“आज का डॉक्टर कल मरीज भी बन सकता है” डॉक्टर्स डे पर कविता

Doctors Day poem…. उन डॉक्टर्स के लिए जिन्होंने जाने अनजाने मरीज पर पैसे का बोझ गिराया है.

Doctors Day poem

एक कविता(Doctors Day poem) के माध्यम से हम पूछना चाह रहे हैं कि अगर भविष्य में आज का डॉक्टर कल को मरीज बनता है तो वह डॉक्टर अपने आपको किस रूप में देखेगा एक “डॉक्टर के रूप” में या एक “मरीज के रूप” में.

यह कविता लिखने का मात्र इतना उद्देश्य है कि आज के समय में एक डॉक्टर की मानसिकता बदल चुकी है. आज के डॉक्टर की मानसिकता में पैसे की मांग ज्यादा और दूसरों की सेवा का जज्बा कम नजर आता है. दूसरी तरफ डॉक्टर को यह लगता है कि अगर वह मरीजों से पैसे नहीं लेंगे तो उनका इलाज अच्छी तरह नहीं कर पाएंगे,तो उनको अच्छी सुविधाएं नहीं दे पाएंगे.
दोनों को अपनी सोच बदलने की जरूरत है. इसी बात को लेकर मरीज और डॉक्टर का रिश्ता भी बदलकर कुछ और हो गया है.

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“आज का डॉक्टर कल मरीज भी बन सकता है”

क्यों तूने अपने विश्वास को खोया है
क्यों तूने अपने मरीज का पैसा डुबोया है
एक बात तो तू खुद से भी पूछ ले जालिम
कल को जब तू बीमार होएगा
किस डॉक्टर के बेड पर तू सोएगा
कितना अपना पैसा, तू लुटाएगा
लेकिन ध्यान रखना, ऐ आज के डॉक्टर
जिसका भी तू मरीज बनेगा
हो सकता है, वह तेरे किसी मरीज का बेटा बेटी ही हो   
फिर तू सोचना अंजाम  
कहां तू मुंह छिपायेगा?
जो मरीज तुझसे अपने रोग से जुड़ा था
कुछ दिन बाद उसका भगवान तू हुआ था
क्या था इस “भगवान”, शब्द का मतलब
इसके लिए तू
अपनी अंतर आत्मा को टटोल ले…..

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