारी रखी

1 9 65 में वह अपने पति के साथ अहमदाबाद रहने लगी। जहां उन्होंने मास्टर ऑफ साइंस में प्रवेश किया। बाद में उन्होंने 1970 में मोहनिबा स्कूल विद्यालय में एक स्कूल शिक्षिका के रूप में 30 साल तक बच्चो को पढ़ाया।

4. राजनीति की दुनिया में उनका आना काफी नाटकीय था।

आनंदीबेन ने अपने स्कूल के ट्रिप के दौरान 2 लड़कियों को डूबने से बचा लिया। वह भाजपा के ध्यान में तब आई जब वो दो छात्रों को बचाने के लिए, जो नदी के पानी में कूद गई थी।

पर वह तब शामिल नहीं हुईं क्योंकि आनंदिबेन पहली बार राजनीतिक में आने के बारे में संकोच करती थी। लेकिन बाद में यह देखकर कि राजनीति लोगों के लिए एक माध्यम बन सकती हैआनंदिबेन इसमें शामिल हो गई।

5. आनंदीबेन पटेल गुजरात की पहली महिला मुख्यमंत्री बने।

आनंदीबेन के काम के प्रति से प्रभावित हक्लार उन्हें इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी गई थी।

हमारी उन्हें उनके जन्मदिन पर ढेर सारी शुभकामनांए !

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस (ICJ) में भारत का परचम

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस, न्याय की जरुरत पूरी दुनिया को होती है। इसलिए हर इंसान को न्याय दिलाने और उस तक न्याय को पहुंचने के लिए हर देश की अपनी न्याय व्यवस्था होती है। हर देश का अपना न्यायालय होता है जो लोगो की समस्या का समाधान करता है और जरूरत पड़ने पर जनहित याचिका पर भी सुनवाई करता है।

न्याय की आस सिर्फ लोगो को ही नहीं होती कई बार दो देशो के बीच कुछ मुद्दे इतने संवेदनशील होते है जिनके समाधान वो खुद नहीं कर पाते है। ऐसे में इन समस्या के समाधान के लिए इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस (ICJ) की स्थापना की गई है आज हम आपको बताते है ICJ के बारे में।

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस (ICJ):

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस
International Court Of Justice

आपको पता है की संयुक्त राष्ट्र का मुख्य न्यायिकअंग अंतरराष्‍ट्रीय न्यायालय है और यह संयुक्त राष्ट्र के छह मुख्य भागो में से एक है। ICJ की स्थापना 26 जून 1945 को सैन फ्रांसिस्को में हुई थी। इसका मुख्यालय दि हेग (नीदरलैंड) में है।

ICJ(International Court Of Justice) की क्या है जरुरत:

ICJ
Court Of Justice

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस का उद्देश्य है सदस्य राष्ट्रों द्वारा सामने रखे गये विवादों की सुनवाई और निपटारा करना है। महासभा, सुरक्षा परिषद या महासभा द्वारा अधिकृत अन्य सहयोगी संगठन के अनुरोध करने पर किसी वैधानिक प्रश्न से जुडी सलाह देना है।

जज का कार्यकाल:

  • इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस में 15 जज होते हैं। इनका चुनाव 9 वर्ष के कार्यकाल के लिए महासभा और सुरक्षा परिषद स्वतंत्र रूप से करता है। एक-तिहाई सीटों के लिए प्रति तीन वर्षों के बाद चुनाव होते हैं।
  • किसी भी देश के दो जज का चुनाव नहीं किया जाता।
  • इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस के न्यायाधीश को राजनीतिक या प्रशासनिक गतिविधियों में भाग लेने की स्वीकृति नहीं दी जाती।

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस में भारत के जज:

Indian Judge of Intertional Court of Justice
Indian Judge

ICJ में भारत ने भी अपना डंका बजाया है और हमारे देश के 4 जज इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस में जज रह चुके है। मुझे पूरा यकीं है ये सुनकर आपको भी इंडियन होने पर गर्व हुआ होगा, तो देखते है कौन से वो 4 जज।

  1. दलवीर भंडारी

भारतीय जज दलवीर भंडारी ने नीदरलैंड के हेग की अंतर्राष्ट्रीय अदालत में दूसरी बार जज चुने गए। दलवीर को जनरल एसेंबली में 183 वोट मिले। सिक्योरिटी काउंसिल में जस्टिस भंडारी को 15 वोट ही मिले। भंडारी का जज के चुनाव के लिए मुकाबला ब्रिटेन के उम्मीदवार क्रिस्टोफर ग्रीनवुड से था। भंडारी दूसरी बार इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस के जज बने हैं। राजस्थान के जोधपुर से ताल्लुक रखते हैं भंडारी।

2. जस्टिस नगेंद्र सिं‍ह

जस्टिस नगेंद्र सिंह भी राजस्थान के ही डूंगरपुर के राजघराने से ताल्लुक रखते है। नगेंद्र सिं‍ह इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस में 1973 से 1988 के बीच जज रहे। इस दौरान ही सिंह 1976-79 में वाइस प्रेसिडेंट और उसके बाद 1985-88 में प्रेसिडेंट बने।

जस्टिस बेनेगल नरसिंग राव:

बेनेगल नरसिंह राव या बी. एन. राव एक भारतीय प्रशासनिक अधिकारी, राजनयिक और राजनीतिज्ञ के रूप में जाने जाते थे। इनकी भारत के संविधान का ढांचा तैयार करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका रही थी।
बेनेगल नरसिंग राव का हेग में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश होने का गौरव प्राप्त है जो संयुक्त राष्ट्र (यूएन) का प्रमुख न्यायिक अंग है।

जस्टिस रघुनंदन स्‍वरूप पाठक: 

रघुनंदन स्वरूप पाठक का भारत के 18वें मुख्य न्यायाधीशके रूप में चुना गया। साथ ही वो अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश के रूप में कार्य कर चुके है। इन्होंने इस पद पर 1989 से 1991 तक कार्य किया। इनका जन्म 25 नवम्बर 1924 को बरेली सन्युक्त प्रांत में हुआ था।

ये वो जज थे जिन्होंने दुनिया के सामने भारत का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया।

“स्टूडेंट ऑफ़ द ईयर 2” का पहला पोस्टर रिलीज़ 

“स्टूडेंट ऑफ़ द ईयर 2” का पहला पोस्टर रिलीज़ हो गया है। ये 2012 में करण जोहर के निर्देशन में आई “स्टूडेंट ऑफ़ द ईयर” का दूसरा पार्ट है। ये 2012 की सुपरहिट फिल्म थी। इस फिल्म के गानो से लेकर स्टोरी तक युवाओ को काफी पसंद आई थी।

स्टूडेंट ऑफ़ थे ईयर 2(sTUDENT OF THE YEAR2):

करण जौहर के धर्मा प्रोडक्शन के निर्देषन में बन रही फ़िल्म ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर-2’ का पहला पोस्टर रिलीज हो गया है। टाइगर श्रॉफ फ़िल्म में लीड रोल निभा रहे हैं। इस पोस्टर में टाइगर श्रॉफ स्कूल बैग पर अपने सिर को टिकाये हुए स्टाइलिश नज़र आ रहे हैं! साथ ही पोस्टर में लिखा हुआ है की “एडमिशन ओपन 2018″। ये फिल्म अगले साल रिलीज हो सकती है।

स्टूडेंट ऑफ़ द ईयर(sTUDENT OF THE YEAR):

साल 2012 में आई ये फिल्म भी करण जोहर के निर्देशन में बनी थी। इस फिल्म से आलिया भट्ट, वरुण धवन और सिद्धार्थ मल्होत्रा ने बॉलीवुड में एंट्री क थी। इस फिल्म के गाने आज भी लोगो की जुबान पर चढ़े हुए है और आज भी ये गाने लोगो को थिरकने पर मजबूर करते है। इस फिल्म की कहानी युवाओ की कॉलेज लाइफ पर आधारित थी।

टाइगर श्रॉफ:

स्टूडेंट ऑफ़ द ईयर 2 के लीड किरदार
टाइगर श्रॉफ है लीड किरदार

टाइगर श्रॉफ की पिछली फिल्मे जिनसे उन्हें काफी उम्मीद थी “फ्लाइंग जट्ट” और ‘मुन्ना माइकेल’ बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह से पिट गई थीं। लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि वो आने वाला समय स्क्रीन पर धमाल आकर सकते है क्योंकि उनकी जबरदस्त एक्शन फिल्म ‘बागी-2’ की शूटिंग इन दिनों से बहुत तेजी के साथ कर रहे हैं. इसके तुरंत बाद वो ‘रैंबो’ के ऑफिशल रीमेक में भी नजर आ सकते हैं और जिसमे टाइगर काफी खतरनाक अंदाज में दिख रहे हैं। साथ ही वो ऋतिक रोशन के साथ भी एक एक्शन फिल्म में काम कर रहे हैं। लेकिन अब ताजा खबर यह है कि टाइगर श्रॉफ ‘स्टुडेंट ऑफ द ईयर-2’ भी कर रहे हैं।

भारत की 5 वीरांगनाओ जिन्होंने अपने बलिदान से लिखी अमरकथा

वीरांगनाओ भारत देश के इतिहास स्वर्णिम रहा है जहाँ हमारे देश को “सोने की चिड़िया” कहा जाता था। वही इस देश के दामन पर दाग लगाने और इस भूमि पर अपना कब्ज़ा करने के उद्देश्य से ब्रिटिश से लेकर विदेशी लुटेरों ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी थी। जहाँ उन ताकतवर हमलावरों ने देश के कई राज्यों पर आक्रमण कर उनपर अपनी हुकूमत की, तो देश में कुछ महाराजा-महारानी ऐसे भी थे जिन्होंने उनके शासन के खिलाफ जंग छेड़ दी।

इन विदेशी हमलावरों के खिलाफ आवाज़ उठाने वालो में सिर्फ देश के राजा-महाराजा ही नहीं बल्कि देश की वीरांगनाओ  भी आती थी। जिन्होंने अपने पराक्रम से विदेशी हमलावरों के दांत खट्टे करे, आज हम आपको देश की ऐसे ही वीर रानी-महारानी  के बारे में बताएंगे।

  1. महारानी पद्मावती(Padmavati):

Beautiful Padmavati
वीरांगनाओ में रानी पद्मवनी, राजा गंधर्व सेन और रानी चंपावती की पुत्री थीं
  • फिल्म “पद्मावती” से सुर्खियों में आई है रानी पद्मवनी। राजा गंधर्व सेन और रानी चंपावती की पुत्री थीं पद्मनी। रानी पद्मावती का विवाह चित्तौड़ के राजा रत्नसिंह के साथ हुआ था। रानी बहुत ही खूबसूरत थी और उनकी खूबसूरती के चर्चे दूर-दूर तक थे।
  • रानी पद्मावती की सुंदरता पर दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी का दिल आ गया। इसके साथ ही रानी को प्राप्त करने के लिए अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ पर आक्रमण कर दिया। खिलजी ने राजा रत्नसिंह को धोखे से मार गिराया। तब अपने मान-सम्मान की रक्षा के लिए वीर रानी पद्मावती ने 1303 ईस्वी में राजपूत वीरांगनाओं के साथ जौहर कर लिया।

2. रानी दुर्गावती (Durgavati):

Maharani Durgavati
वीरांगनाओ दुर्गावती का जन्म सन1524 में गोंडवाना में हुआ था
  • महारानी दुर्गावती का जन्म सन 1524 में गोंडवाना में हुआ था। कालिंजर के राजा कीर्तिसिंह चंदेल की एकमात्र संतान थीं दुर्गावती। राजा संग्राम शाह के पुत्र दलपत शाह के साथ उनका विवाह हुआ था। विवाह के सिर्फ 4 साल बाद ही राजा दलपतशाह चल बसे। उस समय रानी दुर्गावती का पुत्र नारायण काफी छोटा था, ऐसे में रानी ने ही गढ़मंडला का कार्यभार संभाला।
  • महारानी दुर्गावती की बहादुरी का वर्णन भारतीय इतिहास में काम ही मिलता है क्योंकी उन्होंने मुस्लिम शासको को कई बार युद्ध में हराया। मुग़ल शासक अकबर(Akbar) दूसरी राजपूत घरानों की विधवाओं की तरह ही महारानी दुर्गावती को भी अपने रनवासे की शोभा बनाना चाहता था।
  • रानी दुर्गावती ने अकबर के आगे झुकने से इंकार करते हुए अपनी आज़ादी और अस्मिता के लिए युद्ध भूमि का रास्ता चुना और युद्ध में अनेक बार शत्रुओं को पराजित करते हुए 1564 में देश के लिए अपना बलिदान दे दिया।

3. झांसी की रानी लक्ष्मीबाई (Jhansi ki Rani Lakshmi Bai):

Rani Lakshni bai
झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का जन्म वाराणसी में हुआ था
  • ‘मनु’ यानि रानी लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवंबर 1835 में वाराणसी में हुआ था। उनका नाम मणिकर्णिका था। प्यार से सब उन्हें “मनु” बुलाते थे। 1842 में मनु की शादी झांसी के राजा गंगाधर राव के साथ हुई। शादी के बाद ही मनु को ‘लक्ष्मीबाई’ नाम से नवाज़ा गया। 1851 में इनको एक बेटा हुआ लेकिन 4 महीने बाद ही उसकी मृत्यु हो गई।
  • इसके बाद रानी ने दामोदर राव को गोद लिया गया। रानी लक्ष्मीबाई 18 साल की थी जब महाराजा गंगाधर राव की भी मृत्यु हो गई। इसके बाद भी रानी ने हिम्मत नहीं हारी, ब्रिटिश हुकूमत ने बालक दामोदर को झांसी का वारिस मानने से इंकार कर दिया और वो झांसी को ब्रितानी राज्य में मिलाने का षड्यंत्र करने लगे।
  • 1858 में ब्रिटिश सरकार ने झांसी पर हमला कर उसको घेर लिया व उस पर कब्जा कर लिया। रानी ने हार नहीं मानी और वो अंग्रेज़ो का सामना करते हुए 18 जून 1858 को वीरगति को प्राप्त हो गई। वीरांगनाओ में इनका नाम अमर है।

4.रानी द्रौपदी (Draupadi) :

Rani Draupadi
वीरांगनाओ में महारानी द्रौपदीबाई
  • रानी द्रौपदीबाई धार क्षेत्र में हुई क्रांति की सूत्रधार थी। धार के राजा के देहांत के बाद राजा की बड़ी रानी द्रौपदीबाई ने ही राज्यभार को संभाला क्योंकि आनंदराव बाला साहब नाबालिग थे।
  • रानी द्रौपदीबाई ने 1857 की क्रांति में ब्रितानियों का विरोध किया। रानी ने क्रांतिकारियों की सहायता की। ब्रिटिश सैनिकों ने 22 अक्टूबर 1857 को धार का किला घेर लिया। ये किला मैदान से 30 फुट की ऊंचाई पर था। किले के चारों ओर 14 गोल तथा 2 चौकोर बुर्ज बने हुए थे।
  • क्रांतिकारियों ने उनका डटकर मुकाबला किया। ब्रितानियों को आशा थी कि वे शीघ्र आत्मसमर्पण कर देंगे, पर ऐसा न हुआ। 24 से 30 अक्टूबर तक संघर्ष चलता रहा। रानी द्रौपदीबाई ने वीरता के साथ उनका सामना किया।

5.राजकुमारी रत्नावती (Ratnavati) :

Rajkumari Ratnavati of Jasalmer
राजकुमारी रत्नावती
  • जैसलमेर के नरेश महारावल रत्नसिंह ने अपने किले की रक्षा की जिम्मेदारी अपनी बेटी रत्नावती को सौपी थी।इस किले पर कब्ज़ा करने के लिए दिल्ली के शासक अलाउद्दीन की सेना ने किले को घेर लिया,। राजकुमारी रत्नावतीने इससे ना घबराते हुई उनका डटकर सामना किया और अलाउद्दीन क्वे सेनापति सहित 100 सैनिको को बंधक बना लिया अलाउद्दीन के इरादों पर पानी फेरते हुए इस शासक को अपने कदम वापस लेने पर मजबूर आकर दिया।

ये थी भारत भूमि की वो वीरांगनाओजिसने अपने पराक्रम और बहादुरी से अपना नाम इतिहास के सुनहरे अक्षरों में हमेशा के लिए दर्ज़ करा लिया, इन्ही सभी को हमारा शत-शत नमन है।

इंदिरा गाँधी: क्या है इस आयरन लेडी की कहानी

इंदिरा गाँधी ये भारत के इतिहास का ऐसा नाम है जिससे शायद ही कोई भूल पाए। भारतीय राजनीति में इस महिला ने एक अहम छाप छोड़ी। इंदिर गाँधी को हमारे देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनाने का गौरव प्राप्त हुआ। भारतीय राजनीति में इन्हे तेज़-तरार नेता के रूप में जाना जाता था। अपने जीवनकाल में इंदिरा गाँधी एक या दो बार नहीं बल्कि चार बार भारत की प्रधानमंत्री रही।

आज हम आपको इंदिरा गाँधी के जीवन के बारे में ऐसे कुछ राज़ बताएंगे जो आपको हैरान कर देंगे और जिन्हे आप ने शायद ही कभी सुना हो।

शनि अमावस्या पर कैसे करे भगवान शनि को खुश

इंदिरा गाँधी:

Iron Lady Of India
इंदिरा गाँधी के बचपन की फोटो

इंदिरा गाँधी का जन्म राजनीतिक रूप से प्रभावशाली और आर्थिक रूप से संपन्न नेहरू परिवार में 19 नवम्बर 1917 को हुआ था। इनके पिता जवाहरलाल नेहरू और माता कमला नेहरू की इकलौती बेटी थीं।

इंदिरा का नाम दादा पंडित मोतीलाल नेहरू ने रखा था। इनके दादा को लगता था कि पोती के रूप में उन्हें माँ लक्ष्मी और दुर्गा की प्राप्ति हुई है।

इन्होने अपनी शिक्षा इकोले नौवेल्ले, बेक्स (स्विट्जरलैंड), इकोले इंटरनेशनेल, जिनेवा, पूना और बंबई में स्थित प्यूपिल्स ओन स्कूल, बैडमिंटन स्कूल, ब्रिस्टल, विश्व भारती, शांति निकेतन और समरविले कॉलेज, ऑक्सफोर्ड जैसे मशहूर शिक्षा संस्थानों से प्राप्त की।

इंदिरा गाँधी ने 26 मार्च 1942 को फ़िरोज़ गाँधी के साथ विवाह किया। उनके दो बेटे राजीव और संजय गाँधी हुए।

इंदिरा के बारे में रोचक पहलू:

First Lady Prime Minister Of India
इंदिरा गाँधी के पिता जवाहर लाल नेहरू थे
  • क्या आपको पता है की इंदिरा गांधी का पूरा नाम इंदिरा प्रियदर्शिनी गाँधी था।
  • शान्तिनिकेतन में साक्षात्कार के समय ही रबिन्द्रनाथ टैगोर ने उनको प्रियदर्शिनी नाम दिया और तभी से वह इंदिरा प्रियदर्शिनी नेहरु के नाम से पहचानी गई।
  • देश प्रेम उनके खून में बचपन से ही था तभी उन्होंने 1930 के ‘सविनय अवज्ञा’ आंदोलन के समय कॉग्रेस के स्वयंसेवको को मदद करने के लिए छोटे बच्चों की ‘वानरसेना’ बनाई थी।
  • इंदिरा गांधी ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ के तहत 1942 में जेल गई।
  • देश में इंदिरा गांधी को ‘लौह महिला’ (Iron Lady) के नाम से भी बुलाये जाने लगा।

राजनितिक जीवन:

इंदिरा गाँधी का राजनितिक जीवन
इंदिरा गाँधी का सफल राजनितिक जीवन
  • इंदिरा गाँधी ने 1959 और 1960 में चुनाव लड़ा और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष चुनी गई।
  • नए प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की प्रेरणा से वो चुनाव लड़ीं और 1966-1964 तक सूचना और प्रसारण मंत्री रहीं।
  • जनवरी 1966 में इंदिरा देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी।
  • 14 जनवरी 1980 में इंदिरा गाँधी चौथी बार प्रधानमंत्री चुनी गई।

विवादित फैसले:

Indira Gandhi Declared Emergency
आपातकाल की घोषणा की
  • “ऑपरेशन ब्लू स्टार” इनका एक ऐसा ही विवादित फैसला था। इस फैसले की कीमत इंदिरा गाँधी को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। स्वर्ण मंदिर में हजारों नागरिकों की उपस्थिति होने के बाद भी गांधी ने आतंकवादियों का खात्मा करने के लिए सेना को इस ऎतिहासिक धर्मस्थल में प्रवेश करने का आदेश दिया। अलगाववादी एक अलग राज्य खालिस्तान की मांग के लिए हिंसा कर रहे थे जिसकी वजह से इंदिरा गाँधी को ये फैसला लेना पड़ा।
  • “26 जून आपातकाल 1975 “ इससे भारतीय सविधान का काला दिन कहा जाता है। जब 26 जून की रात भारतीय संविधान की धारा 352 के तहत आपातकाल की घोषणा कर दी। इस दौरान सविधान का चौथा स्तम्भ कहे जाने वाले “मीडिया” की आज़ादी पर रोक लगा दी गयी थी।

इंदिरा ने जहा अपने मजबूत फैसले से देश को बदला वही अपने कुछ विवादित फैसलो की वजह सेआलोचना का शिकार होना पड़ा। इंदिरा गाँधी की मौत 31 अक्टूबर 1984 को दो अज्ञात हमलावरों द्वारा हत्या कर दी गई, देश के लिए किया उनका कार्य आदर्शनीय है।

प. नेहरू के जन्मदिन पर जाने उनकी जीवन से जुडी कुछ रोचक बातें

जवाहरलाल नेहरू के बारे में यूं तो सब जानते हैं. उनका जन्म दिन 14 नवंबर को हमारे देश में children’s day के रूप में मनाया जाता है| आज हमारे देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का जन्मदिन है| ये तो आप सबको पता ही है बच्चे उनको प्यार से चाचा नेहरू के नाम से बुलाते थे| जवाहर लाल नेहरू कश्मीरी पंडित थे। आज हम आपको  जवाहर लाल नेहरू के बारे में ऐसी रोचक बातें बताएंगे जो शायद ही कोई जानता होगा और ये पढ़कर आप कहेगे अरे, ऐसा भी हो सकता है?

प. नेहरू के जीवन से जुडी रोचक बातें:
1. नेहरू की पढाई बचपन से ही इंग्लिश स्कूल में हुई थी, उन्हें गांवो में घूम-घूमकर हिंदी बोलनी सीखी थी|
2. चाचा नेहरू के कपड़े धुलने के लिए विदेश में लंदन जाते थे|
3. एक बार फरवरी 1950, में राजस्थान के पिलानी में जवाहर लाल नेहरू के स्वागत के लिए हरी सब्जियों और गाजर-मूली से स्वागत द्वार बनाए गए थे। जिससे नाराज होकर नेहरू ने सब गरीबों में बँटवा दिया|
4. आपको पता है  JRD Tata ने ब्यूटी प्रोडक्ट लैक्मे महिलाओं के लिए नही बल्कि जवाहर लाल नेहरू के कहने पर बनाया था|
5.प. नेहरू को खाना खाने के बाद 555 ब्रांड का सिगरेट पीने की लत थी|  एक बार नेहरू जी भोपाल गए थे और उनकी सिगरेट खत्म हो गई ये सिगरेट पूरे भोपाल में नही मिली तो एक विशेष विमान में इंदौर से सिगरेट लाई गई|
6. महात्मा गांधी की अपील पर जब पूरा देश विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार कर रहा था तो उस समय नेहरू को भी अपना बेस्ट कोट फेंकना पड़ा| इसके बाद ही उन्होनें खादी का जैकेट पहनना शुरू किया था|
7. जवाहार लाल नेहरू , नोबेल प्राइज के लिए 11 बार नाॅमिनेट हो चुके हैं। कई बार उन्हें शांति के नाॅबेल के लिए भी नाॅमिनेट किया जा चुका हैं। लेकिन एक बार भी वह पुरस्कार पाने में सफल नहीं हुए|.
8. जवाहरलाल नेहरू पर चार बार जानलेवा हमला हुआ था, पहली बार 1947 में बंटवारे के दौरान उन पर हमला हुआ था। तब वे भारत-पाकिस्तान सीमा पर थे। इसके बाद 1955 में महाराष्ट्र में चाकू से हमला किया गया। 1956 में बम से रेल की पटरी उड़ाने की कोशिश भी नाकाम हो गई थी|
9. जवाहरलाल नेहरू की मौत 27 मई 1964 को हार्ट अटैक से हुई थी| उनके अंतिम संस्कार में 15 लाख लोग शामिल हुए थे|

 

नेहरू के विचार:

जहाँ प. नेहरू ने अपनी शखिसयत से पूरी दुनिया पर अलग छाप छोड़ी वही वो विश्व में अपने अलग और प्रगतिशील विचार के लिए भी जाने जाते है| आज आपको हम उनके कुछ ऐसी ही विचार से रूबरू कराएंगे|
1 शांति के बिना अन्य सभी सपने गायब हो जाते हैं और राख में मिल जाते हैं|
2 एक महान कार्य में लगन और कुशल पूर्वक काम करने पर भी, भले ही उसे तुरंत पहचान न मिले, अंततः सफल जरुर होता है|
3 संकट में हर छोटी सी बात का महत्व होता है  |
4 विफलता तभी होती है जब हम अपने आदर्शों, उद्देश्यों और सिद्धांतों को भूल जाते हैं |
5 संकट और गतिरोध जब होते हैं तो उनसे कम से कम यह लाभ होता  है, कि वे हमें सोचने के लिए मजबूर करते है |
आज चाचा नेहरू के जन्मदिन पर हमने आपको उनके उन विचारो और रोचक बातो से रूबरू कराया जिससे आप अभी तक अनजान थे|