इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस (ICJ) में भारत का परचम

International Court Of Justice

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस, न्याय की जरुरत पूरी दुनिया को होती है। इसलिए हर इंसान को न्याय दिलाने और उस तक न्याय को पहुंचने के लिए हर देश की अपनी न्याय व्यवस्था होती है। हर देश का अपना न्यायालय होता है जो लोगो की समस्या का समाधान करता है और जरूरत पड़ने पर जनहित याचिका पर भी सुनवाई करता है।

न्याय की आस सिर्फ लोगो को ही नहीं होती कई बार दो देशो के बीच कुछ मुद्दे इतने संवेदनशील होते है जिनके समाधान वो खुद नहीं कर पाते है। ऐसे में इन समस्या के समाधान के लिए इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस (ICJ) की स्थापना की गई है आज हम आपको बताते है ICJ के बारे में।

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस (ICJ):

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस
International Court Of Justice

आपको पता है की संयुक्त राष्ट्र का मुख्य न्यायिकअंग अंतरराष्‍ट्रीय न्यायालय है और यह संयुक्त राष्ट्र के छह मुख्य भागो में से एक है। ICJ की स्थापना 26 जून 1945 को सैन फ्रांसिस्को में हुई थी। इसका मुख्यालय दि हेग (नीदरलैंड) में है।

ICJ(International Court Of Justice) की क्या है जरुरत:

ICJ
Court Of Justice

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस का उद्देश्य है सदस्य राष्ट्रों द्वारा सामने रखे गये विवादों की सुनवाई और निपटारा करना है। महासभा, सुरक्षा परिषद या महासभा द्वारा अधिकृत अन्य सहयोगी संगठन के अनुरोध करने पर किसी वैधानिक प्रश्न से जुडी सलाह देना है।

जज का कार्यकाल:

  • इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस में 15 जज होते हैं। इनका चुनाव 9 वर्ष के कार्यकाल के लिए महासभा और सुरक्षा परिषद स्वतंत्र रूप से करता है। एक-तिहाई सीटों के लिए प्रति तीन वर्षों के बाद चुनाव होते हैं।
  • किसी भी देश के दो जज का चुनाव नहीं किया जाता।
  • इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस के न्यायाधीश को राजनीतिक या प्रशासनिक गतिविधियों में भाग लेने की स्वीकृति नहीं दी जाती।

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस में भारत के जज:

Indian Judge of Intertional Court of Justice
Indian Judge

ICJ में भारत ने भी अपना डंका बजाया है और हमारे देश के 4 जज इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस में जज रह चुके है। मुझे पूरा यकीं है ये सुनकर आपको भी इंडियन होने पर गर्व हुआ होगा, तो देखते है कौन से वो 4 जज।

  1. दलवीर भंडारी

भारतीय जज दलवीर भंडारी ने नीदरलैंड के हेग की अंतर्राष्ट्रीय अदालत में दूसरी बार जज चुने गए। दलवीर को जनरल एसेंबली में 183 वोट मिले। सिक्योरिटी काउंसिल में जस्टिस भंडारी को 15 वोट ही मिले। भंडारी का जज के चुनाव के लिए मुकाबला ब्रिटेन के उम्मीदवार क्रिस्टोफर ग्रीनवुड से था। भंडारी दूसरी बार इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस के जज बने हैं। राजस्थान के जोधपुर से ताल्लुक रखते हैं भंडारी।

2. जस्टिस नगेंद्र सिं‍ह

जस्टिस नगेंद्र सिंह भी राजस्थान के ही डूंगरपुर के राजघराने से ताल्लुक रखते है। नगेंद्र सिं‍ह इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस में 1973 से 1988 के बीच जज रहे। इस दौरान ही सिंह 1976-79 में वाइस प्रेसिडेंट और उसके बाद 1985-88 में प्रेसिडेंट बने।

जस्टिस बेनेगल नरसिंग राव:

बेनेगल नरसिंह राव या बी. एन. राव एक भारतीय प्रशासनिक अधिकारी, राजनयिक और राजनीतिज्ञ के रूप में जाने जाते थे। इनकी भारत के संविधान का ढांचा तैयार करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका रही थी।
बेनेगल नरसिंग राव का हेग में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश होने का गौरव प्राप्त है जो संयुक्त राष्ट्र (यूएन) का प्रमुख न्यायिक अंग है।

जस्टिस रघुनंदन स्‍वरूप पाठक: 

रघुनंदन स्वरूप पाठक का भारत के 18वें मुख्य न्यायाधीशके रूप में चुना गया। साथ ही वो अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश के रूप में कार्य कर चुके है। इन्होंने इस पद पर 1989 से 1991 तक कार्य किया। इनका जन्म 25 नवम्बर 1924 को बरेली सन्युक्त प्रांत में हुआ था।

ये वो जज थे जिन्होंने दुनिया के सामने भारत का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया।

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