स्मॉग वाली दिल्ली में कैसे रखे अपने परिवार को तंदुरस्त जाने

Delhi air improves to very poor

स्मॉग एक ऐसा शब्द बन गया है जिसने हम सब परेशान है। राजधानी दिल्ली वैसे तो पूरे साल ही प्रदुषण के लिए ख़बरों में बनी रहती है। पर बीते कुछ दिनों से दिल्ली की हवा इतनी जहरीली हो गयी है की लोगो को साँस लेने में भी परेशानी हो रही है। स्मॉग जिससे देख अक्सर हम कोहरा समझ लेते है वो प्रदूषण का ही एक रूप है। इस स्मॉग की वजह से बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक परेशान नज़र आ रहे है।

अगर आप भी इससे परेशान है तो आज हम आपको स्मॉग से बचने और अपने परिवार को सुरक्षित रखने के तरीके बताएंगे।

स्मॉग क्या है-

People are affected by Delhi Smog
Delhi Smog

स्मॉग एक तरह का वायु प्रदूषण ही होता है। स्मॉग, स्मोक और फॉग से मिलकर बना है जिसका मतलब है स्मोकी फॉग, यानी कि धुआं युक्त कोहरा। इस वायु प्रदूषण में हवा में नाइट्रोजन ऑक्साइड्स, सल्फर ऑक्साइड्स, ओजोन, स्मोक और पार्टिकुलेट्स मिले होते हैं। इस तरह के वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण हमारे द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों से निकलने वाला धुआं, फैक्ट्रियों और कोयले, पराली आदि के जलने से निकलने वाला धुआं होता है।

स्मॉग का कारण –

  • दिल्ली-एनसीआर के पडोसी राज्ये पंजाब, उत्तर प्रदेश और हरियाणा हैं। जहां बहुत ज्यादा मात्रा में खेती की जाती है। यहां के लोग फसल कटने के बाद उसके अवशेष जिससे पराली कहते है उसको जला देते हैं जिससे स्मॉग की समस्या पैदा होती है।
  • इस बार सुप्रीम कोर्ट से पटाखों पर बैन के बावजूद राजधानी के बहुत से इलाकों में काफी पटाखे फोड़े गए है।
  • राजधानी की सड़कों पर दौड़ने वाली कारें, ट्रक्स, बस भी साफ़ पर्यावरण का एक बड़ा दुश्मन है।
  • औद्योगिक प्रदूषण भी स्मॉग का मुख्य जिम्मेदार कारक है।
  • सर्दी के मौसम में हवाएं थोड़ी सुस्त होती हैं। ऐसे में डस्ट पार्टिकल्स और प्रदूषण वातावरण में स्थिर हो जाता है जिससे स्मॉग जैसी समस्याएं सामने आती हैं।

स्मॉग के बुरे प्रभाव –

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  1. खांसी, गले और सीने में जलन – जब आप स्मॉग भरी हवा में साँस लेते हैं तो हवाओं में हाई लेवल का ओजोन मौजूद होने की वजह से आपके श्वसन तंत्र पर बुरा असर पड़ता है। इससे सीने में जलन होने लगती है तथा खांसी की भी समस्या उत्पन्न हो जाती है। ओजोन आपके फेफड़ों को तब भी नुकसान पहुंचाती है।
  2. अस्थमा– अस्थमा के मरीज़ो के लिए स्मॉग ज्यादा घातक हो सकता है। स्मॉग में मौजूद ओजोन की वजह से अस्थमा का अटैक आ सकता है।
  3. सांस लेने में तकलीफ और फेफड़े खराब होना – स्मॉग की वजह से सांस लेने में तकलीफ होती ही है साथ ही साथ इसकी वजह से अस्थमा, एम्फीसिमा, क्रोनिक ब्रोंकाइटिस और अन्य साँस संबंधी समस्याएं अपनी गिरफ्त में ले लेती हैं। इसकी वजह से फेफड़ों में संक्रमण भी हो सकता है।

क्या है बचने का तरीका –

  1. सबसे पहले आपको अपने इलाके का ओजोन स्तर पता होना चाहिए।
  2. ऐसे समय में घर से ज्यादा देर तक के लिए बाहर रहने से बचें।
  3. बाहर जाने का प्रोग्राम हो तो मुँह पर मास्क का इस्तेमाल करे।
  4.  स्मॉग के दिनों में कम से कम एक्टिव रहने की कोशिश करें। ऐसे मौसम में आप जितना एक्टिव रहेंगे       आपको श्वसन संबंधी रोग होने का 5. खतरा उतना बढ़ जाएगा।
  5.  वायु प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई में सहयोग करें। ऊर्जा संरक्षण, कार पूलिंग और पब्लिक ट्रांसपोर्ट जैसे अभियानों में सहयोग दें।
  6. घर की भीतरी हवा की गुणवत्ता को नियन्त्रित रखें- दरवाजे और खिड़कियां बंद रखें। एयर            प्यूरीफायर भी लगा सकते हैं।
  7. पूरी बाजू के कपड़े पहनें और अपने चेहरे को अच्छी गुणवत्ता के मास्क से ढकें। (नियमित समय अंतराल पर मास्क बदलें)
  8. घर के बाहर किए जाने वाले व्यायाम से बचें, इसके बजाए घर के अंदर योगा जैसे व्यायाम करें। अपने घर के आस-पास प्रदूषण कम करने के लिए पेड़ लगाएं।
  9. इम्‍यूनिटी को मजबूत बनाने के लिए अदरक और तुलसी की चाय पीएं।
  10. अपने आहार में विटामिन सी, ओमेगा 3 और मैग्निशियम, हल्दी, गुड़, अखरोट आदि का सेवन करें।

फिर टेंशन किस बात की, इन आसान तरीको को अपना कर आप अपनी ज़िन्दगी को स्मॉग से सुरक्षित रख सकते है

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