दशहरा पर भगवान राम और मां दुर्गा से लें सीख

दोस्तों भारत में अनेक उत्सव और त्यौहार हर वर्ष मनाएं जातें है, और हर त्यौहार किसी न किसी रूप में बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है. लेकिन जो त्यौहार को इस संदेश के लिये जाना जाता है वह है दशहरा. दशहरा दीवाली से ठीक बीस दिन पहले, आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी को विजयदशमी अथवा दशहरा के रुप में देशभर में मनाया जाता है. दशहरा हिंदूओं के प्रमुख त्यौहारों में से एक है.

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दशहरा
इस बार दशहरा 30 सितम्बर शनिवार को मनाया जाएगा

दशहरा
दोस्तों  यह त्यौहार भगवान श्री राम की कहान भी कहता हैं जिन्होंनें लंका में 9 दिनों तक लगातार चले युद्ध के बाद अंहकारी रावण को मार गिराया और माता सीता को उसकी कैद से मुक्त करवाया.

दशहरा
दोस्तों इस दिन के साथ मां दुर्गा की कहानी भी जुड़ी है. इस दिन मां ने महिषासुर का संहार भी किया था इसलिये भी इसे विजयदशमी के रुप में मनाया जाता है और मां दुर्गा की पूजा भी की जाती है.

दोस्तों माना जाता है कि भगवान श्री राम ने भी मां दूर्गा की पूजा कर शक्ति का आह्वान किया था, भगवान श्री राम की परीक्षा लेते हुए पूजा के लिये रखे गये कमल के फूलों में से एक फूल को गायब कर दिया. राम जी को राजीवनयन यानि कमल से नेत्रों वाला कहा जाता था इसलिये उन्होंनें अपना एक नेत्र मां को अर्पण करने का निर्णय लिया ज्यों ही वे अपना नेत्र निकालने लगे देवी प्रसन्न होकर उनके समक्ष प्रकट हुई और विजयी होने का वरदान दिया.
माना जाता है मां के इस वरदान के बाद ही दशमी के दिन प्रभु श्री राम ने रावण का वध किया. भगवान राम की रावण पर और माता दुर्गा की महिषासुर पर जीत के इस त्यौहार को बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय के रुप में देशभर में मनाया जाता है.
दोस्तों देशभर में इसे अलग अंदाज़ में मनाया जाता है. दोस्तों कुल्लू का दशहरा देश भर में काफी प्रसिद्ध है तो पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा सहित कई राज्यों में दुर्गा पूजा को भी इस दिन बड़े धूमधाम से मनाया जाता है.

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