शनि अमावस्या पर कैसे करे भगवान शनि को खुश

शनि अमावस्या 2017!! न्याय के देवता है शनि। लोगो को उनके कर्मो के अनुसार फल प्रदान करते है भगवान शनि। इनको प्रसन्न करके आप अपने जीवन में खुशियां ला सकते है। ये आप कर सकते है शनि अमावस्या 2017 के अवसर पर। शनि अमावस्या का शुभ संयोग बहुत कम अवसर पर बनता है।

शनि देव को शनि अमावस्या बहुत प्रिय है। इस साल शनि अमावस्या 2017, 18 नवंबर 2017 यानी शनिवार को मनाई जाएगी। ऐसा माना जाता है कि साढ़ेसाती एवं ढैय्या के दौरान शनि ग्रह व्यक्ति पर शुभ-अशुभ फल प्रदान करता है।शनि अमावस्या पर शनिदेव की पूजा कर उन्हें प्रसन्न कर व्यक्ति शनि के कोप से खुद का बचा सकता है।

कौन है शनि:

God of Justice Shani
Shani Amavsya

शनि भगवान सूर्य तथा छाया के पुत्र हैं। मृत्यु के देवता यमराज शनिदेव के बड़े भाई हैं। आकाश मंडल में सौर परिवार के जो 9 ग्रह हैं, उनमें यह दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है। शनिदेव यदि रुष्ट हो जाएं तो राजा को रंक बना देते हैं और यदि प्रसन्न हो जाएं तो आम आदमी को खास आदमी बना देते हैं।

शनि अमावस्या का योग:
18 नवंबर 2017 को शनि अमावस्या पर 30 साल बाल शोभन योग बन रहा है। यह योग दान-पुण्य से लेकर बाजार से खरीदी नए कार्यों की शुरुआत के लिए शुभ रहेगा। इस दिन शनि के साथ बुध-चंद्रमा की युति से फसलों और व्यापार में वृद्धि के संकेत मिल रहे हैं। साथ ही पूजा-पाठ से शनि की कृपा भी बरसेगी।

शनि अमावस्या 2017 का महत्व:
मार्गशीर्ष अमावस्या का एक अन्य नाम अगहन अमावस्या भी है। इस अमावस्या का महत्व कार्तिक अमावस्या से कम नहीं है। जिस प्रकार कार्तिक मास की अमावस्या को लक्ष्मी पूजन कर दिपावली बनाई जाती है। इस दिन भी श्री लक्ष्मी का पूजन करना शुभ होता है. इसके अतिरिक्त अमावस्या होने के कारण इस दिन स्नान- दान आदि कार्य भी किये जाते है। अमावस्या के दिन पितरों के कार्य विशेष रुप से किये जाते है. तथा यह दिन पूर्वजों के पूजन का दिन होता है।

क्यों खास है शोभन योग:
इस शनिश्चरी अमावस्या पर दोपहर 12.48 बजे तक गजकेसरी योग रहेगा। इसके उपरांत बुधादित्य योग के साथ काल सर्पदोष की भी निष्पत्ति हो रही है। इस योग के कारण शिक्षा एवं न्याय क्षेत्र में काम करने वाले और विद्यार्थियों के लिए शुभ रहेगा। जलीय वस्तुओं, इलेक्ट्रॉनिक्स सामान, ऑटो मोबाइल सेक्टर में महंगाई बढ़ेगी।

अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में क्या इस बार खास जानने के लिए यहां क्लिक करें

शनि अमावस्या 2017

शनि अमावस्या 2017
शनि अमावस्या पर करना चाहते है भगवान शनि को खुश

का शनि भक्तो पर असर:

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न्याय के देवता है शनि

शनि अमावस्या को शनि भक्तों के लिए फलदायी मानी जाती है। शनि अमावस्या को न्याय के देवता शनिदेव का दिन माना गया है। जिन जातकों की जन्म कुंडली या राशियों पर शनि की साढ़ेसाती और ढैया का असर होता है, उनके लिये यह खास दिन है, क्योंकि शनि अमावस्या पर शनि देव की पूजा-अर्चना करने पर शांति व अच्छे भाग्य की प्राप्ति होती है। ज्येष्ठ मास में दान-पुण्य के लिए ये सबसे अच्छा दिन माना जाता है। शनि मंदिरों में इस दिन दर्शन-पूजन से शनि पीड़ा से मुक्ति मिलेगी।

शनि अमावस्या पर करे ये उपाय

  • शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए आप दिन व्रत रख सकते है इससे शनि दोषों से छुटकारा दिलाता है।
  • शनिदेव के कवच, बीज मंत्र और स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।
  • शनिवार व्रत कथा पढ़ना भी उत्तम माना जाता है।
  • शनि अमावस्या के दिन व्रत के दौरान फल, दूध और लस्सी आदि ग्रहण कर सकते हैं।
  • शाम के समय हनुमान जी और बटुक भैरव का दर्शान करें।
  • काले उड़द की खिचड़ी में काला नमक मिलाकर ग्रहण करना चाहिए। इसके अलावे काले उड़द दाल का मीठा हलवा भी ग्रहण कर सकते हैं।

शनि अमावस्या पर इन् आसान उपायों को कर के भगवान शनि को प्रसन्न कर सकते है, उनकी कृपा पा सकते है,

अंतर्राष्ट्रीय भारतीय फिल्म फेस्टिवल 2017 का होगा शानदार आगाज़

बॉलीवुड वैसे तो अपनी चमक से हमेशा जगमगया रहता है, लेकिन जब बात किसी फिल्म फेस्टिवल की आती है तो इसकी रौनक देखती ही बनती है, फिल्म जगत में वैसे तो कोई न कोई फिल्म फेस्टिवल चलता रहता है, लेकिन जो फिल्म फेस्टिवल इस समय देश में चल रहा है वो है International Film Festival India 2017 (इफ्फी)

IFFI Goa 2017 :

IFFI 2017 in Goa
International Film Festival Of India 2917

48वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का आयोजन 20 नवंबर से गोवा में किया जा रहा है। इस IFFI की खास बात ये है की इसमें इस बार बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन को सम्मानित किया जाएगा।

http://sarijankari.com/2017/11/16/smog-delhi-reasons-save/

इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल इंडिया 2017 (IFFI )-

  • International Film Festival India 2017 की शुरुआत 20 नवंबर से लेकर 28 नवंबर तक आयोजित किया जाएगा।
  • पूरे 8 दिनों तक दर्शकों को विभिन्न भाषओं की बेहतरीन फिल्में देखने को मिलेंगी।
  • इस महोत्सव में बहुत से सेलिब्रिटीज को सम्मानित किया जाएगा तो देश के बेहतरीन सिनेमा को लोगों के सामने लाने का काम किया जाएगा।
  • इसके अलावा आपको बहुत से फिल्मी सितारें इन 8 दिनों में महोत्सव में शिरकत करते हुए दिखेंगे।

IFFi में विवाद-

  • इस International Film Festival India 2017 में दो फिल्में मलयालम भाषा की सेक्सी दुर्गा और मराठी की न्यूड को दिखाया जाना था।
  • महोत्सव के लिए बनी 13 सदस्यों की ज्यूरी में मशहूर फिल्म निर्माता सुजॉय घोष को अध्यक्ष बनाया गया था।
  • सेक्सी दुर्गा और न्यूड ज्यूरी को इतनी पसंद आई थीं कि उन्होंने इन्हीं के साथ महोत्सव की शुरुआत करने की सोची थी। लेकिन इन्हें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सूची से हटा दिया है। जिसकी वजह से नाराज घोष ने 13 सदस्यीय टीम से इस्तीफा दे दिया है।

भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 2017 हर बार की तरह बहुत सारे Twist & Turns के साथ वापस आया है।यहाँ आपको बॉलीवुड से लेकर दूसरी फिल्म जगत की भी बेहरीन फिल्मो की झलक देखने को मिलती है। यही खास बात है इफ्फी की। आज हमने आपको रूबरू कराया इसी के कुछ रंगीन पहलुओं से।

धनतेरस 2017, शुभ मुहूर्त मंत्र पूजा विधि

धनतेरस 2017!! इस समय मौसम त्योहारी रंग में नहाया हुआ है. इस आकर्षक फेस्टिव सीजन की शुरुआत हो चुकी है. बाजारों की रौनक भी एक अलग रंग में है. कल से दिवाली सीजन आपके मन को खुशनुमा बनाने आ रहा है.

ऐसे पूजा करके मां लक्ष्मी को दिवाली पर घर में आमंत्रित करें

धनतेरस 2017

दिवाली सीजन के त्यौहार की शुरुआत धनतेरस के साथ होती है. धनतेरस दिवाली सीजन में सबसे पहला त्यौहार माना जाता है. धनतेरस पर लोग खूब खरीदारी करते हैं. खरीदारी करना इस दिन बहुत शुभ माना जाता है.

दिवाली के लिए बेस्ट गिफ्ट आइडियाज यहां से लें

कब करें धनतेरस 2017 की खरीदारी:
धनतेरस पर खरीदारी करने का शुभ समय शाम को माना जाता है. शाम से लेकर रात तक बाजारों में लोग बड़े उत्साह के साथ खरीदारी करते हैं.

धनतेरस पर लोग सोने चांदी के आभूषण, बर्तन, झाड़ू और वाहनों की खरीदारी करते हैं. इनकी खरीदारी करना अच्छा माना जाता है. धनतेरस पर पूजा का­­­ भी एक शुभ मुहूर्त होता है. जिस पर आप विधि-विधान के साथ पूजा-पाठ करके अपने साल को अच्छा बना सकते हैं. भगवान की कृपा आप पर हमेशा बनी रहेगी.

कब है धनतेरस 2017:
धनतेरस 2017 का त्यौहार इस बार मंगलवार यानी 17 अक्टूबर 2017 को मनाया जाएगा. धनतेरस पर माता लक्ष्मी के साथ धन के मालिक कुबेर की पूजा की जाती है. लोग अपने घरों में कुबेर देवता की मूर्ति को भी स्थापित करते हैं.

पूजा का शुभ मुहूर्त:
धनतेरस के दिन पूजा-अर्चना का शुभ मुहूर्त शाम 6.57 से रात्रि 8.49 तक रहेगा. मुहूर्त के निश्चित समय में पूजा करने से भक्त जनों को अच्छा लाभ मिलता है.

इस मंत्र से करें धन के देवता का जाप:
देवान कृशान सुरसंघनि पीडितांगान, दृष्ट्वा दयालुर मृतं विपरीतु कामः
पायोधि मंथन विधौ प्रकटौ भवधो, धन्वन्तरि: स भगवानवतात सदा नः
ॐ धन्वन्तरि देवाय नमः ध्यानार्थे अक्षत पुष्पाणि समर्पयामि

धनतेरस पूजन विधि:
यूं तो पूजा सब अपने-अपने तरीके से करते हैं लेकिन फिर भी हर पूजा को करने की एक विधि होती है. जिसके अनुसार आप अपनी पूजा को और भी फलदायी बना सकते हैं.
तो चलिए जानते हैं धनतेरस के दिन की पूजन विधि क्या होनी चाहिए.

  • सबसे पहले पूजन के स्थान की सफाई करें
  • उसके बाद एक चौकी रखें
  • चौकी पर एक साफ कपड़ा बिछाकर उस पर लक्ष्मी माता और भगवान धनवंतरी की तस्वीर रखें
  • गंगाजल से छिड़काव
  • एक दीपक लें और उस पर सिंदूर और अक्षत का तिलक लगाकर उस में तेल डालकर भगवान के सामने दीप प्रज्वलित करें
  • भगवान को भोग लगाएं और कुछ पैसे भी चढ़ाएं
  • कुछ देर भगवान का ध्यान करें. और ऊपर बताए गए मंत्र का जाप करें
  • तत्पश्चात पूजा समाप्त होने के बाद दीपक को घर के मुख्य द्वार पर रख दें.
    dhanteras par kya kharide
    तो इस प्रकार आप भी ऊपर बताएं गई पूजा विधि के अनुसार पूजा करें और भगवान के मंत्र का जाप करें और अपनी धनतेरस को खुशहाल बनाए. परिवार की सुख समृद्धि के लिए कामना करें.

Happy Dhanteras!!

Best gift ideas for diwali

दिवाली पर गिफ्ट!!!

दिवाली का त्योहार अब आने वाला ही है ऐसे में में मिठाई, पटाखे और आतिशबाजियों के अलावा गिफ्ट का भी महत्व बहुत ही ज्यादा है.
इस त्यौहार में दोस्त, परिवार, ऑफिस हर जगह गिफ्ट लेने-देने की परंपरा है. ऐसे समय में गिफ्ट क्या दें यह हमारी समझ से बाहर हो जाता है ऐसे में हम आपके लिए कुछ गिफ्ट Ideas लेकर आएं हैं.

दिवाली पर गिफ्ट

इस दिवाली कुछ इस खास तरह से करें सजावट

ऑफिस के लिए दिवाली पर गिफ्ट:
अगर आप अपने ऑफिस में घड़ी गिफ्ट देना चाहते हैं तो पर्सनलाइज्ड घड़ी गिफ्ट में दे सकते हैं. ऑफिस में टाइम का खास महत्व होता है.
दिवाली पर लक्ष्मी जी और गणेश जी की पूजा की जाती है. इसलिए आप लक्ष्मी गणेश की मूर्ति भी गिफ्ट के स्वरूप में दे सकते हैं.

सगे संबंधियों के लिए:
दिवाली खुशियों का त्यौहार है और इस पर मिठाइयों का ख़ास महत्व है. इसलिए आप अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को मिठाई भी गिफ्ट कर सकते हैं.
लेकिन यहां हम आपको एक सलाह देना चाहेंगे. त्योहार पर किसी को भी मिठाई भेंट करने से पहले एक बार उसको चेक जरुर कर लेना चाहिए जब भी आप मिठाई खरीदें तो उसको टेस्ट जरूर कर लें. फेस्टिवल सीजन में मिठाइयों में बहुत ज्यादा मिलावट पाई जाती है.
इसके अलावा अगर आपका बजट थोड़ा ज्यादा है तो आप अपने सगे सम्बन्धियों को बाजार में उपलब्ध ड्राई फ्रूट का पैक भी गिफ्ट कर सकते हैं. जोकि देखने में तो बहुत आकर्षक लगते ही हैं साथ ही आप दूसरों पर इंप्रेशन भी डाल सकते हैं.

इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स:
अगर ये आपके Boyfriend या Girlfriend के साथ पहली दिवाली हो तो उन्हें स्पेशल फील कराने के लिए स्मार्टफोन भी गिफ्ट कर सकते हैं. कई ई-कॉमर्स कंपनियां फेस्टिव सीजन के चलते ऑफर्स भी देती हैं. आप भी उन ऑफर्स का फायदा उठा सकते हैं.
आप अपने करीबियों को भी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स उपहार के तौर पर दे सकते हैं.

घर की सजावट के लिए गिफ्ट:
बाजार में कई हेंडीक्राफ्ट आइटम्स उपलब्ध होते हैं. जिन्हें आप गिफ्ट कर सकते हैं. हेंडीक्राफ्ट आइटम्स घर के किसी भी हिस्से की शोभा बढ़ाते सकते हैं.
दिवाली में क्रॉकरी का सेट देना भी एक अच्छा विकल्प है.

कार्ड :
कोई भी त्यौहार हो कार्ड का प्रयोग आप हमेशा किसी को स्पेशल फील करने के लिए कर सकते हैं. कार्ड में शुभकामनाएं लिखकर कार्ड भेंट करें.

चॉकलेट :
अब दिवाली पर एक-दूसरे को चॉकलेट गिफ्ट करना एक ट्रेंड बन गया है. और धीरे-धीरे लोग मिठाई की जगह चॉकलेट को ही तरजीह देने लगे हैं.

किसी को भी खुश करने के लिए ऊपर बताए गए गिफ्ट Ideas काफी हैं. गिफ्ट देते समय मुस्कुराना ना भूलें. एक मुस्कुराहट के साथ अपने रिश्तो में मधुरता लाएं.

Happy Diwali to All Dear Readers!!

Decoration of Diwali

दिवाली की सजावट!!!

दिवाली की सजावट सच में बहुत मायने रखती है. इस दिन लोग अपने घरों की साफ़-सफाई कर उसे सजाने में व्यस्त हो जाते हैं. इस दिन घर को सजाना उतना ही जरुरी होता है जितना माता लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा करना होता है. कहते हैं जहां साफ़-सफाई होती है वहाँ माँ लक्ष्मी का वास होता है. यदि आपका घर साफ़ सुथरा और सजा रहेगा तो माता लक्ष्मी आप पर खुश रहेंगी.

दीवाली कहानी, लक्ष्मी पूजन मंत्र और मुहूर्त

दिवाली की सजावट

दिवाली की सजावट और घर को नया लुक देने के लिये लोग विभिन्न प्रकार की झालरों से ले कर रंगाई-पुताई आदि कराने पर ध्यान देते हैं और पैसे भी खर्च करते हैं.
लोग सोंचते हैं कि बात अगर घर को सजाने की हो तो बजट का ध्यान दिमाग से निकाल देना चाहिए. लेकिन दिवाली के दौरान लगभग हर दुकानदार अपने सामान का रेट चार गुना बढ़ा देता है. इसलिए दिवाली की सजावट करने के कुछ आसान tips आपको बताने जा रहे हैं .

दिवाली पर घर सजाने के लिये आपको कुछ Basic सी चीज़े चाहिये होती हैं. जो कि बाजार में बहुत महंगे दामों पर बेची जाती हैं. इसलिये इस काम में हम आपकी मदद करेंगे और आपको बताएंगे कि दिवाली पर किस तरह budget में रह कर घर को सजाया जाए.

कागज़ के रिबन:
वैसे इन रिबन का प्रयोग बर्थडे पार्टी या किसी अन्य पार्टी जैसे टीचर्स डे आदि पर किया जाता है. तो क्यों ना इसका प्रयोग हम दिवाली पर घर को सजाने के लिए करें. जो कि आपके बजट के अनुकूल भी होगा.

वॉल हैंगिंग(wall hanging):
दिवाली आते ही घर पर महमानों और परिवारजनों का आना-जाना शुरू हो जाता है. लोगों की भीड़ इकठ्ठा होने लगती है. तो इसलिये आपको अपने घर को अच्छी तरह से सजाना चाहिए. दिवाली की सजावट में आप गहरे रंग की वॉल हैंगिंग अपने सोफे के पीछे या बेड के ऊपर लगा सकती हैं. इससे आपका घर नया-नया नजर आएगा.

कंदील(Kandeel):
रंग-बिरंगे और कढाई वाले कंदील से आप अपनी बालकनी या घर में कम रौशनी वाली जगह को रौशन कर सकती हैं. बाजारों में कई प्रकार के कंडील उपलब्ध होते हैं.

पूजा की थाली:
दीवाली में लक्ष्मी पूजा के दिन थाली का विशेष महत्व होता है. अपने पूजा घर को साफ़ करें उसे सजाएं, उसमें रखी मर्तियों की सफाई करें और आरती की थाली को रंग-बिरंगे कपड़ों, सितारों और पेंट आदि से decorate करना न भूलें.

रंगोली(Rangoli):
इस दिन रंगोली का विशेष महत्व़ होता है. अपने घर के Main Gate पर Chalk Powder या फूलों की एक खूबसूरत रंगोली बनाएं और उस रंगोली पर कुछ दिये रखें. इससे पूरा घर खिला-खिला लगने लगता है.

हैंडीक्राफ्ट आइटम(Handcraft Items):
Clay के अद्भुत Handicraft item देखने में बहुत attractive लगते हैं और इनका budget भी कम होता है.

मूर्तियां:
मूर्तियों को आप अपने ड्राइंग रूम की साइड-टेबल पर रख कर उसके किनारे दिया सजा कर रख सकती हैं.

इस दीवाली आप भी अपने घर को ऊपर दिए हुए आईडिया से सजाकर एक खुशनुमा माहौल बनाएं. इस दिवाली को हमेशा के लिए यादगार बनाएं.
आपको कम पैसों में अपना घर सजाने के ऊपर बताए गए तरीके कैसे लगे कृपया करके हमें कमेंट बॉक्स में जरुर बताएं.

प्यारे पाठको को दिवाली की बहुत-बहुत शुभकामनाएं!!
अपना ख्याल रखें अपने वातावरण का भी ख्याल रखें!!

दीवाली कहानी, लक्ष्मी पूजन मंत्र और मुहूर्त

दीवाली हिंदुओं के मुख्य त्यौहारों में से एक है. दीपावली को लक्ष्मी पूजा के नाम से भी जाना जाता है. दिवाली लोगो के लिए खुशियों भरा त्यौहार है. इस त्यौहार को पूरे भारत में बड़े हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है. इस फेस्टिव सीजन के लिए कार्यालयों में भी छुट्टी दी जाती है. लोग अपने-अपने घरों को जाते हैं और अपने परिवार वालो के साथ इस त्यौहार का भरपूर आनंद लेते हैं.

दिवाली गिफ्ट के लिए आईडिया यहाँ से ले

दीवाली

दीवाली भगवान श्री राम के अयोध्या वापसी की खुशी में मनाई जाती है. दीवाली के दिन लक्ष्मी जी की पूजा का भी विधान है.
इस साल दीवाली 19 अक्टूबर=2017 यानी बृहस्पतिवार को मनाई जाएगी. शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान राम 14 वर्ष के बाद रावण यानी अंधकार पर विजय प्राप्त कर अयोध्या वापस लौटे थे. प्रभु राम के आने की ख़ुशी में अयोध्यावासियों ने दीपक जलाकर भगवान के वापसी का उत्सव मनाया था. स्कंद पुराण के अनुसार कार्तिक अमावस्या के दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर सभी देवताओं की पूजा इस विधि विधान के साथ करनी चाहिए.

कुछ ऐसे करे दिवाली पर घर की सजावट

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त:
दिवाली के दिन लक्ष्मी माँ के पूजन का मुहूर्त शाम 07:11 से लेकर रात को 08:16 तक है.

महानिशा काल पूजा का मुहूर्त:
रात 11:40 से लेकर रात को 12:31 तक है

दिवाली पूजा विधि :
दिवाली के दिन पूजन मुहूर्त के समय पूजा घर में लक्ष्मी और गणेश जी की नई मूर्तियों को स्थापित करें.
पूजा की चौकी पर स्वस्तिक बनाकर और चावल रखकर उसके ऊपर कलश की स्थापना करनी चाहिए.
इसके बाद प्रतिमा के सामने बैठकर हाथ में जल लेकर शुद्धि मंत्र का उच्चारण करते हुए उसे मूर्ति पर, परिवार के सदस्यों पर और घर में सर्वत्र छिड़कना चाहिए.

दिवाली का त्यौहार पाँच दिन (धनतेरस, नरक चतुर्दशी, अमावश्या, कार्तिक सुधा पधमी, यम द्वितीया या भाई दूज) का हिन्दू त्यौहार है. जिसकी शुरुआत धनतेरस (अश्वनी माह के पहले दिन का त्यौहार है) से होती है और भाई दूज (कार्तिक माह के अन्तिम दिन का त्यौहार है) पर खत्म होती है.
इस त्यौहार को लोग खुशी से घरों को सजाकर बहुत सारी Light, दिये, candles  जलाकर, आरती पढकर, Gifts बाटकर, मिठाईयॉ, cards बॉटकर, एस .एम. एस भेजकर, रंगोली बनाकर, खेल खेलकर, मिठाइयां खाकर मानते हैं.

त्यौहार की शुरुआत:
गुरुवार, 19 अक्टूबर, 2017
धनतेरस: मंगलवार, 17 अक्टूबर, 2017
नरक चतुर्दशी (छोटी दीवाली): बुद्धवार, 18 अक्टूबर, 2017
लक्ष्मी पूजा (मुख्य दिवाली): गुरुवार, 19 अक्टूबर, 2017
बाली प्रतिप्रदा या गोवर्धन पूजा: शुक्रवार, 20 अक्टूबर, 2017
भाईदूज: शनिवार, 21 अक्टूबर, 2017

दिवाली पर सुख समृद्धि के विशेष 8 mantra:
दिवाली पर हर कोई महालक्ष्मी को प्रसन्न करने की कोशिश करता है. हम आपको शास्त्रों और पुराणों से एकत्र 8 ऐसे मंत्र के विषय में बताएंगे जो माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए जरुरी होता है.

महालक्ष्मी मंत्र 1
ॐ ह्रीं श्री क्रीं क्लीं श्री लक्ष्मी मम गृहे धन पूरये,
धन पूरये, चिंताएं दूरये-दूरये स्वाहा:

महालक्ष्मी मंत्र 2
ॐ ह्रीं ह्रीं श्री लक्ष्मी वासुदेवाय नम:

महालक्ष्मी मंत्र 3
पद्मानने पद्म पद्माक्ष्मी पद्म संभवे
तन्मे भजसि पद्माक्षि येन सौख्यं लभाम्यहम्

 महालक्ष्मी मंत्र 4
ॐ आं ह्रीं क्रौं श्री श्रिये नम: ममा लक्ष्मी
नाश्य-नाश्य मामृणोत्तीर्ण कुरु-कुरु
सम्पदं वर्धय-वर्धय स्वाहा:

महालक्ष्मी मंत्र 5
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नम:

 महालक्ष्मी मंत्र 6
ॐ ह्रीं श्री क्लीं नम:

महालक्ष्मी मंत्र 7
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नम:

महालक्ष्मी मंत्र 8
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं अर्ह नम: महालक्ष्म्यै
धरणेंद्र पद्मावती सहिते हूं श्री नम:

sarijankari के सभी प्रिय पाठकों को दिवाली की ढेरों शुभकामनाएं!!!
अपने साथ-साथ अपने आस-पास के वातावरण का भी ख्याल रखें !!
Polution free दिवाली मनाये और स्वस्थ रहे…..

करवा चौथ की पूजन विधि और मुहूर्त

करवा चौथ व्रत सुहागन महिलाएं अपने पति के लिए करती हैं इस दिन वो पति की लंबी उम्र की प्रार्थना करती हैं. साथ ही भगवान से अपने सुखी गृहस्थ जीवन के भी लिए प्रार्थना करती हैं.

गुस्सा काबू करने का Top and easy tips

करवा चौथ

इस बार साल 2017 में करवाचौथ का व्रत आठ अक्टूबर(8 October), रविवार को पड़ रहा है.

करवा चौथ के दिन का मुहूर्त(Karwa chauth Ka Muhurt):

करवा चौथ के दिन पूजा का समय शाम 5:55 पर शुरू होगा और शाम 7: 09 पर पूजा करने का महूर्त समाप्त होगा.

चांद देखना जरूरी क्‍यों है (Kab niklega chaand):
इस व्रत के दिन चंद्रमा का उदय शाम आठ बजकर चौदह मिनट पर होगा. इस दिन महिलाएं चंद्रमा को देखे पानी ग्रहण करती हैं. चाँद निकलने के बाद होने के बाद औरतें चाँद को छलनी से  देखती हैं फिर अपने पति का दीदार भी छलनी से ही करती हैं. इसके बाद पति अपनी पत्नियों को पानी पिलाकर उनका व्रत पूरा करते हैं. चाँद को देखे बिना यह व्रत अधूरा माना जाता है.

करवा चौथ करने की विधि :
Karwa chauth का व्रत केवल शादी-शुदा महिलाओं के लिये ही होता है. महिलाएं अपने सास या फिर माँ से करवा चौथ करने की विधि सीखती हैं. लेकिन अगर आप अपने घर से दूर रहती हैं और यह व्रत करना चाहती हैं, इसकी विधि जाननी चाहती हैं तो हम आपको इस व्रत की विधि विस्तार से बताएंगे तो चलिए जानते हैं क्या है करवा चौथ व्रत की सही विधि.

  • सरगी करने के बाद करवा चौथ का निर्जला व्रत शुरु होता है. व्रत के दिन माता पार्वती, महादेव और गणेश जी का ध्‍यान मन में करती रहें.
  • गेरू और पिसे चावलों के घोल से दिवार पर करवा का चित्र बनाएं. चित्र बनाने की इस कला को करवा धरना कहा जाता है जो कि पुरानी परंपरा है.
  • लकड़ी के सिंहासन पर माता पार्वती को स्थापित करें. और उन्हें लाल रंग की चुनरी पहना कर  सुहाग, श्रृंगार की  सामग्री अर्पित करें और माँ कि स्थापित मूर्ति के आगे जल से भरा कलश रखें.
  • व्रत के दिन माँ गौरी और गणेश के स्‍वरूपों की पूजा करें.

करवा चौथ के दिन इस मंत्र का जाप करें:
नमः शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभाम्‌
प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे.

अधिकतर महिलाएं अपने परिवार में प्रचलित प्रथा के अनुसार पूजा करती हैं. हर क्षेत्र  में अपने रिवाज के हिसाब से पूजा करने का विधान है. इसलिये कथा में भी अंतर पाया जाता है.
व्रत के दिन करवा चौथ की कथा कहनी सुननी चाहिए कथा के बाद आपको अपने घर के सभी वरिष्‍ठ लोगों का चरण स्‍पर्श करना चाहिये.
रात के समय छननी के प्रयोग से चाँद का दर्शन करें फिर पति के पैरों को छूकर उनका आर्शिवाद लें बाद में पति को प्रसाद दे कर बाद में खुद भी प्रसाद ग्रहण करें.

सभी दम्पत्तियों को करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनायें!!

मां सिद्धिदात्री के पूजन से समाप्त होता है नवरात्र

नवरात्र महापर्व के नौवें दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा और उपासना की जाती है. मां सिद्धिदात्री अपने भक्तों को सभी प्रकार की सिद्धियां प्रदान करती हैं.

दशहरा पर भगवान राम और मां दुर्गा से लें सीख

मां सिद्धिदात्री

ऐसा माना जाता है कि मां सिद्धिदात्री की पूजा पूरे विधि-विधान के साथ करने वाले मनुष्यों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
मां के चार हाथ हैं और मां सिद्धिदात्री कमल के पुष्प पर विराजमान हैं.
मां के दाहिंनी हाथ में चक्र है ऊपर वाले हाथ में गदा है. दूसरे हाथ में कमल का फूल और शंख है. प्राचीन पुराणों में शास्त्रों में अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, और वशित्व नामक आठ सिद्धियां बताई गई हैं.
भक्तों को ये आठों सिद्धियां मां सिद्धिदात्री की पूजा और उपासना करने से मिल सकती है.
हनुमान चालीसा में भी इन्हीं आठ सिद्धियों का उल्लेख है कि ‘अष्टसिद्धि नव निधि के दाता, अस वर दीन्ह जानकी माता’ यहां ऊपर दिए गए आठों सिद्धियों की बात की गयी है.
शास्त्रों के अनुसार स्वयं भगवान शंकर ने भी मां सिद्धिदात्री देवी की कठोर तपस्या कर मां से ये आठ सिद्धियां प्राप्त की थीं.
मां की कृपा से ही खुद सिद्धिदात्री महादेव की आधी देह हो गयीं और भोलेनाथ अर्द्धनारीश्वर कहलाए.
नौवें दिन इनकी पूजा के बाद ही नवरात्र का समापन माना जाता है.
इस दिन ही हिंदू परिवारों में कन्याओं का पूजन किया जाता है.

मां सिद्धदाद्धत्री स्तुति मंत्र:
सिद्धगन्‍धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि,
सेव्यमाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी

देवी का बीज मंत्र:
ऊॅं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे नमो नमः
ऊपर दिए गए श्लोक के अलावा भी मां सिद्धिदात्री की पूजा में दुर्गा सप्तशती के सभी श्लोकों का प्रयोग किया जा सकता है.

कन्या पूजन :
नवरात्र के नवें दिन नौ कन्याओं को घर में भोजन कराना चाहिए. नव-देवियों में मां सिद्धिदात्री आखिरी हैं. मां की पूजा से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है.
जिन कन्याओं को आप कन्या भोज करा रहे हैं उन कन्याओं की आयु दो वर्ष से ऊपर और 10 वर्ष तक होनी चाहिए.
यदि 9 से ज्यादा कन्या आपके घर भोजन करने आ रही हैं तो इसमें कोई परेशानी नहीं है.

आठवें दिन करें मां महागौरी की उपासना

नवरात्री महापर्व के आठवें दिन मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप की पूजा उपासना की जाती है. मां महागौरी की उपासना मनुष्य के भीतर पल रहे कुत्सित व बुरे विचारों को ख़त्म कर ज्ञान की ज्योति जलाती हैं.

मां सिद्धिदात्री के पूजन से समाप्त होता है नवरात्र

मां महागौरी

मां का ध्यान करने से मनुष्य को आत्मिक शांति मिलती है उसके अंदर श्रद्धा, निष्ठा आदि का विकास होता है.
मां दुर्गा की आठवीं शक्ति का स्वरूप महागौरी है.
जिनकी आराधना से उनके भक्तों को सही राह मिलती है.
इस दिन व्रत रखकर मां का पूजन करें और फिर मां को भोग लगाएं, उसके बाद भोग का प्रसाद ग्रहण करे.

अष्टमी कथा:
नवरात्र के आठवें दिन देवी महागौरी की पूजा अर्चना की जाती है. अष्टमी के दिन मां को याद करने व उनकी स्तुति से मनुष्य के सभी पापों का नाश होता है.
पौराणिक कथाओं और शास्त्रों के अनुसार मां महागौरी ने घोर तप कर गौरवर्ण प्राप्त किया था.
जब माता की उत्पत्ति हुई थी तो ऐसा माना जाता है कि उनकी आयु आठ वर्ष की थी.इसी कारण मां की पूजा अर्चना अष्टमी को किया जाता है.
अष्टमी के ही दिन कन्याओं के पूजन का विधान है. मां धन वैभव, सुख, संपदा, खुशहाली और शांति की अधिष्ठात्री देवी हैं.
मां वृषभवाहिनी अर्थात बैल की सवारी करती हैं.
शास्त्रों के अनुसार मां महागौरी ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी.
जिसके बाद उनका शरीर मिटटी के ढेर से ढक गया था.
भगवान शंकर मां महागौरी पर प्रसन्न हुए और उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार करने का आर्शीवाद दिया.
भगवान शंकर ने मां महागौरी के शरीर को गंगाजल से स्नान कराया जिसके बाद मां महागौरी का शरीर गोरा और दैदीप्यमान हो गया.
इसी कारण मां का नाम महागौरी पड़ा.
मां महागौरी गीत- संगीत से प्रसन्न होती है. मां के पूजा और उपासना में संगीत अवश्य होता है.
हिन्दू धर्म में अष्टमी के दिन कन्याओं को भोजन कराए जाने और सामर्थ्य के अनुसार दान किये जाने की परम्परा है.

ध्यान मंत्र:
श्वेत वृषे समारूढ़ा श्वेतांबरधरा शुचि
महागौरी शुभे दद्यान्महादेव प्रमोददा.

सातवें दिन करें माँ कालरात्रि की उपासना

नवरात्र महापर्व में सातवां दिन मां कालरात्रि का होता है. मां कालरात्रि को विनाश और संहार की देवी माना जाता है. लेकिन मां अपने भक्तो को हमेशा शुभ फल देती है.

नवरात्र के छठे दिन करें माँ कात्यायनी की उपासना

मां कालरात्रि की कथा :
मां कालरात्रि

मां कालरात्रि ने हाहाकारी दुष्ट असुर रक्तबीज के संहार के लिए अपने तेज से मां काली को उत्पन्न किया था.
माँ का रंग काला होने के कारण इनका नाम मां कालरात्रि पड़ा. दुष्ट दानवों शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज ने तीनो लोको में हाहाकार मचा दिया था.
असुरो की अति से तंग आकर देवगण भगवान शंकर के पास गए उन्होनें मां पार्वती से असुरों का संहार करने को कहा.
मां पार्वती ने भगवती दुर्गा रूप धारण कर शुम्भ और निशुम्भ से युद्ध कर उन्हें पराजित किया और मौत के घाट उतार दिया लेकिन जैसे ही माँ ने रक्त बीज का वध करने की कोशिश की तभी उसके रक्त से लाखो असुर पैदा हो गये.
इस तरह माँ जब परेशान हुई तो उन्होंने मां काली को उत्पन्न किया.
जब मां दुर्गा ने रक्तबीज का संहार किया तो माँ काली ने रक्तबीज का सारा रक्त पी लिया और इस तरह दुष्ट दानवों का दलन हुआ.
शास्त्रों के अनुसार सप्तमी की रात सिद्धियों की रात होती है. मां भगवती का यह रूप ऋद्धि-सिद्धि प्रदान करने वाला है.
मां की कृपा से हर बाधा दूर हो जाती है.
माता की कृपा पाने के लिए उन्हें गुड़ का भोग लगाया जाता है ऐसा माना जाता है कि गुड़ मां कालरात्रि को प्रिय हैं.

सप्तमी को करे इस मंत्र का जाप:
श्लोकः या देवी सर्वभूतेषु कालरात्रि रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

शास्त्रों में माँ कालरात्रि को त्रिनेत्री भी कहा गया है इनके तीन नेत्र ब्रह्माण्ड की तरह विशाल हैं.
जिनसे बिजली की तरह किरणें निकलती हैं. माँ के खुले बाल बिखरे हुए रहते हैं
इनकी नासिका से श्वास और भयंकर ज्वालाएं निकलती हैं.
माँ कालरात्रि को शास्त्रों में चतुर्भुजी कहा गया है.
इनकी चार भुजाएं हैं दायीं ओर की ऊपरी भुजा से महामाया भक्तों को वरदान दे रही हैं और नीचे की भुजा से अभय का आशीर्वाद देती हैं.
देवी कालरात्रि की सवारी गर्दभ (गधे) है, माँ उसपर विराजमान रहती हैं.