हैप्पी टीचर्स डे!!! आइए उनकों स्पेशल फील कराए, जिन्होनें बनाया है आपको स्पेशल

टीचर्स डे!!गुरु की महिमा क्या कहें, निर्मल गुरु से ही होए.बिन गुरुवर, जीवन कटु फल सा होए !!

टीचर्स डे

शिक्षक दिवस का हमारे जीवन में विशेष महत्व है, निर्मल ज्ञान, सदाचार आदि सभी शब्दों का पर्याय शिक्षक है, इन खूबियों के बिना मनुष्य का जीवन कड़वे फल की तरह होता है, और बिना गुरु के जीवन का कोई आधार भी नहीं होता.

जान लीजिये क्यों मायने रखता है निजता का अधिकार

आपको बता दें कि हमारा देश, 5 सितम्बर को देश के महान दार्शनिक और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन टीचर्स डे के रूप में मनाता है. राधाकृष्णन दर्शनशास्त्र यानी Philosophy के Teacher थे, उन्होंने अपने ज्ञान से लोगों को प्रभावित किया था, और खुद राष्ट्रपिता महात्मा गांधी भी उनके ज्ञान से प्रभावित थे, उन्होंने देश-विदेश के कई विश्वविद्यालयों में अपने व्याख्यान दिये जो आज भी याद किये जाते हैं.

टीचर्स डे हमें याद ही नहीं रहता है, दोस्तों ज़िंदगी की भागदौड़ में हम इतने व्यस्त हैं कि उन टीचर्स को याद करने का हमारे पास वक्त ही नहीं है. जिनके बिना शायद ही हम जिस मुकाम पर हैं वहां होते. यूँ तो टीचर्स को स्पेशल फील कराने के लिए किसी ख़ास दिन की जरूरत नहीं है, पर फिर भी अगर आप इस टीचर्स डे(5 सितम्बर),थोड़ा सा प्रयास करके उन सभी टीचर्स के फ़ोन नम्बर ढूंढ कर उन्हें एक बार फ़ोन करने की कोशिश कीजिये जिन्हें देखे या जिनसे बात किये वर्षों हो गए हैं. यकीन मानिये दोस्तों आपके टीचर माथे पर बल डालकर आपको याद करने की कोशिश जरूर करेंगे और अगर आप उन्हें याद ना भी आये तो भी वो आपके बैच का ईयर जानकर और ये जानकर की वो अब भी आपके लिए ख़ास हैं बहुत खुश होंगे. आप मम्मी पापा से बात करना, उन्हें याद करना भूलतें हैं? फिर आप  टीचर्स को कैसे भूल सकतें हैं.

अच्छा दोस्तों जब हम टीचर्स की बात करते हैं तो सिर्फ हम अपने स्कूल या कॉलेज टीचर्स तक सिमट कर रह जातें हैं. क्या आपको आपके म्यूजिक वाली मैम,या फिर स्विमिंग वाले सर याद नहीं आते, जिन्होनें आपको ऐसी कलाओं में माहिर बनाया जिसमें आप जीरो थे?

या फिर पड़ोस वाले अंकल जो हमेशा आपको प्रोत्साहित करते हैं कुछ अच्छा करने के लिए कुछ नया करने के लिए, तो आइए इस टीचर्स डे उन सभी लोगों को विश करके उन्हें स्पेशल फील कराएं जो हमारी ज़िंदगी में रौशनी की किरण को धूमिल नहीं होने देते. तो तैयार हैं आप यादों के गलियारे में घूमनें के लिए!!!

इस बार कैसे मनाएं टीचर्स डे:
दोस्तों हमसब हर बार कुछ ना कुछ नया करने का सोचते ही हैं अपने टीचर्स के लिए इस बार इन तरीकों को अपनाकर आप अपने टीचर्स को खुश कर सकते हैं.

गिफ्ट में दे डायरी और पेन:
उन्होंने आपको पढ़ना-लिखना सिखाया और सही-गलत में फर्क सिखाया है उनके लिए पेंसिल और डायरी और पेन से अच्छा गिफ्ट कोई हो ही नहीं सकता. आप उनके पर्सनल और प्रोफेशनल यूज़ के लिए उन्हें यह गिफ्ट दे सकते हैं.

हैंडमेड कार्ड :
हैंडमेड कार्ड की तो बात ही निराली है, किसी भी मौके पर कोई भी गिफ्ट लेकर जाइए पर फिर भी जो बात हांथ से बने कार्ड में हैं वो कहीं और नहीं है.कार्ड के अंदर आप कई रंगों से अपने टीचर के लिए Poem भी लिख सकतें हैं जो यकीनन उन्हें बहुत पसंद आएगा.

बुके या फूल:

टीचर्स डे
इस टीचर्स डे पर सुबह-सुबह जब आप उन्हें फूलों का गुलदस्ता देंगे या फिर गुलाब का फूल उससे आपके टीचर के चेहरे पर जो मुस्कान आएगी वो सच में अतुलनीय होगी.

फेंगशुई गिफ्ट कर सकते हैं:
इस टीचर्स डे पर दोस्तों आप सभी अपने टीचर्स के हेल्थ और लम्बी उम्र की कामना करते है ऐसे में उन्हें फेंगशुई गिफ्ट कर सकते हैं, विंड चाइम, लाफिंग बुद्धा और भी अन्य चीजें मार्केट में उपलब्ध है.

टीचर्स डे

दोस्तों चलिए आपको कुछ ऐसे टीचर्स से मिलवातें हैं जो खुद तो मशहूर नहीं हुए लेकिन उनके हाथों तराशे गए हीरों ने देश को हमेशा गौरवान्वित किया है.

रमाकांत अचरेकर:
दोस्तों बात अगर मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर की करें तो आपको बता दें कि सचिन को सचिन सचिन गूंज का आदि और इतना महान बल्लेबाज़ बनाने के पीछे उनके बचपन के कोच रमाकांत अचरेकर का बहुत बड़ा हाथ है, सचिन अपनी सफलता का श्रेय अपने कोच को देनें से कभी पीछे नहीं हटतें, सचिन कहतें है कि अचरेकर सर ने ही मुझे सिखाया कि किसी भी गेम में फिटनेस का कितना महत्व है. सचिन का मानना है कि उनकी ज़िंदगी में कोच अचरेकर ने क्रिकेट को इतना इंट्रस्टिंग गेम बनाया कि वो लगातार घंटों बिना रुके प्रैक्टिस किया करते थे.

पुलेला गोपीचंद:
भारत का प्रदर्शन इस बार ओलम्पिक खेलों में उम्दा नहीं रहा पर पीवी सिंधू ने ओलम्पिक में अच्छा प्रदर्शन किया और भारत की स्टार महिला शटलर ने रियो ओलंपिक्स 2016 में रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया, ओलंपिक्स में रजत पदक जीतने वाली देश की पहली बैडमिंटन खिलाड़ी हैं. लेकिन सिंधू अपनी सफलता का श्रेय कोच पुलेला गोपीचंद को देने में ज़रा भी नहीं हिचकती. सिंधू कहती हैं कि एक बेहतरीन कोच के सरे गुण कोच गोपीचंद में हैं. मैं उनसे तबसे सीखती आ रहीं हूँ जब से मैं 10 साल की थी.

आनंद एल राय:
बॉलीवुड में आनंद एल राय अपनी एक ख़ास पहचान रखते हैं. उनकी फिल्में आम लोगों के जीवन पर आधारित होती हैं, अभिनेत्री स्वरा भास्कर आनंद को इंडस्ट्री में अपना गॉडफादर मानती हैं. उनके मुताबिक बॉलीवुड में उनकी सफलता के पीछे आनंद का भी बहुत बड़ा हाथ है.

आनंद कुमार :
सुपर 30 कोचिंग के संस्थापक आनंद कुमार की कहानी से आप सब वाकिफ ही होंगे, गरीब घर के बच्चों के लिए आईआईटी जैसे संस्थान में पढ़ना सपना ही होता अगर आनंद जैसे लोग आगे नहीं आते, वंचित परिवारों के तीस बच्चों को हर साल अपनी कोचिंग में मुफ्त में आईआईटी की कोचिंग देते हैं और इतना ही नहीं इन बच्चों को अपने घर पर रखते हैं और उनकी मां बच्चों लिए भोजन बनाती हैं. आनंद ने एक अच्छे टीचर होने की मिसाल पेश की है और ये उन सभी बच्चों के लिए भगवान से काम नहीं है जिनके सपनों को इन्होंने पंख दिया है.

चाहे वो सचिन हो चाहे स्वरा या कोई और सबके जीवन में गुरुओं का बहुत बड़ा और अहम रोल रहा है, लेकिन इनमें और हम लोगों में एक फर्क है ये अपनी सफलता का श्रेय उन शिक्षकों को देने में जरा भी नहीं हिचकते और हम कभी अपने टीचर्स को स्पेशल फील कराते हैं? शायद नहीं, स्कूल कॉलेज के साथ सबकुछ ख़त्म! इस टीचर्स डे एक बार कोशिश जरूर करिएगा उनसे मिलने की बात करने की और उनके डांट और मार के पीछे छिपे प्यार को समझने की.

टीचर्स के ऊपर कितना भी बोला जाए कितना भी लिखा जाए सब कम ही है, आइए पढ़तें है कुछ कोट्स जो ये बताने की कोशिश कर रहें हैं की हमारे जीवन में शिक्षक की क्या भूमिका होती है.

  • शिक्षक वह नहीं जो छात्र के दिमाग में तथ्यों को जबरन ठूंसे, बल्कि वास्तविक शिक्षक तो वह है जो उसे आने वाले कल की चुनौतियों के लिए तैयार करें.
  • गलतियाँ भी उतनी अच्छी शिक्षक हो सकती हैं जितना की सफलता.
  • सभी कठिन कार्यों में सबसे कठिन कार्य है, एक अच्छा शिक्षक बनना.
  • एक अच्छा शिक्षक बाहर से जितना साधारण नजर आता है. अन्दर से उतना ही रोचक होता.बहुत कुछ कहा गया कहा जाता रहेगा टीचर्स के ऊपर लेकिन उनकी इम्पोर्टेंस क्या है, हमारे जीवन में सच में कोई शब्द, कोई कलम नहीं बता सकता.दोस्तों क्या अपने कभी सोचा है अपने केजी के उस टीचर के बारे में जिन्होंने आपको पेंसिल पकड़ना सिखाया, जिन्होंने आपकी दोस्ती उन शब्दों से कराई जिन शब्दों की वजह से आज आप खुद को एक्सप्रेस कर पाते हैं. उस धैर्य से शायद हम कभी किसी को पढ़ा ही नहीं सकते या कुछ बता ही नहीं सकते लेकिन हमारे टीचर्स हमारे साथ तबतक लगे रहें जबतक उन्होंने हमारी दोस्ती शब्दों से नहीं करा दी, हमारी लाइफ में कई ऐसे मौके आएं होंगे जब हमने उन्हें गलत समझा होगा, लेकिन ज़रा आज सोचिये वो सब किसलिए था? हर टीचर का ये सपना होता है कि उसके पढ़ाये हुए बच्चे जीवन में एक मुकाम हासिल करें. आपकी सफलता से आपके माता पिता और गुरु के जितना कोई खुश हो ही नहीं सकता.

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