सावन शिवरात्रि 2017, व्रत,पूजा विधि

सावन शिवरात्रि 2017

सावन शिवरात्रि 2017

सावन शिवरात्रि 2017!!! सालभर में आने वाली दो-दो शिवरात्रि का भगवान भोलेनाथ के भक्तो को बेसब्री से इंतज़ार रहता है. पहली शिवरात्रि फाल्गुन के महीने में मनाई जाती है. और दूसरी सावन के महीने में. दोनों ही शिवरात्रियों का अपना-अपना बहुत महत्त्व होता है. दोनों पर बाबा शिव को पूजा जाता है. भगवान् भोलेनाथ के बारे में यह माना जाता है कि वो अपने भक्तो की महिमा सुनकर बहुत जल्दी ही प्रसन्न हो जाते है.
इनके लिए सोमवार का दिन होता है. सोमवार के दिन सुबह से शाम तक का व्रत होता हैं. सावन के सोमवारों के व्रत का क्या महत्व् होता हैं और ये व्रत कैसे किये जाते हैं, व्रत की विधि क्या है. जानने के लिए अवश्य पढ़े .

कब है सावन शिवरात्रि:
वर्ष 2017 में शिवरात्रि 21 जुलाई (शुक्रवार)को मनाई जाएगी. जिस पर मंदिरो में बहुत भीड़ देखने को मिलती है. शिवरात्रि के लिए मंदिरो को दुल्हन की तरह सजाया जाता है. शिवरात्रि से कई दिन पहले से ही शिव मंदिरो की एक अलग ही रौनक होती है. सारा माहौल रौशनी से जगमगाया रहता है. बम-बम बोल बम के नारो से मंदिरों में चहल-पहल देखते ही बनती है.

सावन शिवरात्रि 2017 का महत्व्:
यूँ तो बाबा शिव के भक्त सालभर भी सोमवार का व्रत करते है. लेकिन शिवरात्रि का व्रत करने वाले भक्तो की संख्या बहुत बढ़ जाती है. और शिवरात्रि के इस महान व्रत की मान्यता भी बहुत है. शिवरात्रि के व्रत पर शिवलिंग पर जलाभिषेक करना आवश्यक माना जाता है. साथ ही भोलेनाथ को फल-फूल, द्धीप, प्रसाद वगैरह अर्पण किये जाते हैं. जिससे भगवान शंकर शीघ्र प्रसन्न होते है.

सावन का पूरा महीना भोले की भक्ति में नहाया होता हैं. रास्तों पर जगह-जगह शिव भक्तो की टोलिया मिल जाती हैं. इस सावन शिवरात्रि पर भोले भक्त कावड़ लाकर भी भगवन  शिव को प्रसन्न करते हैं. कावड़ क्या होती है हम आपको आगे बताते हैं.

कावड़ क्या होती है:

sawan shivratri 2017भारत में सावन के महीने में फाल्गुन शिवरात्रि के उपलक्ष में कावड़ यात्रा निकलती है. कावड़ लकड़ियों से धनुष के आकर की बनाई जाती है. फिर उसको तरह-तरह जैसे बच्चो के खिलोने, लड़कियों के सजने का सामान, कुछ छोटे-मोठे कपडे, रुमाल, प्लास्टिक से बने हुए पशु-पक्षी आदि से सजाया जाता है. जिसको कंधे पर रखकर चला जाता है. कावड़ को लेकर शिव भक्त हरिद्वार हर की पौड़ी या अपने पास के मान्यता वाले स्थान पर जल भरने जाते हैं. और जल लाकर शिवरात्रि के दिन मंदिर में शिवलिंग पर अपनी कावड़ सहित जलाभिषेक करते हैं. फिर उस कावड़ को घर लाकर उसका सामान बच्चो में बाँट दिया जाता है. और जो धनुष के आकर की कावड़ बचती है उसको घर या मंदिर में किसी एक स्थान पर एक साल के लिए रख दिया जाता हैं.

सावन के पहले दिन से कावड़ यात्रा शुरू:
यूँ तो सावन का  महीना आने से कई दिन पहले ही कावड़ यात्रा शुरू हो जाती है. परन्तु सही मायनो में सावन के पहले दिन से शुरू मानी जाती है. कुछ भक्त पूरे परिवार के संग कावड़ लेने जाते हैं तो कुछ दोस्तों के समूहों में, तो कुछ अकेले भी कावड़ लेकर जल लेने जाते हैं. हाँ, कुछ श्रद्धालु पैदल तो कुछ मोटर साइकिल से, कुछ साईकिल से तो कुछ DJ लेकर भी शिव भोले की भक्ति में मस्त होकर जल लेने जाते हैं.

समाज सेवी संस्थाओ की और से इन श्रद्धालुओं के लिए रास्तो में थोड़ी-थोड़ी दूरी पर खाने-पीने, रहने, आराम करने की व्यवस्था की जाती है. जहाँ ये भक्त फ्री में इन व्यवस्थाओ का लाभ उठाते हैं.

कावड़ यात्रा का प्रचलन भारत के कुछ ही हिस्सों में देखा जाता हैं. साधारण कावड़ के साथ डाक कावड़ भी सड़को पर खूब धूम-धाम के साथ अपना सफर तय करती हैं. कावड़ यात्रा के दौरान रस्ते भी बदल दिए जाते हैं मतलब एक रास्ता शिव भक्तों के लिए तो दूसरा रास्ता रोज होने वाली आवाजाही के लिए. जिससे किसी भी को कोई परेशानी का सामना ना करना पड़े.

क्या करें सावन शिवरात्रि पर (सावन शिवरात्रि व्रत विधि):
सावन शिवरात्रि 2017 का व्रत रखना बहुत पुण्य माना गया है . भगवान् शंकर अपने भक्तो के सब कष्ट हर लेते हैं और उनको दुखो से छुड़ाते हैं. भगवान् का व्रत करना बहुत लाभकारी माना गया हैं.

  • शिवरात्रि के दिन प्रातः उठकर नहा कर साफ-सुथरे वस्त्र पहने.
  • व्रत का संकल्प ले.
  • अपने आस-पास की किसी पवित्र नदी से जल भरकर ला सकते हैं तो सूर्योदय तक ले आये.
  • भगवन की पूजा के लिए सामग्री तैयार कर ले जैसे कि गंगाजल, दूध, बताशे या चीनी, धूपबत्ती, अगरबत्ती, माचिस, बेलपत्थर और बाकि जो भी आप चाहते हो. भगवन शिव को भांग, धतूरा भी बहुत पसंद है तो पूजा सामग्री में इन्हे भी शामिल कर सकते हैं.
  • अपने घर के पास के मंदिर जाये
  • मंदिर में जाकर शिवलिंग पर सबसे पहले जलाभिषेक करें फिर.
  • अन्य सामग्री से बारी-बारी पूजा करें.
  • कुछ देर भगवान् शिव का ध्यान करें.
  • फिर अपने व्रत के अनुसार चाय-फल खा सकते हैं.
  • शाम को एक समय भोजन ग्रहण कर के अपना व्रत खोल सकते हैं.
शिवरात्रि का समय, तिथि और शुभ मुहूर्त:
  • निशिथ काल पूजा – 24:06 से 24:48
  • पारण का समय – 05:41 से 15:50 (22 जुलाई 2017)
  • चतुर्दशी तिथि आरंभ – 21:49 (21  जुलाई 2017)
  • चतुर्दशी तिथि समाप्त – 18:27 (22 जुलाई 2017)

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