दांतों को सफ़ेद कैसे करें

दांतों को सफ़ेद कैसे करें!!!
दोस्तों अगर हमारे दांत सफ़ेद और चमकदार हो तो हमारी हसी को चार चाँद लग जाता है और हमारे चेहरे की सुंदरता अपने आप निखर जाती है.
आपको ज्यादा कॉफ़ी और सॉफ्ट ड्रिंक पीने से बचना चाहिए ऐसा करने से दांतों में दाग धब्बे पड़ जाता है. दांत के पीले होने कई कारण होते हैं अधिक दवाइयों के सेवन से भी दांत पीला हो जाता है.

दांतों को सफ़ेद कैसे करें

 

पसीने की बदबू दूर करने के उपाय

दांतों के पीलेपन के कारण हमें कई बार शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है.
जहां सभी लोग ठहाके मार कर हस रहे होते हैं, वहां हमें फीकी मुस्कान से ही काम चलाना पड़ता है.
दांत भी हमारे शरीर का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है इसलिए इनकी देखभाल करना हमारी जिम्मेदारी है. बाज़ार में कई ऐसे Product मिलते हैं दांतों को सफ़ेद बना सकते है.
लेकिन हम यहां आपको कुछ आसान घरेलू नुस्खों के बारे में बताएंगे, जो आपके दांतों को कुदरती रंगत लौटा देंगे.

नमक सोडा और सुहागा का मिश्रण (Mixture of salt, soda and borax):

दांतों को सफ़ेद कैसे करें, इस सवाल का पहला जवाब है नमक, सोडा और सुहागा का मिश्रण.
नमक के साथ खाने का सोडा और सुहागा अच्छी तरह मिलाकर एक डब्बे में रख लें.
रोज सुबह ब्रश करते वक्त इससे दांत साफ़ कर लें इससे दांतों पर लम्बे समय से जमा पीलापन और कालापन दूर हो जाएगा.

निम्बू का छिलका(Nimbu ka chilka):
अबकी बार निम्बू को प्रयोग करके उसके छिलकों को कूड़ेदान में ना फेंके.
दांतों को सफ़ेद कैसे करें में अब बारी है दूसरे नुस्खें की, इन छिलकों को कड़ी धूप में सूखा लें और मिक्सर में इसे बारीक पीस लें.
इसमें नमक मिलाकर रख लें. ब्रश करने के बाद इससे अपने दांतों को साफ़ करें ऐसा करने से आपके दांत सफ़ेद और चमकदार बनेंगे.

सरसो का तेल और नमक(Mixture of oil & Salt):
दांतों को सफ़ेद कैसे करें सवाल का तीसरा जवाब है सरसो के तेल में एक चम्मच नमक मिलाकर रख लें इस मिश्रण को दांतों पर मलने से दांत सफ़ेद होते हैं.

लीची का पेस्ट (Lichi ka paste):
दोस्तों लीची अगर आपको पसंद है तो लीची को पिस कर इसका पेस्ट बना ले. इस पेस्ट से दांतों की सफाई करने से दांत चमकने लगते हैं.

तुलसी(Tulsi):
तुलसी में कुदरती रूप से दांतों के पीलपन को दूर करने की क्षमता होती है.इसके अलावा मुँह के अन्य रोगों से भी हमारी रक्षा करती है. तुलसी के पत्तों को धूप में बिलकुल सुखा लें और मिक्सर में पीस कर इसका पाउडर बना लें. और इसको एक डब्बे में रख लें जब भी ब्रश करें इसके पाउडर को टूथपेस्ट में मिला लें और दांत साफ़ करें .

संतरे का छिलका (Santre ka Chilka):
संतरे के छिलके को फेंकने के बजाय उसके छिलके को सूखा लें और साथ ही तुलसी के पत्तों को सुखाकर पाउडर तैयार कर लें.
ब्रश करने के बाद संतरे और तुलसी के पाउडर के इस मिश्रण से दांतों पर मसाज करें.
संतरे में विटामिन सी और कैल्शियम के अधिकता के कारण दांत मोती जैसे हो जाते हैं.

नीम(Neem):
नीम में असीम औषधिय गुण होने के कारण इस बहुत ही उपयोगी माना गया है. नीम में दांतों को सफेद बनाने व बैक्टीरिया को जड़ से ख़त्म करने के सारा गुण पाया जाता है. यह नेचुरल एंटीबैक्टिीरियल और एंटीसेप्टिक है.
कुछ भी मीठा खाने के बाद या किसी भी चीज का सेवन करने के बाद पानी से कुल्ला जरूर करे.

पसीने की बदबू दूर करने के उपाय

 

पसीने की बदबू!!! शरीर से आने वाली पसीने की बदबू कई बार हम लोगों के लिए शर्मिंदगी का कारण बन जाती है. शायद कुछ लोग झप्पी लेने-देने में इसी लिए हिचकिचाते हैं.

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पसीने की बदबू

पसीने की बदबू और बुरी दुर्गन्ध हमें नयें दोस्त बनाने और किसी रिश्तें को मजबूत बनाने में बाधा पहुंचती है. आम आदमी की समझ से हमे यह लगता है कि शरीर की दुर्गन्ध ज्यादा पसीना आने की वजह से आती है, लेकिन इसका कारण पसीना नहीं बल्कि बैक्टीरिया है. ये बक्टेरिया हमारे शरीर से निकलने वाले पसीने में मिल जाते हैं और बदबू पैदा करते हैं. बैक्टीरिया गर्म और नम वातावरण में पनपते हैं. ऐसे में सारा दिन अपने शरीर को ताजा रखना चुनौती से कम नहीं. इसलिए दोस्तों हम आपके लिए लेकर आएं हैं बेहद कारगर उपाय जिससे आपको इस समस्या से छुटकारा मिलेगा.

टमाटर (tomatoes):
शरीर की दुर्गन्ध से छुटकारा पाने के लिए टमाटर बहुत कारगर साबित होता है.  नहाते वक्त तकरीबन 5 से 6 टमाटर का जूस नहाने वाले पानी में डालकर उससे स्नान कर लें. टमाटर के अंदर मौजूद एंटीसेप्टिक गुण आपके शरीर से आने वाली बदबू को ख़त्म कर देगा. ऐसा करने से त्वचा की रोम छिद्र भी छोटी हो जाती हैं. जिसकी वजह से शरीर से कम पसीना बाहर निकलता है.

बेकिंग सोडा(Baking Soda):
बेकिंग सोडा में कुदरती रूप से (deodorant) का गुण होता है. आपके जिन जगहों पर पसीना ज्यादा आता है वहां बेकिंग सोडा लगाना फायदेमंद साबित होगा. ये बैक्टीरिया को मारता है और उन्हें पनपने से रोकता है जिससे शरीर की बदबू कम होती है.

शलजम का जूस:
बात अगर प्राकृतिक (डिओडोरेंट)की चल रही है तो आप शलजम का जूस निकालकर पसीने वाली जगह पर लगा सकते हैं. इसको लगाने के बाद कई घंटो तक आपको पसीने की दुर्गन्ध से छुटकारा मिलेगा.
इसके अलावा बदबू को ख़त्म करने के लिए शलजम का जूस पी भी सकते हैं. शलजम में विटामिन C पाया जाता हैं जो पसीने के दुर्गन्ध को ख़त्म करने में सहायक होता है.

सिरका(vinegar):
सिरका भी शरीर के दुर्गन्ध दूर करने में बेहद प्रभावशाली माना जाता है. स्नान करने के बाद आपके पास मौजूद कोई भी सिरका चाहे सेब का या फिर अन्य हो दो स्पून लें और पानी में मिलाकर जिन जगहों पर पसीना ज्यादा आता हैं वहां लगा लें. ऐसा करने से शरीर से दुर्गन्ध नहीं आती यह बहुत ही कारगर उपाय है.

डीओडोरेंट(deodorant):
डीओडोरेंट (deodorant) की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह बैक्टीरिया से पैदा होने वाली वाले बदबू को रोकता है. जरूरी नहीं की इसको लगाने से पसीना रुक जाये. यह थोड़े या ज्यादे समय के लिए बदबू को दूर रखता है यह इसकी गुणवत्ता पर निर्भर करता है.

 साफ-सफाई(tidy & clean):
पसीने की बदबू को दूर करने में सफाई का भी ध्यान रखें. सफाई का ध्यान रखना बहुत जरुरी है जब भी पसीना आये पंखें के सामने बैठ उसे सूखा लें और दिन में एक बार स्नान जरूर करें जब पसीना ज्यादा आ रहा हो तो दोबारा स्नान करने में कोई बुराई नहीं है.

खान-पान(Eating habits):
खाने में की गयी लापरवाही हमारे शरीर में कई चीजों को गड़बड़ कर देती है कुछ भोजन पसीने की बदबू को बढ़ा देते है.
भोजन में प्याज, लहसून, रेड मीट, मसालेदार खाना, शराब और कैफीन शामिल है. ऐसे भोजन  और पेय गर्मी पैदा करते है. इन चीजों के सेवन से शरीर से पसीना निकलता है .

ज्यादा पानी पीये(Drink water):
पानी की कमी के कारण शरीर का तापमान गड़बड़ हो जाता है हमे दिन में करीब 3 लीटर पानी  पीना चाहिए,ज्यादा पानी पीने से स्किन हाइड्रेटेड रहती है और टोक्सिंस शरीर के बाहर निकलते हैं जिससे शरीर से दुर्गन्ध नहीं आती.

निम्बू का रस(Lemon Juice):
निम्बू के अम्लीय गुण के कारण बैक्टीरिया ख़त्म हो जाते हैं. स्नान करते वक्त पानी में  गुलाब जल या निम्बू का रस मिलाने से दुर्गन्ध नहीं आती .

कॉटन के कपड़े(Cotton clothes):
पसीना सोखने वाले कपड़ों को तरजीह देने से हमारे शरीर को हवा मिलती रहती है. पसीने के बदबू से बचने के लिए कॉटन के वस्त्र पहनने चाहिए.

Top Best 14 quotes

 

Quotes of intellectual people!!!

Friends हम आपके लिए लेकर आएं हैं, अबतक के टॉप 14 Best Quotes:

Internet addiction बर्बाद ना कर दे आपकी ज़िंदगी

  • Winston Churchill:
    Quotes

  • Success is going from failure to failure without losing Enthusiasm.
    हर असफलता के बाद भी बिना उत्साह खोये प्रयास करते रहना सफलता है.

Lao Tzu:
Quotes

  • The Journey of a thousand miles begins with one step.
    हज़ारो मील का सफर एक छोटे कदम से शुरू होता है.

Norman Vaughan:
Quotes

  • Dream big and dare to fail
    बड़े सपने देखो और, असफल होने की हिम्मत रखो.

 Ralph Waldo Emerson:
Quotes

  • What you do speaks so loudly that I cannot hear what you say.
    तुम जो करते हो उसकी आवाज़ इतनी तेज़ होती है कि मुझे सुनाई नहीं पड़ता कि तुम क्या कहते हो.

    Mahatma Gandhi:
    Quotes

  • You must be the change you wish to see in the world
    जो बदलाव आप दुनिया के अंदर देखना चाहते हैं, आपको अपने अंदर लाना होगा.


Dr Robert Schuller:
Quotes

  • Tough times never last, but tough people do
    मुश्किल दौर ख़त्म हो जाता है लेकिन बहदुर लोग चलते रहते हैं.

 Christopher Morley:
Quotes

  • There is only one success: to be able to spend your life in your own way.
    अपनी ज़िंदगी अपने तरीके से जीने से बढ़कर कोई सफलता नहीं हो सकती है.

John Muir:
Quotes

  • The power of imagination makes us infinite.
    सपने देखने की कला हमे अनंत बनाती है.

     John Wooden:
    Quotes

  • Make each day your masterpiece.
    अपने हर दिन को मास्टरपीस बनाइये.

Cherie Gilderbloom:
Quotes

  • The best dreams happen when you’re awake.
    अच्छे सपने तब सच होते हैं जब आप जाग रहें होते हैं.

 Christopher Reeve:
Quotes

  • Once you choose hope, anything possible
    एक बार आपने आशा को चुन लिया तो आप जीवन में कुछ भी कर सकते हैं.

T.S. Eliot:
Quotes

  • Every moment is a fresh beginning.
    हर पल एक नयीं शुरुआत है.  

Charles Kettering:
Quotes

  • Believe and act as if it were impossible to fail
    विश्वास करें और ऐसे काम करें जैसे असफल होना नामुमकिन है.


Jimmy Johnson:
Quotes

  • The difference between ordinary and extraordinary is that little extra
    साधारण और असाधारण लोगों के बीच बस एक मील का फर्क होता है.

 

 

मां सिद्धिदात्री के पूजन से समाप्त होता है नवरात्र

नवरात्र महापर्व के नौवें दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा और उपासना की जाती है. मां सिद्धिदात्री अपने भक्तों को सभी प्रकार की सिद्धियां प्रदान करती हैं.

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मां सिद्धिदात्री

ऐसा माना जाता है कि मां सिद्धिदात्री की पूजा पूरे विधि-विधान के साथ करने वाले मनुष्यों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
मां के चार हाथ हैं और मां सिद्धिदात्री कमल के पुष्प पर विराजमान हैं.
मां के दाहिंनी हाथ में चक्र है ऊपर वाले हाथ में गदा है. दूसरे हाथ में कमल का फूल और शंख है. प्राचीन पुराणों में शास्त्रों में अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, और वशित्व नामक आठ सिद्धियां बताई गई हैं.
भक्तों को ये आठों सिद्धियां मां सिद्धिदात्री की पूजा और उपासना करने से मिल सकती है.
हनुमान चालीसा में भी इन्हीं आठ सिद्धियों का उल्लेख है कि ‘अष्टसिद्धि नव निधि के दाता, अस वर दीन्ह जानकी माता’ यहां ऊपर दिए गए आठों सिद्धियों की बात की गयी है.
शास्त्रों के अनुसार स्वयं भगवान शंकर ने भी मां सिद्धिदात्री देवी की कठोर तपस्या कर मां से ये आठ सिद्धियां प्राप्त की थीं.
मां की कृपा से ही खुद सिद्धिदात्री महादेव की आधी देह हो गयीं और भोलेनाथ अर्द्धनारीश्वर कहलाए.
नौवें दिन इनकी पूजा के बाद ही नवरात्र का समापन माना जाता है.
इस दिन ही हिंदू परिवारों में कन्याओं का पूजन किया जाता है.

मां सिद्धदाद्धत्री स्तुति मंत्र:
सिद्धगन्‍धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि,
सेव्यमाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी

देवी का बीज मंत्र:
ऊॅं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे नमो नमः
ऊपर दिए गए श्लोक के अलावा भी मां सिद्धिदात्री की पूजा में दुर्गा सप्तशती के सभी श्लोकों का प्रयोग किया जा सकता है.

कन्या पूजन :
नवरात्र के नवें दिन नौ कन्याओं को घर में भोजन कराना चाहिए. नव-देवियों में मां सिद्धिदात्री आखिरी हैं. मां की पूजा से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है.
जिन कन्याओं को आप कन्या भोज करा रहे हैं उन कन्याओं की आयु दो वर्ष से ऊपर और 10 वर्ष तक होनी चाहिए.
यदि 9 से ज्यादा कन्या आपके घर भोजन करने आ रही हैं तो इसमें कोई परेशानी नहीं है.

आठवें दिन करें मां महागौरी की उपासना

नवरात्री महापर्व के आठवें दिन मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप की पूजा उपासना की जाती है. मां महागौरी की उपासना मनुष्य के भीतर पल रहे कुत्सित व बुरे विचारों को ख़त्म कर ज्ञान की ज्योति जलाती हैं.

मां सिद्धिदात्री के पूजन से समाप्त होता है नवरात्र

मां महागौरी

मां का ध्यान करने से मनुष्य को आत्मिक शांति मिलती है.उसके अंदर श्रद्धा, निष्ठा आदि का विकास होता है.
मां दुर्गा की आठवीं शक्ति का स्वरूप महागौरी है.
जिनकी आराधना से उनके भक्तों को सही राह मिलती है.
इस दिन व्रत रखकर मां का पूजन करें और फिर मां को भोग लगाएं, उसके बाद भोग लगे हुआ मां का प्रसाद ग्रहण करे.

अष्टमी कथा:
नवरात्र के आठवें दिन देवी महागौरी की पूजा अर्चना की जाती है. अष्टमी के दिन मां को याद करने व उनकी स्तुति से मनुष्य के सभी पापों का नाश होता है.
पौराणिक कथाओं और शास्त्रों के अनुसार मां महागौरी ने घोर तप कर गौरवर्ण प्राप्त किया था.
जब माता की उत्पत्ति हुई थी तो ऐसा माना जाता है कि उनकी आयु आठ वर्ष की थी.इसी कारण मां की पूजा अर्चना अष्टमी को किया जाता है.
अष्टमी के ही दिन कन्याओं के पूजन का विधान है. मां धन वैभव, सुख, संपदा, खुशहाली और शांति की अधिष्ठात्री देवी हैं.
मां वृषभवाहिनी अर्थात बैल की सवारी करती हैं.
शास्त्रों के अनुसार मां महागौरी ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी.
जिसके बाद उनका शरीर मिटटी के ढेर से ढक गया था.
भगवान शंकर मां महागौरी पर प्रसन्न हुए और उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार करने का आर्शीवाद दिया.
भगवान शंकर ने मां महागौरी के शरीर को गंगाजल से स्नान कराया जिसके बाद मां महागौरी का शरीर गोरा और दैदीप्यमान हो गया.
इसी कारण मां का नाम महागौरी पड़ा.
मां महागौरी गीत- संगीत से प्रसन्न होती है. मां के पूजा और उपासना में संगीत अवश्य होता है.
हिन्दू धर्म में अष्टमी के दिन कन्याओं को भोजन कराए जाने और सामर्थ्य के अनुसार दान किये जाने की परम्परा है.

ध्यान मंत्र:
श्वेत वृषे समारूढ़ा श्वेतांबरधरा शुचि
महागौरी शुभे दद्यान्महादेव प्रमोददा.

सातवें दिन करें माँ कालरात्रि की उपासना

नवरात्र महापर्व में सातवां दिन मां कालरात्रि का होता है. मां कालरात्रि को विनाश और संहार की देवी माना जाता है. लेकिन मां अपने भक्तो को हमेशा शुभ फल देती है.

नवरात्र के छठे दिन करें माँ कात्यायनी की उपासना

मां कालरात्रि की कथा :
मां कालरात्रि

मां कालरात्रि ने हाहाकारी दुष्ट असुर रक्तबीज के संहार के लिए अपने तेज से मां काली को उत्पन्न किया था.
माँ का रंग काला होने के कारण इनका नाम मां कालरात्रि पड़ा. दुष्ट दानवों शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज ने तीनो लोको में हाहाकार मचा दिया था.
असुरो की अति से तंग आकर देवगण भगवान शंकर के पास गए उन्होनें मां पार्वती से असुरों का संहार करने को कहा.
मां पार्वती ने भगवती दुर्गा रूप धारण कर शुम्भ और निशुम्भ से युद्ध कर उन्हें पराजित किया और मौत के घाट उतार दिया लेकिन जैसे ही माँ ने रक्त बीज का वध करने की कोशिश की तभी उसके रक्त से लाखो असुर पैदा हो गये.
इस तरह माँ जब परेशान हुई तो उन्होंने मां काली को उत्पन्न किया.
जब मां दुर्गा ने रक्तबीज का संहार किया तो माँ काली ने रक्तबीज का सारा रक्त पी लिया और इस तरह दुष्ट दानवों का दलन हुआ.
शास्त्रों के अनुसार सप्तमी की रात सिद्धियों की रात होती है. मां भगवती का यह रूप ऋद्धि-सिद्धि प्रदान करने वाला है.
मां की कृपा से हर बाधा दूर हो जाती है.
माता की कृपा पाने के लिए उन्हें गुड़ का भोग लगाया जाता है ऐसा माना जाता है कि गुड़ मां कालरात्रि को प्रिय हैं.

सप्तमी को करे इस मंत्र का जाप:
श्लोकः या देवी सर्वभूतेषु कालरात्रि रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

शास्त्रों में माँ कालरात्रि को त्रिनेत्री भी कहा गया है इनके तीन नेत्र ब्रह्माण्ड की तरह विशाल हैं.
जिनसे बिजली की तरह किरणें निकलती हैं. माँ के खुले बाल बिखरे हुए रहते हैं
इनकी नासिका से श्वास और भयंकर ज्वालाएं निकलती हैं.
माँ कालरात्रि को शास्त्रों में चतुर्भुजी कहा गया है.
इनकी चार भुजाएं हैं दायीं ओर की ऊपरी भुजा से महामाया भक्तों को वरदान दे रही हैं और नीचे की भुजा से अभय का आशीर्वाद देती हैं.
देवी कालरात्रि की सवारी गर्दभ (गधे) है, माँ उसपर विराजमान रहती हैं.

नवरात्र के छठे दिन करें माँ कात्यायनी की उपासना

माँ कात्यायनी का स्वरूप मां दुर्गा का छठा स्वरुप है. नवरात्रों के छठे दिन माँ  कात्यायनी की पूजा, अर्चना की जाती है.

शुभ मुहूर्त में करें कलश स्थापना

कात्यान ऋषि के घर माँ ने कन्या रूप में जन्म लिया जिसके कारण माँ कात्यायनी के नाम से विख्यात हो गयी. माँ का रूप सोने के सामान कांतिमान और चमकीला है.
चार भुजाओं वाली माँ कात्यायनी शेर पर सवार हो वरमुद्रा और अभयमुद्रा में अपने दर्शन देती हैं.
माँ के एक हाथ में कमल है तो दूसरे हाथ में तलवार है.

माँ कात्यायनी की कथा:
माँ कात्यायनी

एक वन में कत नाम के एक ऋषि रहते थे और उनका गोत्र कात्य था.महर्षि कात्य की कोई संतान नहीं थी. मां भगवती को अपनी पुत्री के रूप में पाने के लिए महर्षि कात्य ने भगवती पराम्बा की कठोर तपस्या की थी.
उनकी कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उन्हें पुत्री रत्न की प्राप्ति का वरदान दिया.
ऐसा भी माना जाता है कि माँ ने अवतार केवल महिसासुर के वध के लिए लिया था. कात्य गोत्र में जन्म लेने के कारण मां का नाम कात्यायनी पड़ गया.

माँ कात्यायनी को प्रसन्न करने का मंत्र :
इस मंत्र से जाप से माँ प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूरी करती हैं.
चंद्र हासोज्ज वलकरा शार्दू लवर वाहना
कात्यायनी शुभं दद्या देवी दानव घातिनि.

अर्थ: जिसके एक हाथ में अक्षमाला है और दूसरे हाथ में चंद्रहास की भांति दैदीप्यमान, शार्दूल अर्थात् शेर पर सवार और दानवों का विनाश करने वाली मां कात्यायनी हम सबके लिए शुभदायी हों.

भोग में शहद :
छठे दिन देवी के पूजन में मधु का महत्व बताया गया है. इस दिन प्रसाद में शहद का प्रयोग करना चाहिए. माना जाता है कि इसके प्रभाव से साधक सुंदर रूप को प्राप्त करता है.

शास्त्रों के अनुसार माँ कात्यायनी की उपासना करने वालों को किसी भी प्रकार का डर और भय नहीं रहता. वह मनुष्य सब तरह के पापों से मुक्त हो जाता है. शास्त्रों के वर्णन अनुसार उच्च शिक्षा का अध्ययन करने वालों को माँ की उपासना जरूर करनी चाहिए. इन्हें शोध की देवी भी कहा जाता है.

शुभ मुहूर्त में करें कलश स्थापना

कलश स्थापना!!! इस बार शारदीय नवरात्र 21 सितंबर से शुरू हो रहे हैं. इस महापर्व को शारदीय नवरात्र इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह अश्विन माह में पड़ता है.

प्रथम दिन करें माँ शैलपुत्री की आराधना

नवरात्र के दूसरे दिन करें ब्रम्हचारिणी माँ की आराधना

नवरात्रों में सबसे मुख्य काम जो माना जाता है वो है माता की चौकी लगाना और कलश स्थापना. इस शारदीय नवरात्र कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 3 मिनट से 8 बजकर 22 मिनट तक रहेगा.

कलश स्थापना

नवरात्रि के इस महापर्व के दौरान दुर्गा माँ के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है. व्रत  के पहले दिन घटस्थापना की जाती है.

इसके बाद भक्त नौ दिनों तक दुर्गा माँ की पूजा अर्चना करते हैं इसके बाद व्रत के अष्टमी और नवमी में कन्या पूजन होता है.

कलश स्थापना कैसे करें:
21 सितंबर को सुबह माँ शैलपुत्री की पूजा की जाती है. पहला दिन माँ शैलपुत्री को अर्पित किया जाता है.
सुबह कलश की स्थापना की जाती है.
कलश के ऊपर स्वास्तिक का चिन्ह बनाया जाता है किसी भी शुभ कार्य में स्वस्तिक का चिन्ह शुभ माना जाता है.
कलश में जल डालकर आम के पत्तों से उसे सजाते हैं. मौली से उसे बांधते है.
जल में बिना टूटे चावल (अक्षत) डालकर उसके ऊपर नारियल रखते है.

माता की चौकी स्थापना के लिए एक चौकी रखकर उसपर लाल रंग का कपड़ा बिछा दें. लाल रंग शुभ माना जाता है, फिर उस पर माता की मूर्ति स्थापित करें मूर्ति पर फूल और फूलों की माला इत्यादि चढ़ाएं.
कलश की स्थापना करते वक्त ध्यान रखें कि कलश माँ के मूर्ति कि दायी तरफ रखें.

माँ के नौ रूपों के नाम:
माँ के नौ रूपों के नाम
पहली शैलपुत्री कहलावें (Shailputri Mata)
दूसरी ब्रह्मचारिणी मन भावे (Brahmacharini Mata)
तीसरी चंद्रघण्टा शुभनाम (Chandrghanta Mata)
चौथी कुष्मांडा सुखधाम (Kushmanda Mata)
पांचवी देवी स्कन्दा माता (Skanda Mata)
छठी कात्यायनी विख्याता (katyayani Mata)
सातवीं कालरात्रि महामाया (Kaalratri Mata)
आठवीं महागौरी जगजाया (Mahagauri Mata)
नौवीं सिद्धिदात्री जग जाने (Siddhidatri Mata)
नव दुर्गा के नाम बखाने 

अखंड ज्योत का महत्व:
कलश स्थापना

दोस्तों अखंड ज्योत यानी लगातार जलने वाला दीपक, बिना लौ बाधित हुए जलने वाला दीपक. नवरात्रों में अखंड ज्योत का विशेष महत्व होता है.
इसे जलाने से घर में माँ जगत जननी जगदम्बिका की कृपा बनी रहती है. अखंड ज्योत का संकल्प लेने से पहले उसके विषय में कुछ नियम होते हैं और आपको इन नियमों का पालन करना ही होता हैं.
हिन्दू परंम्परा के अनुसार जिस घर में अखंड ज्योत जलती हैं उस घर के लोगों को जमीन पर सोना पड़ता हैं.
यूँ तो भगवान को याद करने के लिए हर समय उचित हैं, लेकिन मुहूर्त पर पूजन-हवन का अपना एक विशेष महत्व होता हैं कोशिश करें कि इस बार माँ की मूर्ति स्थापना और कलश स्थापना एक साथ ही करें.

Happy Navratri to All Readers!!

इन तरीकों से पाएं गोरी त्वचा

हम सबकी चाहत होती है कि हमारा चेहरा साफ़ दिखे हम गोरे दिखें लेकिन बहुत ही कम लोगों को गोरी त्वचा कुदरती रूप से मिली होती है. बाकियों के लिए भी गोरी त्वचा पाना मुश्किल नहीं है कुछ आसान उपाय हैं जिन्हें अपनाकर आपकी स्किन चमकदार बन जाएगी.
कुछ दाग धब्बे और टैनिंग इतनी ज्यादा होती है कि तमाम Beauty Products का प्रयोग करने के बाद भी चेहरे कि रंगत नहीं निखरती. पर इन चीजों के प्रयोग से आपकी Skin साफ़ तौर पर निखर जाएगी और आप बिलकुल Glowing और गोरी नज़र आएंगी.

गुणों की खान है टमाटर

चावल का आटा (Rice Scrub):
गोरी त्वचा

Friends, गोरी और ग्लोइंग त्वचा पाने के लिए चावल का इस्तेमाल बहुत लम्बे समय से चला आ रहा है.
चावल से बना स्क्रब त्वचा के लिये बहुत ही सही रहता है. चावल को दरदरा पीस कर उसे शहद में मिलाकर पेस्ट तैयार कर लें.
पेस्ट को अपने चेहरे और गर्दन कि त्वचा पर अच्छी तरह से लगाकर थोड़ी देर छोड़ दें जब पेस्ट सूख जाए, तो पानी से अपने चेहरे और गर्दन को अच्छी तरफ साफ कर लें.
यह बढ़िया मॉइस्चराइज़र है और यह blood circulation को बढ़ाता है और स्किन को Soft हो जाती है.

 हल्दी (Turmeric):
गोरी त्वचा

हल्दी में कई ऐसे गुण मौजूद होते है जो स्किन टोन निखारने में मदद करता है. इसका एंटीसेप्टिक गुण त्वचा से जुड़े आम बीमारियों जैसे जला कटा ठीक करने में मदद करता है.
गोरी त्वचा पाने के लिए हल्दी में ताजी मलाई, दूध और बेसन मिला लें और इसका गधा मिश्रण तैयार कर लें इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाएं और पानी से अपना मुँह साफ़ कर लें.

चंदन और गुलाबजल (Sandal & Gulabjal): 

गोरी त्वचा

चंदन और गुलाबजल में औषधिय गुण होते हैं. जो गोरी रंगत के देने के अलावा  दाग-धब्बे को चेहरे से दूर करने में सहायक होता है.
इसमें औषधिय गुण होने के कारण ये एलर्जी और पिंपल भी दूर करने में सहायक होता है.
चंदन पाउडर और गुलाबजल को समान मात्रा में लेकर एक बाउल में इसका पेस्ट घोल लें.
इस पेस्ट को चेहरे पर ठीक से लगाएं. जब यह सूखने लगे तो इसे सूती के कपड़े को गिला करके चेहरे को साफ़ कर लें.
ऐसा नियमित रूप से करने पर आपके चेहरे कि रंगत खिलखिला उठेगी.

केले और खीरे का पैक(Banana & Cucumber Pack) :

गोरी त्वचा
खीरा और केला ये दोनों ही त्वचा के लिए फायदेमंद होता है. इनकी गुणकारी प्रवत्ति Skin को चमकदार बनाने में मुख्य भूमिका निभाती है.
आप एक छोटा खीरा और एक केला लेकर उन्हें मिला लीजिये इसमें शहद और  नींबू का रस मिलाएं.
और साथ ही अॉलिव oil डालें और अच्छे से मिलाएं इसे चेहरे पर लगाएं और सूखने के बाद गरम पानी से साफ कर लें.

 हर्बल टिप्स (Herbal Tips):

किसी भी चीज का रिजल्ट एक दिन में नहीं मिलता इसलिए चेहरे की रंगत निखारने के लिए डेली कुछ चीजों का ध्यान रखना जरुरी है.

  • गोरी त्वचा के लिए, रोज चंदन पाउडर, गुलाब जल व हल्दी को मिलाकर इसका पेस्ट चेहरे पर लगाएं.
  • एलोवेरा के पत्तों के नीचे मिलने वाले उसके गूदे को लगाने से दाग-धब्बे ख़त्म हो जाता है.
  • शहद के मॉस्चर वाले गुण के कारण इसको नियमित रूप से त्वचा पर use करने से skin के दाग-धब्बा कम हो जाता है, और स्किन का रूखापन ख़त्म हो जाता है.

 

नवरात्र के दूसरे दिन करें ब्रह्मचारिणी माँ की आराधना

ब्रह्मचारिणी !!! माँ दुर्गा के दूसरे स्वरुप यानी की ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा करने से मनुष्य को ज्ञान के साथ वैराग्य की भी प्राप्ति होती है. शास्‍त्रों में मां एक हर रूप की पूजा विधि और कथा का महत्‍व बताया गया है. मां आपके कठिन समय में आपको सम्बल प्रदान करती है. तो आइए जाने माँ के इस रूप के बारे में.

तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा को ऐसे करे प्रसन्न, पूजा विधि, मंत्र

ब्रह्मचारिणी  मां का मंत्र:
ब्रह्मचारिणी

माँ ब्रह्मचारिणी पूजा मंत्र:
“दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा.”

माँ के नाम का अर्थ बहुत ही सीधा है ब्रह्मचारिणी का अर्थ तप की चारिणी यानी तप का आचरण करने वाली. माँ का यह रूप साहस और दृढ़ संकल्प के लिए माना जाता है. मां इस रूप में दाएं हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमण्डल धारण कर भक्तों को वरदान देती हैं .

मां ब्रह्मचारिणी की कथा:
माँ शैलपुत्री ने जब राजा हिमवान के घर जन्म लीं तो एक दिन महर्षि ने पार्वती को उनके पूर्व जन्म की कथा कह सुनाई.ऋषि नारद जी की बातों ने पार्वती जी के मन में शंकर जी के प्रति प्रेम भाव भर दिया. माँ पार्वती ने प्रभु शंकर को पति रूप में पाने के लिए घोर तपस्या की. इस कठिन और अडिग तपस्या के चलते ही इन्हें ब्रह्मचारिणी नाम से जाना गया. माँ ने हज़ारों वर्ष फल-फूल खाकर अपना जीवन बिताया.

कई दिन तक कठिन उपवास रखे. माँ ने खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप जैसे तमाम मुश्किल कष्ट सहे. माँ पत्तों को खाकर अपना जीवन बिताती. एक दिन माँ ने पत्तों को भी खाना छोड़ दिया इस कारण माँ का नाम अपर्णा पड़ा.
इस अडिग तपस्या के कारण माँ ब्रह्मचारिणी का शरीर क्षीण हो गया. देवता, ऋषि-मुनि अन्य सभी लोगो ने ब्रह्मचारिणी माँ की तपस्या को अभूतपूर्व कृत्य माना और माँ के इस कृत्य की सराहना की और कहा- देवी किसी ने ऐसी कठोर तपस्या नहीं की है. ये आपके द्वारा ही संभव था. आपकी मनोकामना पूरी होगी और भगवान शिव आपको पति रूप में मिलेंगे.
उन्होंने माँ पार्वती से तपस्या छोड़ घर लौट जाने को कहा और कहा आपके पिता आपको लेने आ रहे हैं. मां ब्रह्मचारिणी ने तमाम दुखों को सहा लेकिन वह अडिग रही एक पल के लिए भी विचलित नहीं हुई. और आखिरकार उन्हें स्वयं महादेव पति के रूप में मिले. जीवन में कठिन संघर्षों में विचलित नहीं होना चाहिए. मां की कृपा से सभी सिद्धि प्राप्त होती है.