गुरु पूर्णिमा : गुरु और शिष्य का दिन

“गुरु पूर्णिमा”!! आषाढ़ मास में पड़ने वाली शुक्ल पक्ष की  पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है. गुरु पूर्णिमा देश भर में मनाई जाती है. गुरु पूर्णिमा के बारे में जानने के लिए  इस आर्टिकल को पूरा पढ़िए.

गुरु पूर्णिमा

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कब है गुरु पूर्णिमा:

वर्ष 2017 में यह गुरु पूर्णिमा 9 जुलाई को है. यह पर्व गुरु और शिष्यों का है. लोगो की मान्यता है कि यह दिन बहुत महत्वपूर्ण होता है. इस दिन गुरुओ का आशीर्वाद लेना बहुत जरुरी है. अपने दिन को शुभ बनाने के लिए दिन की शुरुआत अपने गुरुओ के आशीर्वाद से ही करनी चाहिए. इसी दिन से पता चलता है कि गुरु और शिष्य का सम्बन्ध कैसा है, गुरुओ की हमारे जीवन में कितनी महत्ता है.

मंदिरो  में कार्यक्रम:

इस खास दिन के लिए मंदिरो में खासे इंतज़ाम किये जाते है. क्यूंकि लोग अपने गुरुओ की पूजा-अर्चना करने और आशीर्वाद लेने के लिए मंदिरो की और ही प्रस्थान करते हैं. गुरु पूर्णिमा के लिए मंदिरो को सजाया भी जाता है. चारो और गुरु पूर्णिमा पर्व से कई दिन पहले ही तैयारियां शुरू कर दी जाती है.

इस उपलक्ष में मदिरों में कई दिवसीय कार्यक्रम भी आयोजित किये जाते है. जैसे कि कथा, पाठ, कीर्तन, जागरण सत्संग, प्रवचन  इत्यादि.  देश-विदेश से लोग कई-कई दिन पहले ही अपने गुरुओ के आश्रम में डेरा डाल लेते है. और सेवा में लगे रहते हैं.

कितना बड़ा गुरु:

पुराने समय के महान ऋषि थे “व्यास”. जो चारो वेदो के पहले व्याख्याता भी हुए हैं. जिनकी पूजा गुरु पूर्णिमा के दिन की जाती है. गुरु पूर्णिमा के दिन व्यास जी की पूजा के महत्व् के अनुसार इस दिन को “व्यास पूर्णिमा” भी कहा जाता है.

हमारे समाज में गुरुओ का दर्जा बहुत बड़ा है. इसकी कई मिसालें शास्त्रों में भी व्याख्यान है. प्राचीन समय से ही माना गया है कि जीवन का सही सार जानने के लिए एक सच्चे गुरु का होना आवश्यक है. जीवन में गुरु का साथ होना अच्छा मानव होने की निशानी है.  गुरु की शरण में रहने से मनुष्य को नैतिक मूल्यों का सही ज्ञान होता है. साथ ही शांति, भक्ति करने की शक्ति, अध्ययन और योग का भी ज्ञान मिलता है.

देशभर में यह पर्व बड़ी ही श्रद्धा से मनाया जाता है. जब प्राचीन समय में शिष्य अपने गुरुओ से उनके आश्रम में रहकर शिक्षा लेते थे तो इस दिन के महत्व्  के अनुसार अपने गुरुओ की पूजा करके  दान-दक्षिणा भी देते थे.
इसीलिए गुरु पूर्णिमा जैसे बड़े पर्व पर अपने गुरु का आशीर्वाद लेना मायने रखता है.

नोट: अपने गुरु का चयन करते समय बड़ी सावधानी बरतनी चाहिए. क्यूंकि आज के समय में सच्चा गुरु मिलना बहुत मुश्किल सा हो गया है. किसी पर बिना सोचे-समझे विश्वास करना आपको परेशानी में डाल सकता है.

क्या करे गुरु पूर्णिमा पर:

  • गुरु पूर्णिमा के दिन सुबह सवेरे उठकर घर की साफ़-सफाई करे.
  • स्नान करके मन ही मन अपने गुरु का मनन करते रहे.
  • साफ़-सुथरे कपडे पहने और तैयार हो जाये.
  • घर के पूजा वाले स्थान पर या किसी भी पावन जगह पर लकड़ी की एक साफ़ पाटी रख ले.
  • पाटी पर सफ़ेद रंग का साफ़ कपडा बिछा ले.
  • अब बारह-बारह रेखाएं बनाकर व्यास पीठ बना ले.
  • “गुरुपरम्परासिद्धयर्थ व्यासपूजां करिष्ये” मन्त्र से पूजा करे और संकल्प ले.
  • उसके बाद चारो दिशाओ में चावल छोड़े.
  • अब महान ऋषि और गुरुओं का नाम या मन्त्र से जाप करें.
  • इसके बाद अपने गुरु का स्मरण और पूजा करके दक्षिणा भी दे.

इसके अलावा व्यास ऋषि के लिखे हुए शास्त्रों और ग्रंथो का अध्यन भी कर सकतें हैं. और उनकी शिक्षाओं को अपने आचरण में लाने की कोशिश करें.

यह महत्वपूर्ण गुरु पर्व बड़ी ही श्रद्धा का पर्व है. इसको श्रद्धा से मनाये, लेकिन इसमें अन्धविश्वास शामिल नहीं होना चाहिए.

इस मौके पर गुरु को फूलो की माला पहनाकर, फल, फूल, वस्त्र आदि देकर आशीर्वाद प्राप्त करें.

इस दिन केवल गुरु का ही नहीं अपने माता-पिता और घर-परिवार के सभी बड़ो का आशीर्वाद ले. यह बहुत कल्याणकारी माना गया है.

तो आप इस सब तरीके से अपना गुरु पर्व मनाइये और हमें कमेंट बॉक्स में बताइये कैसा रहा आपका पवित्र दिन?

प्यारे पाठको को  गुरु पूर्णिमा की बहुत बहुत बधाइयाँ…….

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