सावन शिवरात्रि 2017, व्रत,पूजा विधि

सावन शिवरात्रि 2017

सावन शिवरात्रि 2017

सावन शिवरात्रि 2017!!! सालभर में आने वाली दो-दो शिवरात्रि का भगवान भोलेनाथ के भक्तो को बेसब्री से इंतज़ार रहता है. पहली शिवरात्रि फाल्गुन के महीने में मनाई जाती है. और दूसरी सावन के महीने में. दोनों ही शिवरात्रियों का अपना-अपना बहुत महत्त्व होता है. दोनों पर बाबा शिव को पूजा जाता है. भगवान् भोलेनाथ के बारे में यह माना जाता है कि वो अपने भक्तो की महिमा सुनकर बहुत जल्दी ही प्रसन्न हो जाते है.
इनके लिए सोमवार का दिन होता है. सोमवार के दिन सुबह से शाम तक का व्रत होता हैं. सावन के सोमवारों के व्रत का क्या महत्व् होता हैं और ये व्रत कैसे किये जाते हैं, व्रत की विधि क्या है. जानने के लिए अवश्य पढ़े .

कब है सावन शिवरात्रि:
वर्ष 2017 में शिवरात्रि 21 जुलाई (शुक्रवार)को मनाई जाएगी. जिस पर मंदिरो में बहुत भीड़ देखने को मिलती है. शिवरात्रि के लिए मंदिरो को दुल्हन की तरह सजाया जाता है. शिवरात्रि से कई दिन पहले से ही शिव मंदिरो की एक अलग ही रौनक होती है. सारा माहौल रौशनी से जगमगाया रहता है. बम-बम बोल बम के नारो से मंदिरों में चहल-पहल देखते ही बनती है.

सावन शिवरात्रि 2017 का महत्व्:
यूँ तो बाबा शिव के भक्त सालभर भी सोमवार का व्रत करते है. लेकिन शिवरात्रि का व्रत करने वाले भक्तो की संख्या बहुत बढ़ जाती है. और शिवरात्रि के इस महान व्रत की मान्यता भी बहुत है. शिवरात्रि के व्रत पर शिवलिंग पर जलाभिषेक करना आवश्यक माना जाता है. साथ ही भोलेनाथ को फल-फूल, द्धीप, प्रसाद वगैरह अर्पण किये जाते हैं. जिससे भगवान शंकर शीघ्र प्रसन्न होते है.

सावन का पूरा महीना भोले की भक्ति में नहाया होता हैं. रास्तों पर जगह-जगह शिव भक्तो की टोलिया मिल जाती हैं. इस सावन शिवरात्रि पर भोले भक्त कावड़ लाकर भी भगवन  शिव को प्रसन्न करते हैं. कावड़ क्या होती है हम आपको आगे बताते हैं.

कावड़ क्या होती है:

sawan shivratri 2017भारत में सावन के महीने में फाल्गुन शिवरात्रि के उपलक्ष में कावड़ यात्रा निकलती है. कावड़ लकड़ियों से धनुष के आकर की बनाई जाती है. फिर उसको तरह-तरह जैसे बच्चो के खिलोने, लड़कियों के सजने का सामान, कुछ छोटे-मोठे कपडे, रुमाल, प्लास्टिक से बने हुए पशु-पक्षी आदि से सजाया जाता है. जिसको कंधे पर रखकर चला जाता है. कावड़ को लेकर शिव भक्त हरिद्वार हर की पौड़ी या अपने पास के मान्यता वाले स्थान पर जल भरने जाते हैं. और जल लाकर शिवरात्रि के दिन मंदिर में शिवलिंग पर अपनी कावड़ सहित जलाभिषेक करते हैं. फिर उस कावड़ को घर लाकर उसका सामान बच्चो में बाँट दिया जाता है. और जो धनुष के आकर की कावड़ बचती है उसको घर या मंदिर में किसी एक स्थान पर एक साल के लिए रख दिया जाता हैं.

सावन के पहले दिन से कावड़ यात्रा शुरू:
यूँ तो सावन का  महीना आने से कई दिन पहले ही कावड़ यात्रा शुरू हो जाती है. परन्तु सही मायनो में सावन के पहले दिन से शुरू मानी जाती है. कुछ भक्त पूरे परिवार के संग कावड़ लेने जाते हैं तो कुछ दोस्तों के समूहों में, तो कुछ अकेले भी कावड़ लेकर जल लेने जाते हैं. हाँ, कुछ श्रद्धालु पैदल तो कुछ मोटर साइकिल से, कुछ साईकिल से तो कुछ DJ लेकर भी शिव भोले की भक्ति में मस्त होकर जल लेने जाते हैं.

समाज सेवी संस्थाओ की और से इन श्रद्धालुओं के लिए रास्तो में थोड़ी-थोड़ी दूरी पर खाने-पीने, रहने, आराम करने की व्यवस्था की जाती है. जहाँ ये भक्त फ्री में इन व्यवस्थाओ का लाभ उठाते हैं.

कावड़ यात्रा का प्रचलन भारत के कुछ ही हिस्सों में देखा जाता हैं. साधारण कावड़ के साथ डाक कावड़ भी सड़को पर खूब धूम-धाम के साथ अपना सफर तय करती हैं. कावड़ यात्रा के दौरान रस्ते भी बदल दिए जाते हैं मतलब एक रास्ता शिव भक्तों के लिए तो दूसरा रास्ता रोज होने वाली आवाजाही के लिए. जिससे किसी भी को कोई परेशानी का सामना ना करना पड़े.

क्या करें सावन शिवरात्रि पर (सावन शिवरात्रि व्रत विधि):
सावन शिवरात्रि 2017 का व्रत रखना बहुत पुण्य माना गया है . भगवान् शंकर अपने भक्तो के सब कष्ट हर लेते हैं और उनको दुखो से छुड़ाते हैं. भगवान् का व्रत करना बहुत लाभकारी माना गया हैं.

  • शिवरात्रि के दिन प्रातः उठकर नहा कर साफ-सुथरे वस्त्र पहने.
  • व्रत का संकल्प ले.
  • अपने आस-पास की किसी पवित्र नदी से जल भरकर ला सकते हैं तो सूर्योदय तक ले आये.
  • भगवन की पूजा के लिए सामग्री तैयार कर ले जैसे कि गंगाजल, दूध, बताशे या चीनी, धूपबत्ती, अगरबत्ती, माचिस, बेलपत्थर और बाकि जो भी आप चाहते हो. भगवन शिव को भांग, धतूरा भी बहुत पसंद है तो पूजा सामग्री में इन्हे भी शामिल कर सकते हैं.
  • अपने घर के पास के मंदिर जाये
  • मंदिर में जाकर शिवलिंग पर सबसे पहले जलाभिषेक करें फिर.
  • अन्य सामग्री से बारी-बारी पूजा करें.
  • कुछ देर भगवान् शिव का ध्यान करें.
  • फिर अपने व्रत के अनुसार चाय-फल खा सकते हैं.
  • शाम को एक समय भोजन ग्रहण कर के अपना व्रत खोल सकते हैं.
शिवरात्रि का समय, तिथि और शुभ मुहूर्त:
  • निशिथ काल पूजा – 24:06 से 24:48
  • पारण का समय – 05:41 से 15:50 (22 जुलाई 2017)
  • चतुर्दशी तिथि आरंभ – 21:49 (21  जुलाई 2017)
  • चतुर्दशी तिथि समाप्त – 18:27 (22 जुलाई 2017)

सावन के सोमवार व्रत, सावन के सोमवार की व्रत विधि, तारीखें

सावन के सोमवार व्रत कैसे करें?

10 जुलाई-2017 से सावन का महीना शुरू हो रहा है. जिसमें भगवान शिव को पूजा जाता है, कावड़ यात्रा निकाली जाती है, शिवरात्रि मनाई जाती है और हरियाली तीज भी सावन के महीने में ही आती है. तो हम आपको सावन सोमवार व्रत कैसे करने चाहिए, उसकी पूजा विधि क्या है, व्रत कथा क्या है, यह सब बताते हैं.सावन सोमवार व्रत

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 


सावन सोमवार व्रत में पूजा कैसे करें:

शंकर भगवान को कई नामों से जाना जाता है. जिनमें से एक नाम है भोले भंडारी. शिव शंकर को भोले भगवान के रूप में जाना जाता है. इसलिए इनकी पूजा भी बड़ी सरल है. जैसे साल भर के सोमवार के व्रत में पूजा की जाती है. वैसे ही आप सावन सोमवार व्रत में पूजा करके भगवान शिव को प्रसन्न कर सकते हैं. शिव भोले के कुछ भक्त सावन के प्रथम सोमवार से प्रारंभ करके नौ या सौलह सोमवार के व्रत भी रखते जो बहुत फलदाई व्रत माने गए हैं.

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भोले भंडारी बहुत दयालु है. इसलिए जिन लोगों के काम में कोई रुकावट आ रही है. वह इस व्रत को रखते हैं. सावन के सोमवार में व्रत रखने से जीवन की कठिनाइयां दूर हो जाती है और सारे मनोरथ पूरे होते हैं.

पूजा विधि:
सुबह सवेरे उठ कर नहा धोकर साफ वस्त्र धारण करें. और दिन में सिर्फ एक बार भोजन ग्रहण करने का संकल्प लें. इस व्रत में अन्न केवल एक समय ही खाया जाता है. आप पूरे दिन व्रत रखकर तीसरे पहर शाम को व्रत खोल सकते हैं. इस व्रत में नमक खाना या ना खाना श्रद्धालु की इच्छा पर निर्भर करता है. यदि कोई मनुष्य रख सके तो सावन के सोमवार के व्रत मीठे भी किए जा सकते हैं मतलब आप दिन में नमक का सेवन ना करें सिर्फ फलाहार या कोई मीठा प्रसाद खाएं. सुबह शाम दोनों समय भगवान शिव की पूजा करें.

इसके लिए आप भगवान शिव के साथ माता पार्वती, गणेश, कार्तिकेय की तस्वीर पूजा के स्थान पर रखें. और गंगाजल से स्नान कराएं. इसके बाद भगवान के सामने धूप, दीप, फूल, अक्षत, जल, प्रसाद आदि चढ़ाएं. “ओम नमः शिवाय” मंत्र से जाप करें. फिर प्रसाद से भगवान शिव और माता पार्वती को भोग लगाएं. प्रसाद अपने आसपास के लोगों में बांट दें. और जल को पौधे में समर्पित करें. भगवान शिव के व्रत रखना बहुत आसान है. और साथ ही इन का फल भी अच्छा मिलता है. मंदिर में जा कर विधि विधान से शिवलिंग पर जलाभिषेक करें साथ ही बेल पत्थर, फूल, दीप, धूप, बताशे, चावल, सिंदूर आदि अर्पण करें.

कब-कब है सावन सोमवार व्रत की तारीखें:
इस बार सावन में पांच सोमवारों का विशेष योग बन रहा है. इसलिए भक्तजनों को पांच सोमवार व्रत करने को मिलेंगे. अधिकांश चार सोमवार ही सावन के महीने में आते हैं.

साल 2017 में सावन सोमवार व्रत तारीखें इस प्रकार हैं
पहला 10 जुलाई – 2017
दूसरा 17 जुलाई -2017
तीसरा 24 जुलाई – 2017
चौथा 31 जुलाई – 2017
पांचवा 7 अगस्त – 2017

21 जुलाई को सावन शिवरात्रि मनाई जाएगी. इस बार क्या करे शिवरात्रि पर.

तो आप भी सावन के सोमवार के व्रत कीजिए. और भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करके अपनी मनोकामनाएं पूरी करवाएं.

हैप्पी सावन……

“रिमझिम फुहारों के साथ सावन
घेवर की मिठास के साथ सावन
बागों में झूलों के साथ सावन
अपनों के एहसास के साथ सावन”

सावन का महीना, शिवरात्रि, सोमवार व्रत

सावन का महीना कब है!!! यूं तो भारत में हर महीने छोटे-बड़े त्यौहार आते ही रहते हैं. और अब जो आने वाला है वह सावन का महीना है. सावन का महीना पूरे साल भर में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. इसको सावन की शिवरात्रि कब हैभी कहा जाता है. सावन का महीना भगवान शंकर से संबंधित है. सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा की जाती है. श्रावण मास में मौसम भी बहुत सुहावना रहता है. रिमझिम बारिश और झमाझम बरसात भी सावन के महीने का पूरा साथ देती है. कहां जाता है सावन का महीना प्रेमियों के लिए बहुत सुखद है. तो चलिए नीचे पढ़ते हैं, सावन का महीना कब है?, सावन की शिवरात्रि कब है? और सावन के महीने में क्या-क्या होता है.

सावन का महीना कब है

सावन का महीना कब से शुरू है(सावन का महीना कब है):
वर्ष 2017 में सावन का महीना 10 जुलाई से शुरू हो रहा है. और यह 7 अगस्त को समाप्त होगा. इस बार सावन के महीने में पांच सोमवार का विशेष योग बन रहा है. ऐसा बहुत कम बार होता है. अधिकांश महीनों में चार ही सोमवार होते हैं. सावन सोमवार व्रत करने का तरीका और विधि के लिए यह पढ़े.

गुरु पूर्णिमा पर हिंदी कविता

सावन के महीने के सोमवार व्रत :
सावन के महीने में सोमवार के दिनों को बहुत महत्व दिया गया है. क्योंकि मान्यता है कि सोमवार का दिन भगवान शंकर का दिन होता है. इस दिन शंकर भगवान की पूजा की जाती है. सावन के सोमवार को अधिकतर लोग व्रत करते हैं. और भगवान शंकर की आराधना करते हैं. मंदिरों में जाकर शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं, और बेल पत्थर, फूल, चावल, बताशे, दूध आदि चढ़ाते हैं. कहां जाता है सावन के सोमवार में भगवान शंकर की पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और मनुष्य सद्गति को पाता है. उसे मोक्ष मिलता है.

यह भी मान्यता है कि सावन के सोमवार के व्रत करने से कुंवारी लड़कियों को अच्छा पति मिलता है. सावन के सोमवार में मंदिरों में खासी भीड़ देखी जा सकती है. सुबह शाम मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहता है. यहां तक कि लोगों को शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए लंबी-लंबी कतारों में लगना पड़ता है. सावन मास में भगवान शिव की आराधना का अलग ही पुण्य मिलता है.

सावन शिवरात्रि:
सावन में शिवरात्रि 21 जुलाई 2017 को है. बता दें, एक साल में दो शिवरात्रि मनाई जाती हैं. एक फरवरी-मार्च के आसपास और दूसरी जुलाई-अगस्त में जिसको सावन की शिवरात्रि कहते हैं. सावन शिवरात्रि पर कावड़ यात्रा भी निकलती है. सावन शिवरात्रि का व्रत की पूजा और विधि जानने के लिए क्या करे सावन शिवरात्रि पर पढ़ें . इस पर क्लिक करने पर आपको शिवरात्रि से जुडी सारी जानकारी मिल जाएगी.

सावन में प्रकृति:
सावन का मौसम हर उम्र के लोगों के लिए बहुत सुहावना होता है. कहा जाता है सावन के महीने से मौसम का परिवर्तन शुरू हो जाता है. इन दिनों प्रकृति का योवन भी नए निखार पर होता है. मानो धरती का रंग बिरंगे रंगों से सिंगार कर दिया गया हो. इसीलिए भारतीय फिल्मों में भी सावन के महीनों के गानों का काफी अधिक उपयोग किया जाता है.

बाजारों में भी रौनक:
सावन के महीने में बाजारों की रौनक देखने लायक होती है. चहल कदमी के साथ बाजार में मिठाइयां, कपड़ों, गहनों की भरमार होती है. इनदिनों लोग बाजारों में खरीदारी करने के लिए आते हैं. भारत के कुछ हिस्से में सावन के महीने में घेवर मिठाई का बहुत अधिक प्रचलन है. घेवर की मिठाई एक दूसरे के घर भेजते हैं. कहा जाता है सावन की पहली बारिश के बाद घेवर मिठाई का स्वाद और भी अधिक बढ़ जाता है. सावन के महीने में अलग-अलग परिवारों के अलग अलग तरह से काम करने के रीति-रिवाज है.

सिंधारा(कोथली) प्रथा :
भारत में कई जगहों पर, हिंदू परिवारों में सावन के महीने में शादीशुदा बेटियों की ससुराल कोथली अथवा सिंधारा भी भेजे जाते हैं. जिसमें कपड़े, घेवर, मिठाइयां, लड्डू, मट्ठी, सोने-चांदी के जेवरात, बच्चों के लिए खिलौने आदि भेजने का प्रचलन है.

प्यारे पाठको को रिमझिम बारिश, घेवर और अन्य मिठाइयों के संग सावन के महीने की शुभकामनाएं. आपको हमारा सावन का महीना कब है आर्टिकल कैसा लगा कृपया कमेंट बॉक्स में जरुर बताएं.

गुरु पूर्णिमा : गुरु और शिष्य का दिन

“गुरु पूर्णिमा”!! आषाढ़ मास में पड़ने वाली शुक्ल पक्ष की  पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है. गुरु पूर्णिमा देश भर में मनाई जाती है. गुरु पूर्णिमा के बारे में जानने के लिए  इस आर्टिकल को पूरा पढ़िए.

गुरु पूर्णिमा

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कब है गुरु पूर्णिमा:

वर्ष 2017 में यह गुरु पूर्णिमा 9 जुलाई को है. यह पर्व गुरु और शिष्यों का है. लोगो की मान्यता है कि यह दिन बहुत महत्वपूर्ण होता है. इस दिन गुरुओ का आशीर्वाद लेना बहुत जरुरी है. अपने दिन को शुभ बनाने के लिए दिन की शुरुआत अपने गुरुओ के आशीर्वाद से ही करनी चाहिए. इसी दिन से पता चलता है कि गुरु और शिष्य का सम्बन्ध कैसा है, गुरुओ की हमारे जीवन में कितनी महत्ता है.

मंदिरो  में कार्यक्रम:

इस खास दिन के लिए मंदिरो में खासे इंतज़ाम किये जाते है. क्यूंकि लोग अपने गुरुओ की पूजा-अर्चना करने और आशीर्वाद लेने के लिए मंदिरो की और ही प्रस्थान करते हैं. गुरु पूर्णिमा के लिए मंदिरो को सजाया भी जाता है. चारो और गुरु पूर्णिमा पर्व से कई दिन पहले ही तैयारियां शुरू कर दी जाती है.

इस उपलक्ष में मदिरों में कई दिवसीय कार्यक्रम भी आयोजित किये जाते है. जैसे कि कथा, पाठ, कीर्तन, जागरण सत्संग, प्रवचन  इत्यादि.  देश-विदेश से लोग कई-कई दिन पहले ही अपने गुरुओ के आश्रम में डेरा डाल लेते है. और सेवा में लगे रहते हैं.

कितना बड़ा गुरु:

पुराने समय के महान ऋषि थे “व्यास”. जो चारो वेदो के पहले व्याख्याता भी हुए हैं. जिनकी पूजा गुरु पूर्णिमा के दिन की जाती है. गुरु पूर्णिमा के दिन व्यास जी की पूजा के महत्व् के अनुसार इस दिन को “व्यास पूर्णिमा” भी कहा जाता है.

हमारे समाज में गुरुओ का दर्जा बहुत बड़ा है. इसकी कई मिसालें शास्त्रों में भी व्याख्यान है. प्राचीन समय से ही माना गया है कि जीवन का सही सार जानने के लिए एक सच्चे गुरु का होना आवश्यक है. जीवन में गुरु का साथ होना अच्छा मानव होने की निशानी है.  गुरु की शरण में रहने से मनुष्य को नैतिक मूल्यों का सही ज्ञान होता है. साथ ही शांति, भक्ति करने की शक्ति, अध्ययन और योग का भी ज्ञान मिलता है.

देशभर में यह पर्व बड़ी ही श्रद्धा से मनाया जाता है. जब प्राचीन समय में शिष्य अपने गुरुओ से उनके आश्रम में रहकर शिक्षा लेते थे तो इस दिन के महत्व्  के अनुसार अपने गुरुओ की पूजा करके  दान-दक्षिणा भी देते थे.
इसीलिए गुरु पूर्णिमा जैसे बड़े पर्व पर अपने गुरु का आशीर्वाद लेना मायने रखता है.

नोट: अपने गुरु का चयन करते समय बड़ी सावधानी बरतनी चाहिए. क्यूंकि आज के समय में सच्चा गुरु मिलना बहुत मुश्किल सा हो गया है. किसी पर बिना सोचे-समझे विश्वास करना आपको परेशानी में डाल सकता है.

क्या करे गुरु पूर्णिमा पर:

  • गुरु पूर्णिमा के दिन सुबह सवेरे उठकर घर की साफ़-सफाई करे.
  • स्नान करके मन ही मन अपने गुरु का मनन करते रहे.
  • साफ़-सुथरे कपडे पहने और तैयार हो जाये.
  • घर के पूजा वाले स्थान पर या किसी भी पावन जगह पर लकड़ी की एक साफ़ पाटी रख ले.
  • पाटी पर सफ़ेद रंग का साफ़ कपडा बिछा ले.
  • अब बारह-बारह रेखाएं बनाकर व्यास पीठ बना ले.
  • “गुरुपरम्परासिद्धयर्थ व्यासपूजां करिष्ये” मन्त्र से पूजा करे और संकल्प ले.
  • उसके बाद चारो दिशाओ में चावल छोड़े.
  • अब महान ऋषि और गुरुओं का नाम या मन्त्र से जाप करें.
  • इसके बाद अपने गुरु का स्मरण और पूजा करके दक्षिणा भी दे.

इसके अलावा व्यास ऋषि के लिखे हुए शास्त्रों और ग्रंथो का अध्यन भी कर सकतें हैं. और उनकी शिक्षाओं को अपने आचरण में लाने की कोशिश करें.

यह महत्वपूर्ण गुरु पर्व बड़ी ही श्रद्धा का पर्व है. इसको श्रद्धा से मनाये, लेकिन इसमें अन्धविश्वास शामिल नहीं होना चाहिए.

इस मौके पर गुरु को फूलो की माला पहनाकर, फल, फूल, वस्त्र आदि देकर आशीर्वाद प्राप्त करें.

इस दिन केवल गुरु का ही नहीं अपने माता-पिता और घर-परिवार के सभी बड़ो का आशीर्वाद ले. यह बहुत कल्याणकारी माना गया है.

तो आप इस सब तरीके से अपना गुरु पर्व मनाइये और हमें कमेंट बॉक्स में बताइये कैसा रहा आपका पवित्र दिन?

प्यारे पाठको को  गुरु पूर्णिमा की बहुत बहुत बधाइयाँ…….

देवशयनी एकादशी : “चातुर्मास” तक किसी भी मंगल कार्य की ना डाले नींव

देवशयनी एकादशी!!! भारत देश में अनेको विभिन्नतायें हैं. अलग-अलग त्यौहार, रीति-रिवाज, तौर-तरीके, आदि-आदि. और सब काम विभिन्न शुभ तिथियों पर होते हैं. त्योहारों और शुभ तिथियों का सिलसिला भी साल भर चलता रहता है. लेकिन साल में कुछ दिन शुभ तिथियों का दौर भी थम सा जाता हैं.

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और फ़िलहाल वो ही समय आ गया हैं. जी हाँ, हम बात कर रहे हैं देवशयनी एकादशी की. साल 2017 में देवशयनी एकादशी मंगलवार यानि 4th जुलाई को है.  धार्मिक ग्रंथो में आषाढ़ मास की शुक्ल तिथि से कार्तिक मास की शुक्ल तिथि (4 महीने) तक भगवान विष्णु के शयनकाल का समय होता हैं. और उनके सोने का समय 31 अक्टूबर 2017 के दिन देवोत्थान एकादशी को समाप्त होगा. हम आपको बता दे, इन चार महीनो में कोई भी शुभ कार्य करना शुभ नहीं माना जाता है. और ये ही कारण है कि हिन्दू लोगो में चार महीने तक शादियां भी नही होती हैं.

इस 4 जुलाई को होने वाली एकादशी को विष्णुशयनी, हरिशयनी, शयन और पदमा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. जब सूर्य कर्क राशि में प्रवेश करते हैं तब विष्णु भगवान् सोते हैं और जब सूर्य तुला राशि में प्रवेश करता हैं तो भगवान् विष्णु के जागने का समय होता हैं.

यह चातुर्मास की कही जाने वाली प्रथम एकादशी है. इसीलिए इसका महत्त्व और भी कई गुना बढ़ जाता है. लोग इस दिन अच्छी तरह से पूजा-पथ करके दान आदि करते हैं. और पुण्य कमाते हैं. कुछ लोग चातुर्मास की एकादशी के व्रत का भी स्वेच्छा से पालन करते हैं.

महीनो की शुरुआत के लिए जो हिन्दू लोग सूर्य के अनुसार महीने को प्रारम्भ करते हैं. वो संक्रांति से संक्रांति (16 जुलाई से 17 अक्टूबर) तक और जो चन्द्रमा के अनुसार महीने का प्रारम्भ मानते हैं वो पूर्णिमा से पूर्णिमा(9 जुलाई से 4 नवंबर) तक चातुर्मास के व्रत के नियमो को ध्यान में रखेंगे.

आज का दिन ही केवल बचा है शुभ कार्यो के लिए. अपने सभी अच्छे कार्य जल्दी निपटा ले.

Shani Amavasya 24 June,पूजा विधि, दान आदि के बारे में जाने

Shani Amavasya 24 June, इस साल 2017 में जून के महीने में शनिवार को पड़ने वाली 24 तारीख को अमावस्या है. शनिवार को ये योग बनने की वजह से इसको शनिश्चरी अमावस्या कहां जा रहा. इस साल इस अमावस्या को बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है. क्यूंकि ये संयोग 10 साल बाद बना है.

जाने रामनाथ कोविंद के बारे में कुछ खास बातें

Shani Amavasya 24 June23 जून को शनि राशि बदल कर वृश्चिक राशि में प्रवेश कर रही है. साथ ही 24 जून को अमावस्या का पर्व है. तो इस हिसाब से ये दोनों दिन बहुत ही बड़े माने जा रहे हैं.

भारतीय शास्त्रो में शनि ामस्य को एक बड़ी अमावस्या माना गया है. इसी लिए साल 2017 की 24 जून को शनि अमावस्या बहुत बड़े पर्व के रूप में मनाई जाएगी.
आषाढ़  के इस महीने को बाबा  भैरव का महीना  भी माना गया है. इसी कारण शनिचरी अमावस्या को शनि देव और बाबा भैरव की पूजा स्तुति करे. यह बहुत लाभकारी होगा.

ज्योतिषाचार्यो के अनुसार अब से पहले यह योग साल 2007 में बना था और अब फिर 10 साल बाद आया है. बता दे, इसके बाद यह योग 2037 में बनने की सम्भावना है. तो सभी को इस शनि अमावस्या पर बाबा भैरव के साथ ही शनि देव की पूजा-पाठ पूरे विधि-विधान से करने से विशेष लाभ तो होगा ही साथ-साथ शनि की दशा सही होने में भी प्रभावी होगा.

Shani Amavasya 24 June को जो भी दान आदि करना हो तो बड़ी श्रद्धा भाव से से करें. पंडितो के अनुसार शनि की साढ़े साती, पितृ दोष, काल सर्प दोष, शनि पूजा और ढय्या वाले जातको को विशेष राहत मिलेगी

कहा जाता है की अगर आप इस महान दिन पर कुछ उपाय कर ले तो आपको परेशानियों से राहत मिल सकती है.जो लोग शनि की साढ़े साती की दशा से परेशान हैं. उनको इस शुभ दिन शनि देव की आराधना अवश्य करनी चाहिए. साथ ही शनि अष्ठक और शनि स्त्रोत का पाठ भी अपनी आराधना में शामिल करें. ऐसा करने से आपको परेशान करने वाली दशा में राहत महसूस होगी.

एक दूसरा आप ये कर सकते हैं कि, शनि के बीज मन्त्र का जाप करें और काला तिल से बने सामान दान करे. काले तिल भी दान करने का प्रचलन है. इसके अलावा उड़द की काली दाल की खिचड़ी भी गरीबो को खिला सकते हैं.

इस शुभ शनि अमावस्या पर अपने आस-पास के पीपल के पेड़ पर सरसो के तेल से अभिषेक करके दीपक जलाये. सात प्रकार के अनाज भी चढ़ाना भी अच्छा माना जाता है.

तो इस प्रकार आप शनिचरी अमावस्या के दिन पूजा-पाठ कर सकते हैं. और शनि दोष को काम करने में सफल हो सकते हैं. साथ ही आपके कार्य सफल होने के आसार कई गुना बढ़ जाते हैं.

पूजा की विधि:

ये तो सभी जानते है कि शनि महाराज को तेल से अभिषेक किया जाता है. तो इस दिन भी शांत मन से शनि देव को तेल से अभिषेक करें. काला कपडा, काला तिल, काला उड़द और नील फूल चढ़ाये. साथ ही काले श्वान को भोजन भी दान करना चाहिए. इस दिन ज्यादातर काली वस्तुओ का दान किया जाता है. जैसे कि काळा उरद की दाल से बानी मिठाईया, काले तिल या काले तिल से बने हुए पकवान, काले गुलाब जामुन, छतरी, अपने पितरों के काले वस्त्र आदि.

Shani Amavasya 24 June पर जानवरों को काले चने भिगोकर खिलाना, काले कुत्ते को दूध पिलाना, काले कौवा को रोटी खिलाना बहुत लाभकारी होगा. सही तरीके से किये गए उपायों से शनि की दशा से प्रभावित जातको के कार्यो में आ रही बाधाओं को दूर करने में भी सहायता मिलेगी.

इस खास दिन के लिए सभी शनि मदिरो में अच्छे खासे इंतज़ाम किये जाते हैं. श्रद्धालुओं की भीड़ होने पर भक्तजनो को कोई परेशानी ना हो इसके लिए प्रबंधन पहले से ही सक्रिय रहता है.  भक्तों की सुविधाओं का भी ख्याल रखा जाता है.