पैरों में सूजन कहीं इस कारण तो नहीं

दोस्तों पैर में सूजन की समस्या को अनदेखा ना करें. यह कई तरह की बड़ी मुश्किलें पैदा कर सकती है. हम आपको बतातें हैं क्या है यह समस्या और इससे कैसे बचे.

हल्के में ना लें पुरानी खांसी को

पैर में सूजन
अचानक पैर में सूजन, तथा चलने-फिरने पर पैर में खिंचाव जैसे लक्षण डीप वेन थ्रोम्बोसिस (डी.वी.टी.) यानी टांगों की नसों में खून के कतरों का जमाव गंभीर स्थिति की निशानी हो सकती है.
ज्यादातर देखा गया है की अक्सर लोग अज्ञानता के कारण इसे नस में खिंचाव, चोट, थकान, सामान्य संक्रमण या फाइलेरिया मान बैठते हैं और उस इलाज में लग जातें हैं.

पैर में सूजन
महिलाएं पैर में सूजन यानी डीप वेन थ्रोम्बोसिस की शिकार ज्यादा होती हैं. मौजूदा समय में व्यायाम नहीं करने की प्रवृत्ति और महिलाओं में गर्भनिरोधक दवाओं एवं हारमोन के के कारण डीप वेन थ्रोम्बोसिस का प्रकोप बढ़ रहा है. इसके अलावा फैशन के प्रभाव में ऊंची एड़ी यानी हाई हील वाली सैंडिलों के प्रचलन से भी यह बीमारी होने का खतरा बढ़ता है.

क्या हैं कारण:
दोस्तों पैरों की कसरत नहीं करने, किसी ऑप्रेशन के कारण लंबे समय तक बिस्तर पर पड़े रहने और डॉक्टर की सलाह के बगैर अधिक दिनों तक हारमोन अथवा गर्भ निरोधक दवाओं के सेवन करने पर डीप वेन थ्रोम्बोसिस का खतरा बढ़ जाता है. खून के जरूरत से ज्यादा गाढ़ा हो जाने पर भी यह रोग हो सकता है. गर्भवती महिलाओं में प्रसव के तुरंत बाद यह रोग हो सकता है.

इलाज:
दोस्तों हाथ-पैर में किसी भी तरह की दिक्कत होने अथवा हल्का सा भी डी.वी.टी. का संदेह होने पर सामान्य डॉक्टर को दिखाने की बजाय तुरंत किसी वैस्कुलर या कार्डियोवैस्कुलर सजर्न को दिखाना चाहिए,इससे शुरुआती अवस्था में ही बीमारी पर काबू पाने में मदद मिल जाती है. ऐसे मरीजों का इलाज अत्याधुनिक हॉस्पिटल में ही कराना चाहिए.

बचाव के उपाय:
दोस्तों इस बीमारी की रोकथाम के लिए नियमित व्यायाम करना चाहिए.  तीन से चार किलोमीटर तक सैर करने तथा पैरों की कसरत करने से पैरों की शिराओं में गंदे रक्त को रुकने का मौका नहीं मिलता और पम्प अच्छी तरह काम करता है. लंबे समय तक बेड रेस्ट में रहने वाले और गर्भ निरोधक गोलियों एवं हारमोन का सेवन करने वाली महिलाओं को विशेष रूप से सावधान रहना चाहिए.

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