इस गणेश चतुर्थी करें, विघ्नहर्ता को प्रसन्न

गणेश चतुर्थी 2017!! यूँ तो ईश्वर हमारे नेक कर्मों से ही प्रसन्न हो जाते हैं, और उन्हें अपने भक्तों से किसी विशेष प्रकार की अपेक्षा नहीं रहती. फिर भी गणेश चतुर्थी 2017 के अवसर पर यदि आप गणपति बप्पा, मंगलमूर्ति को प्रसन्न करना चाहते हैं तो कुछ मंत्रों के जाप से निश्चित ही आप उन्हें खुश कर सकते हैं.

गणेश चतुर्थी 2017

see all the information of Solar eclipse august 2017

वक्रतुण्ड महाकाय कोटिसूर्य समप्रभ
निर्विघ्नं कुरू मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।।

इस मंत्र के जाप से साधक के सारे कष्ट दूर होते हैं तथा उसके कार्य में बाधा नहीं आती .

गणेश शुभ लाभ मंत्र(गणेश चतुर्थी 2017 के मंत्र) :
ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये
वर्वर्द सर्वजन्म में वषमान्य नमः॥

इस मंत्र के जाप मात्र से गणपति और माँ लक्ष्मी की कृपा हमारे ऊपर बनी रहती है. ये उनका बीज मंत्र है, और इसके जाप से सिर्फ इस जन्म में ही नहीं, अपितु अगले जन्म में भी भगवान गणेश और माँ लक्ष्मी की साझी कृपा आप पर बनी रहेगी.

गणेश गायत्री मंत्र :
ॐ एकदन्ताय विद्धमहे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दन्ति प्रचोदयात्॥

इस गणेश गायत्री मन्त्र के जरिये हम प्रभु से विनती कर सकते हैं कि, वो अज्ञान और अन्धकार से निकाल कर हमें ज्ञान और प्रकाश की ओर ले जाएं.

क्यों मनाई जाती है गणेश चतुर्थी ?:
गणेश चतुर्थी हिन्दू धर्म में मनाया जाने वाला एक प्रमुख त्यौहार है इसे पूरे भारत खासकर महाराष्ट्र में बहुत ही हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है. और ये त्यौहार 10 दिन तक चलता है, दसवें दिन भगवान की मूर्ति नदी या तालाब में प्रवाहित कर दी जाती है. शास्त्रों के अनुसार इस दिन मंगलमूर्ति श्री गणेश का जन्म हुआ था.

गणेश चतुर्थी 2017 मूर्ति स्थापना और पूजा का मुहूर्त:
अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार इस साल 2017 को गणेश चतुर्थी 25 अगस्त, शुक्रवार से मनाया जाएगा. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मध्यान का समय ही पूजा और मूर्ति स्थापना के लिए उचित रहेगा, क्योंकि दोपहर के वक्त ही भगवान गणेश का जन्म हुआ था.

  •  दोपहर गणेश पूजा का समय  – 11:06 से 13:39 तक.
  •  चतुर्थी तिथि प्रारम्भ            – 24 अगस्त को 20:27 मिनट तक.
  •  चतुर्थी तिथि समाप्त           – 25  अगस्त को 20:30 मिनट तक.
  •  5 सितम्बर को गणपति बप्पा की मूर्ति का विसर्जन किया जायेगा.
भगवान गणेश को क्यों पसंद है मोदक?:

यूँ तो भक्त अपने हिसाब से नए – नए पकवान, मिष्ठान आदि का भोग प्रभु को लगत हैं लेकिन अगर  बात भगवान गणेश के फेवरेट भोग कि करें तो उन्हें तो मोदक बेहद पसंद है. गणेश पूजा अर्चना के समय उन्हें 21 मोदक के टुकड़े रख कर भोग लगाने का विधान है.

पुराणों के अनुसार एक बार माँ पार्वती भगवान शिव और गणेश जी ऋषि माता अनुसूया के घर गए वहां नन्हें गणेश और भगवान शिव को भूख लगी थी, माँ अनुसूया ने शिव को इंतजार करने के लिए कहा, और गणेश को भोजन परोसने लगी लेकिन, बाल गणेश कि भूख शांत होने का नाम ही नहीं ले रही थी. थोड़ा विचार करने के बाद अनुसूया ने मिठाई का एक टुकड़ा गणेश जी को खाने को दिया उसे खाते ही उन्हें डकार आ गयी जिसके बाद भगवान शिव का पेट भी अपने आप भर गया. और उन्होनें 21 डकार ली, ये देखर माँ पार्वती ने अनुसूया से पूछा कि जो मिष्ठान आपने गणेश को खिलाया है उसका नाम क्या है,  फिर अनुसूया ने मोदक का नाम माँ पार्वती को बताया. उसके बाद से गणेश को हमेशा से मोदक प्रिय हो गए.

कैसे हुआ था गणेश का जन्म, क्यों उनकी रचना है सबसे अलग:
पुराणों के अनुसार भगवान शिव स्नान करने किसी स्थान पर गए, उनके जाने के पश्चात पार्वती जी ने अपने शरीर के मैल से एक बालक को आकर दिया जिसका नाम उन्होंने गणेश रखा.

माँ ने गणेश को आदेश दिया की वह भीतर स्नान कर रही हैं, गणेश किसी भी पुरुष को अंदर आने की अनुमति ना दें. माता की आज्ञा का पालन करते हुए गणेश द्वार पर खड़े हो गए जब स्वयं महादेव शिव आये तो बालक ने उन्हें अंदर जाने से रोका, महादेव ने बालक को समझाने की चेष्टा की लेकिन वह अपने जगह से हिला तक नहीं, भोलेनाथ ने क्रोध में आकर बालक का सिर धड़ से अलग कर दिया. और फिर जब उन्हें और अन्य देवताओं को ज्ञात हुआ कि यह माँ पार्वती के अंश हैं, तो उन्होंने एक गज के बच्चे का सूढ़ लाकर गणेश जी को लगा दिया. उस वक्त माँ को अथाह पीड़ा हुई इस पीड़ा को देखकर सभी देवताओं ने गणेश को वरदान दिया. वरदान में उन्हें यह भी आशीर्वाद मिला कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत उनके पूजन से ही होगी. उन्हें देवों ने प्रथम देवता का अधिकार दिया.

ये चीजें भगवान गणेश को है अतिप्रिय:
बात अगर गणेश चतुर्थी 2017 की हो तो भगवान को खुश करने में कोई पीछे नहीं रहना चाहता. यहां पर हम आपको भगवान के पसंद की चीजों की ऐसी ही लिस्ट बताते है, इन्हें पाना अत्यंत सुगम है और इनके जरिये भगवान को खुश करने में सफल भी हो जाएंगे.

मोदक:
प्रसाद में बिना मोदक के अगर आप भगवान गणेश को भोग लगा रहें हैं, तो शायद ही उन्हें ये पसंद आये उन्हें मोदक पसंद है, और मोदक का भोग भगवान को बहुत प्रिय है. इसलिए उन्हें मोदकप्रिय भी कहा जाता है.

केला:
भगवान गणेश का गजमुख और गज के सामान इन्हें भी केला अत्यंत प्रिय है.

गेंदे का फूल:
पूजा के समय लाल और पीले रंग के गेंदे के फूल की माला चढ़ाने से भगवान गजानन प्रसन्न होते हैं.

दूर्वा घास:
दूर्वा घास गणेश जी को बेहद प्रिय है पुष्पों से भी अधिक इस घास को प्रभु के मस्तक पर चढ़ाएं कदमों में ना रखें.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *